সুনান নাসাঈ > ঈমানের মিষ্টতা

সুনান নাসাঈ ৪৯৮৮

أخبرنا سويد بن نصر، قال: حدثنا عبد الله، عن شعبة، عن قتادة، قال: سمعت أنس بن مالك رضي الله عنه يحدث، عن النبي صلى الله عليه وسلم قال: " ثلاث من كن فيه وجد حلاوة الإيمان: من أحب المرء لا يحبه إلا لله عز وجل، ومن كان الله عز وجل ورسوله أحب إليه مما سواهما، ومن كان أن يقذف في النار أحب إليه من أن يرجع إلى الكفر بعد أن أنقذه الله منه "

আনাস ইব্‌ন মালিক (রাঃ) রাসুলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) থেকে থেকে বর্নিতঃ

তিনি বলেন: যার মধ্যে তিনটি গুণ থাকবে; সে ঈমানের মিষ্টতা পাবে; ১. যে কাউকে ভালবাসলে কেবল আল্লাহ্‌র সন্তূষ্টির জন্যই তাকে ভালবাসবে; ২. আল্লাহ্‌ এবং আল্লাহ্‌র রাসূল তার কাছে অন্য সবকিছুর চাইতে বেশি প্রিয় হবে এবং ৩. আল্লাহ্‌ তাকে কুফর হতে পরিত্রাণ করার পর পুনঃ কুফরীতে ফিরে যাওয়ার চেয়ে অগ্নিতে নিক্ষিপ্ত হওয়া তার নিকট পছন্দনীয় হবে।

আনাস ইব্‌ন মালিক (রাঃ) রাসুলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) থেকে থেকে বর্নিতঃ

তিনি বলেন: যার মধ্যে তিনটি গুণ থাকবে; সে ঈমানের মিষ্টতা পাবে; ১. যে কাউকে ভালবাসলে কেবল আল্লাহ্‌র সন্তূষ্টির জন্যই তাকে ভালবাসবে; ২. আল্লাহ্‌ এবং আল্লাহ্‌র রাসূল তার কাছে অন্য সবকিছুর চাইতে বেশি প্রিয় হবে এবং ৩. আল্লাহ্‌ তাকে কুফর হতে পরিত্রাণ করার পর পুনঃ কুফরীতে ফিরে যাওয়ার চেয়ে অগ্নিতে নিক্ষিপ্ত হওয়া তার নিকট পছন্দনীয় হবে।

أخبرنا سويد بن نصر، قال: حدثنا عبد الله، عن شعبة، عن قتادة، قال: سمعت أنس بن مالك رضي الله عنه يحدث، عن النبي صلى الله عليه وسلم قال: " ثلاث من كن فيه وجد حلاوة الإيمان: من أحب المرء لا يحبه إلا لله عز وجل، ومن كان الله عز وجل ورسوله أحب إليه مما سواهما، ومن كان أن يقذف في النار أحب إليه من أن يرجع إلى الكفر بعد أن أنقذه الله منه "


সুনান নাসাঈ > ইসলামের স্বাদ

সুনান নাসাঈ ৪৯৮৯

أخبرنا علي بن حجر، قال: حدثنا إسماعيل، عن حميد، عن أنس، عن النبي صلى الله عليه وسلم قال: " ثلاث من كن فيه وجد بهن حلاوة الإسلام: من كان الله ورسوله أحب إليه مما سواهما، ومن أحب المرء لا يحبه إلا لله، ومن يكره أن يرجع إلى الكفر كما يكره أن يلقى في النار "

আনাস (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ

নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: যার মধ্যে তিনটি গুণ থাকবে, সে ইসলামের মিষ্টতা উপলব্ধি করবে; ১. আল্লাহ্‌ এবং আল্লাহ্‌র রাসুল তার নিকট অন্য সমস্ত কিছু হতে প্রিয় হবে; ২. সে কাউকে ভালবাসলে তাকে আল্লাহ্‌র সন্তূষ্টির জন্যই ভালবাসবে; ৩. আর সে কুফরীতে ফিরে যাওয়াকে ঐরূপই ঘৃণা করবে, যেরূপ সে অগ্নিতে নিক্ষিপ্ত হওয়াকে ঘৃণা করে।

