মুয়াত্তা ইমাম মালিক > যখন চোর বিচারকের নিকট উপস্থিত হয়ে যায়, তখন তার জন্য সুপারিশ করা অবৈধ

মুয়াত্তা ইমাম মালিক ১৫৩৫

و حدثني عن مالك عن ابن شهاب عن صفوان بن عبد الله بن صفوان أن صفوان بن أمية قيل له إنه من لم يهاجر هلك فقدم صفوان بن أمية المدينة فنام في المسجد وتوسد رداءه فجاء سارق فأخذ رداءه فأخذ صفوان السارق فجاء به إلى رسول الله صلى الله عليه وسلم فأمر به رسول الله صلى الله عليه وسلم أن تقطع يده فقال له صفوان إني لم أرد هذا يا رسول الله هو عليه صدقة فقال رسول الله صلى الله عليه وسلم فهلا قبل أن تأتيني به

সাফওয়ান ইবনু আবদুল্লাহ্ ইবনু সাফওয়ান (র) থেকে বর্নিতঃ

কেউ সাফওয়ান ইব্নু উমাইয়া (রা)-কে বলল, যে ব্যক্তি হিজরত করেনি সে ধ্বংস হোক। অতঃপর সাফওয়ান হিজরত করে মদীনাতে আগমন করে স্বীয় চাদর মাথার নিচে রেখে মসজিদে নববীতে শুয়ে পড়ল। ইত্যবসরে এক চোর তার চাদর চুরি করল। সাফওয়ান চোরকে ধরে, তাকে রসূলুল্লাহ্ সল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম-এর খিদমতে নিয়ে গেলে অতঃপর রসূলুল্লাহ্ সল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম তার হাত কাটার আদেশ দিলেন। সাফওয়াল বলল, ইয়া রসূলাল্লাহ্! আমার এই ইচ্ছা ছিল না। আমি তাকে চাদরখানা সদকা করলাম। রসূলুল্লাহ্ সল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বললেন, আমার কাছে তাকে আনার পূর্বে তোমার এ কথা বলা উচিত ছিল। (সহীহ, আবূ দাঊদ ৪৩৯৪, নাসাঈ ৪৮৭৯, ইবনু মাজাহ ২৫৯৫, আলবানী হাদীসটিকে সহীহ বলেছেন [ইরওয়া] ২৩১৭, তবে ইমাম মালিক কর্তৃক বর্ণিত হাদীসটি মুরসাল)

সাফওয়ান ইবনু আবদুল্লাহ্ ইবনু সাফওয়ান (র) থেকে বর্নিতঃ

কেউ সাফওয়ান ইব্নু উমাইয়া (রা)-কে বলল, যে ব্যক্তি হিজরত করেনি সে ধ্বংস হোক। অতঃপর সাফওয়ান হিজরত করে মদীনাতে আগমন করে স্বীয় চাদর মাথার নিচে রেখে মসজিদে নববীতে শুয়ে পড়ল। ইত্যবসরে এক চোর তার চাদর চুরি করল। সাফওয়ান চোরকে ধরে, তাকে রসূলুল্লাহ্ সল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম-এর খিদমতে নিয়ে গেলে অতঃপর রসূলুল্লাহ্ সল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম তার হাত কাটার আদেশ দিলেন। সাফওয়াল বলল, ইয়া রসূলাল্লাহ্! আমার এই ইচ্ছা ছিল না। আমি তাকে চাদরখানা সদকা করলাম। রসূলুল্লাহ্ সল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বললেন, আমার কাছে তাকে আনার পূর্বে তোমার এ কথা বলা উচিত ছিল। (সহীহ, আবূ দাঊদ ৪৩৯৪, নাসাঈ ৪৮৭৯, ইবনু মাজাহ ২৫৯৫, আলবানী হাদীসটিকে সহীহ বলেছেন [ইরওয়া] ২৩১৭, তবে ইমাম মালিক কর্তৃক বর্ণিত হাদীসটি মুরসাল)

و حدثني عن مالك عن ابن شهاب عن صفوان بن عبد الله بن صفوان أن صفوان بن أمية قيل له إنه من لم يهاجر هلك فقدم صفوان بن أمية المدينة فنام في المسجد وتوسد رداءه فجاء سارق فأخذ رداءه فأخذ صفوان السارق فجاء به إلى رسول الله صلى الله عليه وسلم فأمر به رسول الله صلى الله عليه وسلم أن تقطع يده فقال له صفوان إني لم أرد هذا يا رسول الله هو عليه صدقة فقال رسول الله صلى الله عليه وسلم فهلا قبل أن تأتيني به


মুয়াত্তা ইমাম মালিক ১৫৩৬

و حدثني عن مالك عن ربيعة بن أبي عبد الرحمن أن الزبير بن العوام لقي رجلا قد أخذ سارقا وهو يريد أن يذهب به إلى السلطان فشفع له الزبير ليرسله فقال لا حتى أبلغ به السلطان فقال الزبير إذا بلغت به السلطان فلعن الله الشافع والمشفع

রবীআ ইবনু আবূ আবদুর রহমান (র) থেকে বর্নিতঃ

যুবাইর ইব্নু আওয়াম এক ব্যক্তিকে দেখল, সে চোরকে ধরে বিচারকের কাছে নিয়ে যাচ্ছে। যুবাইর বলল, তাকে ছেড়ে দাও। সে বলল, বিচারকের নিকট না নিয়ে আমি তাকে ছাড়ব না। যুবাইর বলল, তুমি তাকে বিচারকের কাছে নিয়ে গেলে সুপারিশকারী ও সুপারিশ মান্যকারীর উপর আল্লাহর অভিসম্পাত। [১] (হাদীসটি ইমাম মালিক এককভাবে বর্ণনা করেছেন)

রবীআ ইবনু আবূ আবদুর রহমান (র) থেকে বর্নিতঃ

যুবাইর ইব্নু আওয়াম এক ব্যক্তিকে দেখল, সে চোরকে ধরে বিচারকের কাছে নিয়ে যাচ্ছে। যুবাইর বলল, তাকে ছেড়ে দাও। সে বলল, বিচারকের নিকট না নিয়ে আমি তাকে ছাড়ব না। যুবাইর বলল, তুমি তাকে বিচারকের কাছে নিয়ে গেলে সুপারিশকারী ও সুপারিশ মান্যকারীর উপর আল্লাহর অভিসম্পাত। [১] (হাদীসটি ইমাম মালিক এককভাবে বর্ণনা করেছেন)

و حدثني عن مالك عن ربيعة بن أبي عبد الرحمن أن الزبير بن العوام لقي رجلا قد أخذ سارقا وهو يريد أن يذهب به إلى السلطان فشفع له الزبير ليرسله فقال لا حتى أبلغ به السلطان فقال الزبير إذا بلغت به السلطان فلعن الله الشافع والمشفع


মুয়াত্তা ইমাম মালিক > হাত কাটার বিভিন্ন মাসায়েল

মুয়াত্তা ইমাম মালিক ১৫৩৭

حدثني يحيى عن مالك عن عبد الرحمن بن القاسم عن أبيه أن رجلا من أهل اليمن أقطع اليد والرجل قدم فنزل على أبي بكر الصديق فشكا إليه أن عامل اليمن قد ظلمه فكان يصل من الليل فيقول أبو بكر وأبيك ما ليلك بليل سارق ثم إنهم فقدوا عقدا لأسماء بنت عميس امرأة أبي بكر الصديق فجعل الرجل يطوف معهم ويقول اللهم عليك بمن بيت أهل هذا البيت الصالح فوجدوا الحلي عند صائغ زعم أن الأقطع جاءه به فاعترف به الأقطع أو شهد عليه به فأمر به أبو بكر الصديق فقطعت يده اليسرى وقال أبو بكر والله لدعاؤه على نفسه أشد عندي عليه من سرقته قال يحيى قال مالك الأمر عندنا في الذي يسرق مرارا ثم يستعدى عليه إنه ليس عليه إلا أن تقطع يده لجميع من سرق منه إذا لم يكن أقيم عليه الحد فإن كان قد أقيم عليه الحد قبل ذلك ثم سرق ما يجب فيه القطع قطع أيضا

