জামে' আত-তিরমিজি > দু’টি গোলামের বিনিময়ে একটি গোলাম ক্রয়-বিক্রয় করা
জামে' আত-তিরমিজি ১২৩৯
حدثنا قتيبة، أخبرنا الليث، عن أبي الزبير، عن جابر، قال جاء عبد فبايع النبي صلى الله عليه وسلم على الهجرة ولا يشعر النبي صلى الله عليه وسلم أنه عبد فجاء سيده يريده فقال النبي صلى الله عليه وسلم " بعنيه " . فاشتراه بعبدين أسودين ثم لم يبايع أحدا بعد حتى يسأله أعبد هو قال وفي الباب عن أنس . قال أبو عيسى حديث جابر حديث حسن صحيح . والعمل على هذا عند أهل العلم أنه لا بأس بعبد بعبدين يدا بيد . واختلفوا فيه إذا كان نسيئا .
জাবির (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ
তিনি বলেন, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম)-এর নিকট একজন ক্রিতদাস এসে হিজরাতের উদ্দেশ্যে তাঁর নিকট শপথ করে। সে যে ক্রীতদাস রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) সেটা জানতেন না। তার মালিক এসে উপস্থিত হল তাকে ফেরত নেয়ার জন্য। রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেনঃ তুমি একে আমার নিকট বিক্রয় করে দাও। তিনি তাকে কিনলেন দুইটি হাবশী গোলামের বিনিময়ে। এরপর হতে কারো বাইআত গ্রহণের পূর্বে তিনি প্রশ্ন করে নিতেন, সে ক্রীতদাস কি না। সহীহ্, বেচা-কেনার হাদীস, মুসলিম
জাবির (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ
তিনি বলেন, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম)-এর নিকট একজন ক্রিতদাস এসে হিজরাতের উদ্দেশ্যে তাঁর নিকট শপথ করে। সে যে ক্রীতদাস রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) সেটা জানতেন না। তার মালিক এসে উপস্থিত হল তাকে ফেরত নেয়ার জন্য। রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেনঃ তুমি একে আমার নিকট বিক্রয় করে দাও। তিনি তাকে কিনলেন দুইটি হাবশী গোলামের বিনিময়ে। এরপর হতে কারো বাইআত গ্রহণের পূর্বে তিনি প্রশ্ন করে নিতেন, সে ক্রীতদাস কি না। সহীহ্, বেচা-কেনার হাদীস, মুসলিম
حدثنا قتيبة، أخبرنا الليث، عن أبي الزبير، عن جابر، قال جاء عبد فبايع النبي صلى الله عليه وسلم على الهجرة ولا يشعر النبي صلى الله عليه وسلم أنه عبد فجاء سيده يريده فقال النبي صلى الله عليه وسلم " بعنيه " . فاشتراه بعبدين أسودين ثم لم يبايع أحدا بعد حتى يسأله أعبد هو قال وفي الباب عن أنس . قال أبو عيسى حديث جابر حديث حسن صحيح . والعمل على هذا عند أهل العلم أنه لا بأس بعبد بعبدين يدا بيد . واختلفوا فيه إذا كان نسيئا .
জামে' আত-তিরমিজি > গমের বিনিময়ে সমপরিমাণ গম বেচা-কেনা করতে হবে, অতিরিক্ত দেয়া-নেয়া নিষেধ
জামে' আত-তিরমিজি ১২৪০
حدثنا سويد بن نصر، حدثنا عبد الله بن المبارك، أخبرنا سفيان، عن خالد الحذاء، عن أبي قلابة، عن أبي الأشعث، عن عبادة بن الصامت، عن النبي صلى الله عليه وسلم قال " الذهب بالذهب مثلا بمثل والفضة بالفضة مثلا بمثل والتمر بالتمر مثلا بمثل والبر بالبر مثلا بمثل والملح بالملح مثلا بمثل والشعير بالشعير مثلا بمثل فمن زاد أو ازداد فقد أربى بيعوا الذهب بالفضة كيف شئتم يدا بيد وبيعوا البر بالتمر كيف شئتم يدا بيد وبيعوا الشعير بالتمر كيف شئتم يدا بيد " . قال وفي الباب عن أبي سعيد وأبي هريرة وبلال وأنس . قال أبو عيسى حديث عبادة حديث حسن صحيح . وقد روى بعضهم هذا الحديث عن خالد بهذا الإسناد وقال " بيعوا البر بالشعير كيف شئتم يدا بيد " . وروى بعضهم هذا الحديث عن خالد عن أبي قلابة عن أبي الأشعث عن عبادة عن النبي صلى الله عليه وسلم الحديث وزاد فيه قال خالد قال أبو قلابة " بيعوا البر بالشعير كيف شئتم " فذكر الحديث . والعمل على هذا عند أهل العلم لا يرون أن يباع البر بالبر إلا مثلا بمثل والشعير بالشعير إلا مثلا بمثل فإذا اختلف الأصناف فلا بأس أن يباع متفاضلا إذا كان يدا بيد . وهذا قول أكثر أهل العلم من أصحاب النبي صلى الله عليه وسلم وغيرهم وهو قول سفيان الثوري والشافعي وأحمد وإسحاق . قال الشافعي والحجة في ذلك قول النبي صلى الله عليه وسلم " بيعوا الشعير بالبر كيف شئتم يدا بيد " . قال أبو عيسى وقد كره قوم من أهل العلم أن تباع الحنطة بالشعير إلا مثلا بمثل . وهو قول مالك بن أنس والقول الأول أصح .
