জামে' আত-তিরমিজি > জোরপূর্বক ইয়াতীম মেয়েকে বিয়ে দেওয়া

জামে' আত-তিরমিজি ১১০৯

حدثنا قتيبة، حدثنا عبد العزيز بن محمد، عن محمد بن عمرو، عن أبي سلمة، عن أبي هريرة، قال قال رسول الله صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ اليتيمة تستأمر في نفسها فإن صمتت فهو إذنها وإن أبت فلا جواز عليها ‏"‏ ‏.‏ قال وفي الباب عن أبي موسى وابن عمر وعائشة ‏.‏ قال أبو عيسى حديث أبي هريرة حديث حسن ‏.‏ واختلف أهل العلم في تزويج اليتيمة فرأى بعض أهل العلم أن اليتيمة إذا زوجت فالنكاح موقوف حتى تبلغ فإذا بلغت فلها الخيار في إجازة النكاح أو فسخه ‏.‏ وهو قول بعض التابعين وغيرهم ‏.‏ وقال بعضهم لا يجوز نكاح اليتيمة حتى تبلغ ‏.‏ ولا يجوز الخيار في النكاح ‏.‏ وهو قول سفيان الثوري والشافعي وغيرهما من أهل العلم ‏.‏ وقال أحمد وإسحاق إذا بلغت اليتيمة تسع سنين فزوجت فرضيت فالنكاح جائز ولا خيار لها إذا أدركت ‏.‏ واحتجا بحديث عائشة أن النبي صلى الله عليه وسلم بنى بها وهي بنت تسع سنين ‏.‏ وقد قالت عائشة إذا بلغت الجارية تسع سنين فهي امرأة ‏.‏

আবূ হুরাইরা (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ

তিনি বলেন, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেনঃ ইয়াতীম কুমারীর (বিয়ের) ব্যাপারে তার নিজের মত নিতে হবে। সে চুপ থাকলে তবে এটাই তার সম্মতিগণ্য হয়ে যাবে। সে সরাসরি অস্বীকার করলে তবে তার উপর জোর খাটানো যাবে না। হাসান সহীহ, ইরওয়া (১৮৩৪), সহীহ আবু দাউদ (১৮২৫)

আবূ হুরাইরা (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ

তিনি বলেন, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেনঃ ইয়াতীম কুমারীর (বিয়ের) ব্যাপারে তার নিজের মত নিতে হবে। সে চুপ থাকলে তবে এটাই তার সম্মতিগণ্য হয়ে যাবে। সে সরাসরি অস্বীকার করলে তবে তার উপর জোর খাটানো যাবে না। হাসান সহীহ, ইরওয়া (১৮৩৪), সহীহ আবু দাউদ (১৮২৫)

حدثنا قتيبة، حدثنا عبد العزيز بن محمد، عن محمد بن عمرو، عن أبي سلمة، عن أبي هريرة، قال قال رسول الله صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ اليتيمة تستأمر في نفسها فإن صمتت فهو إذنها وإن أبت فلا جواز عليها ‏"‏ ‏.‏ قال وفي الباب عن أبي موسى وابن عمر وعائشة ‏.‏ قال أبو عيسى حديث أبي هريرة حديث حسن ‏.‏ واختلف أهل العلم في تزويج اليتيمة فرأى بعض أهل العلم أن اليتيمة إذا زوجت فالنكاح موقوف حتى تبلغ فإذا بلغت فلها الخيار في إجازة النكاح أو فسخه ‏.‏ وهو قول بعض التابعين وغيرهم ‏.‏ وقال بعضهم لا يجوز نكاح اليتيمة حتى تبلغ ‏.‏ ولا يجوز الخيار في النكاح ‏.‏ وهو قول سفيان الثوري والشافعي وغيرهما من أهل العلم ‏.‏ وقال أحمد وإسحاق إذا بلغت اليتيمة تسع سنين فزوجت فرضيت فالنكاح جائز ولا خيار لها إذا أدركت ‏.‏ واحتجا بحديث عائشة أن النبي صلى الله عليه وسلم بنى بها وهي بنت تسع سنين ‏.‏ وقد قالت عائشة إذا بلغت الجارية تسع سنين فهي امرأة ‏.‏


