জামে' আত-তিরমিজি > বিয়ের ব্যাপারে কুমারী (বিক্র) ও অকুমারী (সায়্যিব) অনুমতি নেয়া
জামে' আত-তিরমিজি ১১০৭
حدثنا إسحاق بن منصور، أخبرنا محمد بن يوسف، حدثنا الأوزاعي، عن يحيى بن أبي كثير، عن أبي سلمة، عن أبي هريرة، قال قال رسول الله صلى الله عليه وسلم " لا تنكح الثيب حتى تستأمر ولا تنكح البكر حتى تستأذن وإذنها الصموت " . قال وفي الباب عن عمر وابن عباس وعائشة والعرس بن عميرة . قال أبو عيسى حديث أبي هريرة حديث حسن صحيح . والعمل على هذا عند أهل العلم أن الثيب لا تزوج حتى تستأمر وإن زوجها الأب من غير أن يستأمرها فكرهت ذلك فالنكاح مفسوخ عند عامة أهل العلم . واختلف أهل العلم في تزويج الأبكار إذا زوجهن الآباء فرأى أكثر أهل العلم من أهل الكوفة وغيرهم أن الأب إذا زوج البكر وهي بالغة بغير أمرها فلم ترض بتزويج الأب فالنكاح مفسوخ . وقال بعض أهل المدينة تزويج الأب على البكر جائز وإن كرهت ذلك . وهو قول مالك بن أنس والشافعي وأحمد وإسحاق .
আবূ হুরাইরা (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ
তিনি বলেন, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেনঃ প্রাপ্তবয়স্কা (সায়্যিব) নারীকে তার সুস্পষ্ট অনুমতি ব্যতীত বিয়ে দেয়া যাবে না। কুমারী মেয়েকে তার অনুমতি ব্যতীত বিয়ে দেয়া যাবে না। নীরবতাই তার অনুমতি। সহীহ্, ইবনু মা-জাহ (১৮৭১), বুখারী ও মুসলিম
আবূ হুরাইরা (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ
তিনি বলেন, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেনঃ প্রাপ্তবয়স্কা (সায়্যিব) নারীকে তার সুস্পষ্ট অনুমতি ব্যতীত বিয়ে দেয়া যাবে না। কুমারী মেয়েকে তার অনুমতি ব্যতীত বিয়ে দেয়া যাবে না। নীরবতাই তার অনুমতি। সহীহ্, ইবনু মা-জাহ (১৮৭১), বুখারী ও মুসলিম
حدثنا إسحاق بن منصور، أخبرنا محمد بن يوسف، حدثنا الأوزاعي، عن يحيى بن أبي كثير، عن أبي سلمة، عن أبي هريرة، قال قال رسول الله صلى الله عليه وسلم " لا تنكح الثيب حتى تستأمر ولا تنكح البكر حتى تستأذن وإذنها الصموت " . قال وفي الباب عن عمر وابن عباس وعائشة والعرس بن عميرة . قال أبو عيسى حديث أبي هريرة حديث حسن صحيح . والعمل على هذا عند أهل العلم أن الثيب لا تزوج حتى تستأمر وإن زوجها الأب من غير أن يستأمرها فكرهت ذلك فالنكاح مفسوخ عند عامة أهل العلم . واختلف أهل العلم في تزويج الأبكار إذا زوجهن الآباء فرأى أكثر أهل العلم من أهل الكوفة وغيرهم أن الأب إذا زوج البكر وهي بالغة بغير أمرها فلم ترض بتزويج الأب فالنكاح مفسوخ . وقال بعض أهل المدينة تزويج الأب على البكر جائز وإن كرهت ذلك . وهو قول مالك بن أنس والشافعي وأحمد وإسحاق .
