জামে' আত-তিরমিজি > যে জিনিস আয়ত্তে নেই তার অগ্রিম ক্রয়-বিক্রয় নিষিদ্ধ

জামে' আত-তিরমিজি ১২৩২

حدثنا قتيبة، حدثنا هشيم، عن أبي بشر، عن يوسف بن ماهك، عن حكيم بن حزام، قال أتيت رسول الله صلى الله عليه وسلم فقلت يأتيني الرجل يسألني من البيع ما ليس عندي أبتاع له من السوق ثم أبيعه قال ‏ "‏ لا تبع ما ليس عندك ‏"‏ ‏.‏ قال وفي الباب عن عبد الله بن عمر ‏.‏

হাকীম ইবনু হিযাম (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ

তিনি বলেন, আমি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর নিকট জানার জন্য বললাম, আমার নিকট এসে কোন লোক এমন জিনিস কিনতে চায় যা আমার নিকট নেই। আমি এভাবে বিক্রয় করতে পারি কি যে, তা বাজার হতে ক্রয় করে এনে তাকে দিব? তিনি বলেনঃ যা তোমার অধিকারে নেই তা তুমি বিক্রয় কর না। সহীহ্‌, ইবনু মা-জাহ (২১৮৭)

হাকীম ইবনু হিযাম (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ

তিনি বলেন, আমি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর নিকট জানার জন্য বললাম, আমার নিকট এসে কোন লোক এমন জিনিস কিনতে চায় যা আমার নিকট নেই। আমি এভাবে বিক্রয় করতে পারি কি যে, তা বাজার হতে ক্রয় করে এনে তাকে দিব? তিনি বলেনঃ যা তোমার অধিকারে নেই তা তুমি বিক্রয় কর না। সহীহ্‌, ইবনু মা-জাহ (২১৮৭)

حدثنا قتيبة، حدثنا هشيم، عن أبي بشر، عن يوسف بن ماهك، عن حكيم بن حزام، قال أتيت رسول الله صلى الله عليه وسلم فقلت يأتيني الرجل يسألني من البيع ما ليس عندي أبتاع له من السوق ثم أبيعه قال ‏ "‏ لا تبع ما ليس عندك ‏"‏ ‏.‏ قال وفي الباب عن عبد الله بن عمر ‏.‏


জামে' আত-তিরমিজি ১২৩৩

حدثنا قتيبة، حدثنا حماد بن زيد، عن أيوب، عن يوسف بن ماهك، عن حكيم بن حزام، قال نهاني رسول الله صلى الله عليه وسلم أن أبيع ما ليس عندي ‏.‏ قال أبو عيسى وهذا حديث حسن ‏.‏ قال إسحاق بن منصور قلت لأحمد ما معنى نهى عن سلف وبيع قال أن يكون يقرضه قرضا ثم يبايعه عليه بيعا يزداد عليه ويحتمل أن يكون يسلف إليه في شيء فيقول إن لم يتهيأ عندك فهو بيع عليك ‏.‏ قال إسحاق يعني ابن راهويه كما قال قلت لأحمد وعن بيع ما لم تضمن قال لا يكون عندي إلا في الطعام ما لم تقبض ‏.‏ قال إسحاق كما قال في كل ما يكال أو يوزن ‏.‏ قال أحمد إذا قال أبيعك هذا الثوب وعلى خياطته وقصارته فهذا من نحو شرطين في بيع وإذا قال أبيعكه وعلى خياطته فلا بأس به أو قال أبيعكه وعلى قصارته فلا بأس به إنما هو شرط واحد ‏.‏ قال إسحاق كما قال ‏.‏

হাকীম ইবনু হিযাম (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ

তিনি বলেন, আমার হাতে নেই এমনসব বস্তু বিক্রয় করতে রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) আমাকে নিষেধ করেছেন। সহীহ্‌, দেখুন পূর্বের হাদীস

হাকীম ইবনু হিযাম (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ

তিনি বলেন, আমার হাতে নেই এমনসব বস্তু বিক্রয় করতে রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) আমাকে নিষেধ করেছেন। সহীহ্‌, দেখুন পূর্বের হাদীস