জামে' আত-তিরমিজি ১১০৯

حدثنا قتيبة، حدثنا عبد العزيز بن محمد، عن محمد بن عمرو، عن أبي سلمة، عن أبي هريرة، قال قال رسول الله صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ اليتيمة تستأمر في نفسها فإن صمتت فهو إذنها وإن أبت فلا جواز عليها ‏"‏ ‏.‏ قال وفي الباب عن أبي موسى وابن عمر وعائشة ‏.‏ قال أبو عيسى حديث أبي هريرة حديث حسن ‏.‏ واختلف أهل العلم في تزويج اليتيمة فرأى بعض أهل العلم أن اليتيمة إذا زوجت فالنكاح موقوف حتى تبلغ فإذا بلغت فلها الخيار في إجازة النكاح أو فسخه ‏.‏ وهو قول بعض التابعين وغيرهم ‏.‏ وقال بعضهم لا يجوز نكاح اليتيمة حتى تبلغ ‏.‏ ولا يجوز الخيار في النكاح ‏.‏ وهو قول سفيان الثوري والشافعي وغيرهما من أهل العلم ‏.‏ وقال أحمد وإسحاق إذا بلغت اليتيمة تسع سنين فزوجت فرضيت فالنكاح جائز ولا خيار لها إذا أدركت ‏.‏ واحتجا بحديث عائشة أن النبي صلى الله عليه وسلم بنى بها وهي بنت تسع سنين ‏.‏ وقد قالت عائشة إذا بلغت الجارية تسع سنين فهي امرأة ‏.‏

আবূ হুরাইরা (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ

তিনি বলেন, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেনঃ ইয়াতীম কুমারীর (বিয়ের) ব্যাপারে তার নিজের মত নিতে হবে। সে চুপ থাকলে তবে এটাই তার সম্মতিগণ্য হয়ে যাবে। সে সরাসরি অস্বীকার করলে তবে তার উপর জোর খাটানো যাবে না। হাসান সহীহ, ইরওয়া (১৮৩৪), সহীহ আবু দাউদ (১৮২৫)

আবূ হুরাইরা (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ

তিনি বলেন, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেনঃ ইয়াতীম কুমারীর (বিয়ের) ব্যাপারে তার নিজের মত নিতে হবে। সে চুপ থাকলে তবে এটাই তার সম্মতিগণ্য হয়ে যাবে। সে সরাসরি অস্বীকার করলে তবে তার উপর জোর খাটানো যাবে না। হাসান সহীহ, ইরওয়া (১৮৩৪), সহীহ আবু দাউদ (১৮২৫)

حدثنا قتيبة، حدثنا عبد العزيز بن محمد، عن محمد بن عمرو، عن أبي سلمة، عن أبي هريرة، قال قال رسول الله صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ اليتيمة تستأمر في نفسها فإن صمتت فهو إذنها وإن أبت فلا جواز عليها ‏"‏ ‏.‏ قال وفي الباب عن أبي موسى وابن عمر وعائشة ‏.‏ قال أبو عيسى حديث أبي هريرة حديث حسن ‏.‏ واختلف أهل العلم في تزويج اليتيمة فرأى بعض أهل العلم أن اليتيمة إذا زوجت فالنكاح موقوف حتى تبلغ فإذا بلغت فلها الخيار في إجازة النكاح أو فسخه ‏.‏ وهو قول بعض التابعين وغيرهم ‏.‏ وقال بعضهم لا يجوز نكاح اليتيمة حتى تبلغ ‏.‏ ولا يجوز الخيار في النكاح ‏.‏ وهو قول سفيان الثوري والشافعي وغيرهما من أهل العلم ‏.‏ وقال أحمد وإسحاق إذا بلغت اليتيمة تسع سنين فزوجت فرضيت فالنكاح جائز ولا خيار لها إذا أدركت ‏.‏ واحتجا بحديث عائشة أن النبي صلى الله عليه وسلم بنى بها وهي بنت تسع سنين ‏.‏ وقد قالت عائشة إذا بلغت الجارية تسع سنين فهي امرأة ‏.‏


