জামে' আত-তিরমিজি > তাবীরের পর খেজুর গাছ ক্রয় করা এবং সম্পদশালী গোলাম ক্রয় করা

জামে' আত-তিরমিজি ১২৪৪

حدثنا قتيبة، حدثنا الليث، عن ابن شهاب، عن سالم، عن أبيه، قال سمعت رسول الله صلى الله عليه وسلم يقول ‏"‏ من ابتاع نخلا بعد أن تؤبر فثمرتها للذي باعها إلا أن يشترط المبتاع ومن ابتاع عبدا وله مال فماله للذي باعه إلا أن يشترط المبتاع ‏"‏ ‏.‏ قال وفي الباب عن جابر ‏.‏ وحديث ابن عمر حديث حسن صحيح ‏.‏ هكذا روي من غير وجه عن الزهري عن سالم عن ابن عمر عن النبي صلى الله عليه وسلم أنه قال ‏"‏ من ابتاع نخلا بعد أن تؤبر فثمرتها للبائع إلا أن يشترط المبتاع ومن باع عبدا وله مال فماله للبائع إلا أن يشترط المبتاع ‏"‏ ‏.‏ وقد روي عن نافع عن ابن عمر عن النبي صلى الله عليه وسلم قال ‏"‏ من ابتاع نخلا قد أبرت فثمرتها للبائع إلا أن يشترط المبتاع ‏"‏ ‏.‏ وقد روي عن نافع عن ابن عمر عن عمر أنه قال من باع عبدا وله مال فماله للبائع إلا أن يشترط المبتاع ‏.‏ هكذا روى عبيد الله بن عمر وغيره عن نافع الحديثين ‏.‏ وقد روى بعضهم هذا الحديث عن نافع عن ابن عمر عن النبي صلى الله عليه وسلم أيضا ‏.‏ وروى عكرمة بن خالد عن ابن عمر عن النبي صلى الله عليه وسلم نحو حديث سالم ‏.‏ والعمل على هذا الحديث عند بعض أهل العلم وهو قول الشافعي وأحمد وإسحاق ‏.‏ قال محمد بن إسماعيل حديث الزهري عن سالم عن أبيه عن النبي صلى الله عليه وسلم أصح ما جاء في هذا الباب ‏.‏

সালিম (রহঃ) হতে তার পিতার সূত্রে থেকে বর্নিতঃ

তিনি (পিতা) বলেন, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে আমি বলতে শুনেছিঃ তাবীরের পর কোন লোক খেজুর বাগান কিনলে এর ফলের মালিক হবে বিক্রেতা, যদি ক্রয়কারীর জন্য (মালিকানা) শর্ত করা না হয়। যদি কোন লোক সম্পদশালী গোলাম কিনে তবে ঐ সম্পদের অধিকারী হবে বিক্রেতা, ক্রেতার জন্য ঐ সম্পদের যদি কোনরূপ শর্ত করা না হয়। সহীহ্‌, ইবনু মা-জাহ (২২১০, ২২১২), নাসা-ঈ

সালিম (রহঃ) হতে তার পিতার সূত্রে থেকে বর্নিতঃ

তিনি (পিতা) বলেন, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে আমি বলতে শুনেছিঃ তাবীরের পর কোন লোক খেজুর বাগান কিনলে এর ফলের মালিক হবে বিক্রেতা, যদি ক্রয়কারীর জন্য (মালিকানা) শর্ত করা না হয়। যদি কোন লোক সম্পদশালী গোলাম কিনে তবে ঐ সম্পদের অধিকারী হবে বিক্রেতা, ক্রেতার জন্য ঐ সম্পদের যদি কোনরূপ শর্ত করা না হয়। সহীহ্‌, ইবনু মা-জাহ (২২১০, ২২১২), নাসা-ঈ

حدثنا قتيبة، حدثنا الليث، عن ابن شهاب، عن سالم، عن أبيه، قال سمعت رسول الله صلى الله عليه وسلم يقول ‏"‏ من ابتاع نخلا بعد أن تؤبر فثمرتها للذي باعها إلا أن يشترط المبتاع ومن ابتاع عبدا وله مال فماله للذي باعه إلا أن يشترط المبتاع ‏"‏ ‏.‏ قال وفي الباب عن جابر ‏.‏ وحديث ابن عمر حديث حسن صحيح ‏.‏ هكذا روي من غير وجه عن الزهري عن سالم عن ابن عمر عن النبي صلى الله عليه وسلم أنه قال ‏"‏ من ابتاع نخلا بعد أن تؤبر فثمرتها للبائع إلا أن يشترط المبتاع ومن باع عبدا وله مال فماله للبائع إلا أن يشترط المبتاع ‏"‏ ‏.‏ وقد روي عن نافع عن ابن عمر عن النبي صلى الله عليه وسلم قال ‏"‏ من ابتاع نخلا قد أبرت فثمرتها للبائع إلا أن يشترط المبتاع ‏"‏ ‏.‏ وقد روي عن نافع عن ابن عمر عن عمر أنه قال من باع عبدا وله مال فماله للبائع إلا أن يشترط المبتاع ‏.‏ هكذا روى عبيد الله بن عمر وغيره عن نافع الحديثين ‏.‏ وقد روى بعضهم هذا الحديث عن نافع عن ابن عمر عن النبي صلى الله عليه وسلم أيضا ‏.‏ وروى عكرمة بن خالد عن ابن عمر عن النبي صلى الله عليه وسلم نحو حديث سالم ‏.‏ والعمل على هذا الحديث عند بعض أهل العلم وهو قول الشافعي وأحمد وإسحاق ‏.‏ قال محمد بن إسماعيل حديث الزهري عن سالم عن أبيه عن النبي صلى الله عليه وسلم أصح ما جاء في هذا الباب ‏.‏