উবাদা ইবনু সামিত (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ
নাবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেনঃ সমপরিমাণ স্বর্ণের পরিবর্তে সমপরিমাণ স্বর্ণ হতে হবে; সমপরিমাণ রূপার পরিবর্তে সমপরিমাণ রূপা হতে হবে; সমপরিমাণ খেজুরের পরিবর্তে সমপরিমাণ খেজুর হতে হবে; সমপরিমাণ গমের পরিবর্তে সমপরিমাণ গম হতে হবে; সমপরিমাণ লবণের পরিবর্তে সমপরিমাণ লবণ হতে হবে এবং সমপরিমাণ যবের পরিবর্তে সমপরিমাণ যব হতে হবে। যে লোক এ সবের লেনদেনে বেশি পরিমাণ দিবে অথবা নিবে সে সূদে লেনদেনকারী বলে বিবেচিত হবে। তোমাদের ইচ্ছানুযায়ী রূপার পরিমাণের পরিবর্তে স্বর্ণের পরিমাণ নির্ধারণ করে নগদ বিক্রয় করতে পার। তোমাদের ইচ্ছানুযায়ী খেজুরের পরিমাণের পরিবর্তে গমের পরিমাণ নির্ধারণ করে নগদ বিক্রয় করতে পার। তোমাদের ইচ্ছানুযায়ী খেজুরের পরিমাণের পরিবর্তে যবের পরিমাণ ঠিক করে নগদ বিক্রয় করতে পার। সহীহ্, ইবনু মা-জাহ (২২৫৪), মুসলিম
উবাদা ইবনু সামিত (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ
নাবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেনঃ সমপরিমাণ স্বর্ণের পরিবর্তে সমপরিমাণ স্বর্ণ হতে হবে; সমপরিমাণ রূপার পরিবর্তে সমপরিমাণ রূপা হতে হবে; সমপরিমাণ খেজুরের পরিবর্তে সমপরিমাণ খেজুর হতে হবে; সমপরিমাণ গমের পরিবর্তে সমপরিমাণ গম হতে হবে; সমপরিমাণ লবণের পরিবর্তে সমপরিমাণ লবণ হতে হবে এবং সমপরিমাণ যবের পরিবর্তে সমপরিমাণ যব হতে হবে। যে লোক এ সবের লেনদেনে বেশি পরিমাণ দিবে অথবা নিবে সে সূদে লেনদেনকারী বলে বিবেচিত হবে। তোমাদের ইচ্ছানুযায়ী রূপার পরিমাণের পরিবর্তে স্বর্ণের পরিমাণ নির্ধারণ করে নগদ বিক্রয় করতে পার। তোমাদের ইচ্ছানুযায়ী খেজুরের পরিমাণের পরিবর্তে গমের পরিমাণ নির্ধারণ করে নগদ বিক্রয় করতে পার। তোমাদের ইচ্ছানুযায়ী খেজুরের পরিমাণের পরিবর্তে যবের পরিমাণ ঠিক করে নগদ বিক্রয় করতে পার। সহীহ্, ইবনু মা-জাহ (২২৫৪), মুসলিম
حدثنا سويد بن نصر، حدثنا عبد الله بن المبارك، أخبرنا سفيان، عن خالد الحذاء، عن أبي قلابة، عن أبي الأشعث، عن عبادة بن الصامت، عن النبي صلى الله عليه وسلم قال " الذهب بالذهب مثلا بمثل والفضة بالفضة مثلا بمثل والتمر بالتمر مثلا بمثل والبر بالبر مثلا بمثل والملح بالملح مثلا بمثل والشعير بالشعير مثلا بمثل فمن زاد أو ازداد فقد أربى بيعوا الذهب بالفضة كيف شئتم يدا بيد وبيعوا البر بالتمر كيف