জামে' আত-তিরমিজি ১১০৯

حدثنا قتيبة، حدثنا عبد العزيز بن محمد، عن محمد بن عمرو، عن أبي سلمة، عن أبي هريرة، قال قال رسول الله صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ اليتيمة تستأمر في نفسها فإن صمتت فهو إذنها وإن أبت فلا جواز عليها ‏"‏ ‏.‏ قال وفي الباب عن أبي موسى وابن عمر وعائشة ‏.‏ قال أبو عيسى حديث أبي هريرة حديث حسن ‏.‏ واختلف أهل العلم في تزويج اليتيمة فرأى بعض أهل العلم أن اليتيمة إذا زوجت فالنكاح موقوف حتى تبلغ فإذا بلغت فلها الخيار في إجازة النكاح أو فسخه ‏.‏ وهو قول بعض التابعين وغيرهم ‏.‏ وقال بعضهم لا يجوز نكاح اليتيمة حتى تبلغ ‏.‏ ولا يجوز الخيار في النكاح ‏.‏ وهو قول سفيان الثوري والشافعي وغيرهما من أهل العلم ‏.‏ وقال أحمد وإسحاق إذا بلغت اليتيمة تسع سنين فزوجت فرضيت فالنكاح جائز ولا خيار لها إذا أدركت ‏.‏ واحتجا بحديث عائشة أن النبي صلى الله عليه وسلم بنى بها وهي بنت تسع سنين ‏.‏ وقد قالت عائشة إذا بلغت الجارية تسع سنين فهي امرأة ‏.‏

আবূ হুরাইরা (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ

তিনি বলেন, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেনঃ ইয়াতীম কুমারীর (বিয়ের) ব্যাপারে তার নিজের মত নিতে হবে। সে চুপ থাকলে তবে এটাই তার সম্মতিগণ্য হয়ে যাবে। সে সরাসরি অস্বীকার করলে তবে তার উপর জোর খাটানো যাবে না। হাসান সহীহ, ইরওয়া (১৮৩৪), সহীহ আবু দাউদ (১৮২৫)

আবূ হুরাইরা (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ

তিনি বলেন, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেনঃ ইয়াতীম কুমারীর (বিয়ের) ব্যাপারে তার নিজের মত নিতে হবে। সে চুপ থাকলে তবে এটাই তার সম্মতিগণ্য হয়ে যাবে। সে সরাসরি অস্বীকার করলে তবে তার উপর জোর খাটানো যাবে না। হাসান সহীহ, ইরওয়া (১৮৩৪), সহীহ আবু দাউদ (১৮২৫)

