সুনান নাসাঈ > মহান মহীয়ান আল্লাহ্র রাস্তায় জিহাদকারীর উপমা
সুনান নাসাঈ ৩১২৭
أخبرنا هناد بن السري، عن ابن المبارك، عن معمر، عن الزهري، عن سعيد بن المسيب، عن أبي هريرة، قال: سمعت رسول الله صلى الله عليه وسلم يقول: «مثل المجاهد في سبيل الله، والله أعلم بمن يجاهد في سبيله، كمثل الصائم القائم الخاشع الراكع الساجد»
আবু হুরায়রা (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ
আমি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে বলতে শুনেছিঃ আল্লাহ্র রাস্তায় জিহাদকারীর উপমা- আর কে আল্লাহ্র রাস্তায় জিহাদ করে, তা আল্লাহ্ই ভাল জানেন- ঐ সিয়াম পালনকারীর ন্যায়, যে রাত জেগে ইবাদাত করে, আল্লাহ্কে ভয় করে, রুকু করে এবং সিজদা করে।
আবু হুরায়রা (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ
আমি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে বলতে শুনেছিঃ আল্লাহ্র রাস্তায় জিহাদকারীর উপমা- আর কে আল্লাহ্র রাস্তায় জিহাদ করে, তা আল্লাহ্ই ভাল জানেন- ঐ সিয়াম পালনকারীর ন্যায়, যে রাত জেগে ইবাদাত করে, আল্লাহ্কে ভয় করে, রুকু করে এবং সিজদা করে।
أخبرنا هناد بن السري، عن ابن المبارك، عن معمر، عن الزهري، عن سعيد بن المسيب، عن أبي هريرة، قال: سمعت رسول الله صلى الله عليه وسلم يقول: «مثل المجاهد في سبيل الله، والله أعلم بمن يجاهد في سبيله، كمثل الصائم القائم الخاشع الراكع الساجد»
সুনান নাসাঈ > মহান মহীয়ান আল্লাহ্র রাস্তায় জিহাদের সমতুল্য যা
সুনান নাসাঈ ৩১২৮
أخبرنا عبيد الله بن سعيد، قال: حدثنا عفان، قال: حدثنا همام، قال: حدثنا محمد بن جحادة، قال: حدثني أبو حصين، أن ذكوان، حدثه أن أبا هريرة، حدثه قال: جاء رجل إلى رسول الله صلى الله عليه وسلم، فقال: دلني على عمل يعدل الجهاد؟ قال: «لا أجده، هل تستطيع إذا خرج المجاهد تدخل مسجدا فتقوم لا تفتر، وتصوم لا تفطر؟» قال: من يستطيع ذلك
আবু হুরায়রা (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ
এক ব্যক্তি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর কাছে এসে বললঃ আমাকে এমন আমলের সন্ধান দিন- যা জিহাদের সমতুল্য হয়। তিনি বললেনঃ আমি তো এমন আমল পাচ্ছি না, (আচ্ছা) যখন মুজাহিদ জিহাদে বের হয়, তখন তুমি কি কোন মসজিদে প্রবেশ করে এমন ইবাদাত আরম্ভ করতে সক্ষম, যাতে একটুও বিরতি দেবে না? আর (লাগাতার) সাওম পালন করবে, যাতে কোন বিরতি দিবে না? লোকটি বললঃ এরূপ করতে কে সক্ষম হবে?
আবু হুরায়রা (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ
এক ব্যক্তি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর কাছে এসে বললঃ আমাকে এমন আমলের সন্ধান দিন- যা জিহাদের সমতুল্য হয়। তিনি বললেনঃ আমি তো এমন আমল পাচ্ছি না, (আচ্ছা) যখন মুজাহিদ জিহাদে বের হয়, তখন তুমি কি কোন মসজিদে প্রবেশ করে এমন ইবাদাত আরম্ভ করতে সক্ষম, যাতে একটুও বিরতি দেবে না? আর (লাগাতার) সাওম পালন করবে, যাতে কোন বিরতি দিবে না? লোকটি বললঃ এরূপ করতে কে সক্ষম হবে?