কাসিম ইবনু মুহাম্মাদ (র) থেকে বর্নিতঃ

এক ব্যক্তি ইয়ামান হতে মদীনায় আগমন করল, যার এক হাত, এক পা কাটা ছিল। [১] আবূ বাকর (রা)-এর নিকট উপস্থিত হয়ে সে বলতে লাগল, ইয়ামানের বিচারক আমার উপর অত্যাচার করেছে। এই ইয়ামানী ব্যক্তি রাত্রে নামায পড়ত। আবূ বাকর (রা) তাকে বললেন, আল্লাহর কসম, তোমার রাত চোরের রাত নয়। ঘটনাক্রমে আবূ বাকর (রা)-এর স্ত্রী আসমা বিনতু উমাইস (রা)-এর একখানা হার হারিয়ে গেল, অন্যান্য লোকের সাথে ঐ পঙ্গু লোকটিও উহা তালাশ করছিল আর বলিতেছিল, হে আল্লাহ! যে ব্যক্তি এই সম্ভ্রান্ত পরিবারের হার চুরি করেছে, তাকে ধ্বংস কর। অবশেষে এক স্বর্ণকারের দোকানে উক্ত হার পাওয়া গেল। স্বর্ণকার বলল, ইহা তো আমাকে ঐ পঙ্গু লোকটি দিয়েছে। অতঃপর ঐ পঙ্গু লোকটি হয় স্বীকার করেছে অথবা সাক্ষীর সাক্ষ্য দ্বারা সাব্যস্ত হয়েছে যে, এ কাজ ঐ ব্যক্তিরই। আবূ বাকর (রা)-এর আদেশে ঐ পঙ্গু লোকটির বাম হাত কাটা গেল। [২] আবূ বাকর (রা) বললেন, আল্লাহ্‌র কসম, এই লোকটি যে নিজের উপর বদ দু‘আ করছিল উহা তার চুরি হতেও আমার নিকট কঠিন মনে হচ্ছিল। (হাদীসটি ইমাম মালিক এককভাবে বর্ণনা করেছেন) মালিক (র) বলেছেন, যদি কোন ব্যক্তি কয়েকবার চুরি করে, তৎপর সে ধৃত হয়, তবে এই কয়েক বারের পরিবর্তে শুধু এক হাতই কাটা যাবে। যদি ইতোপূর্বে তার শাস্তি না হয়ে থাকে। আর শাস্তি হয়ে থাকলে পুনরায় চুরি করার অপরাধে আবার তার ডান পা কাটা হবে।

কাসিম ইবনু মুহাম্মাদ (র) থেকে বর্নিতঃ

এক ব্যক্তি ইয়ামান হতে মদীনায় আগমন করল, যার এক হাত, এক পা কাটা ছিল। [১] আবূ বাকর (রা)-এর নিকট উপস্থিত হয়ে সে বলতে লাগল, ইয়ামানের বিচারক আমার উপর অত্যাচার করেছে। এই ইয়ামানী ব্যক্তি রাত্রে নামায পড়ত। আবূ বাকর (রা) তাকে বললেন, আল্লাহর কসম, তোমার রাত চোরের রাত নয়। ঘটনাক্রমে আবূ বাকর (রা)-এর স্ত্রী আসমা বিনতু উমাইস (রা)-এর একখানা হার হারিয়ে গেল, অন্যান্য লোকের সাথে ঐ পঙ্গু লোকটিও উহা তালাশ করছিল আর বলিতেছিল, হে আল্লাহ! যে ব্যক্তি এই সম্ভ্রান্ত পরিবারের হার চুরি করেছে, তাকে ধ্বংস কর। অবশেষে এক স্বর্ণকারের দোকানে উক্ত হার পাওয়া গেল। স্বর্ণকার বলল, ইহা তো আমাকে ঐ পঙ্গু লোকটি দিয়েছে। অতঃপর ঐ পঙ্গু লোকটি হয় স্বীকার করেছে অথবা সাক্ষীর সাক্ষ্য দ্বারা সাব্যস্ত হয়েছে যে, এ কাজ ঐ ব্যক্তিরই। আবূ বাকর (রা)-এর আদেশে ঐ পঙ্গু লোকটির বাম হাত কাটা গেল। [২] আবূ বাকর (রা) বললেন, আল্লাহ্‌র কসম, এই লোকটি যে নিজের উপর বদ দু‘আ করছিল উহা তার চুরি হতেও আমার নিকট কঠিন মনে হচ্ছিল। (হাদীসটি ইমাম মালিক এককভাবে বর্ণনা করেছেন) মালিক (র) বলেছেন, যদি কোন ব্যক্তি কয়েকবার চুরি করে, তৎপর সে ধৃত হয়, তবে এই কয়েক বারের পরিবর্তে শুধু এক হাতই কাটা যাবে। যদি ইতোপূর্বে তার শাস্তি না হয়ে থাকে। আর শাস্তি হয়ে থাকলে পুনরায় চুরি করার অপরাধে আবার তার ডান পা কাটা হবে।

حدثني يحيى عن مالك عن عبد الرحمن بن القاسم عن أبيه أن رجلا من أهل اليمن أقطع اليد والرجل قدم فنزل على أبي بكر الصديق فشكا إليه أن عامل اليمن قد ظلمه فكان يصل من الليل فيقول أبو بكر وأبيك ما ليلك بليل سارق ثم إنهم فقدوا عقدا لأسماء بنت عميس امرأة أبي بكر الصديق فجعل الرجل يطوف معهم ويقول اللهم عليك بمن بيت أهل هذا البيت الصالح فوجدوا الحلي عند صائغ زعم أن الأقطع جاءه به فاعترف به الأقطع أو شهد عليه به فأمر به أبو بكر الصديق فقطعت يده اليسرى وقال أبو بكر والله لدعاؤه على نفسه أشد عندي عليه من سرقته قال يحيى قال مالك الأمر عندنا في الذي يسرق مرارا ثم يستعدى عليه إنه ليس عليه إلا أن تقطع يده لجميع من سرق منه إذا لم يكن أقيم عليه الحد فإن كان قد أقيم عليه الحد قبل ذلك ثم سرق ما يجب فيه القطع قطع أيضا