জামে' আত-তিরমিজি > একে অপর হতে আলাদা হওয়ার পূর্ব পর্যন্ত ক্রেতা-বিক্রেতা উভয়ের (ক্রয়-বিক্রয় প্রত্যাখ্যানের) স্বাধীনতা বজায় থাকে

জামে' আত-তিরমিজি ১২৪৫

حدثنا واصل بن عبد الأعلى الكوفي، حدثنا ابن فضيل، عن يحيى بن سعيد، عن نافع، عن ابن عمر، قال سمعت رسول الله صلى الله عليه وسلم يقول ‏ "‏ البيعان بالخيار ما لم يتفرقا أو يختارا ‏"‏ ‏.‏ قال فكان ابن عمر إذا ابتاع بيعا وهو قاعد قام ليجب له البيع ‏.‏ قال أبو عيسى وفي الباب عن أبي برزة وحكيم بن حزام وعبد الله بن عباس وعبد الله بن عمرو وسمرة وأبي هريرة قال أبو عيسى حديث ابن عمر حديث حسن صحيح والعمل على هذا عند بعض أهل العلم من أصحاب النبي صلى الله عليه وسلم وغيرهم وهو قول الشافعي وأحمد وإسحق وقالوا الفرقة بالأبدان لا بالكلام وقد قال بعض أهل العلم معنى قول النبي صلى الله عليه وسلم ما لم يتفرقا يعني الفرقة بالكلام والقول الأول أصح لأن ابن عمر هو روى عن النبي صلى الله عليه وسلم وهو أعلم بمعنى ما روى وروي عنه أنه كان إذا أراد أن يوجب البيع مشى ليجب له وهكذا روي عن أبي برزة الأسلمي

ইবনু উমার (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ

তিনি বলেন, আমি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে বলতে শুনেছিঃ ক্রেতা ও বিক্রেতা একে অপর হতে আলাদা না হওয়া পর্যন্ত অথবা উভয়ে ক্রয়-বিক্রয় সম্পন্ন করতে সম্মত না হওয়া পর্যন্ত তাদের জন্য ক্রয়-বিক্রয় বাতিল করার স্বাধীনতা বজায় থাকে। বর্ণনাকারী বলেন, বসে থাকাবস্থায় ইবনু উমার (রাঃ) কোন জিনিস কিনলে (তা নির্ধারিত করার জন্য) উঠে দাড়িয়ে যেতেন। সহীহ্‌, ইবনু মা-জাহ (২১৮১), নাসা-ঈ

ইবনু উমার (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ

তিনি বলেন, আমি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে বলতে শুনেছিঃ ক্রেতা ও বিক্রেতা একে অপর হতে আলাদা না হওয়া পর্যন্ত অথবা উভয়ে ক্রয়-বিক্রয় সম্পন্ন করতে সম্মত না হওয়া পর্যন্ত তাদের জন্য ক্রয়-বিক্রয় বাতিল করার স্বাধীনতা বজায় থাকে। বর্ণনাকারী বলেন, বসে থাকাবস্থায় ইবনু উমার (রাঃ) কোন জিনিস কিনলে (তা নির্ধারিত করার জন্য) উঠে দাড়িয়ে যেতেন। সহীহ্‌, ইবনু মা-জাহ (২১৮১), নাসা-ঈ

حدثنا واصل بن عبد الأعلى الكوفي، حدثنا ابن فضيل، عن يحيى بن سعيد، عن نافع، عن ابن عمر، قال سمعت رسول الله صلى الله عليه وسلم يقول ‏ "‏ البيعان بالخيار ما لم يتفرقا أو يختارا ‏"‏ ‏.‏ قال فكان ابن عمر إذا ابتاع بيعا وهو قاعد قام ليجب له البيع ‏.‏ قال أبو عيسى وفي الباب عن أبي برزة وحكيم بن حزام وعبد الله بن عباس وعبد الله بن عمرو وسمرة وأبي هريرة قال أبو عيسى حديث ابن عمر حديث حسن صحيح والعمل على هذا عند بعض أهل العلم من أصحاب النبي صلى الله عليه وسلم وغيرهم وهو قول الشافعي وأحمد وإسحق وقالوا الفرقة بالأبدان لا بالكلام وقد قال بعض أهل العلم معنى قول النبي صلى الله عليه وسلم ما لم يتفرقا يعني الفرقة بالكلام والقول الأول أصح لأن ابن عمر هو روى عن النبي صلى الله عليه وسلم وهو أعلم بمعنى ما روى وروي عنه أنه كان إذا أراد أن يوجب البيع مشى ليجب له وهكذا روي عن أبي برزة الأسلمي