আনাস (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ

নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: যার মধ্যে তিনটি গুণ থাকবে, সে ইসলামের মিষ্টতা উপলব্ধি করবে; ১. আল্লাহ্‌ এবং আল্লাহ্‌র রাসুল তার নিকট অন্য সমস্ত কিছু হতে প্রিয় হবে; ২. সে কাউকে ভালবাসলে তাকে আল্লাহ্‌র সন্তূষ্টির জন্যই ভালবাসবে; ৩. আর সে কুফরীতে ফিরে যাওয়াকে ঐরূপই ঘৃণা করবে, যেরূপ সে অগ্নিতে নিক্ষিপ্ত হওয়াকে ঘৃণা করে।

أخبرنا علي بن حجر، قال: حدثنا إسماعيل، عن حميد، عن أنس، عن النبي صلى الله عليه وسلم قال: " ثلاث من كن فيه وجد بهن حلاوة الإسلام: من كان الله ورسوله أحب إليه مما سواهما، ومن أحب المرء لا يحبه إلا لله، ومن يكره أن يرجع إلى الكفر كما يكره أن يلقى في النار "


সুনান নাসাঈ > ইসলামের পরিচয়

সুনান নাসাঈ ৪৯৯০

أخبرنا إسحق بن إبراهيم، قال: حدثنا النضر بن شميل، قال: أنبأنا كهمس بن الحسن، قال: حدثنا عبد الله بن بريدة، عن يحيى بن يعمر، أن عبد الله بن عمر قال: حدثني عمر بن الخطاب قال: بينما نحن عند رسول الله صلى الله عليه وسلم ذات يوم إذ طلع علينا رجل شديد بياض الثياب، شديد سواد الشعر، لا يرى عليه أثر السفر، ولا يعرفه منا أحد، حتى جلس إلى رسول الله صلى الله عليه وسلم، فأسند ركبتيه إلى ركبتيه، ووضع كفيه على فخذيه، ثم قال: يا محمد أخبرني عن الإسلام؟ قال: «أن تشهد أن لا إله إلا الله، وأن محمدا رسول الله، وتقيم الصلاة، وتؤتي الزكاة، وتصوم رمضان، وتحج البيت إن استطعت إليه سبيلا» قال: صدقت. فعجبنا إليه يسأله ويصدقه، ثم قال: أخبرني عن الإيمان؟ قال: «أن تؤمن بالله، وملائكته، وكتبه، ورسله، واليوم الآخر، والقدر كله خيره وشره» قال: صدقت. قال: فأخبرني عن الإحسان؟ قال: «أن تعبد الله كأنك تراه، فإن لم تكن تراه فإنه يراك». قال: فأخبرني عن الساعة؟ قال: «ما المسئول عنها بأعلم بها من السائل». قال: فأخبرني عن أماراتها؟ قال: «أن تلد الأمة ربتها، وأن ترى الحفاة العراة العالة رعاء الشاء يتطاولون في البنيان». قال عمر: فلبثت ثلاثا، ثم قال لي رسول الله صلى الله عليه وسلم: «يا عمر هل تدري من السائل؟» قلت: الله ورسوله أعلم، قال: «فإنه جبريل عليه السلام أتاكم ليعلمكم أمر دينكم»