شئتم يدا بيد وبيعوا الشعير بالتمر كيف شئتم يدا بيد " . قال وفي الباب عن أبي سعيد وأبي هريرة وبلال وأنس . قال أبو عيسى حديث عبادة حديث حسن صحيح . وقد روى بعضهم هذا الحديث عن خالد بهذا الإسناد وقال " بيعوا البر بالشعير كيف شئتم يدا بيد " . وروى بعضهم هذا الحديث عن خالد عن أبي قلابة عن أبي الأشعث عن عبادة عن النبي صلى الله عليه وسلم الحديث وزاد فيه قال خالد قال أبو قلابة " بيعوا البر بالشعير كيف شئتم " فذكر الحديث . والعمل على هذا عند أهل العلم لا يرون أن يباع البر بالبر إلا مثلا بمثل والشعير بالشعير إلا مثلا بمثل فإذا اختلف الأصناف فلا بأس أن يباع متفاضلا إذا كان يدا بيد . وهذا قول أكثر أهل العلم من أصحاب النبي صلى الله عليه وسلم وغيرهم وهو قول سفيان الثوري والشافعي وأحمد وإسحاق . قال الشافعي والحجة في ذلك قول النبي صلى الله عليه وسلم " بيعوا الشعير بالبر كيف شئتم يدا بيد " . قال أبو عيسى وقد كره قوم من أهل العلم أن تباع الحنطة بالشعير إلا مثلا بمثل . وهو قول مالك بن أنس والقول الأول أصح .
জামে' আত-তিরমিজি > মুদ্রার বিনিময়
জামে' আত-তিরমিজি ১২৪১
حدثنا أحمد بن منيع، أخبرنا حسين بن محمد، أخبرنا شيبان، عن يحيى بن أبي كثير، عن نافع، قال انطلقت أنا وابن، عمر إلى أبي سعيد فحدثنا أن رسول الله صلى الله عليه وسلم قال سمعته أذناى هاتان يقول " لا تبيعوا الذهب بالذهب إلا مثلا بمثل والفضة بالفضة إلا مثلا بمثل لا يشف بعضه على بعض ولا تبيعوا منه غائبا بناجز " . قال أبو عيسى وفي الباب عن أبي بكر وعمر وعثمان وأبي هريرة وهشام بن عامر والبراء وزيد بن أرقم وفضالة بن عبيد وأبي بكرة وابن عمر وأبي الدرداء وبلال . قال وحديث أبي سعيد عن النبي صلى الله عليه وسلم في الربا حديث حسن صحيح . والعمل على هذا عند أهل العلم من أصحاب النبي صلى الله عليه وسلم وغيرهم إلا ما روي عن ابن عباس أنه كان لا يرى بأسا أن يباع الذهب بالذهب متفاضلا والفضة بالفضة متفاضلا إذا كان يدا بيد . وقال إنما الربا في النسيئة . وكذلك روي عن بعض أصحابه شيء من هذا وقد روي عن ابن عباس أنه رجع عن قوله حين حدثه أبو سعيد الخدري عن النبي صلى الله عليه وسلم . والقول الأول أصح . والعمل على هذا عند أهل العلم من أصحاب النبي صلى الله عليه وسلم وغيرهم وهو قول سفيان الثوري وابن المبارك والشافعي وأحمد وإسحاق . وروي عن ابن المبارك أنه قال ليس في الصرف اختلاف .
