মুয়াত্তা ইমাম মালিক > নিরর্থক কসমের বিবরণ
মুয়াত্তা ইমাম মালিক ১০১০
حدثني يحيى عن مالك عن هشام بن عروة عن أبيه عن عائشة أم المؤمنين أنها كانت تقول لغو اليمين قول الإنسان لا والله لا والله ১৭৩০-قال مالك أحسن ما سمعت في هذا أن اللغو حلف الإنسان على الشيء يستيقن أنه كذلك ثم يوجد على غير ذلك فهو اللغو ১৭৩১-قال مالك وعقد اليمين أن يحلف الرجل أن لا يبيع ثوبه بعشرة دنانير ثم يبيعه بذلك أو يحلف ليضربن غلامه ثم لا يضربه ونحو هذا فهذا الذي يكفر صاحبه عن يمينه وليس في اللغو كفارة ১৭৩২-قال مالك فأما الذي يحلف على الشيء وهو يعلم أنه آثم ويحلف على الكذب وهو يعلم ليرضي به أحدا أو ليعتذر به إلى معتذر إليه أو ليقطع به مالا فهذا أعظم من أن تكون فيه كفارة.
হিশাম ইবনু উরওয়াহ (র) থেকে বর্নিতঃ
যে, উম্মুল মু’মিনীন ‘আয়িশা (রা) বলতেন : কথায় কথায় লা ওয়াল্লাহি, বালা ওয়াল্লাহি (না, আল্লাহর কসম, হ্যাঁ আল্লাহর কসম) ধরনের কসম করা য়ামীন লাগব হবে (অর্থাৎ শরীয়তের দৃষ্টিতে উহা কসম বলে ধর্তব্য হবে না)। (হাদীসটি ইমাম মালিক এককভাবে বর্ণনা করেছেন) মালিক (র) বলেন : য়ামীনে লাগব হল সত্য মনে কয়ে কোন বিষয়ে কসম করা অথচ পরে তা বিপরীত বলে সাব্যস্ত হয়। এই বিষয়ে এটাই উত্তম যা আমি শুনেছি। মালিক (র) বলেন : ভবিষ্যতে কোন কাজ করা না করা সম্পর্কে কসম করা হলে তা পূরণ করা বাধ্যতামূলক, যেমন কেউ বলল : আল্লাহর কসম, এই কাপড়টি আমি দশ দীনারে বিক্রয় করব না। কিন্তু পরে দশ দীনারে তা বিক্রয় করে দিল বা কেউ বলল : আল্লাহর কসম, এই ব্যক্তির গোলামকে আমি মারব, পরে মারল না ইত্যাদি। এই ধরনের কসমের কাফ্ফারা ওয়াজিব হয়। আর য়ামীনে লাগব-এর জন্য কাফ্ফারা নেই।
হিশাম ইবনু উরওয়াহ (র) থেকে বর্নিতঃ
যে, উম্মুল মু’মিনীন ‘আয়িশা (রা) বলতেন : কথায় কথায় লা ওয়াল্লাহি, বালা ওয়াল্লাহি (না, আল্লাহর কসম, হ্যাঁ আল্লাহর কসম) ধরনের কসম করা য়ামীন লাগব হবে (অর্থাৎ শরীয়তের দৃষ্টিতে উহা কসম বলে ধর্তব্য হবে না)। (হাদীসটি ইমাম মালিক এককভাবে বর্ণনা করেছেন) মালিক (র) বলেন : য়ামীনে লাগব হল সত্য মনে কয়ে কোন বিষয়ে কসম করা অথচ পরে তা বিপরীত বলে সাব্যস্ত হয়। এই বিষয়ে এটাই উত্তম যা আমি শুনেছি। মালিক (র) বলেন : ভবিষ্যতে কোন কাজ করা না করা সম্পর্কে কসম করা হলে তা পূরণ করা বাধ্যতামূলক, যেমন কেউ বলল : আল্লাহর কসম, এই কাপড়টি আমি দশ দীনারে বিক্রয় করব না। কিন্তু পরে দশ দীনারে তা বিক্রয় করে দিল বা কেউ বলল : আল্লাহর কসম, এই ব্যক্তির গোলামকে আমি মারব, পরে মারল না ইত্যাদি। এই ধরনের কসমের কাফ্ফারা ওয়াজিব হয়। আর য়ামীনে লাগব-এর জন্য কাফ্ফারা নেই।
حدثني يحيى عن مالك عن هشام بن عروة عن أبيه عن عائشة أم المؤمنين أنها كانت تقول لغو اليمين قول الإنسان لا والله لا والله ১৭৩০-قال مالك أحسن ما سمعت في هذا أن اللغو حلف الإنسان على الشيء يستيقن أنه كذلك ثم يوجد على غير ذلك فهو اللغو ১৭৩১-قال مالك وعقد اليمين أن يحلف الرجل أن لا يبيع ثوبه بعشرة دنانير ثم يبيعه بذلك أو يحلف ليضربن غلامه ثم لا يضربه ونحو هذا فهذا الذي يكفر صاحبه عن يمينه وليس في اللغو كفارة ১৭৩২-قال مالك فأما الذي يحلف على الشيء وهو يعلم أنه آثم ويحلف على الكذب وهو يعلم ليرضي به أحدا أو ليعتذر به إلى معتذر إليه أو ليقطع به مالا فهذا أعظم من أن تكون فيه كفارة.