উমর ইব্‌ন খাত্তাব (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ

তিনি বলেন, একদিন আমরা রাসুলুল্লাহ্‌ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)–এর নিকট উপস্থিত ছিলাম, এমন সময় এক ব্যক্তি আগমন করলেন, যার কাপড় অত্যধিক সাদা ছিল এবং চুল অধিক কাল ছিল। বুঝা যাচ্ছিল না যে, তিনি সফর হতে এসেছেন; আর আমাদের মধ্যে কেউ তাঁকে চিনতে পারছিল না। তিনি নিজ হাঁটুদ্বয় তাঁর হাঁটুদ্বয়ের সাথে লাগিয়ে বসলেন, তাঁর হস্তদ্বয় তাঁর উভয় উরুর উপর রাখলেন এবং বললেন: হে মুহাম্মদ! আমাকে বলুন: ইসলাম কি? তিনি বললেন: এ কথার সাক্ষ্য প্রদান করা যে, আল্লাহ্‌ ব্যতীত কোন ইলাহ নেই, আর মুহাম্মদ আল্লাহ্‌র বাসুল এবং সালাত আদায় করা, যাকাত দেওয়া, রমযানের রোযা রাখা ও পথ খরচের সামর্থ্য থাকলে হজ্জ করা। সে লোকটি বললো: আপনি সত্যই বলেছেন। আমরা আশ্চর্যান্বিত হলাম যে, তিনি প্রশ্ন করলেন এবং বললেন: আপনি সত্য বলেছেন। এরপর তিনি বললেন: ঈমান কি, আমাকে বলুন? তিনি বললেন: বিশ্বাস স্থাপন করা আল্লাহ্‌র উপর, ফিরিশতাগণ, তাঁর কিতাবসমূহ, তাঁর রাসুলগণ, কিয়ামত দিবস এবং নিয়তির ভাল-মন্দের উপর বিশ্বাস। তিনি বললেন: আপনি সত্য বলেছেন। তারপর বললেন: ইহসান কি? তিনি বললেন: এমনভাবে আল্লাহ্‌র ইবাদত করবে, যেন তুমি আল্লাহ্‌কে দেখছো, যদি তুমি তাঁকে না দেখতে পাও, তবে তিনি তো তোমাকে দেখছেন। তারপর বললেন: কিয়ামত কখন হবে? তিনি বললেন: যার নিকট প্রশ্ন করা হচ্ছে তিনি প্রশ্নকারী হতে অধিক জ্ঞাত নন। সে ব্যক্তি বললো: কিয়ামতের নিদর্শনসমূহ বর্ণনা করুন। তিনি বললেন: দাসী তার মুনিবকে প্রসব করবে, নগ্ন পদ, বিবস্ত্র, গরীব, বকরীর রাখালরা বড় বড় প্রাসাদ নির্মার্ণে প্রতিযোগিতা করবে। উমর (রাঃ) বলেন, আমি তিন দিন পর্যন্ত অপেক্ষা করলাম, পরে রাসুলূল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) আমাকে বললেন: হে উমর! তুমি কি অবগত আছ, এই প্রশ্নকারী ব্যক্তি কে? আমি বললাম: আল্লাহ্‌ এবং আল্লাহ্‌র রাসুলই সমধিক অবগত। তিনি বললেন: তিনি ছিলেন জিব্‌রাঈল (আ), তিনি তোমাদেরকে তোমাদের দ্বীন শিক্ষা দিতে এসেছিলেন।