জামে' আত-তিরমিজি ১২৪৬

حدثنا محمد بن بشار، حدثنا يحيى بن سعيد، عن شعبة، عن قتادة، عن صالح أبي الخليل، عن عبد الله بن الحارث، عن حكيم بن حزام، قال قال رسول الله صلى الله عليه وسلم ‏"‏ البيعان بالخيار ما لم يتفرقا فإن صدقا وبينا بورك لهما في بيعهما وإن كتما وكذبا محقت بركة بيعهما ‏"‏ ‏.‏ هذا حديث صحيح ‏.‏ قال أبو عيسى وفي الباب عن أبي برزة وحكيم بن حزام وعبد الله بن عباس وعبد الله بن عمرو وسمرة وأبي هريرة ‏.‏ قال أبو عيسى حديث ابن عمر حديث حسن صحيح ‏.‏ والعمل على هذا عند بعض أهل العلم من أصحاب النبي صلى الله عليه وسلم وغيرهم وهو قول الشافعي وأحمد وإسحاق وقالوا الفرقة بالأبدان لا بالكلام ‏.‏ وقد قال بعض أهل العلم معنى قول النبي صلى الله عليه وسلم ‏"‏ ما لم يتفرقا ‏"‏ ‏.‏ يعني الفرقة بالكلام ‏.‏ والقول الأول أصح لأن ابن عمر هو روى عن النبي صلى الله عليه وسلم وهو أعلم بمعنى ما روى وروي عنه أنه كان إذا أراد أن يوجب البيع مشى ليجب له ‏.‏ وهكذا روي عن أبي برزة الأسلمي أن رجلين اختصما إليه في فرس بعد ما تبايعا ‏.‏ وكانوا في سفينة فقال لا أراكما افترقتما وقال رسول الله صلى الله عليه وسلم ‏"‏ البيعان بالخيار ما لم يتفرقا ‏"‏ ‏.‏ وقد ذهب بعض أهل العلم من أهل الكوفة وغيرهم إلى أن الفرقة بالكلام وهو قول سفيان الثوري وهكذا روي عن مالك بن أنس ‏.‏ وروي عن ابن المبارك أنه قال كيف أرد هذا والحديث فيه عن النبي صلى الله عليه وسلم صحيح ‏.‏ وقوى هذا المذهب ‏.‏ ومعنى قول النبي صلى الله عليه وسلم ‏"‏ إلا بيع الخيار ‏"‏ ‏.‏ معناه أن يخير البائع المشتري بعد إيجاب البيع فإذا خيره فاختار البيع فليس له خيار بعد ذلك في فسخ البيع وإن لم يتفرقا ‏.‏ هكذا فسره الشافعي وغيره ‏.‏ ومما يقوي قول من يقول الفرقة بالأبدان لا بالكلام حديث عبد الله بن عمرو عن النبي صلى الله عليه وسلم ‏.‏

হাকীম ইবনু হিযাম (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ

তিনি বলেন, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেনঃ ক্রেতা-বিক্রেতা একে অপর হতে আলাদা না হওয়া পর্যন্ত উভয়ের জন্য (ক্রয়-বিক্রয় বাতিল করার) স্বাধীনতা বজায় থাকে। যদি তারা দুজনেই সততা অবলম্বন করে এবং পণ্যের দোষ-ত্রুটি প্রকাশ করে তবে তাদের এই লেন-দেনে বরকত হয়। যদি তারা মিথ্যার আশ্রয় গ্রহণ করে এবং দোষ-ত্রুটিগুলো গোপন করে রাখে তবে তাদের ক্রয়-বিক্রয়ের বারকাত তুলে নেয়া হয়। সহীহ্‌, ইরওয়া (১২৮১), বেচা-কেনার হাদীস, নাসা-ঈ

হাকীম ইবনু হিযাম (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ

তিনি বলেন, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেনঃ ক্রেতা-বিক্রেতা একে অপর হতে আলাদা না হওয়া পর্যন্ত উভয়ের জন্য (ক্রয়-বিক্রয় বাতিল করার) স্বাধীনতা বজায় থাকে। যদি তারা দুজনেই সততা অবলম্বন করে এবং পণ্যের দোষ-ত্রুটি প্রকাশ করে তবে তাদের এই লেন-দেনে বরকত হয়। যদি তারা মিথ্যার আশ্রয় গ্রহণ করে এবং দোষ-ত্রুটিগুলো গোপন করে রাখে তবে তাদের ক্রয়-বিক্রয়ের বারকাত তুলে নেয়া হয়। সহীহ্‌, ইরওয়া (১২৮১), বেচা-কেনার হাদীস, নাসা-ঈ