মুয়াত্তা ইমাম মালিক > যে ধরনের কসমে কাফ্ফারা ওয়াজিব হয় না
মুয়াত্তা ইমাম মালিক ১০১১
حدثني يحيى عن مالك عن نافع عن عبد الله بن عمر أنه كان يقول من قال والله ثم قال إن شاء الله ثم لم يفعل الذي حلف عليه لم يحنث ১৭৩৫-قال مالك أحسن ما سمعت في الثنيا أنها لصاحبها ما لم يقطع كلامه وما كان من ذلك نسقا يتبع بعضه بعضا قبل أن يسكت فإذا سكت وقطع كلامه فلا ثنيا له ১৭৩৬-قال يحيى و قال مالك في الرجل يقول كفر بالله أو أشرك بالله ثم يحنث إنه ليس عليه كفارة وليس بكافر ولا مشرك حتى يكون قلبه مضمرا على الشرك والكفر وليستغفر الله ولا يعد إلى شيء من ذلك وبئس ما صنع.
নাফি’ (র) থেকে বর্নিতঃ
আবদুল্লাহ ইবনু উমার (রা) বলতেন : যদি কেউ কসম করে ইনশাআল্লাহ (যদি আল্লাহ চাহেন) বলে তবে কসমকৃত কাজটি না করলে এই কসম ভঙ্গ হবে না। [১] (হাদীসটি ইমাম মালিক এককভাবে বর্ণনা করেছেন) মালিক (র) বলেন : ‘ইনশাআল্লাহ’ কসমের সঙ্গে সঙ্গে এবং কথার ধারাবাহিকতা বজায় থাকতে বলতে হবে। কেউ কসম করে কিছুক্ষণ চুপ থাকার পর যদি ‘ইনশাআল্লাহ’ বলে তবে আর উহা ধর্তব্য হবে না। মালিক (র) বলেন : কেউ বলল, আমি যদি এই কাজ করি তবে আমি কাফের বা মুশরিক। পরে যদি ঐ ব্যক্তি কাজটি করে ফেলে তবে তার কাফ্ফারা ওয়াজিব হবে। কিন্তু অন্তরে শিরক কুফরীর আকীদা না হলে এতে কাফের বা মুশরিক হয়ে যাবে না। তবে গুনাহগার হবে। ভবিষ্যতে এই ধরনের কিছু করবে না বলে তাকে তাওবা করতে হবে। এই ধরনের কসম অতি নিন্দনীয়।
নাফি’ (র) থেকে বর্নিতঃ
আবদুল্লাহ ইবনু উমার (রা) বলতেন : যদি কেউ কসম করে ইনশাআল্লাহ (যদি আল্লাহ চাহেন) বলে তবে কসমকৃত কাজটি না করলে এই কসম ভঙ্গ হবে না। [১] (হাদীসটি ইমাম মালিক এককভাবে বর্ণনা করেছেন) মালিক (র) বলেন : ‘ইনশাআল্লাহ’ কসমের সঙ্গে সঙ্গে এবং কথার ধারাবাহিকতা বজায় থাকতে বলতে হবে। কেউ কসম করে কিছুক্ষণ চুপ থাকার পর যদি ‘ইনশাআল্লাহ’ বলে তবে আর উহা ধর্তব্য হবে না। মালিক (র) বলেন : কেউ বলল, আমি যদি এই কাজ করি তবে আমি কাফের বা মুশরিক। পরে যদি ঐ ব্যক্তি কাজটি করে ফেলে তবে তার কাফ্ফারা ওয়াজিব হবে। কিন্তু অন্তরে শিরক কুফরীর আকীদা না হলে এতে কাফের বা মুশরিক হয়ে যাবে না। তবে গুনাহগার হবে। ভবিষ্যতে এই ধরনের কিছু করবে না বলে তাকে তাওবা করতে হবে। এই ধরনের কসম অতি নিন্দনীয়।