জামে' আত-তিরমিজি ১১০৮
حدثنا قتيبة بن سعيد، حدثنا مالك بن أنس، عن عبد الله بن الفضل، عن نافع بن جبير بن مطعم، عن ابن عباس، أن رسول الله صلى الله عليه وسلم قال " الأيم أحق بنفسها من وليها والبكر تستأذن في نفسها وإذنها صماتها " . هذا حديث حسن صحيح . وقد روى شعبة وسفيان الثوري هذا الحديث عن مالك بن أنس . وقد احتج بعض الناس في إجازة النكاح بغير ولي بهذا الحديث وليس في هذا الحديث ما احتجوا به لأنه قد روي من غير وجه عن ابن عباس عن النبي صلى الله عليه وسلم " لا نكاح إلا بولي " وهكذا أفتى به ابن عباس بعد النبي صلى الله عليه وسلم فقال لا نكاح إلا بولي . وإنما معنى قول النبي صلى الله عليه وسلم " الأيم أحق بنفسها من وليها " . عند أكثر أهل العلم أن الولي لا يزوجها إلا برضاها وأمرها فإن زوجها فالنكاح مفسوخ على حديث خنساء بنت خذام حيث زوجها أبوها وهي ثيب فكرهت ذلك فرد النبي صلى الله عليه وسلم نكاحه .
ইবনু আব্বাস (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ
রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন, নিজের (বিয়ের) ব্যাপারে প্রাপ্তবয়স্কা নারী (আয়্যিম) তার অভিভাবক হতে বেশি কর্তৃত্বশীল। কুমারীর (বিক্র, বিয়ের) ব্যাপারে তার মতামত নেয়া আবশ্যক। তার নীরবতাই তার সম্মতি। সহীহ্, ইবনু মা-জাহ (১৮৭০) মুসলিম
ইবনু আব্বাস (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ
রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন, নিজের (বিয়ের) ব্যাপারে প্রাপ্তবয়স্কা নারী (আয়্যিম) তার অভিভাবক হতে বেশি কর্তৃত্বশীল। কুমারীর (বিক্র, বিয়ের) ব্যাপারে তার মতামত নেয়া আবশ্যক। তার নীরবতাই তার সম্মতি। সহীহ্, ইবনু মা-জাহ (১৮৭০) মুসলিম
حدثنا قتيبة بن سعيد، حدثنا مالك بن أنس، عن عبد الله بن الفضل، عن نافع بن جبير بن مطعم، عن ابن عباس، أن رسول الله صلى الله عليه وسلم قال " الأيم أحق بنفسها من وليها والبكر تستأذن في نفسها وإذنها صماتها " . هذا حديث حسن صحيح . وقد روى شعبة وسفيان الثوري هذا الحديث عن مالك بن أنس . وقد احتج بعض الناس في إجازة النكاح بغير ولي بهذا الحديث وليس في هذا الحديث ما احتجوا به لأنه قد روي من غير وجه عن ابن عباس عن النبي صلى الله عليه وسلم " لا نكاح إلا بولي " وهكذا أفتى به ابن عباس بعد النبي صلى الله عليه وسلم فقال لا نكاح إلا بولي . وإنما معنى قول النبي صلى الله عليه وسلم " الأيم أحق بنفسها من وليها " . عند أكثر أهل العلم أن الولي لا يزوجها إلا برضاها وأمرها فإن زوجها فالنكاح مفسوخ على حديث خنساء بنت خذام حيث زوجها أبوها وهي ثيب فكرهت ذلك فرد النبي صلى الله عليه وسلم نكاحه .
জামে' আত-তিরমিজি > জোরপূর্বক ইয়াতীম মেয়েকে বিয়ে দেওয়া
জামে' আত-তিরমিজি ১১০৯
حدثنا قتيبة، حدثنا عبد العزيز بن محمد، عن محمد بن عمرو، عن أبي سلمة، عن أبي هريرة، قال قال رسول الله صلى الله عليه وسلم " اليتيمة تستأمر في نفسها فإن صمتت فهو إذنها وإن أبت فلا جواز عليها " . قال وفي الباب عن أبي موسى وابن عمر وعائشة . قال أبو عيسى حديث أبي هريرة حديث حسن . واختلف أهل العلم في تزويج اليتيمة فرأى بعض أهل العلم أن اليتيمة إذا زوجت فالنكاح موقوف حتى تبلغ فإذا بلغت فلها الخيار في إجازة النكاح أو فسخه . وهو قول بعض التابعين وغيرهم . وقال بعضهم لا يجوز نكاح اليتيمة حتى تبلغ . ولا يجوز الخيار في النكاح . وهو قول سفيان الثوري والشافعي وغيرهما من أهل العلم . وقال أحمد وإسحاق إذا بلغت اليتيمة تسع سنين فزوجت فرضيت فالنكاح جائز ولا خيار لها إذا أدركت . واحتجا بحديث عائشة أن النبي صلى الله عليه وسلم بنى بها وهي بنت تسع سنين . وقد قالت عائشة إذا بلغت الجارية تسع سنين فهي امرأة .