حدثنا محمد بن بشار، حدثنا يحيى بن سعيد، عن شعبة، عن قتادة، عن صالح أبي الخليل، عن عبد الله بن الحارث، عن حكيم بن حزام، قال قال رسول الله صلى الله عليه وسلم ‏"‏ البيعان بالخيار ما لم يتفرقا فإن صدقا وبينا بورك لهما في بيعهما وإن كتما وكذبا محقت بركة بيعهما ‏"‏ ‏.‏ هذا حديث صحيح ‏.‏ قال أبو عيسى وفي الباب عن أبي برزة وحكيم بن حزام وعبد الله بن عباس وعبد الله بن عمرو وسمرة وأبي هريرة ‏.‏ قال أبو عيسى حديث ابن عمر حديث حسن صحيح ‏.‏ والعمل على هذا عند بعض أهل العلم من أصحاب النبي صلى الله عليه وسلم وغيرهم وهو قول الشافعي وأحمد وإسحاق وقالوا الفرقة بالأبدان لا بالكلام ‏.‏ وقد قال بعض أهل العلم معنى قول النبي صلى الله عليه وسلم ‏"‏ ما لم يتفرقا ‏"‏ ‏.‏ يعني الفرقة بالكلام ‏.‏ والقول الأول أصح لأن ابن عمر هو روى عن النبي صلى الله عليه وسلم وهو أعلم بمعنى ما روى وروي عنه أنه كان إذا أراد أن يوجب البيع مشى ليجب له ‏.‏ وهكذا روي عن أبي برزة الأسلمي أن رجلين اختصما إليه في فرس بعد ما تبايعا ‏.‏ وكانوا في سفينة فقال لا أراكما افترقتما وقال رسول الله صلى الله عليه وسلم ‏"‏ البيعان بالخيار ما لم يتفرقا ‏"‏ ‏.‏ وقد ذهب بعض أهل العلم من أهل الكوفة وغيرهم إلى أن الفرقة بالكلام وهو قول سفيان الثوري وهكذا روي عن مالك بن أنس ‏.‏ وروي عن ابن المبارك أنه قال كيف أرد هذا والحديث فيه عن النبي صلى الله عليه وسلم صحيح ‏.‏ وقوى هذا المذهب ‏.‏ ومعنى قول النبي صلى الله عليه وسلم ‏"‏ إلا بيع الخيار ‏"‏ ‏.‏ معناه أن يخير البائع المشتري بعد إيجاب البيع فإذا خيره فاختار البيع فليس له خيار بعد ذلك في فسخ البيع وإن لم يتفرقا ‏.‏ هكذا فسره الشافعي وغيره ‏.‏ ومما يقوي قول من يقول الفرقة بالأبدان لا بالكلام حديث عبد الله بن عمرو عن النبي صلى الله عليه وسلم ‏.‏


জামে' আত-তিরমিজি ১২৪৭

أخبرنا بذلك، قتيبة بن سعيد حدثنا الليث بن سعد، عن ابن عجلان، عن عمرو بن شعيب، عن أبيه، عن جده، أن رسول الله صلى الله عليه وسلم قال ‏"‏ البيعان بالخيار ما لم يتفرقا إلا أن تكون صفقة خيار ولا يحل له أن يفارق صاحبه خشية أن يستقيله ‏"‏ ‏.‏ قال أبو عيسى هذا حديث حسن ‏.‏ ومعنى هذا أن يفارقه بعد البيع خشية أن يستقيله ولو كانت الفرقة بالكلام ولم يكن له خيار بعد البيع لم يكن لهذا الحديث معنى حيث قال صلى الله عليه وسلم ‏"‏ ولا يحل له أن يفارقه خشية أن يستقيله ‏"‏ ‏.‏

আমর ইবনু শুআইব (রহঃ) হতে পর্যায়ক্রমে তার পিতা ও দাদার সূত্রে থেকে বর্নিতঃ

রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেনঃ ক্রেতা ও বিক্রেতা উভয়ে একে অপর হতে আলাদা না হওয়া পর্যন্ত তাদের জন্য (ক্রয়-বিক্রয় প্রত্যাখ্যানের) স্বাধীনতা বজায় থাকে, কিন্তু স্বাধীনতামূলক বেচা-কেনা হলে (আলাদা হওয়ার পরও স্বাধীনতা বজায় থাকে)। দুজনের মধ্যে যে কোন একজন ক্রয় বা বিক্রয় প্রত্যাখ্যান করতে পারে, এই ভয়ে তাড়াতাড়ি আলাদা হওয়াও বৈধ নয়। হাসান সহীহ্‌, ইরওয়া (১৩১১)