أخبرنا عبيد الله بن سعيد، قال: حدثنا عفان، قال: حدثنا همام، قال: حدثنا محمد بن جحادة، قال: حدثني أبو حصين، أن ذكوان، حدثه أن أبا هريرة، حدثه قال: جاء رجل إلى رسول الله صلى الله عليه وسلم، فقال: دلني على عمل يعدل الجهاد؟ قال: «لا أجده، هل تستطيع إذا خرج المجاهد تدخل مسجدا فتقوم لا تفتر، وتصوم لا تفطر؟» قال: من يستطيع ذلك
সুনান নাসাঈ ৩১২৯
أخبرنا محمد بن عبد الله بن عبد الحكم، عن شعيب، عن الليث، عن عبيد الله بن أبي جعفر، قال: أخبرني عروة، عن أبي مراوح، عن أبي ذر، أنه سأل نبي الله صلى الله عليه وسلم، أي العمل خير؟ قال: «إيمان بالله، وجهاد في سبيل الله عز وجل»
আবূ যর (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ
তিনি নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে জিজ্ঞাসা করলেনঃ কোন আমল সর্বোত্তম? তিনি বললেনঃ আল্লাহ্র প্রতি ঈমান আনা এবং মহান মহীয়ান আল্লাহ্র পথে জিহাদ করা।
আবূ যর (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ
তিনি নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে জিজ্ঞাসা করলেনঃ কোন আমল সর্বোত্তম? তিনি বললেনঃ আল্লাহ্র প্রতি ঈমান আনা এবং মহান মহীয়ান আল্লাহ্র পথে জিহাদ করা।
أخبرنا محمد بن عبد الله بن عبد الحكم، عن شعيب، عن الليث، عن عبيد الله بن أبي جعفر، قال: أخبرني عروة، عن أبي مراوح، عن أبي ذر، أنه سأل نبي الله صلى الله عليه وسلم، أي العمل خير؟ قال: «إيمان بالله، وجهاد في سبيل الله عز وجل»
সুনান নাসাঈ ৩১৩০
أخبرنا إسحق بن إبراهيم، قال: أنبأنا عبد الرزاق، قال: حدثنا معمر، عن الزهري، عن ابن المسيب، عن أبي هريرة، قال: سأل رجل رسول الله صلى الله عليه وسلم أي الأعمال أفضل؟ قال: «إيمان بالله» قال: ثم ماذا؟ قال: «الجهاد في سبيل الله» قال: ثم ماذا؟ قال: «حج مبرور»
আবু হুরায়রা (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ
এক ব্যক্তি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে প্রশ্ন করলোঃ কোন আমল সর্বোত্তম? তিনি বললেনঃ আল্লাহ্র উপর ঈমান আনা। সে বললঃ তারপর কোনটি? তিনি বললেনঃ আল্লাহ্র পথে জিহাদ করা। সে বলল, তারপর কোনটি? তিনি বললেনঃ মাবরূর হজ্জ বা মাকবূল হজ্জ।
আবু হুরায়রা (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ
এক ব্যক্তি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে প্রশ্ন করলোঃ কোন আমল সর্বোত্তম? তিনি বললেনঃ আল্লাহ্র উপর ঈমান আনা। সে বললঃ তারপর কোনটি? তিনি বললেনঃ আল্লাহ্র পথে জিহাদ করা। সে বলল, তারপর কোনটি? তিনি বললেনঃ মাবরূর হজ্জ বা মাকবূল হজ্জ।
أخبرنا إسحق بن إبراهيم، قال: أنبأنا عبد الرزاق، قال: حدثنا معمر، عن الزهري، عن ابن المسيب، عن أبي هريرة، قال: سأل رجل رسول الله صلى الله عليه وسلم أي الأعمال أفضل؟ قال: «إيمان بالله» قال: ثم ماذا؟ قال: «الجهاد في سبيل الله» قال: ثم ماذا؟ قال: «حج مبرور»
সুনান নাসাঈ > মহান মহীয়ান আল্লাহ্র রাস্তায় জিহাদকারীর মর্যাদা