মুয়াত্তা ইমাম মালিক ১৫৩৮

و حدثني عن مالك أن أبا الزناد أخبره أن عاملا لعمر بن عبد العزيز أخذ ناسا في حرابة ولم يقتلوا أحدا فأراد أن يقطع أيديهم أو يقتل فكتب إلى عمر بن عبد العزيز في ذلك فكتب إليه عمر بن عبد العزيز لو أخذت بأيسر ذلك قال يحيى و سمعت ما لكا يقول الأمر عندنا في الذي يسرق أمتعة الناس التي تكون موضوعة بالأسواق محرزة قد أحرزها أهلها في أوعيتهم وضموا بعضها إلى بعض إنه من سرق من ذلك شيئا من حرزه فبلغ قيمته ما يجب فيه القطع فإن عليه القطع سواء كان صاحب المتاع عند متاعه أو لم يكن ليلا ذلك أو نهارا قال مالك في الذي يسرق ما يجب عليه فيه القطع ثم يوجد معه ما سرق فيرد إلى صاحبه إنه تقطع يده قال مالك فإن قال قائل كيف تقطع يده وقد أخذ المتاع منه ودفع إلى صاحبه فإنما هو بمنزلة الشارب يوجد منه ريح الشراب المسكر وليس به سكر فيجلد الحد قال وإنما يجلد الحد في المسكر إذا شربه وإن لم يسكره وذلك أنه إنما شربه ليسكره فكذلك تقطع يد السارق في السرقة التي أخذت منه ولو لم ينتفع بها ورجعت إلى صاحبها وإنما سرقها حين سرقها ليذهب بها قال مالك في القوم يأتون إلى البيت فيسرقون منه جميعا فيخرجون بالعدل يحملونه جميعا أو الصندوق أو الخشبة أو بالمكتل أو ما أشبه ذلك مما يحمله القوم جميعا إنهم إذا أخرجوا ذلك من حرزه وهم يحملونه جميعا فبلغ ثمن ما خرجوا به من ذلك ما يجب فيه القطع وذلك ثلاثة دراهم فصاعدا فعليهم القطع جميعا قال وإن خرج كل واحد منهم بمتاع على حدته فمن خرج منهم بما تبلغ قيمته ثلاثة دراهم فصاعدا فعليه القطع ومن لم يخرج منهم بما تبلغ قيمته ثلاثة دراهم فلا قطع عليه قال يحيى قال مالك الأمر عندنا أنه إذا كانت دار رجل مغلقة عليه ليس معه فيها غيره فإنه لا يجب على من سرق منها شيئا القطع حتى يخرج به من الدار كلها وذلك أن الدار كلها هي حرزه فإن كان معه في الدار ساكن غيره وكان كل إنسان منهم يغلق عليه بابه وكانت حرزا لهم جميعا فمن سرق من بيوت تلك الدار شيئا يجب فيه القطع فخرج به إلى الدار فقد أخرجه من حرزه إلى غير حرزه ووجب عليه فيه القطع قال مالك والأمر عندنا في العبد يسرق من متاع سيده أنه إن كان ليس من خدمه ولا ممن يأمن على بيته ثم دخل سرا فسرق من متاع سيده ما يجب فيه القطع فلا قطع عليه وكذلك الأمة إذا سرقت من متاع سيدها لا قطع عليها و قال في العبد لا يكون من خدمه ولا ممن يأمن على بيته فدخل سرا فسرق من متاع امرأة سيده ما يجب فيه القطع إنه تقطع يده قال وكذلك أمة المرأة إذا كانت ليست بخادم لها ولا لزوجها ولا ممن تأمن على بيتها فدخلت سرا فسرقت من متاع سيدتها ما يجب فيه القطع فلا قطع عليها قال مالك وكذلك أمة المرأة التي لا تكون من خدمها ولا ممن تأمن على بيتها فدخلت سرا فسرقت من متاع زوج سيدتها ما يجب فيه القطع أنها تقطع يدها قال مالك وكذلك الرجل يسرق من متاع امرأته أو المرأة تسرق من متاع زوجها ما يجب فيه القطع إن كان الذي سرق كل واحد منهما من متاع صاحبه في بيت سوى البيت الذي يغلقان عليهما وكان في حرز سوى البيت الذي هما فيه فإن من سرق منهما من متاع صاحبه ما يجب فيه القطع فعليه القطع فيه قال مالك في الصبي الصغير والأعجمي الذي لا يفصح أنهما إذا سرقا من حرزهما أو غلقهما فعلى من سرقهما القطع وإن خرجا من حرزهما وغلقهما فليس على من سرقهما قطع قال وإنما هما بمنزلة حريسة الجبل والثمر المعلق قال مالك والأمر عندنا في الذي ينبش القبور أنه إذا بلغ ما أخرج من القبر ما يجب فيه القطع فعليه فيه القطع و قال مالك وذلك أن القبر حرز لما فيه كما أن البيوت حرز لما فيها قال ولا يجب عليه القطع حتى يخرج به من القبر

আবূ যিনাদ (রা) থেকে বর্নিতঃ

উমার ইব্নু আবদুল আযীয (র)-এর একজন কর্মচারী ডাকাতির দায়ে এমন কয়েকজনকে গ্রেফতার করলেন, যারা কাউকেও হত্যা করেনি। কর্মচারী তাদের হাত কেটে ফেলতে অথবা তাদেরকে হত্যা করতে ইচ্ছা করলেন। কিন্তু কোনটি করা ঠিক হবে সাব্যস্ত করতে না পেরে অবশেষে এ ব্যাপারটি উমার ইবনু আঃ আযীয-এর নিকট লিখে জানালেন। উমার ইবনু আঃ আযীয উত্তরে লিখলেন, যদি তুমি সহজ শাস্তি প্রদান কর, তবে তাই উত্তম হবে। [১] (হাদীসটি ইমাম মালিক এককভাবে বর্ণনা করেছেন) মালিক (র) বলেন, আমাদের মতে যদি কোন ব্যক্তি বাজারের সামগ্রী হতে এক-চতুর্থাংশ দীনারের সমমানের মাল চুরি করে, যা উহার মালিক একটি পাত্রে রেখেছে এবং একটিকে অন্যটির সাথে মিলিয়ে রেখেছে, তবে চোরের হাত কাটা যাবে, ঐ মালের মালিক তথায় উপস্থিত থাকুক অথবা না থাকুক, দিনে চুরি হয়ে থাকুক অথবা রাতে। মালিক (র) বলেন, যদি কোন ব্যক্তি চুরি করে এমন কিছু, যার মূল্য দীনারের এক-চতুর্থাংশ। অতঃপর সে ধরা পড়ে, উহা মালের প্রকৃত মালিককে প্রত্যর্পণ করে, তবুও তার হাত কাটা যাবে। কেউ যদি বলে কেন তার হাত কাটা হবে? তার নিকট হতে মাল ফিরিয়ে নেয়া হয়েছে। তাহলে বলা হবে কেননা এর উদাহরণ এইরূপ যেমন কোন ব্যক্তি কোন মাদক দ্রব্য পান করল, যার গন্ধ তার মুখ হতে নিঃসৃত হচ্ছে, কিন্তু মাতাল হচ্ছে না, তবে তার উপর শাস্তির আদেশ জারি হবে। কেননা সে ব্যক্তি উহা মাদকতার জন্যই খেয়েছিল যদিও সে মাতাল হয়নি। তদ্রুপ চোরও মাল নিয়ে যাওয়ার জন্যই চুরি করেছিল, যদিও নিয়ে যেতে সক্ষম হয়নি। মালিক (র) বলেছেন, যদি কতিপয় ব্যক্তি কোন ঘরে চুরি করার নিমিত্তে প্রবেশ করে আর তথা হতে একটি বাক্স বা কাষ্ঠ অথবা টুকরি সকলে মিলে উঠিয়ে নেয়, যদি উহার মূল্য এক দীনারের এক-চতুর্থাংশ পরিমাণ হয় তা হলে ঐ সকল ব্যক্তির হাত কাটতে হবে। আর যদি প্রত্যেকে পৃথক পৃথক মাল নিয়ে বের হয়, তবে যার মালের মূল্য এক-চতুর্থাংশ দীনারের পরিমাণ হয় তার হাত কাটা যাবে। আর যার মাল এই পরিমাণের না হবে, তার হাত কাটা যাবে না। মালিক (রা) বলেন, আমাদের মত এই যে, যদি কোন ঘরে শুধু একজন লোকই থাকে আর ঐ ঘর হতে চোর কোন দ্রব্য চুরি করে, কিন্তু ঘরের বাহিরে নিয়ে যেতে সক্ষম না হয়, তবে তার হাত কর্তন করা হবে না, যতক্ষণ না ঐ মাল ঘরের বাহিরে নিয়ে যায়। যদি ঘরে পৃথক পৃথক কয়েকটি কামরা থাকে আর প্রতি কামরায় লোক থাকে, এমতাবস্থায় যদি চোর কোন কামরা হতে কারো মাল চুরি করে কামরার বাহিরে নিয়ে যায়, কিন্তু ঘরের বাহিরে নিয়ে যায়নি, তবুও তার হাত কাটা হবে। মালিক (র) বলেন, আমাদের মতে যে দাস-দাসী ঘরে যাতায়াত করে আর তার প্রভু তার উপর পূর্ণ নির্ভরশীল থাকে, যদি সে স্বীয় প্রভুর কোন মাল চুরি করে তা হলে তার হাত কাটতে হবে না। এইরূপে যে দাস বা দাসী ঘরে যাতায়াত করে না, আর প্রভু তার উপর নির্ভরও করে না, সেও যদি স্বীয় প্রভুর মাল চুরি করে থাকে তবে তার হাত কাটতে হবে না। যদি ঐ দাস বা দাসী স্বীয় প্রভুর স্ত্রীর মাল অথবা স্বীয় প্রভুর স্বামীর মাল চুরি করে, তা হলে তার হাত কাটতে হবে। মালিক (র) বলেন, অনুরূপভাবে যদি স্বামী স্ত্রীর এমন মাল চুরি কর্‌ যা যেই ঘরে তারা উভয়ে অবস্থান করে সেই ঘরে রক্ষিত নয়, বরং অন্য কোন ঘরে রক্ষিত অথবা স্ত্রী স্বীয় স্বামীর এমন মাল চুরি করে যা অন্য ঘরে রয়েছে, তা হলে হাত কাটতে হবে। মালিক (র) বলেন, বালক-বালিকা অথবা কোন বিদেশী ব্যক্তি যে এই দেশের কথা বলতে পারে না যদি কোন চোর তাদেরকে ঘর হতে চুরি করে, তা হলে হাত কাটতে হবে। যদি রাস্তা হতে অথবা ঘরের বাহির হতে নিয়ে যায় তা হলে হাত কাটতে হবে না। এদের হুকুম পাহাড়ের ছাগল ও গাছের লটকানো ফলের মতো হবে। মালিক (র) বলেন, যদি কেউ কবর খুঁড়ে দীনারের চতুর্থাংশ পরিমাণ মাল চুরি করে নেয়, তবে চোরের হাত কাটা হবে। কেননা কবরও ঘরের মতো একটি রক্ষিত স্থান। কিন্তু যতক্ষণ না কাফন কবর হতে বের করে আনবে ততক্ষণ হাত কাটতে হবে না।