حدثني يحيى عن مالك عن نافع عن عبد الله بن عمر أنه كان يقول من قال والله ثم قال إن شاء الله ثم لم يفعل الذي حلف عليه لم يحنث ১৭৩৫-قال مالك أحسن ما سمعت في الثنيا أنها لصاحبها ما لم يقطع كلامه وما كان من ذلك نسقا يتبع بعضه بعضا قبل أن يسكت فإذا سكت وقطع كلامه فلا ثنيا له ১৭৩৬-قال يحيى و قال مالك في الرجل يقول كفر بالله أو أشرك بالله ثم يحنث إنه ليس عليه كفارة وليس بكافر ولا مشرك حتى يكون قلبه مضمرا على الشرك والكفر وليستغفر الله ولا يعد إلى شيء من ذلك وبئس ما صنع.
মুয়াত্তা ইমাম মালিক > যে ধরনের কসমে কাফ্ফারা ওয়াজিব হয়
মুয়াত্তা ইমাম মালিক ১০১২
حدثني يحيى عن مالك عن سهيل بن أبي صالح عن أبيه عن أبي هريرة أن رسول الله صلى الله عليه وسلم قال من حلف بيمين فرأى غيرها خيرا منها فليكفر عن يمينه وليفعل الذي هو خير ১৭৩৯-قال يحيى و سمعت قوله تعالى يقول من قال علي نذر ولم يسم شيئا إن عليه كفارة يمين قال مالك فأما التوكيد فهو حلف الإنسان في الشيء الواحد مرارا يردد فيه الأيمان يمينا بعد يمين كقوله والله لا أنقصه من كذا وكذا يحلف بذلك مرارا ثلاثا أو أكثر من ذلك قال فكفارة ذلك كفارة واحدة مثل كفارة اليمين ১৭৪১-فإن حلف رجل مثلا فقال والله لا آكل هذا الطعام ولا ألبس هذا الثوب ولا أدخل هذا البيت فكان هذا في يمين واحدة فإنما عليه كفارة واحدة وإنما ذلك كقول الرجل لامرأته أنت الطلاق إن كسوتك هذا الثوب وأذنت لك إلى المسجد يكون ذلك نسقا متتابعا في كلام واحد فإن حنث في شيء واحد من ذلك فقد وجب عليه الطلاق وليس عليه فيما فعل بعد ذلك حنث إنما الحنث في ذلك حنث واحد ১৭৪২- قال مالك الأمر عندنا في نذر المرأة إنه جائز بغير إذن زوجها يجب عليها ذلك ويثبت إذا كان ذلك في جسدها وكان ذلك لا يضر بزوجها وإن كان ذلك يضر بزوجها فله منعها منه وكان ذلك عليها حتى تقضيه.