আমর ইবনু শুআইব (রহঃ) হতে পর্যায়ক্রমে তার পিতা ও দাদার সূত্রে থেকে বর্নিতঃ

রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেনঃ ক্রেতা ও বিক্রেতা উভয়ে একে অপর হতে আলাদা না হওয়া পর্যন্ত তাদের জন্য (ক্রয়-বিক্রয় প্রত্যাখ্যানের) স্বাধীনতা বজায় থাকে, কিন্তু স্বাধীনতামূলক বেচা-কেনা হলে (আলাদা হওয়ার পরও স্বাধীনতা বজায় থাকে)। দুজনের মধ্যে যে কোন একজন ক্রয় বা বিক্রয় প্রত্যাখ্যান করতে পারে, এই ভয়ে তাড়াতাড়ি আলাদা হওয়াও বৈধ নয়। হাসান সহীহ্‌, ইরওয়া (১৩১১)

أخبرنا بذلك، قتيبة بن سعيد حدثنا الليث بن سعد، عن ابن عجلان، عن عمرو بن شعيب، عن أبيه، عن جده، أن رسول الله صلى الله عليه وسلم قال ‏"‏ البيعان بالخيار ما لم يتفرقا إلا أن تكون صفقة خيار ولا يحل له أن يفارق صاحبه خشية أن يستقيله ‏"‏ ‏.‏ قال أبو عيسى هذا حديث حسن ‏.‏ ومعنى هذا أن يفارقه بعد البيع خشية أن يستقيله ولو كانت الفرقة بالكلام ولم يكن له خيار بعد البيع لم يكن لهذا الحديث معنى حيث قال صلى الله عليه وسلم ‏"‏ ولا يحل له أن يفارقه خشية أن يستقيله ‏"‏ ‏.‏


জামে' আত-তিরমিজি ১২৪৭

أخبرنا بذلك، قتيبة بن سعيد حدثنا الليث بن سعد، عن ابن عجلان، عن عمرو بن شعيب، عن أبيه، عن جده، أن رسول الله صلى الله عليه وسلم قال ‏"‏ البيعان بالخيار ما لم يتفرقا إلا أن تكون صفقة خيار ولا يحل له أن يفارق صاحبه خشية أن يستقيله ‏"‏ ‏.‏ قال أبو عيسى هذا حديث حسن ‏.‏ ومعنى هذا أن يفارقه بعد البيع خشية أن يستقيله ولو كانت الفرقة بالكلام ولم يكن له خيار بعد البيع لم يكن لهذا الحديث معنى حيث قال صلى الله عليه وسلم ‏"‏ ولا يحل له أن يفارقه خشية أن يستقيله ‏"‏ ‏.‏

আমর ইবনু শুআইব (রহঃ) হতে পর্যায়ক্রমে তার পিতা ও দাদার সূত্রে থেকে বর্নিতঃ

রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেনঃ ক্রেতা ও বিক্রেতা উভয়ে একে অপর হতে আলাদা না হওয়া পর্যন্ত তাদের জন্য (ক্রয়-বিক্রয় প্রত্যাখ্যানের) স্বাধীনতা বজায় থাকে, কিন্তু স্বাধীনতামূলক বেচা-কেনা হলে (আলাদা হওয়ার পরও স্বাধীনতা বজায় থাকে)। দুজনের মধ্যে যে কোন একজন ক্রয় বা বিক্রয় প্রত্যাখ্যান করতে পারে, এই ভয়ে তাড়াতাড়ি আলাদা হওয়াও বৈধ নয়। হাসান সহীহ্‌, ইরওয়া (১৩১১)

আমর ইবনু শুআইব (রহঃ) হতে পর্যায়ক্রমে তার পিতা ও দাদার সূত্রে থেকে বর্নিতঃ

রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেনঃ ক্রেতা ও বিক্রেতা উভয়ে একে অপর হতে আলাদা না হওয়া পর্যন্ত তাদের জন্য (ক্রয়-বিক্রয় প্রত্যাখ্যানের) স্বাধীনতা বজায় থাকে, কিন্তু স্বাধীনতামূলক বেচা-কেনা হলে (আলাদা হওয়ার পরও স্বাধীনতা বজায় থাকে)। দুজনের মধ্যে যে কোন একজন ক্রয় বা বিক্রয় প্রত্যাখ্যান করতে পারে, এই ভয়ে তাড়াতাড়ি আলাদা হওয়াও বৈধ নয়। হাসান সহীহ্‌, ইরওয়া (১৩১১)