আবূ যিনাদ (রা) থেকে বর্নিতঃ

উমার ইব্নু আবদুল আযীয (র)-এর একজন কর্মচারী ডাকাতির দায়ে এমন কয়েকজনকে গ্রেফতার করলেন, যারা কাউকেও হত্যা করেনি। কর্মচারী তাদের হাত কেটে ফেলতে অথবা তাদেরকে হত্যা করতে ইচ্ছা করলেন। কিন্তু কোনটি করা ঠিক হবে সাব্যস্ত করতে না পেরে অবশেষে এ ব্যাপারটি উমার ইবনু আঃ আযীয-এর নিকট লিখে জানালেন। উমার ইবনু আঃ আযীয উত্তরে লিখলেন, যদি তুমি সহজ শাস্তি প্রদান কর, তবে তাই উত্তম হবে। [১] (হাদীসটি ইমাম মালিক এককভাবে বর্ণনা করেছেন) মালিক (র) বলেন, আমাদের মতে যদি কোন ব্যক্তি বাজারের সামগ্রী হতে এক-চতুর্থাংশ দীনারের সমমানের মাল চুরি করে, যা উহার মালিক একটি পাত্রে রেখেছে এবং একটিকে অন্যটির সাথে মিলিয়ে রেখেছে, তবে চোরের হাত কাটা যাবে, ঐ মালের মালিক তথায় উপস্থিত থাকুক অথবা না থাকুক, দিনে চুরি হয়ে থাকুক অথবা রাতে। মালিক (র) বলেন, যদি কোন ব্যক্তি চুরি করে এমন কিছু, যার মূল্য দীনারের এক-চতুর্থাংশ। অতঃপর সে ধরা পড়ে, উহা মালের প্রকৃত মালিককে প্রত্যর্পণ করে, তবুও তার হাত কাটা যাবে। কেউ যদি বলে কেন তার হাত কাটা হবে? তার নিকট হতে মাল ফিরিয়ে নেয়া হয়েছে। তাহলে বলা হবে কেননা এর উদাহরণ এইরূপ যেমন কোন ব্যক্তি কোন মাদক দ্রব্য পান করল, যার গন্ধ তার মুখ হতে নিঃসৃত হচ্ছে, কিন্তু মাতাল হচ্ছে না, তবে তার উপর শাস্তির আদেশ জারি হবে। কেননা সে ব্যক্তি উহা মাদকতার জন্যই খেয়েছিল যদিও সে মাতাল হয়নি। তদ্রুপ চোরও মাল নিয়ে যাওয়ার জন্যই চুরি করেছিল, যদিও নিয়ে যেতে সক্ষম হয়নি। মালিক (র) বলেছেন, যদি কতিপয় ব্যক্তি কোন ঘরে চুরি করার নিমিত্তে প্রবেশ করে আর তথা হতে একটি বাক্স বা কাষ্ঠ অথবা টুকরি সকলে মিলে উঠিয়ে নেয়, যদি উহার মূল্য এক দীনারের এক-চতুর্থাংশ পরিমাণ হয় তা হলে ঐ সকল ব্যক্তির হাত কাটতে হবে। আর যদি প্রত্যেকে পৃথক পৃথক মাল নিয়ে বের হয়, তবে যার মালের মূল্য এক-চতুর্থাংশ দীনারের পরিমাণ হয় তার হাত কাটা যাবে। আর যার মাল এই পরিমাণের না হবে, তার হাত কাটা যাবে না। মালিক (রা) বলেন, আমাদের মত এই যে, যদি কোন ঘরে শুধু একজন লোকই থাকে আর ঐ ঘর হতে চোর কোন দ্রব্য চুরি করে, কিন্তু ঘরের বাহিরে নিয়ে যেতে সক্ষম না হয়, তবে তার হাত কর্তন করা হবে না, যতক্ষণ না ঐ মাল ঘরের বাহিরে নিয়ে যায়। যদি ঘরে পৃথক পৃথক কয়েকটি কামরা থাকে আর প্রতি কামরায় লোক থাকে, এমতাবস্থায় যদি চোর কোন কামরা হতে কারো মাল চুরি করে কামরার বাহিরে নিয়ে যায়, কিন্তু ঘরের বাহিরে নিয়ে যায়নি, তবুও তার হাত কাটা হবে। মালিক (র) বলেন, আমাদের মতে যে দাস-দাসী ঘরে যাতায়াত করে আর তার প্রভু তার উপর পূর্ণ নির্ভরশীল থাকে, যদি সে স্বীয় প্রভুর কোন মাল চুরি করে তা হলে তার হাত কাটতে হবে না। এইরূপে যে দাস বা দাসী ঘরে যাতায়াত করে না, আর প্রভু তার উপর নির্ভরও করে না, সেও যদি স্বীয় প্রভুর মাল চুরি করে থাকে তবে তার হাত কাটতে হবে না। যদি ঐ দাস বা দাসী স্বীয় প্রভুর স্ত্রীর মাল অথবা স্বীয় প্রভুর স্বামীর মাল চুরি করে, তা হলে তার হাত কাটতে হবে। মালিক (র) বলেন, অনুরূপভাবে যদি স্বামী স্ত্রীর এমন মাল চুরি কর্‌ যা যেই ঘরে তারা উভয়ে অবস্থান করে সেই ঘরে রক্ষিত নয়, বরং অন্য কোন ঘরে রক্ষিত অথবা স্ত্রী স্বীয় স্বামীর এমন মাল চুরি করে যা অন্য ঘরে রয়েছে, তা হলে হাত কাটতে হবে। মালিক (র) বলেন, বালক-বালিকা অথবা কোন বিদেশী ব্যক্তি যে এই দেশের কথা বলতে পারে না যদি কোন চোর তাদেরকে ঘর হতে চুরি করে, তা হলে হাত কাটতে হবে। যদি রাস্তা হতে অথবা ঘরের বাহির হতে নিয়ে যায় তা হলে হাত কাটতে হবে না। এদের হুকুম পাহাড়ের ছাগল ও গাছের লটকানো ফলের মতো হবে। মালিক (র) বলেন, যদি কেউ কবর খুঁড়ে দীনারের চতুর্থাংশ পরিমাণ মাল চুরি করে নেয়, তবে চোরের হাত কাটা হবে। কেননা কবরও ঘরের মতো একটি রক্ষিত স্থান। কিন্তু যতক্ষণ না কাফন কবর হতে বের করে আনবে ততক্ষণ হাত কাটতে হবে না।