আবূ হুরায়রা (রা) থেকে বর্নিতঃ
রসূলুল্লাহ সল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বললেন : কোন বিষয়ে কসম করার পর তার বিপরীত বিষয় যদি অধিক ভাল ও মঙ্গলজনক মনে হয়; তবে ঐ কসম ভেঙ্গে তার কাফ্ফারা দেবে এবং মঙ্গলজনক কাজটি করবে। (সহীহ, মুসলিম ১৬৫০)
আবূ হুরায়রা (রা) থেকে বর্নিতঃ
রসূলুল্লাহ সল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম বললেন : কোন বিষয়ে কসম করার পর তার বিপরীত বিষয় যদি অধিক ভাল ও মঙ্গলজনক মনে হয়; তবে ঐ কসম ভেঙ্গে তার কাফ্ফারা দেবে এবং মঙ্গলজনক কাজটি করবে। (সহীহ, মুসলিম ১৬৫০)
حدثني يحيى عن مالك عن سهيل بن أبي صالح عن أبيه عن أبي هريرة أن رسول الله صلى الله عليه وسلم قال من حلف بيمين فرأى غيرها خيرا منها فليكفر عن يمينه وليفعل الذي هو خير ১৭৩৯-قال يحيى و سمعت قوله تعالى يقول من قال علي نذر ولم يسم شيئا إن عليه كفارة يمين قال مالك فأما التوكيد فهو حلف الإنسان في الشيء الواحد مرارا يردد فيه الأيمان يمينا بعد يمين كقوله والله لا أنقصه من كذا وكذا يحلف بذلك مرارا ثلاثا أو أكثر من ذلك قال فكفارة ذلك كفارة واحدة مثل كفارة اليمين ১৭৪১-فإن حلف رجل مثلا فقال والله لا آكل هذا الطعام ولا ألبس هذا الثوب ولا أدخل هذا البيت فكان هذا في يمين واحدة فإنما عليه كفارة واحدة وإنما ذلك كقول الرجل لامرأته أنت الطلاق إن كسوتك هذا الثوب وأذنت لك إلى المسجد يكون ذلك نسقا متتابعا في كلام واحد فإن حنث في شيء واحد من ذلك فقد وجب عليه الطلاق وليس عليه فيما فعل بعد ذلك حنث إنما الحنث في ذلك حنث واحد ১৭৪২- قال مالك الأمر عندنا في نذر المرأة إنه جائز بغير إذن زوجها يجب عليها ذلك ويثبت إذا كان ذلك في جسدها وكان ذلك لا يضر بزوجها وإن كان ذلك يضر بزوجها فله منعها منه وكان ذلك عليها حتى تقضيه.
মুয়াত্তা ইমাম মালিক > কসমের কাফ্ফারা
মুয়াত্তা ইমাম মালিক ১০১৩
حدثني يحيى عن مالك عن نافع عن عبد الله بن عمر أنه كان يقول: من حلف بيمين فوكدها ثم حنث فعليه عتق رقبة أو كسوة عشرة مساكين ومن حلف بيمين فلم يؤكدها ثم حنث فعليه إطعام عشرة مساكين لكل مسكين مد من حنطة فمن لم يجد فصيام ثلاثة أيام.
নাফি’ (র) থেকে বর্নিতঃ
আবদুল্লাহ ইবনু উমার (রা) বললেন : কেউ যদি কসম করে ও পরে আরও কসম দ্বারা উহাকে জোরালো করে এবং পরে উহা ভেঙ্গে ফেলে তবে তার উপর একটি গোলাম আযাদ করা অথবা দশজনকে কাপড় দেয়া জরুরী হবে। আর যদি তাকীদযুক্ত নয় এমন কসম করে ভেঙ্গে ফেলে তবে দশজন মিসকীনের প্রত্যেককে এক মুদ পরিমাণ গম দিবে আর তা না পারলে তিন দিন রোযা রাখবে। (হাদীসটি ইমাম মালিক এককভাবে বর্ণনা করেছেন)
নাফি’ (র) থেকে বর্নিতঃ
আবদুল্লাহ ইবনু উমার (রা) বললেন : কেউ যদি কসম করে ও পরে আরও কসম দ্বারা উহাকে জোরালো করে এবং পরে উহা ভেঙ্গে ফেলে তবে তার উপর একটি গোলাম আযাদ করা অথবা দশজনকে কাপড় দেয়া জরুরী হবে। আর যদি তাকীদযুক্ত নয় এমন কসম করে ভেঙ্গে ফেলে তবে দশজন মিসকীনের প্রত্যেককে এক মুদ পরিমাণ গম দিবে আর তা না পারলে তিন দিন রোযা রাখবে। (হাদীসটি ইমাম মালিক এককভাবে বর্ণনা করেছেন)
حدثني يحيى عن مالك عن نافع عن عبد الله بن عمر أنه كان يقول: من حلف بيمين فوكدها ثم حنث فعليه عتق رقبة أو كسوة عشرة مساكين ومن حلف بيمين فلم يؤكدها ثم حنث فعليه إطعام عشرة مساكين لكل مسكين مد من حنطة فمن لم يجد فصيام ثلاثة أيام.