নাফি (রহঃ) থেকে বর্নিতঃ
তিনি বলেন, আবূ সাঈদ (রাঃ)-এর নিকট আমি ও ইবনু উমার (রাঃ) গেলাম। তিনি আমাদেরকে হাদীস বর্ণনা প্রসঙ্গে বলেন, আমার দুটো কানই রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে বলতে শুনেছেঃ তোমরা স্বর্ণের পরিবর্তে স্বর্ণ বিক্রয় কর না পরিমাণে সমান না রেখে। একইভাবে তোমরা রূপার পরিবর্তে রূপা বিক্রয় কর না পরিমাণে সমান সমান না রেখে। একটি অন্যটি হতে পরিমাণে কম-বেশি করা যাবে না। উপস্থিত বস্তুর পরিবর্তে অনুপস্থিত বস্তু বিক্রয় কর না। সহীহ্, ইরওয়া (৫/১৮৯), বেচা-কেনার হাদীস, নাসা-ঈ
নাফি (রহঃ) থেকে বর্নিতঃ
তিনি বলেন, আবূ সাঈদ (রাঃ)-এর নিকট আমি ও ইবনু উমার (রাঃ) গেলাম। তিনি আমাদেরকে হাদীস বর্ণনা প্রসঙ্গে বলেন, আমার দুটো কানই রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে বলতে শুনেছেঃ তোমরা স্বর্ণের পরিবর্তে স্বর্ণ বিক্রয় কর না পরিমাণে সমান না রেখে। একইভাবে তোমরা রূপার পরিবর্তে রূপা বিক্রয় কর না পরিমাণে সমান সমান না রেখে। একটি অন্যটি হতে পরিমাণে কম-বেশি করা যাবে না। উপস্থিত বস্তুর পরিবর্তে অনুপস্থিত বস্তু বিক্রয় কর না। সহীহ্, ইরওয়া (৫/১৮৯), বেচা-কেনার হাদীস, নাসা-ঈ
حدثنا أحمد بن منيع، أخبرنا حسين بن محمد، أخبرنا شيبان، عن يحيى بن أبي كثير، عن نافع، قال انطلقت أنا وابن، عمر إلى أبي سعيد فحدثنا أن رسول الله صلى الله عليه وسلم قال سمعته أذناى هاتان يقول " لا تبيعوا الذهب بالذهب إلا مثلا بمثل والفضة بالفضة إلا مثلا بمثل لا يشف بعضه على بعض ولا تبيعوا منه غائبا بناجز " . قال أبو عيسى وفي الباب عن أبي بكر وعمر وعثمان وأبي هريرة وهشام بن عامر والبراء وزيد بن أرقم وفضالة بن عبيد وأبي بكرة وابن عمر وأبي الدرداء وبلال . قال وحديث أبي سعيد عن النبي صلى الله عليه وسلم في الربا حديث حسن صحيح . والعمل على هذا عند أهل العلم من أصحاب النبي صلى الله عليه وسلم وغيرهم إلا ما روي عن ابن عباس أنه كان لا يرى بأسا أن يباع الذهب بالذهب متفاضلا والفضة بالفضة متفاضلا إذا كان يدا بيد . وقال إنما الربا في النسيئة . وكذلك روي عن بعض أصحابه شيء من هذا وقد روي عن ابن عباس أنه رجع عن قوله حين حدثه أبو سعيد الخدري عن النبي صلى الله عليه وسلم . والقول الأول أصح . والعمل على هذا عند أهل العلم من أصحاب النبي صلى الله عليه وسلم وغيرهم وهو قول سفيان الثوري وابن المبارك والشافعي وأحمد وإسحاق . وروي عن ابن المبارك أنه قال ليس في الصرف اختلاف .
জামে' আত-তিরমিজি ১২৪৩
حدثنا قتيبة، حدثنا الليث، عن ابن شهاب، عن مالك بن أوس بن الحدثان، أنه قال أقبلت أقول من يصطرف الدراهم فقال طلحة بن عبيد الله وهو عند عمر بن الخطاب أرنا ذهبك ثم ائتنا إذا جاء خادمنا نعطك ورقك . فقال عمر كلا والله لتعطينه ورقه أو لتردن إليه ذهبه فإن رسول الله صلى الله عليه وسلم قال " الورق بالذهب ربا إلا هاء وهاء والبر بالبر ربا إلا هاء وهاء والشعير بالشعير ربا إلا هاء وهاء والتمر بالتمر ربا إلا هاء وهاء " . قال أبو عيسى هذا حديث حسن صحيح . والعمل على هذا عند أهل العلم . ومعنى قوله " إلا هاء وهاء " يقول يدا بيد .