উমর ইব্‌ন খাত্তাব (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ

তিনি বলেন, একদিন আমরা রাসুলুল্লাহ্‌ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)–এর নিকট উপস্থিত ছিলাম, এমন সময় এক ব্যক্তি আগমন করলেন, যার কাপড় অত্যধিক সাদা ছিল এবং চুল অধিক কাল ছিল। বুঝা যাচ্ছিল না যে, তিনি সফর হতে এসেছেন; আর আমাদের মধ্যে কেউ তাঁকে চিনতে পারছিল না। তিনি নিজ হাঁটুদ্বয় তাঁর হাঁটুদ্বয়ের সাথে লাগিয়ে বসলেন, তাঁর হস্তদ্বয় তাঁর উভয় উরুর উপর রাখলেন এবং বললেন: হে মুহাম্মদ! আমাকে বলুন: ইসলাম কি? তিনি বললেন: এ কথার সাক্ষ্য প্রদান করা যে, আল্লাহ্‌ ব্যতীত কোন ইলাহ নেই, আর মুহাম্মদ আল্লাহ্‌র বাসুল এবং সালাত আদায় করা, যাকাত দেওয়া, রমযানের রোযা রাখা ও পথ খরচের সামর্থ্য থাকলে হজ্জ করা। সে লোকটি বললো: আপনি সত্যই বলেছেন। আমরা আশ্চর্যান্বিত হলাম যে, তিনি প্রশ্ন করলেন এবং বললেন: আপনি সত্য বলেছেন। এরপর তিনি বললেন: ঈমান কি, আমাকে বলুন? তিনি বললেন: বিশ্বাস স্থাপন করা আল্লাহ্‌র উপর, ফিরিশতাগণ, তাঁর কিতাবসমূহ, তাঁর রাসুলগণ, কিয়ামত দিবস এবং নিয়তির ভাল-মন্দের উপর বিশ্বাস। তিনি বললেন: আপনি সত্য বলেছেন। তারপর বললেন: ইহসান কি? তিনি বললেন: এমনভাবে আল্লাহ্‌র ইবাদত করবে, যেন তুমি আল্লাহ্‌কে দেখছো, যদি তুমি তাঁকে না দেখতে পাও, তবে তিনি তো তোমাকে দেখছেন। তারপর বললেন: কিয়ামত কখন হবে? তিনি বললেন: যার নিকট প্রশ্ন করা হচ্ছে তিনি প্রশ্নকারী হতে অধিক জ্ঞাত নন। সে ব্যক্তি বললো: কিয়ামতের নিদর্শনসমূহ বর্ণনা করুন। তিনি বললেন: দাসী তার মুনিবকে প্রসব করবে, নগ্ন পদ, বিবস্ত্র, গরীব, বকরীর রাখালরা বড় বড় প্রাসাদ নির্মার্ণে প্রতিযোগিতা করবে। উমর (রাঃ) বলেন, আমি তিন দিন পর্যন্ত অপেক্ষা করলাম, পরে রাসুলূল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) আমাকে বললেন: হে উমর! তুমি কি অবগত আছ, এই প্রশ্নকারী ব্যক্তি কে? আমি বললাম: আল্লাহ্‌ এবং আল্লাহ্‌র রাসুলই সমধিক অবগত। তিনি বললেন: তিনি ছিলেন জিব্‌রাঈল (আ), তিনি তোমাদেরকে তোমাদের দ্বীন শিক্ষা দিতে এসেছিলেন।

أخبرنا إسحق بن إبراهيم، قال: حدثنا النضر بن شميل، قال: أنبأنا كهمس بن الحسن، قال: حدثنا عبد الله بن بريدة، عن يحيى بن يعمر، أن عبد الله بن عمر قال: حدثني عمر بن الخطاب قال: بينما نحن عند رسول الله صلى الله عليه وسلم ذات يوم إذ طلع علينا رجل شديد بياض الثياب، شديد سواد الشعر، لا يرى عليه أثر السفر، ولا يعرفه منا أحد، حتى جلس إلى رسول الله صلى الله عليه وسلم، فأسند ركبتيه إلى ركبتيه، ووضع كفيه على فخذيه، ثم قال: يا محمد أخبرني عن الإسلام؟ قال: «أن تشهد أن لا إله إلا الله، وأن محمدا رسول الله، وتقيم الصلاة، وتؤتي الزكاة، وتصوم رمضان، وتحج البيت إن استطعت إليه سبيلا» قال: صدقت. فعجبنا إليه يسأله ويصدقه، ثم قال: أخبرني عن الإيمان؟ قال: «أن تؤمن بالله، وملائكته، وكتبه، ورسله، واليوم الآخر، والقدر كله خيره وشره» قال: صدقت. قال: فأخبرني عن الإحسان؟ قال: «أن تعبد الله كأنك تراه، فإن لم تكن تراه فإنه يراك». قال: فأخبرني عن الساعة؟ قال: «ما المسئول عنها بأعلم بها من السائل». قال: فأخبرني عن أماراتها؟ قال: «أن تلد الأمة ربتها، وأن ترى الحفاة العراة العالة رعاء الشاء يتطاولون في البنيان». قال عمر: فلبثت ثلاثا، ثم قال لي رسول الله صلى الله عليه وسلم: «يا عمر هل تدري من السائل؟» قلت: الله ورسوله أعلم، قال: «فإنه جبريل عليه السلام أتاكم ليعلمكم أمر دينكم»