و حدثني عن مالك أن أبا الزناد أخبره أن عاملا لعمر بن عبد العزيز أخذ ناسا في حرابة ولم يقتلوا أحدا فأراد أن يقطع أيديهم أو يقتل فكتب إلى عمر بن عبد العزيز في ذلك فكتب إليه عمر بن عبد العزيز لو أخذت بأيسر ذلك قال يحيى و سمعت ما لكا يقول الأمر عندنا في الذي يسرق أمتعة الناس التي تكون موضوعة بالأسواق محرزة قد أحرزها أهلها في أوعيتهم وضموا بعضها إلى بعض إنه من سرق من ذلك شيئا من حرزه فبلغ قيمته ما يجب فيه القطع فإن عليه القطع سواء كان صاحب المتاع عند متاعه أو لم يكن ليلا ذلك أو نهارا قال مالك في الذي يسرق ما يجب عليه فيه القطع ثم يوجد معه ما سرق فيرد إلى صاحبه إنه تقطع يده قال مالك فإن قال قائل كيف تقطع يده وقد أخذ المتاع منه ودفع إلى صاحبه فإنما هو بمنزلة الشارب يوجد منه ريح الشراب المسكر وليس به سكر فيجلد الحد قال وإنما يجلد الحد في المسكر إذا شربه وإن لم يسكره وذلك أنه إنما شربه ليسكره فكذلك تقطع يد السارق في السرقة التي أخذت منه ولو لم ينتفع بها ورجعت إلى صاحبها وإنما سرقها حين سرقها ليذهب بها قال مالك في القوم يأتون إلى البيت فيسرقون منه جميعا فيخرجون بالعدل يحملونه جميعا أو الصندوق أو الخشبة أو بالمكتل أو ما أشبه ذلك مما يحمله القوم جميعا إنهم إذا أخرجوا ذلك من حرزه وهم يحملونه جميعا فبلغ ثمن ما خرجوا به من ذلك ما يجب فيه القطع وذلك ثلاثة دراهم فصاعدا فعليهم القطع جميعا قال وإن خرج كل واحد منهم بمتاع على حدته فمن خرج منهم بما تبلغ قيمته ثلاثة دراهم فصاعدا فعليه القطع ومن لم يخرج منهم بما تبلغ قيمته ثلاثة دراهم فلا قطع عليه قال يحيى قال مالك الأمر عندنا أنه إذا كانت دار رجل مغلقة عليه ليس معه فيها غيره فإنه لا يجب على من سرق منها شيئا القطع حتى يخرج به من الدار كلها وذلك أن الدار كلها هي حرزه فإن كان معه في الدار ساكن غيره وكان كل إنسان منهم يغلق عليه بابه وكانت حرزا لهم جميعا فمن سرق من بيوت تلك الدار شيئا يجب فيه القطع فخرج به إلى الدار فقد أخرجه من حرزه إلى غير حرزه ووجب عليه فيه القطع قال مالك والأمر عندنا في العبد يسرق من متاع سيده أنه إن كان ليس من خدمه ولا ممن يأمن على بيته ثم دخل سرا فسرق من متاع سيده ما يجب فيه القطع فلا قطع عليه وكذلك الأمة إذا سرقت من متاع سيدها لا قطع عليها و قال في العبد لا يكون من خدمه ولا ممن يأمن على بيته فدخل سرا فسرق من متاع امرأة سيده ما يجب فيه القطع إنه تقطع يده قال وكذلك أمة المرأة إذا كانت ليست بخادم لها ولا لزوجها ولا ممن تأمن على بيتها فدخلت سرا فسرقت من متاع سيدتها ما يجب فيه القطع فلا قطع عليها قال مالك وكذلك أمة المرأة التي لا تكون من خدمها ولا ممن تأمن على بيتها فدخلت سرا فسرقت من متاع زوج سيدتها ما يجب فيه القطع أنها تقطع يدها قال مالك وكذلك الرجل يسرق من متاع امرأته أو المرأة تسرق من متاع زوجها ما يجب فيه القطع إن كان الذي سرق كل واحد منهما من متاع صاحبه في بيت سوى البيت الذي يغلقان عليهما وكان في حرز سوى البيت الذي هما فيه فإن من سرق منهما من متاع صاحبه ما يجب فيه القطع فعليه القطع فيه قال مالك في الصبي الصغير والأعجمي الذي لا يفصح أنهما إذا سرقا من حرزهما أو غلقهما فعلى من سرقهما القطع وإن خرجا من حرزهما وغلقهما فليس على من سرقهما قطع قال وإنما هما بمنزلة حريسة الجبل والثمر المعلق قال مالك والأمر عندنا في الذي ينبش القبور أنه إذا بلغ ما أخرج من القبر ما يجب فيه القطع فعليه فيه القطع و قال مالك وذلك أن القبر حرز لما فيه كما أن البيوت حرز لما فيها قال ولا يجب عليه القطع حتى يخرج به من القبر


মুয়াত্তা ইমাম মালিক > যে অবস্থায় হাত কাটা হবে না

মুয়াত্তা ইমাম মালিক ১৫৪০

حدثني عن مالك عن ابن شهاب عن السائب بن يزيد أن عبد الله بن عمرو بن الحضرمي جاء بغلام له إلى عمر بن الخطاب فقال له اقطع يد غلامي هذا فإنه سرق فقال له عمر ماذا سرق فقال سرق مرآة لامرأتي ثمنها ستون درهما فقال عمر أرسله فليس عليه قطع خادمكم سرق متاعكم

সায়িব ইবনু ইয়াযীদ থেকে বর্নিতঃ

আবদুল্লাহ ইব্নু আমর ইব্নু হাযরামী (রা) স্বীয় দাসকে উমার (রা)-এর নিকট নিয়ে এসে বলল, আপনি আমার এই দাসের হাত কেটে ফেলুন। কেননা সে চুরি করেছে। উমার (রা) বললেন, কি চুরি করেছে? তিনি বললেন, সে আমার স্ত্রীর আয়না চুরি করেছে, যার মূল্য হবে ষাট দিরহাম। উমার (রা) বললেন, তাকে ছেড়ে দাও, তার হাত কাটা যাবে না। সে তোমার চাকর ছিল, তোমার মাল চুরি করেছে। [১] (হাদীসটি ইমাম মালিক এককভাবে বর্ণনা করেছেন)