মালিক ইবনু আওস ইবনু হাদসান (রহঃ) থেকে বর্নিতঃ
তিনি বলেন, আমি এই বলতে বলতে সামনে এগিয়ে গেলাম, কে রূপার মুদ্রা পরিবর্তন করবে? তালহা ইবনু উবাইদুল্লাহ এ সময়ে উমার ইবনুল খাত্তাব (রাঃ)-এর নিকট ছিলেন। তিনি বললেন, তোমার স্বর্ণ আমাদেরকে দেখাও এবং (কিছুক্ষণ) পরে আমাদের কাছে আস। আমাদের খাদিম আসার পরই তোমাকে রূপার মুদ্রা প্রদান করব। উমার ইবনুল খাত্তাব (রাঃ) বললেন, আল্লাহর শপথ! তা কখনও হতে পারে না। হয় এখনই তাকে রূপার মুদ্রা প্রদান কর না হয় তাকে তার স্বর্ণ ফেরত দাও। কেননা, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেনঃ স্বর্ণের পরিবর্তে রূপার মুদ্রা নগদ আদান-প্রদান না হলে তা গ্রহণ করা সূদের অন্তর্ভুক্ত। গমের পরিবর্তে গম নগদ আদান-প্রদান না হলে তা সূদের অন্তর্ভুক্ত; যবের পরিবর্তে যবের নগদ বিনিময় না হলে তা সূদের অন্তর্ভুক্ত এবং খেজুরের পরিবর্তে খেজুরের নগদ বিনিময় না হলে সুদ হবে। সহীহ্, ইবনু মা-জাহ (২২৫৩), নাসা-ঈ
মালিক ইবনু আওস ইবনু হাদসান (রহঃ) থেকে বর্নিতঃ
তিনি বলেন, আমি এই বলতে বলতে সামনে এগিয়ে গেলাম, কে রূপার মুদ্রা পরিবর্তন করবে? তালহা ইবনু উবাইদুল্লাহ এ সময়ে উমার ইবনুল খাত্তাব (রাঃ)-এর নিকট ছিলেন। তিনি বললেন, তোমার স্বর্ণ আমাদেরকে দেখাও এবং (কিছুক্ষণ) পরে আমাদের কাছে আস। আমাদের খাদিম আসার পরই তোমাকে রূপার মুদ্রা প্রদান করব। উমার ইবনুল খাত্তাব (রাঃ) বললেন, আল্লাহর শপথ! তা কখনও হতে পারে না। হয় এখনই তাকে রূপার মুদ্রা প্রদান কর না হয় তাকে তার স্বর্ণ ফেরত দাও। কেননা, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেনঃ স্বর্ণের পরিবর্তে রূপার মুদ্রা নগদ আদান-প্রদান না হলে তা গ্রহণ করা সূদের অন্তর্ভুক্ত। গমের পরিবর্তে গম নগদ আদান-প্রদান না হলে তা সূদের অন্তর্ভুক্ত; যবের পরিবর্তে যবের নগদ বিনিময় না হলে তা সূদের অন্তর্ভুক্ত এবং খেজুরের পরিবর্তে খেজুরের নগদ বিনিময় না হলে সুদ হবে। সহীহ্, ইবনু মা-জাহ (২২৫৩), নাসা-ঈ
حدثنا قتيبة، حدثنا الليث، عن ابن شهاب، عن مالك بن أوس بن الحدثان، أنه قال أقبلت أقول من يصطرف الدراهم فقال طلحة بن عبيد الله وهو عند عمر بن الخطاب أرنا ذهبك ثم ائتنا إذا جاء خادمنا نعطك ورقك . فقال عمر كلا والله لتعطينه ورقه أو لتردن إليه ذهبه فإن رسول الله صلى الله عليه وسلم قال " الورق بالذهب ربا إلا هاء وهاء والبر بالبر ربا إلا هاء وهاء والشعير بالشعير ربا إلا هاء وهاء والتمر بالتمر ربا إلا هاء وهاء " . قال أبو عيسى هذا حديث حسن صحيح . والعمل على هذا عند أهل العلم . ومعنى قوله " إلا هاء وهاء " يقول يدا بيد .