সুনান নাসাঈ ৩১৩১
قال: الحارث بن مسكين، قراءة عليه وأنا أسمع، عن ابن وهب، قال: حدثني أبو هانئ، عن أبي عبد الرحمن الحبلي، عن أبي سعيد الخدري، أن رسول الله صلى الله عليه وسلم قال: «يا أبا سعيد، من رضي بالله ربا، وبالإسلام دينا، وبمحمد نبيا، وجبت له الجنة» قال: فعجب لها أبو سعيد، قال: أعدها علي يا رسول الله، ففعل، ثم قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: «وأخرى يرفع بها العبد مائة درجة في الجنة، ما بين كل درجتين كما بين السماء والأرض» قال: وما هي يا رسول الله؟ قال: «الجهاد في سبيل الله، الجهاد في سبيل الله»
আবূ সাঈদ খুদরী (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ
রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেনঃ হে আবূ সাঈদ! যে ব্যক্তি আল্লাহ্কে রব হিসেবে, ইসলামকে দ্বীন হিসেবে এবং মুহাম্মাদ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে নবী হিসেবে সন্তুষ্ট চিত্তে মেনে নেয়, তার জন্য জান্নাত অবধারিত হয়ে যায়। বর্ণনাকারী বলেন, এতে আবূ সাঈদ (রাঃ) আশ্চর্যবোধ করলেন। তিনি বললেনঃ ইয়া রাসূলাল্লাহ! এ (কথা)টি আমাকে আবার বলুন। তিনি তা করলেন। তারপর রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন, অন্য একটি (আমল) আছে, তা দ্বারা জান্নাতে বান্দার মর্যাদা একশত গুণ বৃদ্ধি করা হয়, এর প্রতি দুটি মর্যাদা স্তরের দূরত্ব এমন- যেমন আকাশ ও পৃথিবীর মধ্যকার দূরত্ব। তিনি বললেনঃ তা কি, ইয়া রাসূলাল্লাহ? তিনি বললেনঃ আল্লাহ্র রাস্তায় জিহাদ করা, আল্লাহ্র রাস্তায় জিহাদ করা।
আবূ সাঈদ খুদরী (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ
রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেনঃ হে আবূ সাঈদ! যে ব্যক্তি আল্লাহ্কে রব হিসেবে, ইসলামকে দ্বীন হিসেবে এবং মুহাম্মাদ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে নবী হিসেবে সন্তুষ্ট চিত্তে মেনে নেয়, তার জন্য জান্নাত অবধারিত হয়ে যায়। বর্ণনাকারী বলেন, এতে আবূ সাঈদ (রাঃ) আশ্চর্যবোধ করলেন। তিনি বললেনঃ ইয়া রাসূলাল্লাহ! এ (কথা)টি আমাকে আবার বলুন। তিনি তা করলেন। তারপর রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন, অন্য একটি (আমল) আছে, তা দ্বারা জান্নাতে বান্দার মর্যাদা একশত গুণ বৃদ্ধি করা হয়, এর প্রতি দুটি মর্যাদা স্তরের দূরত্ব এমন- যেমন আকাশ ও পৃথিবীর মধ্যকার দূরত্ব। তিনি বললেনঃ তা কি, ইয়া রাসূলাল্লাহ? তিনি বললেনঃ আল্লাহ্র রাস্তায় জিহাদ করা, আল্লাহ্র রাস্তায় জিহাদ করা।
قال: الحارث بن مسكين، قراءة عليه وأنا أسمع، عن ابن وهب، قال: حدثني أبو هانئ، عن أبي عبد الرحمن الحبلي، عن أبي سعيد الخدري، أن رسول الله صلى الله عليه وسلم قال: «يا أبا سعيد، من رضي بالله ربا، وبالإسلام دينا، وبمحمد نبيا، وجبت له الجنة» قال: فعجب لها أبو سعيد، قال: أعدها علي يا رسول الله، ففعل، ثم قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: «وأخرى يرفع بها العبد مائة درجة في الجنة، ما بين كل درجتين كما بين السماء والأرض» قال: وما هي يا رسول الله؟ قال: «الجهاد في سبيل الله، الجهاد في سبيل الله»