সায়িব ইবনু ইয়াযীদ থেকে বর্নিতঃ

আবদুল্লাহ ইব্নু আমর ইব্নু হাযরামী (রা) স্বীয় দাসকে উমার (রা)-এর নিকট নিয়ে এসে বলল, আপনি আমার এই দাসের হাত কেটে ফেলুন। কেননা সে চুরি করেছে। উমার (রা) বললেন, কি চুরি করেছে? তিনি বললেন, সে আমার স্ত্রীর আয়না চুরি করেছে, যার মূল্য হবে ষাট দিরহাম। উমার (রা) বললেন, তাকে ছেড়ে দাও, তার হাত কাটা যাবে না। সে তোমার চাকর ছিল, তোমার মাল চুরি করেছে। [১] (হাদীসটি ইমাম মালিক এককভাবে বর্ণনা করেছেন)

حدثني عن مالك عن ابن شهاب عن السائب بن يزيد أن عبد الله بن عمرو بن الحضرمي جاء بغلام له إلى عمر بن الخطاب فقال له اقطع يد غلامي هذا فإنه سرق فقال له عمر ماذا سرق فقال سرق مرآة لامرأتي ثمنها ستون درهما فقال عمر أرسله فليس عليه قطع خادمكم سرق متاعكم


মুয়াত্তা ইমাম মালিক ১৫৪১

و حدثني عن مالك عن ابن شهاب أن مروان بن الحكم أتي بإنسان قد اختلس متاعا فأراد قطع يده فأرسل إلى زيد بن ثابت يسأله عن ذلك فقال زيد بن ثابت ليس في الخلسة قطع

ইবনু শিহাব (রহঃ) থেকে বর্নিতঃ

মারওয়ানের নিকট এক ব্যক্তিকে আনা হল, যে ব্যক্তি কারো মাল অপহরণ করে নিয়ে গিয়েছে। মারওয়ান তার হাত কাটতে মনস্থ করলেন। অতঃপর এর বিধান জিজ্ঞেস করবার জন্য যায়দ ইব্নু সাবিত (র)-এর নিকট এক ব্যক্তিকে পাঠালেন। তিনি বললেন, যে ব্যক্তি কারো মাল অপহরণ করে, তার হাত কাটা হবে না। [১] (হাদীসটি ইমাম মালিক এককভাবে বর্ণনা করেছেন)

ইবনু শিহাব (রহঃ) থেকে বর্নিতঃ

মারওয়ানের নিকট এক ব্যক্তিকে আনা হল, যে ব্যক্তি কারো মাল অপহরণ করে নিয়ে গিয়েছে। মারওয়ান তার হাত কাটতে মনস্থ করলেন। অতঃপর এর বিধান জিজ্ঞেস করবার জন্য যায়দ ইব্নু সাবিত (র)-এর নিকট এক ব্যক্তিকে পাঠালেন। তিনি বললেন, যে ব্যক্তি কারো মাল অপহরণ করে, তার হাত কাটা হবে না। [১] (হাদীসটি ইমাম মালিক এককভাবে বর্ণনা করেছেন)

و حدثني عن مالك عن ابن شهاب أن مروان بن الحكم أتي بإنسان قد اختلس متاعا فأراد قطع يده فأرسل إلى زيد بن ثابت يسأله عن ذلك فقال زيد بن ثابت ليس في الخلسة قطع


মুয়াত্তা ইমাম মালিক ১৫৩৯

و حدثني يحيى عن مالك عن يحيى بن سعيد عن محمد بن يحيى بن حبان أن عبدا سرق وديا من حائط رجل فغرسه في حائط سيده فخرج صاحب الودي يلتمس وديه فوجده فاستعدى على العبد مروان بن الحكم فسجن مروان العبد وأراد قطع يده فانطلق سيد العبد إلى رافع بن خديج فسأله عن ذلك فأخبره أنه سمع رسول الله صلى الله عليه وسلم يقول لا قطع في ثمر ولا كثر والكثر الجمار فقال الرجل فإن مروان بن الحكم أخذ غلاما لي وهو يريد قطعه وأنا أحب أن تمشي معي إليه فتخبره بالذي سمعت من رسول الله صلى الله عليه وسلم فمشى معه رافع إلى مروان بن الحكم فقال أخذت غلاما لهذا فقال نعم فقال فما أنت صانع به قال أردت قطع يده فقال له رافع سمعت رسول الله صلى الله عليه وسلم يقول لا قطع في ثمر ولا كثر فأمر مروان بالعبد فأرسل

মুহাম্মাদ ইবনু ইয়াহ্ইয়া ইবনু হিব্বান (র) থেকে বর্নিতঃ

এক দাস একটি বাগান হতে একটি খেজুরের চারা চুরি করে স্বীয় প্রভুর বাগানে রোপণ করল। পরে ঐ বাগানের মালিক তার চারার অন্বেষণে বের হল এবং ঐ বাগানে এসে তার চারা পেল। সেই ব্যক্তি ঐ দাসের ব্যাপারে মারওয়ানের নিকট নালিশ করল। মারওয়ান ঐ দাসকে ডেকে বন্দী করল এবং তার হাত কেটে ফেলার ইচ্ছা করল। ঐ দাসের প্রভু রাফি ইব্নু খাদীজের নিকট উপস্থিত হয়ে তার নিকট এ বিষয়ে জানতে চাইল। রাফি বললেন, আমি রসূলুল্লাহ্ সল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম-এর নিকট শুনে, তিনি বলেছেন, ফল কিংবা গাছের মাথির জন্য হাত কাটা হবে না। সে বলল, মারওয়ান আমার দাসকে বন্দী করে রেখেছে এবং তার হাত কাটতে চায়। আমার ইচ্ছা, আপনি আমার সাথে মারওয়ানের নিকট যেয়ে তাকে এই হাদীসটি শুনিয়ে দিন। অবশেষে রাফি তাঁর সাথে মারওয়ানের নিকট গেলেন এবং জিজ্ঞেস করলেন, তুমি কি তার দাসকে বন্দী করে রেখেছ? মারওয়ান বলল, হ্যাঁ। রাফি বললেন, কি করবে ? মারওয়ান বলল, তার হাত কেটে ফেলব। রাফি বললেন, আমি রসূলুল্লাহ্ সল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম-এর নিকট শুনেছি, তিনি বলেছেন, ফল ও গাছের মাথির জন্য হাত কাটা যাবে না। এটা শুনে মারওয়ান ঐ গোলামকে ছেড়ে দিতে আদেশ দিলে তাকে ছেড়ে দেয়া হল। (সহীহ, আবূ দাঊদ ৪২২৩, তিরমিযী ১৪৪৯, নাসাঈ ৪৯৬০, ইবনু মাজাহ ২৫৯৪, আলবানী হাদীসটিকে সহীহ বলেছেন [সহীহ আল জামে] ৭৫৪৫)