أخبرنا بذلك، قتيبة بن سعيد حدثنا الليث بن سعد، عن ابن عجلان، عن عمرو بن شعيب، عن أبيه، عن جده، أن رسول الله صلى الله عليه وسلم قال ‏"‏ البيعان بالخيار ما لم يتفرقا إلا أن تكون صفقة خيار ولا يحل له أن يفارق صاحبه خشية أن يستقيله ‏"‏ ‏.‏ قال أبو عيسى هذا حديث حسن ‏.‏ ومعنى هذا أن يفارقه بعد البيع خشية أن يستقيله ولو كانت الفرقة بالكلام ولم يكن له خيار بعد البيع لم يكن لهذا الحديث معنى حيث قال صلى الله عليه وسلم ‏"‏ ولا يحل له أن يفارقه خشية أن يستقيله ‏"‏ ‏.‏


জামে' আত-তিরমিজি ১২৪৭

أخبرنا بذلك، قتيبة بن سعيد حدثنا الليث بن سعد، عن ابن عجلان، عن عمرو بن شعيب، عن أبيه، عن جده، أن رسول الله صلى الله عليه وسلم قال ‏"‏ البيعان بالخيار ما لم يتفرقا إلا أن تكون صفقة خيار ولا يحل له أن يفارق صاحبه خشية أن يستقيله ‏"‏ ‏.‏ قال أبو عيسى هذا حديث حسن ‏.‏ ومعنى هذا أن يفارقه بعد البيع خشية أن يستقيله ولو كانت الفرقة بالكلام ولم يكن له خيار بعد البيع لم يكن لهذا الحديث معنى حيث قال صلى الله عليه وسلم ‏"‏ ولا يحل له أن يفارقه خشية أن يستقيله ‏"‏ ‏.‏

আমর ইবনু শুআইব (রহঃ) হতে পর্যায়ক্রমে তার পিতা ও দাদার সূত্রে থেকে বর্নিতঃ

রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেনঃ ক্রেতা ও বিক্রেতা উভয়ে একে অপর হতে আলাদা না হওয়া পর্যন্ত তাদের জন্য (ক্রয়-বিক্রয় প্রত্যাখ্যানের) স্বাধীনতা বজায় থাকে, কিন্তু স্বাধীনতামূলক বেচা-কেনা হলে (আলাদা হওয়ার পরও স্বাধীনতা বজায় থাকে)। দুজনের মধ্যে যে কোন একজন ক্রয় বা বিক্রয় প্রত্যাখ্যান করতে পারে, এই ভয়ে তাড়াতাড়ি আলাদা হওয়াও বৈধ নয়। হাসান সহীহ্‌, ইরওয়া (১৩১১)

আমর ইবনু শুআইব (রহঃ) হতে পর্যায়ক্রমে তার পিতা ও দাদার সূত্রে থেকে বর্নিতঃ

রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেনঃ ক্রেতা ও বিক্রেতা উভয়ে একে অপর হতে আলাদা না হওয়া পর্যন্ত তাদের জন্য (ক্রয়-বিক্রয় প্রত্যাখ্যানের) স্বাধীনতা বজায় থাকে, কিন্তু স্বাধীনতামূলক বেচা-কেনা হলে (আলাদা হওয়ার পরও স্বাধীনতা বজায় থাকে)। দুজনের মধ্যে যে কোন একজন ক্রয় বা বিক্রয় প্রত্যাখ্যান করতে পারে, এই ভয়ে তাড়াতাড়ি আলাদা হওয়াও বৈধ নয়। হাসান সহীহ্‌, ইরওয়া (১৩১১)

أخبرنا بذلك، قتيبة بن سعيد حدثنا الليث بن سعد، عن ابن عجلان، عن عمرو بن شعيب، عن أبيه، عن جده، أن رسول الله صلى الله عليه وسلم قال ‏"‏ البيعان بالخيار ما لم يتفرقا إلا أن تكون صفقة خيار ولا يحل له أن يفارق صاحبه خشية أن يستقيله ‏"‏ ‏.‏ قال أبو عيسى هذا حديث حسن ‏.‏ ومعنى هذا أن يفارقه بعد البيع خشية أن يستقيله ولو كانت الفرقة بالكلام ولم يكن له خيار بعد البيع لم يكن لهذا الحديث معنى حيث قال صلى الله عليه وسلم ‏"‏ ولا يحل له أن يفارقه خشية أن يستقيله ‏"‏ ‏.‏


জামে' আত-তিরমিজি > ক্রয়-বিক্রয়ের পর একে অপরের সন্তুষ্টি ছাড়া আলাদা না হওয়া

জামে' আত-তিরমিজি ১২৪৯

حدثنا عمر بن حفص الشيباني، حدثنا ابن وهب، عن ابن جريج، عن أبي الزبير، عن جابر، أن النبي صلى الله عليه وسلم خير أعرابيا بعد البيع ‏.‏ وهذا حديث حسن غريب ‏.‏

জাবির (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ

নাবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) এক বেদুইনকে বিক্রয় সম্পন্ন হওয়ার পরেও তা বাতিলের স্বাধীনতা প্রদান করেছিলেন। হাসান, বেচা-কেনার হাদীস