حدثنا قتيبة، حدثنا عبد العزيز بن محمد، عن محمد بن عمرو، عن أبي سلمة، عن أبي هريرة، قال قال رسول الله صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ اليتيمة تستأمر في نفسها فإن صمتت فهو إذنها وإن أبت فلا جواز عليها ‏"‏ ‏.‏ قال وفي الباب عن أبي موسى وابن عمر وعائشة ‏.‏ قال أبو عيسى حديث أبي هريرة حديث حسن ‏.‏ واختلف أهل العلم في تزويج اليتيمة فرأى بعض أهل العلم أن اليتيمة إذا زوجت فالنكاح موقوف حتى تبلغ فإذا بلغت فلها الخيار في إجازة النكاح أو فسخه ‏.‏ وهو قول بعض التابعين وغيرهم ‏.‏ وقال بعضهم لا يجوز نكاح اليتيمة حتى تبلغ ‏.‏ ولا يجوز الخيار في النكاح ‏.‏ وهو قول سفيان الثوري والشافعي وغيرهما من أهل العلم ‏.‏ وقال أحمد وإسحاق إذا بلغت اليتيمة تسع سنين فزوجت فرضيت فالنكاح جائز ولا خيار لها إذا أدركت ‏.‏ واحتجا بحديث عائشة أن النبي صلى الله عليه وسلم بنى بها وهي بنت تسع سنين ‏.‏ وقد قالت عائشة إذا بلغت الجارية تسع سنين فهي امرأة ‏.‏


জামে' আত-তিরমিজি > দুই অভিভাবক (পৃথকভাবে) বিয়ে দিলে

জামে' আত-তিরমিজি ১১১০

حدثنا قتيبة، حدثنا غندر، حدثنا سعيد بن أبي عروبة، عن قتادة، عن الحسن، عن سمرة بن جندب، أن رسول الله صلى الله عليه وسلم قال ‏ "‏ أيما امرأة زوجها وليان فهي للأول منهما ومن باع بيعا من رجلين فهو للأول منهما ‏"‏ ‏.‏ قال أبو عيسى هذا حديث حسن ‏.‏ والعمل على هذا عند أهل العلم لا نعلم بينهم في ذلك اختلافا إذا زوج أحد الوليين قبل الآخر فنكاح الأول جائز ونكاح الآخر مفسوخ وإذا زوجا جميعا فنكاحهما جميعا مفسوخ ‏.‏ وهو قول الثوري وأحمد وإسحاق ‏.‏

সামুরা ইবনু জুনদুব (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ

রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেনঃ (সম-পর্যায়ের) দুইজন অভিভাবক কোন মেয়েকে (ভিন্ন দুই ব্যক্তির নিকট) বিয়ে দিলে প্রথম জনের বিয়ে বহাল হবে। কোন ব্যক্তি (একই মাল) দু’জন খরিদ্দারের নিকট বিক্রয় করলে তা প্রথম খরিদ্দারই পাবে। যঈফ, ইরওয়া (১৮৫৩) বেচা কেনার হাদীস।

সামুরা ইবনু জুনদুব (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ

রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেনঃ (সম-পর্যায়ের) দুইজন অভিভাবক কোন মেয়েকে (ভিন্ন দুই ব্যক্তির নিকট) বিয়ে দিলে প্রথম জনের বিয়ে বহাল হবে। কোন ব্যক্তি (একই মাল) দু’জন খরিদ্দারের নিকট বিক্রয় করলে তা প্রথম খরিদ্দারই পাবে। যঈফ, ইরওয়া (১৮৫৩) বেচা কেনার হাদীস।

حدثنا قتيبة، حدثنا غندر، حدثنا سعيد بن أبي عروبة، عن قتادة، عن الحسن، عن سمرة بن جندب، أن رسول الله صلى الله عليه وسلم قال ‏ "‏ أيما امرأة زوجها وليان فهي للأول منهما ومن باع بيعا من رجلين فهو للأول منهما ‏"‏ ‏.‏ قال أبو عيسى هذا حديث حسن ‏.‏ والعمل على هذا عند أهل العلم لا نعلم بينهم في ذلك اختلافا إذا زوج أحد الوليين قبل الآخر فنكاح الأول جائز ونكاح الآخر مفسوخ وإذا زوجا جميعا فنكاحهما جميعا مفسوخ ‏.‏ وهو قول الثوري وأحمد وإسحاق ‏.‏