মুহাম্মাদ ইবনু ইয়াহ্ইয়া ইবনু হিব্বান (র) থেকে বর্নিতঃ

এক দাস একটি বাগান হতে একটি খেজুরের চারা চুরি করে স্বীয় প্রভুর বাগানে রোপণ করল। পরে ঐ বাগানের মালিক তার চারার অন্বেষণে বের হল এবং ঐ বাগানে এসে তার চারা পেল। সেই ব্যক্তি ঐ দাসের ব্যাপারে মারওয়ানের নিকট নালিশ করল। মারওয়ান ঐ দাসকে ডেকে বন্দী করল এবং তার হাত কেটে ফেলার ইচ্ছা করল। ঐ দাসের প্রভু রাফি ইব্নু খাদীজের নিকট উপস্থিত হয়ে তার নিকট এ বিষয়ে জানতে চাইল। রাফি বললেন, আমি রসূলুল্লাহ্ সল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম-এর নিকট শুনে, তিনি বলেছেন, ফল কিংবা গাছের মাথির জন্য হাত কাটা হবে না। সে বলল, মারওয়ান আমার দাসকে বন্দী করে রেখেছে এবং তার হাত কাটতে চায়। আমার ইচ্ছা, আপনি আমার সাথে মারওয়ানের নিকট যেয়ে তাকে এই হাদীসটি শুনিয়ে দিন। অবশেষে রাফি তাঁর সাথে মারওয়ানের নিকট গেলেন এবং জিজ্ঞেস করলেন, তুমি কি তার দাসকে বন্দী করে রেখেছ? মারওয়ান বলল, হ্যাঁ। রাফি বললেন, কি করবে ? মারওয়ান বলল, তার হাত কেটে ফেলব। রাফি বললেন, আমি রসূলুল্লাহ্ সল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম-এর নিকট শুনেছি, তিনি বলেছেন, ফল ও গাছের মাথির জন্য হাত কাটা যাবে না। এটা শুনে মারওয়ান ঐ গোলামকে ছেড়ে দিতে আদেশ দিলে তাকে ছেড়ে দেয়া হল। (সহীহ, আবূ দাঊদ ৪২২৩, তিরমিযী ১৪৪৯, নাসাঈ ৪৯৬০, ইবনু মাজাহ ২৫৯৪, আলবানী হাদীসটিকে সহীহ বলেছেন [সহীহ আল জামে] ৭৫৪৫)

و حدثني يحيى عن مالك عن يحيى بن سعيد عن محمد بن يحيى بن حبان أن عبدا سرق وديا من حائط رجل فغرسه في حائط سيده فخرج صاحب الودي يلتمس وديه فوجده فاستعدى على العبد مروان بن الحكم فسجن مروان العبد وأراد قطع يده فانطلق سيد العبد إلى رافع بن خديج فسأله عن ذلك فأخبره أنه سمع رسول الله صلى الله عليه وسلم يقول لا قطع في ثمر ولا كثر والكثر الجمار فقال الرجل فإن مروان بن الحكم أخذ غلاما لي وهو يريد قطعه وأنا أحب أن تمشي معي إليه فتخبره بالذي سمعت من رسول الله صلى الله عليه وسلم فمشى معه رافع إلى مروان بن الحكم فقال أخذت غلاما لهذا فقال نعم فقال فما أنت صانع به قال أردت قطع يده فقال له رافع سمعت رسول الله صلى الله عليه وسلم يقول لا قطع في ثمر ولا كثر فأمر مروان بالعبد فأرسل


মুয়াত্তা ইমাম মালিক ১৫৪২

و حدثني عن مالك عن يحيى بن سعيد أنه قال أخبرني أبو بكر بن محمد بن عمرو بن حزم أنه أخذ نبطيا قد سرق خواتم من حديد فحبسه ليقطع يده فأرسلت إليه عمرة بنت عبد الرحمن مولاة لها يقال لها أمية قال أبو بكر فجاءتني وأنا بين ظهراني الناس فقالت تقول لك خالتك عمرة يا ابن أختي أخذت نبطيا في شيء يسير ذكر لي فأردت قطع يده قلت نعم قالت فإن عمرة تقول لك لا قطع إلا في ربع دينار فصاعدا قال أبو بكر فأرسلت النبطي قال مالك والأمر المجتمع عليه عندنا في اعتراف العبيد أنه من اعترف منهم على نفسه بشيء يقع الحد فيه أو العقوبة فيه في جسده فإن اعترافه جائز عليه ولا يتهم أن يوقع على نفسه هذا قال مالك وأما من اعترف منهم بأمر يكون غرما على سيده فإن اعترافه غير جائز على سيده قال مالك ليس على الأجير ولا على الرجل يكونان مع القوم يخدمانهم إن سرقاهم قطع لأن حالهما ليست بحال السارق وإنما حالهما حال الخائن وليس على الخائن قطع قال مالك في الذي يستعير العارية فيجحدها إنه ليس عليه قطع وإنما مثل ذلك مثل رجل كان له على رجل دين فجحده ذلك فليس عليه فيما جحده قطع قال مالك الأمر المجتمع عليه عندنا في السارق يوجد في البيت قد جمع المتاع ولم يخرج به إنه ليس عليه قطع وإنما مثل ذلك كمثل رجل وضع بين يديه خمرا ليشربها فلم يفعل فليس عليه حد ومثل ذلك رجل جلس من امرأة مجلسا وهو يريد أن يصيبها حراما فلم يفعل ولم يبلغ ذلك منها فليس عليه أيضا في ذلك حد قال مالك الأمر المجتمع عليه عندنا أنه ليس في الخلسة قطع بلغ ثمنها ما يقطع فيه أو لم يبلغ

ইয়াহ্ইয়া ইবনু সাঈদ (র) থেকে বর্নিতঃ

তিনি বলেন, আবূ বাকর ইব্নু মুহাম্মাদ ইব্নু আমর ইব্নু হাযম এক নিবাতী ব্যক্তিকে গ্রেফতার করল, যে লোহার আংটি চুরি করেছে। তাকে হাত কাটতে ধরে রাখল। ‘আমরা বিনতে আবদুর রহমান (রা) তাঁর উমাইয়া নামক মুক্ত দাসীকে আবূ বাকর (র)-এর নিকট পাঠালেন। আবূ বাকর (র) বললেন, আমি কয়েকজন লোকের মধ্যে উপবিষ্ট ছিলাম। ইত্যবসরে ঐ দাসী আমার নিকট এসে বলতে লাগল, আপনার খালা ‘আমরা বলেছেন, ভাগনে! তুমি অল্প কিছু মালের জন্য একজন গ্রাম্য লোককে আটকিয়ে রেখেছ আর তার হাত কাটতে চাচ্ছ ? আমি বললাম, হ্যাঁ। সে বলল, ‘আমরা বলেছেন যে, এক-চতুর্থাংশ দীনারের বিনিময়েই হাত কাটা হয়ে থাকে। অতঃপর আমি তাকে ছেড়ে দিলাম। (হাদীসটি ইমাম মালিক এককভাবে বর্ণনা করেছেন) মালিক (র) বলেন, যদি কোন দাস এইরূপ কোন অন্যায় স্বীকার করে, যাতে তার উপর হাদ্দ জারি হয় অথবা শাস্তি বর্তায় যা তার দৈহিক ক্ষতি সাধন করে, (যথা, হাত কাটা যায়) তবে তা বৈধ। তাকে এই দোষারোপ করা হবে না যে, সে তার মালিকের অনিষ্ট সাধনের নিমিত্তে এই ধরনের অপরাধ স্বীকার করেছে, প্রকৃতপক্ষে সে উহা করেনি। মালিক (র) বলেন, কোন দাস যদি এইরূপ কোন অন্যায় স্বীকার করে যার জন্য তার মালিককে ক্ষতিগ্রস্ত হতে হয় এইভাবে যে, মালিককে তার ক্ষতিপূরণ দিতে হয়, তবে তার এই স্বীকারোক্তি বৈধ ধরা যাবে না। মালিক (র) বলেন, যদি কোন শ্রমিক অথবা অন্য কোন ব্যক্তি যে এমন সব লোকের মধ্যে থাকে, যাদের সে খিদমত করে সে তাদের কোন বস্তু চুরি করলে হাত কাটা যাবে না। কেননা সে খেয়ানতকারীর মতো হল। আর খেয়ানতকারী ব্যক্তির হাত কাটা হয় না। মালিক (র) বলেন, যদি কেউ কারো কোন দ্রব্য চেয়ে নেয়, অতঃপর তা অস্বীকার করে, তবে তার হাত কাটা হবে না। এর উদাহরণ এইরূপ, যেমন কেউ কারো নিকট হতে ঋণ নিয়ে তা অস্বীকার করল তখন তার হাত কাটা হবে না। মালিক (র) বলেন, আমাদের কাছে ইহা একটি সর্বসম্মত বিধান যে, যদি চোর ঘরে ঢুকে মাল একত্র করে নেয় কিন্তু উহা ঘর হতে বের করল না, তা হলে তার হাত কাটা হবে না। এর উদাহরণ এইরূপ, যেমন কারো সম্মুখে পান করবার জন্য মদ রাখা আছে, কিন্তু সে এখনও উহা পান করেনি; এমতাবস্থায় তাকে মদ্য পানের শাস্তি দেয়া হবে না। উহার উদাহরণ এরূপও হতে পারে, যেমন কেউ কোন স্ত্রীলোকের নিকট সহবাস করতে উপবেশন করল, কিন্তু তার লজ্জাস্থানে স্বীয় লজ্জাস্থান প্রবেশ করায়নি, এমতাবস্থায় তার উপর ব্যভিচারের শাস্তি বর্তাবে না। মালিক (র) বলেন, আমাদের কাছে একটি সর্বসম্মত বিধান এই যে, ছিনিয়ে নিলে হাত কাটা হবে না, ঐ দ্রব্যের মূল্য এক দীনারের চতুর্থাংশ হোক বা তার চাইতে কম হোক।