সুনান নাসাঈ > ঈমান ও ইসলামের বিবরণ

সুনান নাসাঈ ৪৯৯১

أخبرنا محمد بن قدامة، عن جرير، عن أبي فروة، عن أبي زرعة، عن أبي هريرة، وأبي ذر، قالا: كان رسول الله صلى الله عليه وسلم يجلس بين ظهراني أصحابه، فيجيء الغريب فلا يدري أيهم هو حتى يسأل، فطلبنا إلى رسول الله صلى الله عليه وسلم أن نجعل له مجلسا يعرفه الغريب إذا أتاه، فبنينا له دكانا من طين، كان يجلس عليه، وإنا لجلوس ورسول الله صلى الله عليه وسلم في مجلسه، إذ أقبل رجل أحسن الناس وجها، وأطيب الناس ريحا، كأن ثيابه لم يمسها دنس، حتى سلم في طرف البساط فقال: السلام عليك يا محمد، فرد عليه السلام، قال: أدنو يا محمد، قال: «ادنه» فما زال يقول: أدنو مرارا، ويقول له: «ادن» حتى وضع يده على ركبتي رسول الله صلى الله عليه وسلم، قال: يا محمد، أخبرني ما الإسلام؟ قال: «الإسلام أن تعبد الله، ولا تشرك به شيئا، وتقيم الصلاة، وتؤتي الزكاة، وتحج البيت، وتصوم رمضان» قال: إذا فعلت ذلك فقد أسلمت؟ قال: «نعم» قال: صدقت. فلما سمعنا قول الرجل صدقت أنكرناه، قال: يا محمد، أخبرني ما الإيمان؟ قال: «الإيمان بالله، وملائكته، والكتاب، والنبيين، وتؤمن بالقدر» قال: فإذا فعلت ذلك فقد آمنت؟ قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: «نعم» قال: صدقت. قال: يا محمد، أخبرني ما الإحسان؟ قال: «أن تعبد الله كأنك تراه، فإن لم تكن تراه فإنه يراك» قال: صدقت. قال: يا محمد، أخبرني متى الساعة؟ قال: فنكس فلم يجبه شيئا، ثم أعاد، فلم يجبه شيئا، ثم أعاد فلم يجبه شيئا، ورفع رأسه فقال: " ما المسئول عنها بأعلم من السائل، ولكن لها علامات تعرف بها، إذا رأيت الرعاء البهم يتطاولون في البنيان، ورأيت الحفاة العراة ملوك الأرض، ورأيت المرأة تلد ربها، خمس لا يعلمها إلا الله، {إن الله عنده علم الساعة} [لقمان: 34] إلى قوله: {إن الله عليم خبير} [لقمان: 34] ثم قال: «لا والذي بعث محمدا بالحق هدى وبشيرا، ما كنت بأعلم به من رجل منكم، وإنه لجبريل عليه السلام نزل في صورة دحية الكلبي»