আবূ হুরাইরা (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ
তিনি বলেন, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেনঃ ইয়াতীম কুমারীর (বিয়ের) ব্যাপারে তার নিজের মত নিতে হবে। সে চুপ থাকলে তবে এটাই তার সম্মতিগণ্য হয়ে যাবে। সে সরাসরি অস্বীকার করলে তবে তার উপর জোর খাটানো যাবে না। হাসান সহীহ, ইরওয়া (১৮৩৪), সহীহ আবু দাউদ (১৮২৫)
আবূ হুরাইরা (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ
তিনি বলেন, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেনঃ ইয়াতীম কুমারীর (বিয়ের) ব্যাপারে তার নিজের মত নিতে হবে। সে চুপ থাকলে তবে এটাই তার সম্মতিগণ্য হয়ে যাবে। সে সরাসরি অস্বীকার করলে তবে তার উপর জোর খাটানো যাবে না। হাসান সহীহ, ইরওয়া (১৮৩৪), সহীহ আবু দাউদ (১৮২৫)
حدثنا قتيبة، حدثنا عبد العزيز بن محمد، عن محمد بن عمرو، عن أبي سلمة، عن أبي هريرة، قال قال رسول الله صلى الله عليه وسلم " اليتيمة تستأمر في نفسها فإن صمتت فهو إذنها وإن أبت فلا جواز عليها " . قال وفي الباب عن أبي موسى وابن عمر وعائشة . قال أبو عيسى حديث أبي هريرة حديث حسن . واختلف أهل العلم في تزويج اليتيمة فرأى بعض أهل العلم أن اليتيمة إذا زوجت فالنكاح موقوف حتى تبلغ فإذا بلغت فلها الخيار في إجازة النكاح أو فسخه . وهو قول بعض التابعين وغيرهم . وقال بعضهم لا يجوز نكاح اليتيمة حتى تبلغ . ولا يجوز الخيار في النكاح . وهو قول سفيان الثوري والشافعي وغيرهما من أهل العلم . وقال أحمد وإسحاق إذا بلغت اليتيمة تسع سنين فزوجت فرضيت فالنكاح جائز ولا خيار لها إذا أدركت . واحتجا بحديث عائشة أن النبي صلى الله عليه وسلم بنى بها وهي بنت تسع سنين . وقد قالت عائشة إذا بلغت الجارية تسع سنين فهي امرأة .
জামে' আত-তিরমিজি ১১০৯
حدثنا قتيبة، حدثنا عبد العزيز بن محمد، عن محمد بن عمرو، عن أبي سلمة، عن أبي هريرة، قال قال رسول الله صلى الله عليه وسلم " اليتيمة تستأمر في نفسها فإن صمتت فهو إذنها وإن أبت فلا جواز عليها " . قال وفي الباب عن أبي موسى وابن عمر وعائشة . قال أبو عيسى حديث أبي هريرة حديث حسن . واختلف أهل العلم في تزويج اليتيمة فرأى بعض أهل العلم أن اليتيمة إذا زوجت فالنكاح موقوف حتى تبلغ فإذا بلغت فلها الخيار في إجازة النكاح أو فسخه . وهو قول بعض التابعين وغيرهم . وقال بعضهم لا يجوز نكاح اليتيمة حتى تبلغ . ولا يجوز الخيار في النكاح . وهو قول سفيان الثوري والشافعي وغيرهما من أهل العلم . وقال أحمد وإسحاق إذا بلغت اليتيمة تسع سنين فزوجت فرضيت فالنكاح جائز ولا خيار لها إذا أدركت . واحتجا بحديث عائشة أن النبي صلى الله عليه وسلم بنى بها وهي بنت تسع سنين . وقد قالت عائشة إذا بلغت الجارية تسع سنين فهي امرأة .