জাবির (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ

নাবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) এক বেদুইনকে বিক্রয় সম্পন্ন হওয়ার পরেও তা বাতিলের স্বাধীনতা প্রদান করেছিলেন। হাসান, বেচা-কেনার হাদীস

حدثنا عمر بن حفص الشيباني، حدثنا ابن وهب، عن ابن جريج، عن أبي الزبير، عن جابر، أن النبي صلى الله عليه وسلم خير أعرابيا بعد البيع ‏.‏ وهذا حديث حسن غريب ‏.‏


জামে' আত-তিরমিজি ১২৪৮

حدثنا نصر بن علي، حدثنا أبو أحمد، حدثنا يحيى بن أيوب، وهو البجلي الكوفي قال سمعت أبا زرعة بن عمرو بن جرير، يحدث عن أبي هريرة، عن النبي صلى الله عليه وسلم قال ‏ "‏ لا يتفرقن عن بيع إلا عن تراض ‏"‏ ‏.‏ قال أبو عيسى هذا حديث غريب ‏.‏

আবূ হুরাইরা (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ

নাবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেনঃ ক্রেতা ও বিক্রেতা ক্রয়-বিক্রয়ের পর দুজনেই একে অপরের সন্তুষ্টি ছাড়া আলাদা হবে না। হাসান সহীহ্‌, ইরওয়া (৫/১২৫, ১২৬)

আবূ হুরাইরা (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ

নাবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেনঃ ক্রেতা ও বিক্রেতা ক্রয়-বিক্রয়ের পর দুজনেই একে অপরের সন্তুষ্টি ছাড়া আলাদা হবে না। হাসান সহীহ্‌, ইরওয়া (৫/১২৫, ১২৬)

حدثنا نصر بن علي، حدثنا أبو أحمد، حدثنا يحيى بن أيوب، وهو البجلي الكوفي قال سمعت أبا زرعة بن عمرو بن جرير، يحدث عن أبي هريرة، عن النبي صلى الله عليه وسلم قال ‏ "‏ لا يتفرقن عن بيع إلا عن تراض ‏"‏ ‏.‏ قال أبو عيسى هذا حديث غريب ‏.‏


জামে' আত-তিরমিজি ১২৪৮

حدثنا نصر بن علي، حدثنا أبو أحمد، حدثنا يحيى بن أيوب، وهو البجلي الكوفي قال سمعت أبا زرعة بن عمرو بن جرير، يحدث عن أبي هريرة، عن النبي صلى الله عليه وسلم قال ‏ "‏ لا يتفرقن عن بيع إلا عن تراض ‏"‏ ‏.‏ قال أبو عيسى هذا حديث غريب ‏.‏

আবূ হুরাইরা (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ

নাবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেনঃ ক্রেতা ও বিক্রেতা ক্রয়-বিক্রয়ের পর দুজনেই একে অপরের সন্তুষ্টি ছাড়া আলাদা হবে না। হাসান সহীহ্‌, ইরওয়া (৫/১২৫, ১২৬)

আবূ হুরাইরা (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ

নাবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেনঃ ক্রেতা ও বিক্রেতা ক্রয়-বিক্রয়ের পর দুজনেই একে অপরের সন্তুষ্টি ছাড়া আলাদা হবে না। হাসান সহীহ্‌, ইরওয়া (৫/১২৫, ১২৬)

حدثنا نصر بن علي، حدثنا أبو أحمد، حدثنا يحيى بن أيوب، وهو البجلي الكوفي قال سمعت أبا زرعة بن عمرو بن جرير، يحدث عن أبي هريرة، عن النبي صلى الله عليه وسلم قال ‏ "‏ لا يتفرقن عن بيع إلا عن تراض ‏"‏ ‏.‏ قال أبو عيسى هذا حديث غريب ‏.‏


জামে' আত-তিরমিজি ১২৪৮

حدثنا نصر بن علي، حدثنا أبو أحمد، حدثنا يحيى بن أيوب، وهو البجلي الكوفي قال سمعت أبا زرعة بن عمرو بن جرير، يحدث عن أبي هريرة، عن النبي صلى الله عليه وسلم قال ‏ "‏ لا يتفرقن عن بيع إلا عن تراض ‏"‏ ‏.‏ قال أبو عيسى هذا حديث غريب ‏.‏

আবূ হুরাইরা (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ

নাবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেনঃ ক্রেতা ও বিক্রেতা ক্রয়-বিক্রয়ের পর দুজনেই একে অপরের সন্তুষ্টি ছাড়া আলাদা হবে না। হাসান সহীহ্‌, ইরওয়া (৫/১২৫, ১২৬)

আবূ হুরাইরা (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ

নাবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেনঃ ক্রেতা ও বিক্রেতা ক্রয়-বিক্রয়ের পর দুজনেই একে অপরের সন্তুষ্টি ছাড়া আলাদা হবে না। হাসান সহীহ্‌, ইরওয়া (৫/১২৫, ১২৬)