জামে' আত-তিরমিজি > মনিবের বিনা অনুমতিতে গোলামের বিয়ে

জামে' আত-তিরমিজি ১১১২

حدثنا سعيد بن يحيى بن سعيد الأموي، حدثنا أبي، حدثنا ابن جريج، عن عبد الله بن محمد بن عقيل، عن جابر، عن النبي صلى الله عليه وسلم قال ‏ "‏ أيما عبد تزوج بغير إذن سيده فهو عاهر ‏"‏ ‏.‏ قال أبو عيسى هذا حديث حسن صحيح ‏.‏

জাবির ইবনু আবদুল্লাহ (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ

রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেনঃ কোন গোলাম তার মনিবের বিনা অনুমতিতে বিয়ে করলে সে যিনাকারী বলে গণ্য হবে। হাসান, দেখুন পূর্বের হাদীস

জাবির ইবনু আবদুল্লাহ (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ

রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেনঃ কোন গোলাম তার মনিবের বিনা অনুমতিতে বিয়ে করলে সে যিনাকারী বলে গণ্য হবে। হাসান, দেখুন পূর্বের হাদীস

حدثنا سعيد بن يحيى بن سعيد الأموي، حدثنا أبي، حدثنا ابن جريج، عن عبد الله بن محمد بن عقيل، عن جابر، عن النبي صلى الله عليه وسلم قال ‏ "‏ أيما عبد تزوج بغير إذن سيده فهو عاهر ‏"‏ ‏.‏ قال أبو عيسى هذا حديث حسن صحيح ‏.‏


জামে' আত-তিরমিজি ১১১১

حدثنا علي بن حجر، أخبرنا الوليد بن مسلم، عن زهير بن محمد، عن عبد الله بن محمد بن عقيل، عن جابر بن عبد الله، عن النبي صلى الله عليه وسلم قال ‏ "‏ أيما عبد تزوج بغير إذن سيده فهو عاهر ‏"‏ ‏.‏ قال وفي الباب عن ابن عمر ‏.‏ قال أبو عيسى حديث جابر حديث حسن ‏.‏ وروى بعضهم هذا الحديث عن عبد الله بن محمد بن عقيل عن ابن عمر عن النبي صلى الله عليه وسلم ‏.‏ ولا يصح والصحيح عن عبد الله بن محمد بن عقيل عن جابر ‏.‏ والعمل على هذا عند أهل العلم من أصحاب النبي صلى الله عليه وسلم وغيرهم أن نكاح العبد بغير إذن سيده لا يجوز ‏.‏ وهو قول أحمد وإسحاق وغيرهما ‏بلا اختلاف.

জাবির ইবনু আবদুল্লাহ (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ

রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেনঃ যে কোন গোলাম তার মনিবের বিনা অনুমতিতে বিয়ে করলে সে ব্যভিচারী। হাসান, ইবনু মা-জাহ (১৯৫৯)

জাবির ইবনু আবদুল্লাহ (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ

রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেনঃ যে কোন গোলাম তার মনিবের বিনা অনুমতিতে বিয়ে করলে সে ব্যভিচারী। হাসান, ইবনু মা-জাহ (১৯৫৯)

حدثنا علي بن حجر، أخبرنا الوليد بن مسلم، عن زهير بن محمد، عن عبد الله بن محمد بن عقيل، عن جابر بن عبد الله، عن النبي صلى الله عليه وسلم قال ‏ "‏ أيما عبد تزوج بغير إذن سيده فهو عاهر ‏"‏ ‏.‏ قال وفي الباب عن ابن عمر ‏.‏ قال أبو عيسى حديث جابر حديث حسن ‏.‏ وروى بعضهم هذا الحديث عن عبد الله بن محمد بن عقيل عن ابن عمر عن النبي صلى الله عليه وسلم ‏.‏ ولا يصح والصحيح عن عبد الله بن محمد بن عقيل عن جابر ‏.‏ والعمل على هذا عند أهل العلم من أصحاب النبي صلى الله عليه وسلم وغيرهم أن نكاح العبد بغير إذن سيده لا يجوز ‏.‏ وهو قول أحمد وإسحاق وغيرهما ‏بلا اختلاف.