আবূ হুরাইরা (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ
তিনি বলেন, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেনঃ ইয়াতীম কুমারীর (বিয়ের) ব্যাপারে তার নিজের মত নিতে হবে। সে চুপ থাকলে তবে এটাই তার সম্মতিগণ্য হয়ে যাবে। সে সরাসরি অস্বীকার করলে তবে তার উপর জোর খাটানো যাবে না। হাসান সহীহ, ইরওয়া (১৮৩৪), সহীহ আবু দাউদ (১৮২৫)
আবূ হুরাইরা (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ
তিনি বলেন, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেনঃ ইয়াতীম কুমারীর (বিয়ের) ব্যাপারে তার নিজের মত নিতে হবে। সে চুপ থাকলে তবে এটাই তার সম্মতিগণ্য হয়ে যাবে। সে সরাসরি অস্বীকার করলে তবে তার উপর জোর খাটানো যাবে না। হাসান সহীহ, ইরওয়া (১৮৩৪), সহীহ আবু দাউদ (১৮২৫)
حدثنا قتيبة، حدثنا عبد العزيز بن محمد، عن محمد بن عمرو، عن أبي سلمة، عن أبي هريرة، قال قال رسول الله صلى الله عليه وسلم " اليتيمة تستأمر في نفسها فإن صمتت فهو إذنها وإن أبت فلا جواز عليها " . قال وفي الباب عن أبي موسى وابن عمر وعائشة . قال أبو عيسى حديث أبي هريرة حديث حسن . واختلف أهل العلم في تزويج اليتيمة فرأى بعض أهل العلم أن اليتيمة إذا زوجت فالنكاح موقوف حتى تبلغ فإذا بلغت فلها الخيار في إجازة النكاح أو فسخه . وهو قول بعض التابعين وغيرهم . وقال بعضهم لا يجوز نكاح اليتيمة حتى تبلغ . ولا يجوز الخيار في النكاح . وهو قول سفيان الثوري والشافعي وغيرهما من أهل العلم . وقال أحمد وإسحاق إذا بلغت اليتيمة تسع سنين فزوجت فرضيت فالنكاح جائز ولا خيار لها إذا أدركت . واحتجا بحديث عائشة أن النبي صلى الله عليه وسلم بنى بها وهي بنت تسع سنين . وقد قالت عائشة إذا بلغت الجارية تسع سنين فهي امرأة .
জামে' আত-তিরমিজি ১১০৯
حدثنا قتيبة، حدثنا عبد العزيز بن محمد، عن محمد بن عمرو، عن أبي سلمة، عن أبي هريرة، قال قال رسول الله صلى الله عليه وسلم " اليتيمة تستأمر في نفسها فإن صمتت فهو إذنها وإن أبت فلا جواز عليها " . قال وفي الباب عن أبي موسى وابن عمر وعائشة . قال أبو عيسى حديث أبي هريرة حديث حسن . واختلف أهل العلم في تزويج اليتيمة فرأى بعض أهل العلم أن اليتيمة إذا زوجت فالنكاح موقوف حتى تبلغ فإذا بلغت فلها الخيار في إجازة النكاح أو فسخه . وهو قول بعض التابعين وغيرهم . وقال بعضهم لا يجوز نكاح اليتيمة حتى تبلغ . ولا يجوز الخيار في النكاح . وهو قول سفيان الثوري والشافعي وغيرهما من أهل العلم . وقال أحمد وإسحاق إذا بلغت اليتيمة تسع سنين فزوجت فرضيت فالنكاح جائز ولا خيار لها إذا أدركت . واحتجا بحديث عائشة أن النبي صلى الله عليه وسلم بنى بها وهي بنت تسع سنين . وقد قالت عائشة إذا بلغت الجارية تسع سنين فهي امرأة .