সুনান নাসাঈ ৩১৩২
- أخبرنا هارون بن محمد بن بكار بن بلال، قال: حدثنا محمد بن عيسى بن القاسم بن سميع، قال: حدثنا زيد بن واقد، قال: حدثني بسر بن عبيد الله، عن أبي إدريس الخولاني، عن أبي الدرداء، قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: «من أقام الصلاة، وآتى الزكاة، ومات لا يشرك بالله شيئا، كان حقا على الله عز وجل أن يغفر له هاجرا ومات في مولده» فقلنا: يا رسول الله، ألا نخبر بها الناس فيستبشروا بها؟ فقال: «إن للجنة مائة درجة، بين كل درجتين كما بين السماء والأرض، أعدها الله للمجاهدين في سبيله، ولولا أن أشق على المؤمنين، ولا أجد ما أحملهم عليه، ولا تطيب أنفسهم أن يتخلفوا بعدي، ما قعدت خلف سرية، ولوددت أني أقتل، ثم أحيا، ثم أقتل
আবুদ দারদা (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ
রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেনঃ যে ব্যক্তি সালাত কায়েম করে, যাকাত প্রদান করে এবং আল্লাহ্র সঙ্গে কাউকে শরীক না করে মৃত্যুবরণ করে, (আল্লাহ্র প্রতিশ্রুতি অনুযায়ী) সে ব্যক্তিকে ক্ষমা করা মহান মহীয়ান আল্লাহ্র জন্য ‘অবধারিত’। সে হিজরত করুক অথবা তার নিজ আবাসে মৃত্যুবরণ করুক। আমি বললামঃ ইয়া রাসূলাল্লাহ! আমি কি লোকদের এ সুসংবাদ পৌঁছিয়ে দেব না, যাতে তারা আনন্দিত হয়? তিনি বললেনঃ জান্নাতে একশত মর্যাদা-স্তর আছে, প্রতি দুটি স্তরের দূরত্ব যমীন ও আসমানের দূরত্বের সমান, আল্লাহ্ তা‘আলা তা আল্লাহ্র রাস্তায় মুজাহিদের জন্য নির্দিষ্ট করে রেখেছেন। যদি মু’মিনদের উপর কষ্টদায়ক না হতো, আর আমি তাদের আরোহণের জন্য সওয়ারী ব্যবস্থা করতে অপারগ না হতাম, আর আমার সাহচর্য থেকে বঞ্চিত থাকার কারণে তাদের মনোকষ্ট না হতো, তবে আমি কোন যোদ্ধাদল হতেই পিছিয়ে থাকতাম না। আমার ইচ্ছা হয়- আমি (একবার) শহীদ হয়ে যাই, আবার জীবিত হই, আবার শহীদ হই।
আবুদ দারদা (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ
রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেনঃ যে ব্যক্তি সালাত কায়েম করে, যাকাত প্রদান করে এবং আল্লাহ্র সঙ্গে কাউকে শরীক না করে মৃত্যুবরণ করে, (আল্লাহ্র প্রতিশ্রুতি অনুযায়ী) সে ব্যক্তিকে ক্ষমা করা মহান মহীয়ান আল্লাহ্র জন্য ‘অবধারিত’। সে হিজরত করুক অথবা তার নিজ আবাসে মৃত্যুবরণ করুক। আমি বললামঃ ইয়া রাসূলাল্লাহ! আমি কি লোকদের এ সুসংবাদ পৌঁছিয়ে দেব না, যাতে তারা আনন্দিত হয়? তিনি বললেনঃ জান্নাতে একশত মর্যাদা-স্তর আছে, প্রতি দুটি স্তরের দূরত্ব যমীন ও আসমানের দূরত্বের সমান, আল্লাহ্ তা‘আলা তা আল্লাহ্র রাস্তায় মুজাহিদের জন্য নির্দিষ্ট করে রেখেছেন। যদি মু’মিনদের উপর কষ্টদায়ক না হতো, আর আমি তাদের আরোহণের জন্য সওয়ারী ব্যবস্থা করতে অপারগ না হতাম, আর আমার সাহচর্য থেকে বঞ্চিত থাকার কারণে তাদের মনোকষ্ট না হতো, তবে আমি কোন যোদ্ধাদল হতেই পিছিয়ে থাকতাম না। আমার ইচ্ছা হয়- আমি (একবার) শহীদ হয়ে যাই, আবার জীবিত হই, আবার শহীদ হই।