জামে' আত-তিরমিজি ১২৪২
حدثنا الحسن بن علي الخلال، حدثنا يزيد بن هارون، أخبرنا حماد بن سلمة، عن سماك بن حرب، عن سعيد بن جبير، عن ابن عمر، قال كنت أبيع الإبل بالبقيع فأبيع بالدنانير فآخذ مكانها الورق وأبيع بالورق فآخذ مكانها الدنانير فأتيت رسول الله صلى الله عليه وسلم فوجدته خارجا من بيت حفصة فسألته عن ذلك فقال " لا بأس به بالقيمة " . قال أبو عيسى هذا حديث لا نعرفه مرفوعا إلا من حديث سماك بن حرب عن سعيد بن جبير عن ابن عمر . وروى داود بن أبي هند هذا الحديث عن سعيد بن جبير عن ابن عمر موقوفا . والعمل على هذا عند بعض أهل العلم أن لا بأس أن يقتضي الذهب من الورق والورق من الذهب . وهو قول أحمد وإسحاق . وقد كره بعض أهل العلم من أصحاب النبي صلى الله عليه وسلم وغيرهم ذلك .
ইবনু উমার (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ
তিনি বলেন, আমি বাকি নামক বাজারে উটের ব্যবসা করতাম। আমি কখনও স্বর্ণ মুদ্রার বদলে উট বিক্রয় করতাম কিন্তু দাম নেয়ার সময় রৌপ্যমুদ্রা নিতাম। আবার কখনও রৌপ্য মুদ্রার বদলে তা বিক্রয় করতাম এবং দাম নেয়ার সময় স্বর্ণ মুদ্রা নিতাম। আমি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর নিকটে এসে তাঁকে হাফসা (রাঃ)-এর ঘর হতে বেরিয়ে আসতে দেখলাম। আমি এ সম্পর্কে তাঁকে প্রশ্ন করলে তিনি বলেনঃ এরূপ দাম গ্রহণ করায় কোন সমস্যা নাই। যঈফ, ইবনু মাজাহ (২২৬২)
ইবনু উমার (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ
তিনি বলেন, আমি বাকি নামক বাজারে উটের ব্যবসা করতাম। আমি কখনও স্বর্ণ মুদ্রার বদলে উট বিক্রয় করতাম কিন্তু দাম নেয়ার সময় রৌপ্যমুদ্রা নিতাম। আবার কখনও রৌপ্য মুদ্রার বদলে তা বিক্রয় করতাম এবং দাম নেয়ার সময় স্বর্ণ মুদ্রা নিতাম। আমি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর নিকটে এসে তাঁকে হাফসা (রাঃ)-এর ঘর হতে বেরিয়ে আসতে দেখলাম। আমি এ সম্পর্কে তাঁকে প্রশ্ন করলে তিনি বলেনঃ এরূপ দাম গ্রহণ করায় কোন সমস্যা নাই। যঈফ, ইবনু মাজাহ (২২৬২)
حدثنا الحسن بن علي الخلال، حدثنا يزيد بن هارون، أخبرنا حماد بن سلمة، عن سماك بن حرب، عن سعيد بن جبير، عن ابن عمر، قال كنت أبيع الإبل بالبقيع فأبيع بالدنانير فآخذ مكانها الورق وأبيع بالورق فآخذ مكانها الدنانير فأتيت رسول الله صلى الله عليه وسلم فوجدته خارجا من بيت حفصة فسألته عن ذلك فقال " لا بأس به بالقيمة " . قال أبو عيسى هذا حديث لا نعرفه مرفوعا إلا من حديث سماك بن حرب عن سعيد بن جبير عن ابن عمر . وروى داود بن أبي هند هذا الحديث عن سعيد بن جبير عن ابن عمر موقوفا . والعمل على هذا عند بعض أهل العلم أن لا بأس أن يقتضي الذهب من الورق والورق من الذهب . وهو قول أحمد وإسحاق . وقد كره بعض أهل العلم من أصحاب النبي صلى الله عليه وسلم وغيرهم ذلك .