আবূ হুরাইরা (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ
তিনি বলেন, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেনঃ ইয়াতীম কুমারীর (বিয়ের) ব্যাপারে তার নিজের মত নিতে হবে। সে চুপ থাকলে তবে এটাই তার সম্মতিগণ্য হয়ে যাবে। সে সরাসরি অস্বীকার করলে তবে তার উপর জোর খাটানো যাবে না। হাসান সহীহ, ইরওয়া (১৮৩৪), সহীহ আবু দাউদ (১৮২৫)
আবূ হুরাইরা (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ
তিনি বলেন, রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেনঃ ইয়াতীম কুমারীর (বিয়ের) ব্যাপারে তার নিজের মত নিতে হবে। সে চুপ থাকলে তবে এটাই তার সম্মতিগণ্য হয়ে যাবে। সে সরাসরি অস্বীকার করলে তবে তার উপর জোর খাটানো যাবে না। হাসান সহীহ, ইরওয়া (১৮৩৪), সহীহ আবু দাউদ (১৮২৫)
حدثنا قتيبة، حدثنا عبد العزيز بن محمد، عن محمد بن عمرو، عن أبي سلمة، عن أبي هريرة، قال قال رسول الله صلى الله عليه وسلم " اليتيمة تستأمر في نفسها فإن صمتت فهو إذنها وإن أبت فلا جواز عليها " . قال وفي الباب عن أبي موسى وابن عمر وعائشة . قال أبو عيسى حديث أبي هريرة حديث حسن . واختلف أهل العلم في تزويج اليتيمة فرأى بعض أهل العلم أن اليتيمة إذا زوجت فالنكاح موقوف حتى تبلغ فإذا بلغت فلها الخيار في إجازة النكاح أو فسخه . وهو قول بعض التابعين وغيرهم . وقال بعضهم لا يجوز نكاح اليتيمة حتى تبلغ . ولا يجوز الخيار في النكاح . وهو قول سفيان الثوري والشافعي وغيرهما من أهل العلم . وقال أحمد وإسحاق إذا بلغت اليتيمة تسع سنين فزوجت فرضيت فالنكاح جائز ولا خيار لها إذا أدركت . واحتجا بحديث عائشة أن النبي صلى الله عليه وسلم بنى بها وهي بنت تسع سنين . وقد قالت عائشة إذا بلغت الجارية تسع سنين فهي امرأة .
জামে' আত-তিরমিজি > দুই অভিভাবক (পৃথকভাবে) বিয়ে দিলে
জামে' আত-তিরমিজি ১১১০
حدثنا قتيبة، حدثنا غندر، حدثنا سعيد بن أبي عروبة، عن قتادة، عن الحسن، عن سمرة بن جندب، أن رسول الله صلى الله عليه وسلم قال " أيما امرأة زوجها وليان فهي للأول منهما ومن باع بيعا من رجلين فهو للأول منهما " . قال أبو عيسى هذا حديث حسن . والعمل على هذا عند أهل العلم لا نعلم بينهم في ذلك اختلافا إذا زوج أحد الوليين قبل الآخر فنكاح الأول جائز ونكاح الآخر مفسوخ وإذا زوجا جميعا فنكاحهما جميعا مفسوخ . وهو قول الثوري وأحمد وإسحاق .
সামুরা ইবনু জুনদুব (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ
রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেনঃ (সম-পর্যায়ের) দুইজন অভিভাবক কোন মেয়েকে (ভিন্ন দুই ব্যক্তির নিকট) বিয়ে দিলে প্রথম জনের বিয়ে বহাল হবে। কোন ব্যক্তি (একই মাল) দু’জন খরিদ্দারের নিকট বিক্রয় করলে তা প্রথম খরিদ্দারই পাবে। যঈফ, ইরওয়া (১৮৫৩) বেচা কেনার হাদীস।
সামুরা ইবনু জুনদুব (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ
রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেনঃ (সম-পর্যায়ের) দুইজন অভিভাবক কোন মেয়েকে (ভিন্ন দুই ব্যক্তির নিকট) বিয়ে দিলে প্রথম জনের বিয়ে বহাল হবে। কোন ব্যক্তি (একই মাল) দু’জন খরিদ্দারের নিকট বিক্রয় করলে তা প্রথম খরিদ্দারই পাবে। যঈফ, ইরওয়া (১৮৫৩) বেচা কেনার হাদীস।
حدثنا قتيبة، حدثنا غندر، حدثنا سعيد بن أبي عروبة، عن قتادة، عن الحسن، عن سمرة بن جندب، أن رسول الله صلى الله عليه وسلم قال " أيما امرأة زوجها وليان فهي للأول منهما ومن باع بيعا من رجلين فهو للأول منهما " . قال أبو عيسى هذا حديث حسن . والعمل على هذا عند أهل العلم لا نعلم بينهم في ذلك اختلافا إذا زوج أحد الوليين قبل الآخر فنكاح الأول جائز ونكاح الآخر مفسوخ وإذا زوجا جميعا فنكاحهما جميعا مفسوخ . وهو قول الثوري وأحمد وإسحاق .