حدثنا قتيبة، حدثنا حماد بن زيد، عن أيوب، عن يوسف بن ماهك، عن حكيم بن حزام، قال نهاني رسول الله صلى الله عليه وسلم أن أبيع ما ليس عندي ‏.‏ قال أبو عيسى وهذا حديث حسن ‏.‏ قال إسحاق بن منصور قلت لأحمد ما معنى نهى عن سلف وبيع قال أن يكون يقرضه قرضا ثم يبايعه عليه بيعا يزداد عليه ويحتمل أن يكون يسلف إليه في شيء فيقول إن لم يتهيأ عندك فهو بيع عليك ‏.‏ قال إسحاق يعني ابن راهويه كما قال قلت لأحمد وعن بيع ما لم تضمن قال لا يكون عندي إلا في الطعام ما لم تقبض ‏.‏ قال إسحاق كما قال في كل ما يكال أو يوزن ‏.‏ قال أحمد إذا قال أبيعك هذا الثوب وعلى خياطته وقصارته فهذا من نحو شرطين في بيع وإذا قال أبيعكه وعلى خياطته فلا بأس به أو قال أبيعكه وعلى قصارته فلا بأس به إنما هو شرط واحد ‏.‏ قال إسحاق كما قال ‏.‏


জামে' আত-তিরমিজি ১২৩৪

حدثنا أحمد بن منيع، حدثنا إسماعيل بن إبراهيم، حدثنا أيوب، حدثنا عمرو بن شعيب، قال حدثني أبي، عن أبيه، حتى ذكر عبد الله بن عمرو أن رسول الله صلى الله عليه وسلم قال ‏ "‏ لا يحل سلف وبيع ولا شرطان في بيع ولا ربح ما لم يضمن ولا بيع ما ليس عندك ‏"‏ ‏.‏ قال أبو عيسى وهذا حديث حسن صحيح ‏.‏ قال أبو عيسى حديث حكيم بن حزام حديث حسن قد روي عنه من غير وجه ‏.‏ روى أيوب السختياني وأبو بشر عن يوسف بن ماهك عن حكيم بن حزام ‏.‏ قال أبو عيسى وروى هذا الحديث عوف وهشام بن حسان عن ابن سيرين عن حكيم بن حزام عن النبي صلى الله عليه وسلم ‏.‏ وهذا حديث مرسل إنما رواه ابن سيرين عن أيوب السختياني عن يوسف بن ماهك عن حكيم بن حزام ‏.‏

আবদুল্লাহ ইবনু আমর (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ

রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেনঃ ঋণ ও বিক্রয় একত্রে জায়িয নয় এবং দুই প্রকারের শর্তও বিক্রয়ের ক্ষেত্রে জুড়ে দেয়া জায়িয নয়, মুনাফা গ্রহণও জায়িয নয় যতক্ষণনা লোকসানের দায়িত্ব না নেয়া হয়, তোমার আয়ত্তে নেই এমন বস্তু বিক্রয় করাও জায়িয নয়। হাসান সহীহ্‌, ইবনু মা-জাহ (২১৮৮)

আবদুল্লাহ ইবনু আমর (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ

রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেনঃ ঋণ ও বিক্রয় একত্রে জায়িয নয় এবং দুই প্রকারের শর্তও বিক্রয়ের ক্ষেত্রে জুড়ে দেয়া জায়িয নয়, মুনাফা গ্রহণও জায়িয নয় যতক্ষণনা লোকসানের দায়িত্ব না নেয়া হয়, তোমার আয়ত্তে নেই এমন বস্তু বিক্রয় করাও জায়িয নয়। হাসান সহীহ্‌, ইবনু মা-জাহ (২১৮৮)

حدثنا أحمد بن منيع، حدثنا إسماعيل بن إبراهيم، حدثنا أيوب، حدثنا عمرو بن شعيب، قال حدثني أبي، عن أبيه، حتى ذكر عبد الله بن عمرو أن رسول الله صلى الله عليه وسلم قال ‏ "‏ لا يحل سلف وبيع ولا شرطان في بيع ولا ربح ما لم يضمن ولا بيع ما ليس عندك ‏"‏ ‏.‏ قال أبو عيسى وهذا حديث حسن صحيح ‏.‏ قال أبو عيسى حديث حكيم بن حزام حديث حسن قد روي عنه من غير وجه ‏.‏ روى أيوب السختياني وأبو بشر عن يوسف بن ماهك عن حكيم بن حزام ‏.‏ قال أبو عيسى وروى هذا الحديث عوف وهشام بن حسان عن ابن سيرين عن حكيم بن حزام عن النبي صلى الله عليه وسلم ‏.‏ وهذا حديث مرسل إنما رواه ابن سيرين عن أيوب السختياني عن يوسف بن ماهك عن حكيم بن حزام ‏.‏