- أخبرنا هارون بن محمد بن بكار بن بلال، قال: حدثنا محمد بن عيسى بن القاسم بن سميع، قال: حدثنا زيد بن واقد، قال: حدثني بسر بن عبيد الله، عن أبي إدريس الخولاني، عن أبي الدرداء، قال: قال رسول الله صلى الله عليه وسلم: «من أقام الصلاة، وآتى الزكاة، ومات لا يشرك بالله شيئا، كان حقا على الله عز وجل أن يغفر له هاجرا ومات في مولده» فقلنا: يا رسول الله، ألا نخبر بها الناس فيستبشروا بها؟ فقال: «إن للجنة مائة درجة، بين كل درجتين كما بين السماء والأرض، أعدها الله للمجاهدين في سبيله، ولولا أن أشق على المؤمنين، ولا أجد ما أحملهم عليه، ولا تطيب أنفسهم أن يتخلفوا بعدي، ما قعدت خلف سرية، ولوددت أني أقتل، ثم أحيا، ثم أقتل
সুনান নাসাঈ > যে মুসলমান হয়েছে, হিজরত করেছে এবং জিহাদ করেছে- তার সওয়াব (ফযীলত)
সুনান নাসাঈ ৩১৩৩
قال: الحارث بن مسكين، قراءة عليه وأنا أسمع، عن ابن وهب، قال: أخبرني أبو هانئ، عن عمرو بن مالك الجنبي، أنه سمع فضالة بن عبيد، يقول: سمعت رسول الله صلى الله عليه وسلم يقول: «أنا زعيم، والزعيم الحميل لمن آمن بي، وأسلم وهاجر ببيت في ربض الجنة، وببيت في وسط الجنة، وأنا زعيم لمن آمن بي، وأسلم، وجاهد في سبيل الله، ببيت في ربض الجنة، وببيت في وسط الجنة، وببيت في أعلى غرف الجنة، من فعل ذلك فلم يدع للخير مطلبا، ولا من الشر مهربا، يموت حيث شاء أن يموت»
আমর ইব্ন মালিক জানবী (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ
ফাযালা ইব্ন উবায়দ (রাঃ)-কে বলতে শুনেছেন, আমি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে বলতে শুনেছিঃ আমি সে ব্যক্তির যামিন হলাম, যে আমার প্রতি ঈমান আনলো এবং ইসলাম গ্রহণ করলো এবং হিজরত করলো- এমন একটি ঘরের- যা জান্নাতের আঙিনায় (বহির্ভাগে) হবে, আর একটি ঘরের- যা জান্নাতের মধ্যভাগে। আর আমি যামিন হলাম ঐ ব্যক্তির জন্য, যে আমার প্রতি ঈমান আনয়ন করেছে এবং ইসলাম গ্রহণ করেছে এবং জিহাদ করেছে আল্লাহ্র রাস্তায় এমন ঘরের- যা জান্নাতের বহির্ভাগে এবং একটি ঘরের- যা জান্নাতের মধ্যভাগে হবে এবং একটি ঘরের- যা জান্নাতের কক্ষসমূহের উপরিভাগে হবে। সে যেখানে কল্যাণের সন্ধান পায়, সেখান থেকে কল্যাণ সন্ধান করবে এবং মন্দ থেকে রক্ষার জন্য যেখানে ইচ্ছা পলায়ন করবে। সে যেখানে ইচ্ছা মৃত্যুবরণ করুক, (জান্নাত তার জন্য অবধারিত)।
আমর ইব্ন মালিক জানবী (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ
ফাযালা ইব্ন উবায়দ (রাঃ)-কে বলতে শুনেছেন, আমি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে বলতে শুনেছিঃ আমি সে ব্যক্তির যামিন হলাম, যে আমার প্রতি ঈমান আনলো এবং ইসলাম গ্রহণ করলো এবং হিজরত করলো- এমন একটি ঘরের- যা জান্নাতের আঙিনায় (বহির্ভাগে) হবে, আর একটি ঘরের- যা জান্নাতের মধ্যভাগে। আর আমি যামিন হলাম ঐ ব্যক্তির জন্য, যে আমার প্রতি ঈমান আনয়ন করেছে এবং ইসলাম গ্রহণ করেছে এবং জিহাদ করেছে আল্লাহ্র রাস্তায় এমন ঘরের- যা জান্নাতের বহির্ভাগে এবং একটি ঘরের- যা জান্নাতের মধ্যভাগে হবে এবং একটি ঘরের- যা জান্নাতের কক্ষসমূহের উপরিভাগে হবে। সে যেখানে কল্যাণের সন্ধান পায়, সেখান থেকে কল্যাণ সন্ধান করবে এবং মন্দ থেকে রক্ষার জন্য যেখানে ইচ্ছা পলায়ন করবে। সে যেখানে ইচ্ছা মৃত্যুবরণ করুক, (জান্নাত তার জন্য অবধারিত)।
قال: الحارث بن مسكين، قراءة عليه وأنا أسمع، عن ابن وهب، قال: أخبرني أبو هانئ، عن عمرو بن مالك الجنبي، أنه سمع فضالة بن عبيد، يقول: سمعت رسول الله صلى الله عليه وسلم يقول: «أنا زعيم، والزعيم الحميل لمن آمن بي، وأسلم وهاجر ببيت في ربض الجنة، وببيت في وسط الجنة، وأنا زعيم لمن آمن بي، وأسلم، وجاهد في سبيل الله، ببيت في ربض الجنة، وببيت في وسط الجنة، وببيت في أعلى غرف الجنة، من فعل ذلك فلم يدع للخير مطلبا، ولا من الشر مهربا، يموت حيث شاء أن يموت»
সুনান নাসাঈ ৩১৩৪
أخبرني إبراهيم بن يعقوب، قال: حدثنا أبو النضر هاشم بن القاسم، قال: حدثنا أبو عقيل عبد الله بن عقيل، قال: حدثنا موسى بن المسيب، عن سالم بن أبي الجعد، عن سبرة بن أبي فاكه، قال: سمعت رسول الله صلى الله عليه وسلم يقول: " إن الشيطان قعد لابن آدم بأطرقه، فقعد له بطريق الإسلام، فقال: تسلم وتذر دينك ودين آبائك وآباء أبيك، فعصاه فأسلم، ثم قعد له بطريق الهجرة، فقال: تهاجر وتدع أرضك وسماءك، وإنما مثل المهاجر كمثل الفرس في الطول، فعصاه فهاجر، ثم قعد له بطريق الجهاد، فقال: تجاهد فهو جهد النفس والمال، فتقاتل فتقتل، فتنكح المرأة، ويقسم المال، فعصاه فجاهد، " فقال رسول الله صلى الله عليه وسلم: «فمن فعل ذلك كان حقا على الله عز وجل أن يدخله الجنة، ومن قتل كان حقا على الله عز وجل أن يدخله الجنة، وإن غرق كان حقا على الله أن يدخله الجنة، أو وقصته دابته كان حقا على الله أن يدخله الجنة»
সাবরাতা ইব্ন আবূ ফাকিহ (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ
আমি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে বলতে শুনেছিঃ শয়তান আদম-সন্তানের রাস্তাসমূহে বসে থাকে। সে ইসলামের পথে বসে (বাধা সৃষ্টি করতে গিয়ে) বলেঃ তুমি ইসলাম গ্রহণ করবে, আর তোমার ধর্ম ও তোমার বাপ দাদার ধর্ম এবং তোমার পিতার পূর্বপুরুষদের ধর্ম পরিত্যাগ করবে? কিন্তু আদম সন্তান তার কথা অমান্য করে ইসলাম গ্রহণ করে। তারপর শয়তান তার হিজরতের রাস্তায় বসে বলেঃ তুমি হিজরত করবে, তোমার ভূমি ও আকাশ পরিত্যাগ করবে? মুহাজির তো একটি লম্বা রশিতে আবদ্ধ ঘোড়ার ন্যায় (নিয়ন্ত্রিত জীবন-যাপনে বাধ্য)। কিন্তু সে ব্যক্তি তার কথা অমান্য করে হিজরত করে। এরপর শয়তান তার জিহাদের রাস্তায় বসে এবং বলেঃ তুমি কি জিহাদ করবে? এতো নিজেকে এবং নিজের ধন সম্পদকে ধ্বংস করা। তুমি যুদ্ধ করে নিহত হবে, তোমার স্ত্রী অন্যের বিবাহে যাবে, তোমার সম্পদ ভাগ হবে। সে ব্যক্তি তাকে অমান্য করে জিহাদে গমন