জামে' আত-তিরমিজি > মনিবের বিনা অনুমতিতে গোলামের বিয়ে
জামে' আত-তিরমিজি ১১১২
حدثنا سعيد بن يحيى بن سعيد الأموي، حدثنا أبي، حدثنا ابن جريج، عن عبد الله بن محمد بن عقيل، عن جابر، عن النبي صلى الله عليه وسلم قال " أيما عبد تزوج بغير إذن سيده فهو عاهر " . قال أبو عيسى هذا حديث حسن صحيح .
জাবির ইবনু আবদুল্লাহ (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ
রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেনঃ কোন গোলাম তার মনিবের বিনা অনুমতিতে বিয়ে করলে সে যিনাকারী বলে গণ্য হবে। হাসান, দেখুন পূর্বের হাদীস
জাবির ইবনু আবদুল্লাহ (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ
রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেনঃ কোন গোলাম তার মনিবের বিনা অনুমতিতে বিয়ে করলে সে যিনাকারী বলে গণ্য হবে। হাসান, দেখুন পূর্বের হাদীস
حدثنا سعيد بن يحيى بن سعيد الأموي، حدثنا أبي، حدثنا ابن جريج، عن عبد الله بن محمد بن عقيل، عن جابر، عن النبي صلى الله عليه وسلم قال " أيما عبد تزوج بغير إذن سيده فهو عاهر " . قال أبو عيسى هذا حديث حسن صحيح .
জামে' আত-তিরমিজি ১১১১
حدثنا علي بن حجر، أخبرنا الوليد بن مسلم، عن زهير بن محمد، عن عبد الله بن محمد بن عقيل، عن جابر بن عبد الله، عن النبي صلى الله عليه وسلم قال " أيما عبد تزوج بغير إذن سيده فهو عاهر " . قال وفي الباب عن ابن عمر . قال أبو عيسى حديث جابر حديث حسن . وروى بعضهم هذا الحديث عن عبد الله بن محمد بن عقيل عن ابن عمر عن النبي صلى الله عليه وسلم . ولا يصح والصحيح عن عبد الله بن محمد بن عقيل عن جابر . والعمل على هذا عند أهل العلم من أصحاب النبي صلى الله عليه وسلم وغيرهم أن نكاح العبد بغير إذن سيده لا يجوز . وهو قول أحمد وإسحاق وغيرهما بلا اختلاف.
জাবির ইবনু আবদুল্লাহ (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ
রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেনঃ যে কোন গোলাম তার মনিবের বিনা অনুমতিতে বিয়ে করলে সে ব্যভিচারী। হাসান, ইবনু মা-জাহ (১৯৫৯)
জাবির ইবনু আবদুল্লাহ (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ
রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেনঃ যে কোন গোলাম তার মনিবের বিনা অনুমতিতে বিয়ে করলে সে ব্যভিচারী। হাসান, ইবনু মা-জাহ (১৯৫৯)
حدثنا علي بن حجر، أخبرنا الوليد بن مسلم، عن زهير بن محمد، عن عبد الله بن محمد بن عقيل، عن جابر بن عبد الله، عن النبي صلى الله عليه وسلم قال " أيما عبد تزوج بغير إذن سيده فهو عاهر " . قال وفي الباب عن ابن عمر . قال أبو عيسى حديث جابر حديث حسن . وروى بعضهم هذا الحديث عن عبد الله بن محمد بن عقيل عن ابن عمر عن النبي صلى الله عليه وسلم . ولا يصح والصحيح عن عبد الله بن محمد بن عقيل عن جابر . والعمل على هذا عند أهل العلم من أصحاب النبي صلى الله عليه وسلم وغيرهم أن نكاح العبد بغير إذن سيده لا يجوز . وهو قول أحمد وإسحاق وغيرهما بلا اختلاف.