জামে' আত-তিরমিজি ১২৩৪

حدثنا أحمد بن منيع، حدثنا إسماعيل بن إبراهيم، حدثنا أيوب، حدثنا عمرو بن شعيب، قال حدثني أبي، عن أبيه، حتى ذكر عبد الله بن عمرو أن رسول الله صلى الله عليه وسلم قال ‏ "‏ لا يحل سلف وبيع ولا شرطان في بيع ولا ربح ما لم يضمن ولا بيع ما ليس عندك ‏"‏ ‏.‏ قال أبو عيسى وهذا حديث حسن صحيح ‏.‏ قال أبو عيسى حديث حكيم بن حزام حديث حسن قد روي عنه من غير وجه ‏.‏ روى أيوب السختياني وأبو بشر عن يوسف بن ماهك عن حكيم بن حزام ‏.‏ قال أبو عيسى وروى هذا الحديث عوف وهشام بن حسان عن ابن سيرين عن حكيم بن حزام عن النبي صلى الله عليه وسلم ‏.‏ وهذا حديث مرسل إنما رواه ابن سيرين عن أيوب السختياني عن يوسف بن ماهك عن حكيم بن حزام ‏.‏

আবদুল্লাহ ইবনু আমর (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ

রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেনঃ ঋণ ও বিক্রয় একত্রে জায়িয নয় এবং দুই প্রকারের শর্তও বিক্রয়ের ক্ষেত্রে জুড়ে দেয়া জায়িয নয়, মুনাফা গ্রহণও জায়িয নয় যতক্ষণনা লোকসানের দায়িত্ব না নেয়া হয়, তোমার আয়ত্তে নেই এমন বস্তু বিক্রয় করাও জায়িয নয়। হাসান সহীহ্‌, ইবনু মা-জাহ (২১৮৮)

আবদুল্লাহ ইবনু আমর (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ

রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেনঃ ঋণ ও বিক্রয় একত্রে জায়িয নয় এবং দুই প্রকারের শর্তও বিক্রয়ের ক্ষেত্রে জুড়ে দেয়া জায়িয নয়, মুনাফা গ্রহণও জায়িয নয় যতক্ষণনা লোকসানের দায়িত্ব না নেয়া হয়, তোমার আয়ত্তে নেই এমন বস্তু বিক্রয় করাও জায়িয নয়। হাসান সহীহ্‌, ইবনু মা-জাহ (২১৮৮)

حدثنا أحمد بن منيع، حدثنا إسماعيل بن إبراهيم، حدثنا أيوب، حدثنا عمرو بن شعيب، قال حدثني أبي، عن أبيه، حتى ذكر عبد الله بن عمرو أن رسول الله صلى الله عليه وسلم قال ‏ "‏ لا يحل سلف وبيع ولا شرطان في بيع ولا ربح ما لم يضمن ولا بيع ما ليس عندك ‏"‏ ‏.‏ قال أبو عيسى وهذا حديث حسن صحيح ‏.‏ قال أبو عيسى حديث حكيم بن حزام حديث حسن قد روي عنه من غير وجه ‏.‏ روى أيوب السختياني وأبو بشر عن يوسف بن ماهك عن حكيم بن حزام ‏.‏ قال أبو عيسى وروى هذا الحديث عوف وهشام بن حسان عن ابن سيرين عن حكيم بن حزام عن النبي صلى الله عليه وسلم ‏.‏ وهذا حديث مرسل إنما رواه ابن سيرين عن أيوب السختياني عن يوسف بن ماهك عن حكيم بن حزام ‏.‏