জামে' আত-তিরমিজি > তাবীরের পর খেজুর গাছ ক্রয় করা এবং সম্পদশালী গোলাম ক্রয় করা
জামে' আত-তিরমিজি ১২৪৪
حدثنا قتيبة، حدثنا الليث، عن ابن شهاب، عن سالم، عن أبيه، قال سمعت رسول الله صلى الله عليه وسلم يقول " من ابتاع نخلا بعد أن تؤبر فثمرتها للذي باعها إلا أن يشترط المبتاع ومن ابتاع عبدا وله مال فماله للذي باعه إلا أن يشترط المبتاع " . قال وفي الباب عن جابر . وحديث ابن عمر حديث حسن صحيح . هكذا روي من غير وجه عن الزهري عن سالم عن ابن عمر عن النبي صلى الله عليه وسلم أنه قال " من ابتاع نخلا بعد أن تؤبر فثمرتها للبائع إلا أن يشترط المبتاع ومن باع عبدا وله مال فماله للبائع إلا أن يشترط المبتاع " . وقد روي عن نافع عن ابن عمر عن النبي صلى الله عليه وسلم قال " من ابتاع نخلا قد أبرت فثمرتها للبائع إلا أن يشترط المبتاع " . وقد روي عن نافع عن ابن عمر عن عمر أنه قال من باع عبدا وله مال فماله للبائع إلا أن يشترط المبتاع . هكذا روى عبيد الله بن عمر وغيره عن نافع الحديثين . وقد روى بعضهم هذا الحديث عن نافع عن ابن عمر عن النبي صلى الله عليه وسلم أيضا . وروى عكرمة بن خالد عن ابن عمر عن النبي صلى الله عليه وسلم نحو حديث سالم . والعمل على هذا الحديث عند بعض أهل العلم وهو قول الشافعي وأحمد وإسحاق . قال محمد بن إسماعيل حديث الزهري عن سالم عن أبيه عن النبي صلى الله عليه وسلم أصح ما جاء في هذا الباب .
সালিম (রহঃ) হতে তার পিতার সূত্রে থেকে বর্নিতঃ
তিনি (পিতা) বলেন, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে আমি বলতে শুনেছিঃ তাবীরের পর কোন লোক খেজুর বাগান কিনলে এর ফলের মালিক হবে বিক্রেতা, যদি ক্রয়কারীর জন্য (মালিকানা) শর্ত করা না হয়। যদি কোন লোক সম্পদশালী গোলাম কিনে তবে ঐ সম্পদের অধিকারী হবে বিক্রেতা, ক্রেতার জন্য ঐ সম্পদের যদি কোনরূপ শর্ত করা না হয়। সহীহ্, ইবনু মা-জাহ (২২১০, ২২১২), নাসা-ঈ
সালিম (রহঃ) হতে তার পিতার সূত্রে থেকে বর্নিতঃ
তিনি (পিতা) বলেন, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে আমি বলতে শুনেছিঃ তাবীরের পর কোন লোক খেজুর বাগান কিনলে এর ফলের মালিক হবে বিক্রেতা, যদি ক্রয়কারীর জন্য (মালিকানা) শর্ত করা না হয়। যদি কোন লোক সম্পদশালী গোলাম কিনে তবে ঐ সম্পদের অধিকারী হবে বিক্রেতা, ক্রেতার জন্য ঐ সম্পদের যদি কোনরূপ শর্ত করা না হয়। সহীহ্, ইবনু মা-জাহ (২২১০, ২২১২), নাসা-ঈ
حدثنا قتيبة، حدثنا الليث، عن ابن شهاب، عن سالم، عن أبيه، قال سمعت رسول الله صلى الله عليه وسلم يقول " من ابتاع نخلا بعد أن تؤبر فثمرتها للذي باعها إلا أن يشترط المبتاع ومن ابتاع عبدا وله مال فماله للذي باعه إلا أن يشترط المبتاع " . قال وفي الباب عن جابر . وحديث ابن عمر حديث حسن صحيح . هكذا روي من غير وجه عن الزهري عن سالم عن ابن عمر عن النبي صلى الله عليه وسلم أنه قال " من ابتاع نخلا بعد أن تؤبر فثمرتها للبائع إلا أن يشترط المبتاع ومن باع عبدا وله مال فماله للبائع إلا أن يشترط المبتاع " . وقد روي عن نافع عن ابن عمر عن النبي صلى الله عليه وسلم قال " من ابتاع نخلا قد أبرت فثمرتها للبائع إلا أن يشترط المبتاع " . وقد روي عن نافع عن ابن عمر عن عمر أنه قال من باع عبدا وله مال فماله للبائع إلا أن يشترط المبتاع . هكذا روى عبيد الله بن عمر وغيره عن نافع الحديثين . وقد روى بعضهم هذا الحديث عن نافع عن ابن عمر عن النبي صلى الله عليه وسلم أيضا . وروى عكرمة بن خالد عن ابن عمر عن النبي صلى الله عليه وسلم نحو حديث سالم . والعمل على هذا الحديث عند بعض أهل العلم وهو قول الشافعي وأحمد وإسحاق . قال محمد بن إسماعيل حديث الزهري عن سالم عن أبيه عن النبي صلى الله عليه وسلم أصح ما جاء في هذا الباب .