حدثنا نصر بن علي، حدثنا أبو أحمد، حدثنا يحيى بن أيوب، وهو البجلي الكوفي قال سمعت أبا زرعة بن عمرو بن جرير، يحدث عن أبي هريرة، عن النبي صلى الله عليه وسلم قال ‏ "‏ لا يتفرقن عن بيع إلا عن تراض ‏"‏ ‏.‏ قال أبو عيسى هذا حديث غريب ‏.‏


জামে' আত-তিরমিজি > যে লোক ক্রয়-বিক্রয়ের কালে প্রতারিত হয়

জামে' আত-তিরমিজি ১২৫০

حدثنا يوسف بن حماد البصري، حدثنا عبد الأعلى بن عبد الأعلى، عن سعيد، عن قتادة، عن أنس، أن رجلا، كان في عقدته ضعف وكان يبايع وأن أهله أتوا النبي صلى الله عليه وسلم فقالوا يا رسول الله احجر عليه ‏.‏ فدعاه نبي الله صلى الله عليه وسلم فنهاه فقال يا رسول الله إني لا أصبر عن البيع ‏.‏ فقال ‏ "‏ إذا بايعت فقل هاء وهاء ولا خلابة ‏"‏ ‏.‏ قال أبو عيسى وفي الباب عن ابن عمر ‏.‏ وحديث أنس حديث حسن صحيح غريب ‏.‏ والعمل على هذا الحديث عند بعض أهل العلم وقالوا يحجر على الرجل الحر في البيع والشراء إذا كان ضعيف العقل ‏.‏ وهو قول أحمد وإسحاق ‏.‏ ولم ير بعضهم أن يحجر على الحر البالغ ‏.‏

আনাস (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ

ক্রয়-বিক্রয়ের ক্ষেত্রে এক ব্যক্তি খুবই দুর্বল ছিল। সে ক্রয়-বিক্রয় করত (কিন্তু ঠকে যেত)। নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম)-এর কাছে এসে তার পরিবারের লোকেরা বলল, হে আল্লাহর রাসূল! তাকে ক্রয়-বিক্রয় হতে বিরত থাকতে বলুন। নাৰী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তাকে ডেকে ক্রয়-বিক্রয় করতে নিষেধ করলেন। সে বলল, হে আল্লাহ্‌র রাসূল! ক্রয়-বিক্রয় হতে বিরত থাকার কাজটি আমার ধৈর্যের উরধে। তিনি বললেনঃ যখন তুমি ক্রয়-বিক্রয় করবে তখন বলবে নগদ লেন-দেন হবে এবং যেন প্রতারণা না করা হয়। সহীহ্‌, ইবনু মা-জাহ (২৩৫৪), নাসা-ঈ

আনাস (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ

ক্রয়-বিক্রয়ের ক্ষেত্রে এক ব্যক্তি খুবই দুর্বল ছিল। সে ক্রয়-বিক্রয় করত (কিন্তু ঠকে যেত)। নবী (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম)-এর কাছে এসে তার পরিবারের লোকেরা বলল, হে আল্লাহর রাসূল! তাকে ক্রয়-বিক্রয় হতে বিরত থাকতে বলুন। নাৰী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তাকে ডেকে ক্রয়-বিক্রয় করতে নিষেধ করলেন। সে বলল, হে আল্লাহ্‌র রাসূল! ক্রয়-বিক্রয় হতে বিরত থাকার কাজটি আমার ধৈর্যের উরধে। তিনি বললেনঃ যখন তুমি ক্রয়-বিক্রয় করবে তখন বলবে নগদ লেন-দেন হবে এবং যেন প্রতারণা না করা হয়। সহীহ্‌, ইবনু মা-জাহ (২৩৫৪), নাসা-ঈ

حدثنا يوسف بن حماد البصري، حدثنا عبد الأعلى بن عبد الأعلى، عن سعيد، عن قتادة، عن أنس، أن رجلا، كان في عقدته ضعف وكان يبايع وأن أهله أتوا النبي صلى الله عليه وسلم فقالوا يا رسول الله احجر عليه ‏.‏ فدعاه نبي الله صلى الله عليه وسلم فنهاه فقال يا رسول الله إني لا أصبر عن البيع ‏.‏ فقال ‏ "‏ إذا بايعت فقل هاء وهاء ولا خلابة ‏"‏ ‏.‏ قال أبو عيسى وفي الباب عن ابن عمر ‏.‏ وحديث أنس حديث حسن صحيح غريب ‏.‏ والعمل على هذا الحديث عند بعض أهل العلم وقالوا يحجر على الرجل الحر في البيع والشراء إذا كان ضعيف العقل ‏.‏ وهو قول أحمد وإسحاق ‏.‏ ولم ير بعضهم أن يحجر على الحر البالغ ‏.‏


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