আবু হুরায়রা এবং আবু যর (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ

রাসুলুল্লাহ্‌ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তার সাহাবায়ে কেরামের মধ্যে বসতেন: নবাগত লোক এসে তাঁকে চিনতে পারত না যতক্ষন না জিজ্ঞাসা করতো। আমরা রাসূলুল্লাহ্‌ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) –এর নিকট তাঁর জন্য একটি বসার স্থান নির্মাণের জন্য অনুমতি চাইলাম। যাতে নবাগত লোক তাঁকে সহজে চিনতে পারে। আমরা তাঁর জন্য মাটির একটি উঁচু স্থান তৈরী করলাম। তিনি তার উপর উপবেশন করতেন। একদা আমরা বসা ছিলাম, আর রাসূলুল্লাহ্‌ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তাঁর স্থানে উপবিষ্ট ছিলেন। এমন সময় এক নবাগত ব্যক্তির আগমন হলো, যার মুখমণ্ডল সকলের চেয়ে সুন্দর ছিল এবং যার শরীরের সুগন্ধি ছিল সকলের চেয়ে উত্তম। তাঁর বস্ত্রে একটু ময়লাও ছিল না। সে ব্যক্তি বিছানার কিনারা হতে সালাম করে বললেন: হে মুহাম্মদ! আপনাকে সালাম। তিনি তাঁর সালামের উত্তর দিলে তিনি বললেন: আমি কি নিকটে আসবো? তিনি বললেন: আস! এভাবে কয়েকবার বললেন, তিনিও কয়েকবার উত্তরে বললেন, হ্যাঁ, নিকটে আস। এমনকি তিনি নিকটে এসে নিজ হাত রাসূলুল্লাহ্‌ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)–এর হাঁটুর উপর রাখলেন এবং বললেন: হে মুহাম্মদ! আমাকে ইসলাম সম্বন্ধে বলুন। তিনি বললেন: ইসলাম হলো তুমি আল্লাহ্‌ তা’আলার ইবাদত করবে এবং তাঁর সাথে কাউকে শরীক করবে না, সালাত কায়েম করবে এবং যাকাত আদায় করবে, কা’বা শরীফের হজ্জ করবে এবং রমজানের রোযা রাখবে। তিনি বললেন: আমি যদি এটা করি, তবে কি আমি মুসলমান হয়ে যাব? তিনি বললেন, হ্যাঁ। সে ব্যক্তি বললেন, আপনি সত্যই বলেছেন। ঐ ব্যক্তির ‘আপনি সত্য বলেছেন’ বাক্য শুনে আমাদের বিস্ময় জাগল। এরপর বললেন: হে মুহাম্মদ! আমাকে বলুন, ঈমান কি? তিনি বললেন: আল্লাহর প্রতি, তাঁর ফেরেশতাগণের, নবীগণের এবং কিতাবের প্রতি বিশ্বাস স্থাপন করা এবং কদরে বিশ্বাস করা। তিনি বললেন: আমি যদি এরূপ করি, তবে কি আমি মু’মিন হয়ে যাব? রাসূলুল্লাহ্‌ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন; হ্যাঁ। তখন সে ব্যক্তি বললেন: আপনি সত্যই বলেছেন। এরপর তিনি বললেন: হে মুহাম্মদ! আমাকে বলুন, ইহসান কি? তিনি বললেন: তুমি এমনভাবে ইবাদত করবে, যেন তুমি আল্লাহ্‌ তা’আলাকে দেখছো। কেননা যদিও তুমি তাঁকে দেখছো না, তিনি তো তোমাকে দেখছেন। তিনি বললেন: আপনি সত্যই বলেছেন। তিনি আবার বললেন: হে মুহাম্মদ! কিয়ামত কবে হবে? তিনি কিছু বললেন না, বরং মাথা নিচু করলেন। লোকটি আবারও সেই প্রশ্ন করলেন কিন্তু তিনি তাকে কোন উত্তর দিলেন না। আবারও প্রশ্ন করলেন কিন্তু এবারও তিনি তাকে কোন উত্তর দিলেন না, অতঃপর তিনি মাথা উঠিয়ে বললেন: তুমি যার নিকট জিজ্ঞাসা করছো, তিনি প্রশ্নকারী হতে অধিক জ্ঞাত নন। কিন্তু এর অনেক আলামত রয়েছে। তুমি তা জানতে পার। যখন তুমি দেখবে পশুপালের রাখালরা সুউচ্চ প্রাসাদ নির্মাণ করবে, আর তুমি দেখবে, নগ্ন পদ ও নগ্ন দেহ লোকেরা ভুখণ্ডের বাদশাহ হবে, আরো তুমি দেখবে যে, দাসী তার মালিককে প্রসব করবে, তখন মনে করবে যে, কিয়ামত নিকটবর্তী। পাঁচটি বস্তু আল্লাহ্‌ ব্যতীত কেউ অবগত নয়। এরপর তিনি (আরবী) হতে (আরবী) পর্যন্ত পাঠ করলেন [১]। এরপর তিনি বললেন: ঐ সত্তার কসম! যিনি মুহাম্মদকে সত্য সহকারে পথ প্রদর্শক ও সুসংবাদদাতা রূপে প্রেরণ করেছেন, আমি তাঁকে তোমাদের চাইতে অধিক জানি না। তিনি ছিলেন, জিব্‌রাঈল (আঃ) যিনি দিহ্‌ইয়া কালবীর রূপে অবতীর্ণ হয়েছিলেন।