জামে' আত-তিরমিজি > মহিলাদের মোহরের বর্ণনা

জামে' আত-তিরমিজি ১১১৩

حدثنا محمد بن بشار، حدثنا يحيى بن سعيد، وعبد الرحمن بن مهدي، ومحمد بن جعفر، قالوا حدثنا شعبة، عن عاصم بن عبيد الله، قال سمعت عبد الله بن عامر بن ربيعة، عن أبيه، أن امرأة، من بني فزارة تزوجت على نعلين فقال رسول الله صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ أرضيت من نفسك ومالك بنعلين ‏"‏ ‏.‏ قالت نعم ‏.‏ قال فأجازه ‏.‏ قال وفي الباب عن عمر وأبي هريرة وسهل بن سعد وأبي سعيد وأنس وعائشة وجابر وأبي حدرد الأسلمي ‏.‏ قال أبو عيسى حديث عامر بن ربيعة حديث حسن صحيح ‏.‏ واختلف أهل العلم في المهر فقال بعض أهل العلم المهر على ما تراضوا عليه ‏.‏ وهو قول سفيان الثوري والشافعي وأحمد وإسحاق ‏.‏ وقال مالك بن أنس لا يكون المهر أقل من ربع دينار ‏.‏ وقال بعض أهل الكوفة لا يكون المهر أقل من عشرة دراهم ‏.‏

আবদুল্লাহ ইবনু আমির ইবনু রাবীআ (রাঃ) হতে তার পিতা থেকে বর্নিতঃ

ফাযারা গোত্রের এক মহিলা একজোড়া জুতার বদলে বিয়ে করলে রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেনঃ তুমি একজোড়া জুতার বদলে তোমার জিন্দেগী ও সম্পদ সপে দিতে রাজী হয়ে গেলে? সে বলল, হ্যাঁ। রাবী বলেন, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) এই বিয়ে অনুমোদন করলেন। যইফ, ইবনু মাজাহ (১৮৮৮)

আবদুল্লাহ ইবনু আমির ইবনু রাবীআ (রাঃ) হতে তার পিতা থেকে বর্নিতঃ

ফাযারা গোত্রের এক মহিলা একজোড়া জুতার বদলে বিয়ে করলে রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেনঃ তুমি একজোড়া জুতার বদলে তোমার জিন্দেগী ও সম্পদ সপে দিতে রাজী হয়ে গেলে? সে বলল, হ্যাঁ। রাবী বলেন, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) এই বিয়ে অনুমোদন করলেন। যইফ, ইবনু মাজাহ (১৮৮৮)

حدثنا محمد بن بشار، حدثنا يحيى بن سعيد، وعبد الرحمن بن مهدي، ومحمد بن جعفر، قالوا حدثنا شعبة، عن عاصم بن عبيد الله، قال سمعت عبد الله بن عامر بن ربيعة، عن أبيه، أن امرأة، من بني فزارة تزوجت على نعلين فقال رسول الله صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ أرضيت من نفسك ومالك بنعلين ‏"‏ ‏.‏ قالت نعم ‏.‏ قال فأجازه ‏.‏ قال وفي الباب عن عمر وأبي هريرة وسهل بن سعد وأبي سعيد وأنس وعائشة وجابر وأبي حدرد الأسلمي ‏.‏ قال أبو عيسى حديث عامر بن ربيعة حديث حسن صحيح ‏.‏ واختلف أهل العلم في المهر فقال بعض أهل العلم المهر على ما تراضوا عليه ‏.‏ وهو قول سفيان الثوري والشافعي وأحمد وإسحاق ‏.‏ وقال مالك بن أنس لا يكون المهر أقل من ربع دينار ‏.‏ وقال بعض أهل الكوفة لا يكون المهر أقل من عشرة دراهم ‏.‏


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