করে। রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেনঃ যে এরূপ করবে, তাকে জান্নাতে প্রবেশ করানো মহান মহীয়ান আল্লাহ্র (ওয়াদা অনুযায়ী জান্নাত তার) জন্য ‘অবধারিত’। আর যে ব্যক্তি শহীদ হয়, তাকে জান্নাতে প্রবেশ করানো আল্লাহ্র উপর অবধারিত। যদি সে ডুবে যায়, তাকে জান্নাতে প্রবেশ করানো আল্লাহ্র উপর অবধারিত। আর যদি তার সওয়ারী তাকে ফেলে দিয়ে তার গর্দান ভেঙ্গে দেয় বা মেরে ফেলে, তখনও তাকে জান্নাতে প্রবেশ করানো আল্লাহ্র উপর অবধারিত।
সাবরাতা ইব্ন আবূ ফাকিহ (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ
আমি রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে বলতে শুনেছিঃ শয়তান আদম-সন্তানের রাস্তাসমূহে বসে থাকে। সে ইসলামের পথে বসে (বাধা সৃষ্টি করতে গিয়ে) বলেঃ তুমি ইসলাম গ্রহণ করবে, আর তোমার ধর্ম ও তোমার বাপ দাদার ধর্ম এবং তোমার পিতার পূর্বপুরুষদের ধর্ম পরিত্যাগ করবে? কিন্তু আদম সন্তান তার কথা অমান্য করে ইসলাম গ্রহণ করে। তারপর শয়তান তার হিজরতের রাস্তায় বসে বলেঃ তুমি হিজরত করবে, তোমার ভূমি ও আকাশ পরিত্যাগ করবে? মুহাজির তো একটি লম্বা রশিতে আবদ্ধ ঘোড়ার ন্যায় (নিয়ন্ত্রিত জীবন-যাপনে বাধ্য)। কিন্তু সে ব্যক্তি তার কথা অমান্য করে হিজরত করে। এরপর শয়তান তার জিহাদের রাস্তায় বসে এবং বলেঃ তুমি কি জিহাদ করবে? এতো নিজেকে এবং নিজের ধন সম্পদকে ধ্বংস করা। তুমি যুদ্ধ করে নিহত হবে, তোমার স্ত্রী অন্যের বিবাহে যাবে, তোমার সম্পদ ভাগ হবে। সে ব্যক্তি তাকে অমান্য করে জিহাদে গমন করে। রাসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেনঃ যে এরূপ করবে, তাকে জান্নাতে প্রবেশ করানো মহান মহীয়ান আল্লাহ্র (ওয়াদা অনুযায়ী জান্নাত তার) জন্য ‘অবধারিত’। আর যে ব্যক্তি শহীদ হয়, তাকে জান্নাতে প্রবেশ করানো আল্লাহ্র উপর অবধারিত। যদি সে ডুবে যায়, তাকে জান্নাতে প্রবেশ করানো আল্লাহ্র উপর অবধারিত। আর যদি তার সওয়ারী তাকে ফেলে দিয়ে তার গর্দান ভেঙ্গে দেয় বা মেরে ফেলে, তখনও তাকে জান্নাতে প্রবেশ করানো আল্লাহ্র উপর অবধারিত।
أخبرني إبراهيم بن يعقوب، قال: حدثنا أبو النضر هاشم بن القاسم، قال: حدثنا أبو عقيل عبد الله بن عقيل، قال: حدثنا موسى بن المسيب، عن سالم بن أبي الجعد، عن سبرة بن أبي فاكه، قال: سمعت رسول الله صلى الله عليه وسلم يقول: " إن الشيطان قعد لابن آدم بأطرقه، فقعد له بطريق الإسلام، فقال: تسلم وتذر دينك ودين آبائك وآباء أبيك، فعصاه فأسلم، ثم قعد له بطريق الهجرة، فقال: تهاجر وتدع أرضك وسماءك، وإنما مثل المهاجر كمثل الفرس في الطول، فعصاه فهاجر، ثم قعد له بطريق الجهاد، فقال: تجاهد فهو جهد النفس والمال، فتقاتل فتقتل، فتنكح المرأة، ويقسم المال، فعصاه فجاهد، " فقال رسول الله صلى الله عليه وسلم: «فمن فعل ذلك كان حقا على الله عز وجل أن يدخله الجنة، ومن قتل كان حقا على الله عز وجل أن يدخله الجنة، وإن غرق كان حقا على الله أن يدخله الجنة، أو وقصته دابته كان حقا على الله أن يدخله الجنة»