আবু হুরায়রা এবং আবু যর (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ

রাসুলুল্লাহ্‌ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তার সাহাবায়ে কেরামের মধ্যে বসতেন: নবাগত লোক এসে তাঁকে চিনতে পারত না যতক্ষন না জিজ্ঞাসা করতো। আমরা রাসূলুল্লাহ্‌ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) –এর নিকট তাঁর জন্য একটি বসার স্থান নির্মাণের জন্য অনুমতি চাইলাম। যাতে নবাগত লোক তাঁকে সহজে চিনতে পারে। আমরা তাঁর জন্য মাটির একটি উঁচু স্থান তৈরী করলাম। তিনি তার উপর উপবেশন করতেন। একদা আমরা বসা ছিলাম, আর রাসূলুল্লাহ্‌ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তাঁর স্থানে উপবিষ্ট ছিলেন। এমন সময় এক নবাগত ব্যক্তির আগমন হলো, যার মুখমণ্ডল সকলের চেয়ে সুন্দর ছিল এবং যার শরীরের সুগন্ধি ছিল সকলের চেয়ে উত্তম। তাঁর বস্ত্রে একটু ময়লাও ছিল না। সে ব্যক্তি বিছানার কিনারা হতে সালাম করে বললেন: হে মুহাম্মদ! আপনাকে সালাম। তিনি তাঁর সালামের উত্তর দিলে তিনি বললেন: আমি কি নিকটে আসবো? তিনি বললেন: আস! এভাবে কয়েকবার বললেন, তিনিও কয়েকবার উত্তরে বললেন, হ্যাঁ, নিকটে আস। এমনকি তিনি নিকটে এসে নিজ হাত রাসূলুল্লাহ্‌ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)–এর হাঁটুর উপর রাখলেন এবং বললেন: হে মুহাম্মদ! আমাকে ইসলাম সম্বন্ধে বলুন। তিনি বললেন: ইসলাম হলো তুমি আল্লাহ্‌ তা’আলার ইবাদত করবে এবং তাঁর সাথে কাউকে শরীক করবে না, সালাত কায়েম করবে এবং যাকাত আদায় করবে, কা’বা শরীফের হজ্জ করবে এবং রমজানের রোযা রাখবে। তিনি বললেন: আমি যদি এটা করি, তবে কি আমি মুসলমান হয়ে যাব? তিনি বললেন, হ্যাঁ। সে ব্যক্তি বললেন, আপনি সত্যই বলেছেন। ঐ ব্যক্তির ‘আপনি সত্য বলেছেন’ বাক্য শুনে আমাদের বিস্ময় জাগল। এরপর বললেন: হে মুহাম্মদ! আমাকে বলুন, ঈমান কি? তিনি বললেন: আল্লাহর প্রতি, তাঁর ফেরেশতাগণের, নবীগণের এবং কিতাবের প্রতি বিশ্বাস স্থাপন করা এবং কদরে বিশ্বাস করা। তিনি বললেন: আমি যদি এরূপ করি, তবে কি আমি মু’মিন হয়ে যাব? রাসূলুল্লাহ্‌ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন; হ্যাঁ। তখন সে ব্যক্তি বললেন: আপনি সত্যই বলেছেন। এরপর তিনি বললেন: হে মুহাম্মদ! আমাকে বলুন, ইহসান কি? তিনি বললেন: তুমি এমনভাবে ইবাদত করবে, যেন তুমি আল্লাহ্‌ তা’আলাকে দেখছো। কেননা যদিও তুমি তাঁকে দেখছো না, তিনি তো তোমাকে দেখছেন। তিনি বললেন: আপনি সত্যই বলেছেন। তিনি আবার বললেন: হে মুহাম্মদ! কিয়ামত কবে হবে? তিনি কিছু বললেন না, বরং মাথা নিচু করলেন। লোকটি আবারও সেই প্রশ্ন করলেন কিন্তু তিনি তাকে কোন উত্তর দিলেন না। আবারও প্রশ্ন করলেন কিন্তু এবারও তিনি তাকে কোন উত্তর দিলেন না, অতঃপর তিনি মাথা উঠিয়ে বললেন: তুমি যার নিকট জিজ্ঞাসা করছো, তিনি প্রশ্নকারী হতে অধিক জ্ঞাত নন। কিন্তু এর অনেক আলামত রয়েছে। তুমি তা জানতে পার। যখন তুমি দেখবে পশুপালের রাখালরা সুউচ্চ প্রাসাদ নির্মাণ করবে, আর তুমি দেখবে, নগ্ন পদ ও নগ্ন দেহ লোকেরা ভুখণ্ডের বাদশাহ হবে, আরো তুমি দেখবে যে, দাসী তার মালিককে প্রসব করবে, তখন মনে করবে যে, কিয়ামত নিকটবর্তী। পাঁচটি বস্তু আল্লাহ্‌ ব্যতীত কেউ অবগত নয়। এরপর তিনি (আরবী) হতে (আরবী) পর্যন্ত পাঠ করলেন [১]। এরপর তিনি বললেন: ঐ সত্তার কসম! যিনি মুহাম্মদকে সত্য সহকারে পথ প্রদর্শক ও সুসংবাদদাতা রূপে প্রেরণ করেছেন, আমি তাঁকে তোমাদের চাইতে অধিক জানি না। তিনি ছিলেন, জিব্‌রাঈল (আঃ) যিনি দিহ্‌ইয়া কালবীর রূপে অবতীর্ণ হয়েছিলেন।