জামে' আত-তিরমিজি ১২৩৪

حدثنا أحمد بن منيع، حدثنا إسماعيل بن إبراهيم، حدثنا أيوب، حدثنا عمرو بن شعيب، قال حدثني أبي، عن أبيه، حتى ذكر عبد الله بن عمرو أن رسول الله صلى الله عليه وسلم قال ‏ "‏ لا يحل سلف وبيع ولا شرطان في بيع ولا ربح ما لم يضمن ولا بيع ما ليس عندك ‏"‏ ‏.‏ قال أبو عيسى وهذا حديث حسن صحيح ‏.‏ قال أبو عيسى حديث حكيم بن حزام حديث حسن قد روي عنه من غير وجه ‏.‏ روى أيوب السختياني وأبو بشر عن يوسف بن ماهك عن حكيم بن حزام ‏.‏ قال أبو عيسى وروى هذا الحديث عوف وهشام بن حسان عن ابن سيرين عن حكيم بن حزام عن النبي صلى الله عليه وسلم ‏.‏ وهذا حديث مرسل إنما رواه ابن سيرين عن أيوب السختياني عن يوسف بن ماهك عن حكيم بن حزام ‏.‏

আবদুল্লাহ ইবনু আমর (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ

রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেনঃ ঋণ ও বিক্রয় একত্রে জায়িয নয় এবং দুই প্রকারের শর্তও বিক্রয়ের ক্ষেত্রে জুড়ে দেয়া জায়িয নয়, মুনাফা গ্রহণও জায়িয নয় যতক্ষণনা লোকসানের দায়িত্ব না নেয়া হয়, তোমার আয়ত্তে নেই এমন বস্তু বিক্রয় করাও জায়িয নয়। হাসান সহীহ্‌, ইবনু মা-জাহ (২১৮৮)

আবদুল্লাহ ইবনু আমর (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ

রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেনঃ ঋণ ও বিক্রয় একত্রে জায়িয নয় এবং দুই প্রকারের শর্তও বিক্রয়ের ক্ষেত্রে জুড়ে দেয়া জায়িয নয়, মুনাফা গ্রহণও জায়িয নয় যতক্ষণনা লোকসানের দায়িত্ব না নেয়া হয়, তোমার আয়ত্তে নেই এমন বস্তু বিক্রয় করাও জায়িয নয়। হাসান সহীহ্‌, ইবনু মা-জাহ (২১৮৮)

حدثنا أحمد بن منيع، حدثنا إسماعيل بن إبراهيم، حدثنا أيوب، حدثنا عمرو بن شعيب، قال حدثني أبي، عن أبيه، حتى ذكر عبد الله بن عمرو أن رسول الله صلى الله عليه وسلم قال ‏ "‏ لا يحل سلف وبيع ولا شرطان في بيع ولا ربح ما لم يضمن ولا بيع ما ليس عندك ‏"‏ ‏.‏ قال أبو عيسى وهذا حديث حسن صحيح ‏.‏ قال أبو عيسى حديث حكيم بن حزام حديث حسن قد روي عنه من غير وجه ‏.‏ روى أيوب السختياني وأبو بشر عن يوسف بن ماهك عن حكيم بن حزام ‏.‏ قال أبو عيسى وروى هذا الحديث عوف وهشام بن حسان عن ابن سيرين عن حكيم بن حزام عن النبي صلى الله عليه وسلم ‏.‏ وهذا حديث مرسل إنما رواه ابن سيرين عن أيوب السختياني عن يوسف بن ماهك عن حكيم بن حزام ‏.‏


জামে' আত-তিরমিজি ১২৩৫

حدثنا الحسن بن علي الخلال، وعبدة بن عبد الله الخزاعي البصري أبو سهل، وغير، واحد، قالوا حدثنا عبد الصمد بن عبد الوارث، عن يزيد بن إبراهيم، عن ابن سيرين، عن أيوب، عن يوسف بن ماهك، عن حكيم بن حزام، قال نهاني رسول الله صلى الله عليه وسلم أن أبيع ما ليس عندي ‏.‏ قال أبو عيسى وروى وكيع هذا الحديث عن يزيد بن إبراهيم عن ابن سيرين عن أيوب عن حكيم بن حزام ‏.‏ ولم يذكر فيه عن يوسف بن ماهك ورواية عبد الصمد أصح ‏.‏ وقد روى يحيى بن أبي كثير هذا الحديث عن يعلى بن حكيم عن يوسف بن ماهك عن عبد الله بن عصمة عن حكيم بن حزام عن النبي صلى الله عليه وسلم ‏.‏ والعمل على هذا الحديث عند أكثر أهل العلم كرهوا أن يبيع الرجل ما ليس عنده ‏.‏