মুয়াত্তা ইমাম মালিক ১০১৪
و حدثني عن مالك عن نافع عن عبد الله بن عمر أنه كان يكفر عن يمينه بإطعام عشرة مساكين لكل مسكين مد من حنطة وكان يعتق المرار إذا وكد اليمين. و حدثني عن مالك عن يحيى بن سعيد عن سليمان بن يسار أنه قال أدركت الناس وهم إذا أعطوا في كفارة اليمين أعطوا مدا من حنطة بالمد الأصغر ورأوا ذلك مجزئا عنهم. ১৭৪৭-قال مالك أحسن ما سمعت في الذي يكفر عن يمينه بالكسوة أنه إن كسا الرجال كساهم ثوبا ثوبا وإن كسا النساء كساهن ثوبين ثوبين درعا وخمارا وذلك أدنى ما يجزئ كلا في صلاته.
নাফি’ (র) থেকে বর্নিতঃ
আবদুল্লাহ ইবনু উমার (রা) যখন স্বীয় কসমের কাফ্ফারা দিতেন তখন দশজন মিসকীনকে আহার করাতেন এবং প্রতিজনকে এক মুদ পরিমাণ গম দিতেন, আর কসম যত তাকীদযুক্ত করতেন তত সংখ্যক গোলাম আযাদ করতেন। (হাদীসটি ইমাম মালিক এককভাবে বর্ণনা করেছেন) ইয়াহইয়া ইবনু সা’ঈদ (র) হতে বর্ণিত, সুলায়মান ইবনু ইয়াসার (র) বললেন : আমি লোকদেরকে পেয়েছি তারা যখন কসমের কাফ্ফারা দিতেন তখন প্রত্যেক মিসকীনকে ছোট মুদের এক মুদ পরিমাণ গম দিতেন এবং উহাই যথেষ্ট বলে মনে করতেন। (হাদীসটি ইমাম মালিক এককভাবে বর্ণনা করেছেন) মালিক (র) বলেন : কসমের কাফ্ফারা কাপড় দিতে চাইলে পুরুষ মিসকীনকে একটি কাপড় দিলেই চলবে, আর মিসকীন নারী হলে অন্তত দুটি করে কাপড় দিতে হবে। একটি জামা আরেকটি ওড়না। কেননা এতটুকুর কমে সালাত হয় না।
নাফি’ (র) থেকে বর্নিতঃ
আবদুল্লাহ ইবনু উমার (রা) যখন স্বীয় কসমের কাফ্ফারা দিতেন তখন দশজন মিসকীনকে আহার করাতেন এবং প্রতিজনকে এক মুদ পরিমাণ গম দিতেন, আর কসম যত তাকীদযুক্ত করতেন তত সংখ্যক গোলাম আযাদ করতেন। (হাদীসটি ইমাম মালিক এককভাবে বর্ণনা করেছেন) ইয়াহইয়া ইবনু সা’ঈদ (র) হতে বর্ণিত, সুলায়মান ইবনু ইয়াসার (র) বললেন : আমি লোকদেরকে পেয়েছি তারা যখন কসমের কাফ্ফারা দিতেন তখন প্রত্যেক মিসকীনকে ছোট মুদের এক মুদ পরিমাণ গম দিতেন এবং উহাই যথেষ্ট বলে মনে করতেন। (হাদীসটি ইমাম মালিক এককভাবে বর্ণনা করেছেন) মালিক (র) বলেন : কসমের কাফ্ফারা কাপড় দিতে চাইলে পুরুষ মিসকীনকে একটি কাপড় দিলেই চলবে, আর মিসকীন নারী হলে অন্তত দুটি করে কাপড় দিতে হবে। একটি জামা আরেকটি ওড়না। কেননা এতটুকুর কমে সালাত হয় না।
و حدثني عن مالك عن نافع عن عبد الله بن عمر أنه كان يكفر عن يمينه بإطعام عشرة مساكين لكل مسكين مد من حنطة وكان يعتق المرار إذا وكد اليمين. و حدثني عن مالك عن يحيى بن سعيد عن سليمان بن يسار أنه قال أدركت الناس وهم إذا أعطوا في كفارة اليمين أعطوا مدا من حنطة بالمد الأصغر ورأوا ذلك مجزئا عنهم. ১৭৪৭-قال مالك أحسن ما سمعت في الذي يكفر عن يمينه بالكسوة أنه إن كسا الرجال كساهم ثوبا ثوبا وإن كسا النساء كساهن ثوبين ثوبين درعا وخمارا وذلك أدنى ما يجزئ كلا في صلاته.