أخبرنا محمد بن قدامة، عن جرير، عن أبي فروة، عن أبي زرعة، عن أبي هريرة، وأبي ذر، قالا: كان رسول الله صلى الله عليه وسلم يجلس بين ظهراني أصحابه، فيجيء الغريب فلا يدري أيهم هو حتى يسأل، فطلبنا إلى رسول الله صلى الله عليه وسلم أن نجعل له مجلسا يعرفه الغريب إذا أتاه، فبنينا له دكانا من طين، كان يجلس عليه، وإنا لجلوس ورسول الله صلى الله عليه وسلم في مجلسه، إذ أقبل رجل أحسن الناس وجها، وأطيب الناس ريحا، كأن ثيابه لم يمسها دنس، حتى سلم في طرف البساط فقال: السلام عليك يا محمد، فرد عليه السلام، قال: أدنو يا محمد، قال: «ادنه» فما زال يقول: أدنو مرارا، ويقول له: «ادن» حتى وضع يده على ركبتي رسول الله صلى الله عليه وسلم، قال: يا محمد، أخبرني ما الإسلام؟ قال: «الإسلام أن تعبد الله، ولا تشرك به شيئا، وتقيم الصلاة، وتؤتي الزكاة، وتحج البيت، وتصوم رمضان» قال: إذا فعلت ذلك فقد أسلمت؟ قال: «نعم» قال: صدقت. فلما سمعنا قول الرجل صدقت أنكرناه، قال: يا محمد، أخبرني ما الإيمان؟ قال: «الإيمان بالله، وملائكته، والكتاب، والنبيين، وتؤمن بالقدر» قال: فإذا فعلت ذلك فقد آمنت؟ قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: «نعم» قال: صدقت. قال: يا محمد، أخبرني ما الإحسان؟ قال: «أن تعبد الله كأنك تراه، فإن لم تكن تراه فإنه يراك» قال: صدقت. قال: يا محمد، أخبرني متى الساعة؟ قال: فنكس فلم يجبه شيئا، ثم أعاد، فلم يجبه شيئا، ثم أعاد فلم يجبه شيئا، ورفع رأسه فقال: " ما المسئول عنها بأعلم من السائل، ولكن لها علامات تعرف بها، إذا رأيت الرعاء البهم يتطاولون في البنيان، ورأيت الحفاة العراة ملوك الأرض، ورأيت المرأة تلد ربها، خمس لا يعلمها إلا الله، {إن الله عنده علم الساعة} [لقمان: 34] إلى قوله: {إن الله عليم خبير} [لقمان: 34] ثم قال: «لا والذي بعث محمدا بالحق هدى وبشيرا، ما كنت بأعلم به من رجل منكم، وإنه لجبريل عليه السلام نزل في صورة دحية الكلبي»


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