হাকীম ইবনু হিযাম (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ

তিনি বলেন, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) আমাকে নিষেধ করেছেন আমার কাছে নেই এমন জিনিস বিক্রয় করতে। সহীহ্‌, দেখুন হাদীস নং (১২৩২, ১২৩৩)

হাকীম ইবনু হিযাম (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ

তিনি বলেন, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) আমাকে নিষেধ করেছেন আমার কাছে নেই এমন জিনিস বিক্রয় করতে। সহীহ্‌, দেখুন হাদীস নং (১২৩২, ১২৩৩)

حدثنا الحسن بن علي الخلال، وعبدة بن عبد الله الخزاعي البصري أبو سهل، وغير، واحد، قالوا حدثنا عبد الصمد بن عبد الوارث، عن يزيد بن إبراهيم، عن ابن سيرين، عن أيوب، عن يوسف بن ماهك، عن حكيم بن حزام، قال نهاني رسول الله صلى الله عليه وسلم أن أبيع ما ليس عندي ‏.‏ قال أبو عيسى وروى وكيع هذا الحديث عن يزيد بن إبراهيم عن ابن سيرين عن أيوب عن حكيم بن حزام ‏.‏ ولم يذكر فيه عن يوسف بن ماهك ورواية عبد الصمد أصح ‏.‏ وقد روى يحيى بن أبي كثير هذا الحديث عن يعلى بن حكيم عن يوسف بن ماهك عن عبد الله بن عصمة عن حكيم بن حزام عن النبي صلى الله عليه وسلم ‏.‏ والعمل على هذا الحديث عند أكثر أهل العلم كرهوا أن يبيع الرجل ما ليس عنده ‏.‏


জামে' আত-তিরমিজি > ‘ওয়ালা’র স্বত্ব বিক্রয় অথবা হেবা করা মাকরূহ

জামে' আত-তিরমিজি ১২৩৬

حدثنا محمد بن بشار، حدثنا عبد الرحمن بن مهدي، قال حدثنا سفيان، وشعبة، عن عبد الله بن دينار، عن ابن عمر، أن رسول الله صلى الله عليه وسلم نهى عن بيع الولاء وهبته ‏.‏ قال أبو عيسى هذا حديث حسن صحيح لا نعرفه إلا من حديث عبد الله بن دينار عن ابن عمر ‏.‏ والعمل على هذا الحديث عند أهل العلم ‏.‏ وقد روى يحيى بن سليم هذا الحديث عن عبيد الله بن عمر عن نافع عن ابن عمر عن النبي صلى الله عليه وسلم أنه نهى عن بيع الولاء وهبته ‏.‏ وهو وهم وهم فيه يحيى بن سليم ‏.‏ وروى عبد الوهاب الثقفي وعبد الله بن نمير وغير واحد عن عبيد الله بن عمر عن عبد الله بن دينار عن ابن عمر عن النبي صلى الله عليه وسلم ‏.‏ وهذا أصح من حديث يحيى بن سليم ‏.‏

ইবনু উমার (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ

‘ওয়ালা’ স্বত্ব বিক্রয় করতে অথবা তা দান করতে রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) নিষেধ করেছেন। সহীহ্‌, ইবনু মা-জাহ (২৭৪৭,২৭৪৮)

ইবনু উমার (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ

‘ওয়ালা’ স্বত্ব বিক্রয় করতে অথবা তা দান করতে রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) নিষেধ করেছেন। সহীহ্‌, ইবনু মা-জাহ (২৭৪৭,২৭৪৮)