ইয়াহ্ইয়া ইবনু সাঈদ (র) থেকে বর্নিতঃ

তিনি বলেন, আবূ বাকর ইব্নু মুহাম্মাদ ইব্নু আমর ইব্নু হাযম এক নিবাতী ব্যক্তিকে গ্রেফতার করল, যে লোহার আংটি চুরি করেছে। তাকে হাত কাটতে ধরে রাখল। ‘আমরা বিনতে আবদুর রহমান (রা) তাঁর উমাইয়া নামক মুক্ত দাসীকে আবূ বাকর (র)-এর নিকট পাঠালেন। আবূ বাকর (র) বললেন, আমি কয়েকজন লোকের মধ্যে উপবিষ্ট ছিলাম। ইত্যবসরে ঐ দাসী আমার নিকট এসে বলতে লাগল, আপনার খালা ‘আমরা বলেছেন, ভাগনে! তুমি অল্প কিছু মালের জন্য একজন গ্রাম্য লোককে আটকিয়ে রেখেছ আর তার হাত কাটতে চাচ্ছ ? আমি বললাম, হ্যাঁ। সে বলল, ‘আমরা বলেছেন যে, এক-চতুর্থাংশ দীনারের বিনিময়েই হাত কাটা হয়ে থাকে। অতঃপর আমি তাকে ছেড়ে দিলাম। (হাদীসটি ইমাম মালিক এককভাবে বর্ণনা করেছেন) মালিক (র) বলেন, যদি কোন দাস এইরূপ কোন অন্যায় স্বীকার করে, যাতে তার উপর হাদ্দ জারি হয় অথবা শাস্তি বর্তায় যা তার দৈহিক ক্ষতি সাধন করে, (যথা, হাত কাটা যায়) তবে তা বৈধ। তাকে এই দোষারোপ করা হবে না যে, সে তার মালিকের অনিষ্ট সাধনের নিমিত্তে এই ধরনের অপরাধ স্বীকার করেছে, প্রকৃতপক্ষে সে উহা করেনি। মালিক (র) বলেন, কোন দাস যদি এইরূপ কোন অন্যায় স্বীকার করে যার জন্য তার মালিককে ক্ষতিগ্রস্ত হতে হয় এইভাবে যে, মালিককে তার ক্ষতিপূরণ দিতে হয়, তবে তার এই স্বীকারোক্তি বৈধ ধরা যাবে না। মালিক (র) বলেন, যদি কোন শ্রমিক অথবা অন্য কোন ব্যক্তি যে এমন সব লোকের মধ্যে থাকে, যাদের সে খিদমত করে সে তাদের কোন বস্তু চুরি করলে হাত কাটা যাবে না। কেননা সে খেয়ানতকারীর মতো হল। আর খেয়ানতকারী ব্যক্তির হাত কাটা হয় না। মালিক (র) বলেন, যদি কেউ কারো কোন দ্রব্য চেয়ে নেয়, অতঃপর তা অস্বীকার করে, তবে তার হাত কাটা হবে না। এর উদাহরণ এইরূপ, যেমন কেউ কারো নিকট হতে ঋণ নিয়ে তা অস্বীকার করল তখন তার হাত কাটা হবে না। মালিক (র) বলেন, আমাদের কাছে ইহা একটি সর্বসম্মত বিধান যে, যদি চোর ঘরে ঢুকে মাল একত্র করে নেয় কিন্তু উহা ঘর হতে বের করল না, তা হলে তার হাত কাটা হবে না। এর উদাহরণ এইরূপ, যেমন কারো সম্মুখে পান করবার জন্য মদ রাখা আছে, কিন্তু সে এখনও উহা পান করেনি; এমতাবস্থায় তাকে মদ্য পানের শাস্তি দেয়া হবে না। উহার উদাহরণ এরূপও হতে পারে, যেমন কেউ কোন স্ত্রীলোকের নিকট সহবাস করতে উপবেশন করল, কিন্তু তার লজ্জাস্থানে স্বীয় লজ্জাস্থান প্রবেশ করায়নি, এমতাবস্থায় তার উপর ব্যভিচারের শাস্তি বর্তাবে না। মালিক (র) বলেন, আমাদের কাছে একটি সর্বসম্মত বিধান এই যে, ছিনিয়ে নিলে হাত কাটা হবে না, ঐ দ্রব্যের মূল্য এক দীনারের চতুর্থাংশ হোক বা তার চাইতে কম হোক।

و حدثني عن مالك عن يحيى بن سعيد أنه قال أخبرني أبو بكر بن محمد بن عمرو بن حزم أنه أخذ نبطيا قد سرق خواتم من حديد فحبسه ليقطع يده فأرسلت إليه عمرة بنت عبد الرحمن مولاة لها يقال لها أمية قال أبو بكر فجاءتني وأنا بين ظهراني الناس فقالت تقول لك خالتك عمرة يا ابن أختي أخذت نبطيا في شيء يسير ذكر لي فأردت قطع يده قلت نعم قالت فإن عمرة تقول لك لا قطع إلا في ربع دينار فصاعدا قال أبو بكر فأرسلت النبطي قال مالك والأمر المجتمع عليه عندنا في اعتراف العبيد أنه من اعترف منهم على نفسه بشيء يقع الحد فيه أو العقوبة فيه في جسده فإن اعترافه جائز عليه ولا يتهم أن يوقع على نفسه هذا قال مالك وأما من اعترف منهم بأمر يكون غرما على سيده فإن اعترافه غير جائز على سيده قال مالك ليس على الأجير ولا على الرجل يكونان مع القوم يخدمانهم إن سرقاهم قطع لأن حالهما ليست بحال السارق وإنما حالهما حال الخائن وليس على الخائن قطع قال مالك في الذي يستعير العارية فيجحدها إنه ليس عليه قطع وإنما مثل ذلك مثل رجل كان له على رجل دين فجحده ذلك فليس عليه فيما جحده قطع قال مالك الأمر المجتمع عليه عندنا في السارق يوجد في البيت قد جمع المتاع ولم يخرج به إنه ليس عليه قطع وإنما مثل ذلك كمثل رجل وضع بين يديه خمرا ليشربها فلم يفعل فليس عليه حد ومثل ذلك رجل جلس من امرأة مجلسا وهو يريد أن يصيبها حراما فلم يفعل ولم يبلغ ذلك منها فليس عليه أيضا في ذلك حد قال مالك الأمر المجتمع عليه عندنا أنه ليس في الخلسة قطع بلغ ثمنها ما يقطع فيه أو لم يبلغ


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