حدثنا محمد بن بشار، حدثنا عبد الرحمن بن مهدي، قال حدثنا سفيان، وشعبة، عن عبد الله بن دينار، عن ابن عمر، أن رسول الله صلى الله عليه وسلم نهى عن بيع الولاء وهبته ‏.‏ قال أبو عيسى هذا حديث حسن صحيح لا نعرفه إلا من حديث عبد الله بن دينار عن ابن عمر ‏.‏ والعمل على هذا الحديث عند أهل العلم ‏.‏ وقد روى يحيى بن سليم هذا الحديث عن عبيد الله بن عمر عن نافع عن ابن عمر عن النبي صلى الله عليه وسلم أنه نهى عن بيع الولاء وهبته ‏.‏ وهو وهم وهم فيه يحيى بن سليم ‏.‏ وروى عبد الوهاب الثقفي وعبد الله بن نمير وغير واحد عن عبيد الله بن عمر عن عبد الله بن دينار عن ابن عمر عن النبي صلى الله عليه وسلم ‏.‏ وهذا أصح من حديث يحيى بن سليم ‏.‏


জামে' আত-তিরমিজি > পশুর বিনিময়ে পশু ধারে বিক্রয় করা নিষেধ

জামে' আত-তিরমিজি ১২৩৮

حدثنا أبو عمار الحسين بن حريث، حدثنا عبد الله بن نمير، عن الحجاج، وهو ابن أرطاة عن أبي الزبير، عن جابر، قال قال رسول الله صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ الحيوان اثنان بواحد لا يصلح نسيئا ولا بأس به يدا بيد ‏"‏ ‏.‏ قال أبو عيسى هذا حديث حسن صحيح ‏.‏

জাবির (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ

তিনি বলেন, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেনঃ দু’টি পশুর বদলে একটি পশু ধারে (করজে) বিক্রয় করা জায়িয নয়, কিন্তু উপস্থিত (নগদ) লেনদেন হলে কোন সমস্যা নেই। সহীহ্‌, ইবনু মা-জাহ (২২৭১)

জাবির (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ

তিনি বলেন, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেনঃ দু’টি পশুর বদলে একটি পশু ধারে (করজে) বিক্রয় করা জায়িয নয়, কিন্তু উপস্থিত (নগদ) লেনদেন হলে কোন সমস্যা নেই। সহীহ্‌, ইবনু মা-জাহ (২২৭১)

حدثنا أبو عمار الحسين بن حريث، حدثنا عبد الله بن نمير، عن الحجاج، وهو ابن أرطاة عن أبي الزبير، عن جابر، قال قال رسول الله صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ الحيوان اثنان بواحد لا يصلح نسيئا ولا بأس به يدا بيد ‏"‏ ‏.‏ قال أبو عيسى هذا حديث حسن صحيح ‏.‏


জামে' আত-তিরমিজি ১২৩৭

حدثنا أبو موسى، محمد بن مثنى حدثنا عبد الرحمن بن مهدي، عن حماد بن سلمة، عن قتادة، عن الحسن، عن سمرة، أن النبي صلى الله عليه وسلم نهى عن بيع الحيوان بالحيوان نسيئة ‏.‏ قال وفي الباب عن ابن عباس وجابر وابن عمر ‏.‏ قال أبو عيسى حديث سمرة حديث حسن صحيح ‏.‏ وسماع الحسن من سمرة صحيح هكذا قال علي بن المديني وغيره ‏.‏ والعمل على هذا عند أكثر أهل العلم من أصحاب النبي صلى الله عليه وسلم وغيرهم في بيع الحيوان بالحيوان نسيئة وهو قول سفيان الثوري وأهل الكوفة وبه يقول أحمد ‏.‏ وقد رخص بعض أهل العلم من أصحاب النبي صلى الله عليه وسلم وغيرهم في بيع الحيوان بالحيوان نسيئة وهو قول الشافعي وإسحاق ‏.‏

সামুরা (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ

পশুর বিনিময়ে পশু ধারে (করজে) বিক্রয় করতে রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) নিষেধ করেছেন। সহীহ্‌, ইবনু মা-জাহ (২২৭০)

সামুরা (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ

পশুর বিনিময়ে পশু ধারে (করজে) বিক্রয় করতে রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) নিষেধ করেছেন। সহীহ্‌, ইবনু মা-জাহ (২২৭০)

حدثنا أبو موسى، محمد بن مثنى حدثنا عبد الرحمن بن مهدي، عن حماد بن سلمة، عن قتادة، عن الحسن، عن سمرة، أن النبي صلى الله عليه وسلم نهى عن بيع الحيوان بالحيوان نسيئة ‏.‏ قال وفي الباب عن ابن عباس وجابر وابن عمر ‏.‏ قال أبو عيسى حديث سمرة حديث حسن صحيح ‏.‏ وسماع الحسن من سمرة صحيح هكذا قال علي بن المديني وغيره ‏.‏ والعمل على هذا عند أكثر أهل العلم من أصحاب النبي صلى الله عليه وسلم وغيرهم في بيع الحيوان بالحيوان نسيئة وهو قول سفيان الثوري وأهل الكوفة وبه يقول أحمد ‏.‏ وقد رخص بعض أهل العلم من أصحاب النبي صلى الله عليه وسلم وغيرهم في بيع الحيوان بالحيوان نسيئة وهو قول الشافعي وإسحاق ‏.‏


জামে' আত-তিরমিজি > দু’টি গোলামের বিনিময়ে একটি গোলাম ক্রয়-বিক্রয় করা

জামে' আত-তিরমিজি ১২৩৯

حدثنا قتيبة، أخبرنا الليث، عن أبي الزبير، عن جابر، قال جاء عبد فبايع النبي صلى الله عليه وسلم على الهجرة ولا يشعر النبي صلى الله عليه وسلم أنه عبد فجاء سيده يريده فقال النبي صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ بعنيه ‏"‏ ‏.‏ فاشتراه بعبدين أسودين ثم لم يبايع أحدا بعد حتى يسأله أعبد هو قال وفي الباب عن أنس ‏.‏ قال أبو عيسى حديث جابر حديث حسن صحيح ‏.‏ والعمل على هذا عند أهل العلم أنه لا بأس بعبد بعبدين يدا بيد ‏.‏ واختلفوا فيه إذا كان نسيئا ‏.‏

জাবির (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ

তিনি বলেন, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম)-এর নিকট একজন ক্রিতদাস এসে হিজরাতের উদ্দেশ্যে তাঁর নিকট শপথ করে। সে যে ক্রীতদাস রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) সেটা জানতেন না। তার মালিক এসে উপস্থিত হল তাকে ফেরত নেয়ার জন্য। রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেনঃ তুমি একে আমার নিকট বিক্রয় করে দাও। তিনি তাকে কিনলেন দুইটি হাবশী গোলামের বিনিময়ে। এরপর হতে কারো বাইআত গ্রহণের পূর্বে তিনি প্রশ্ন করে নিতেন, সে ক্রীতদাস কি না। সহীহ্‌, বেচা-কেনার হাদীস, মুসলিম

জাবির (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ

তিনি বলেন, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম)-এর নিকট একজন ক্রিতদাস এসে হিজরাতের উদ্দেশ্যে তাঁর নিকট শপথ করে। সে যে ক্রীতদাস রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) সেটা জানতেন না। তার মালিক এসে উপস্থিত হল তাকে ফেরত নেয়ার জন্য। রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেনঃ তুমি একে আমার নিকট বিক্রয় করে দাও। তিনি তাকে কিনলেন দুইটি হাবশী গোলামের বিনিময়ে। এরপর হতে কারো বাইআত গ্রহণের পূর্বে তিনি প্রশ্ন করে নিতেন, সে ক্রীতদাস কি না। সহীহ্‌, বেচা-কেনার হাদীস, মুসলিম

حدثنا قتيبة، أخبرنا الليث، عن أبي الزبير، عن جابر، قال جاء عبد فبايع النبي صلى الله عليه وسلم على الهجرة ولا يشعر النبي صلى الله عليه وسلم أنه عبد فجاء سيده يريده فقال النبي صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ بعنيه ‏"‏ ‏.‏ فاشتراه بعبدين أسودين ثم لم يبايع أحدا بعد حتى يسأله أعبد هو قال وفي الباب عن أنس ‏.‏ قال أبو عيسى حديث جابر حديث حسن صحيح ‏.‏ والعمل على هذا عند أهل العلم أنه لا بأس بعبد بعبدين يدا بيد ‏.‏ واختلفوا فيه إذا كان نسيئا ‏.‏


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