মুয়াত্তা ইমাম মালিক > কুরবানী করার পূর্বে মাথার চুল কামিয়ে ফেললে উহার ফিদ্য়া
মুয়াত্তা ইমাম মালিক ৯৩৩
حدثني عن مالك عن حميد بن قيس عن مجاهد أبي الحجاج عن ابن أبي ليلى عن كعب بن عجرة أن رسول الله صلى الله عليه وسلم قال له لعلك آذاك هوامك فقلت نعم يا رسول الله فقال رسول الله صلى الله عليه وسلم احلق رأسك وصم ثلاثة أيام أو أطعم ستة مساكين أو انسك بشاة.
কা’ব ইবনু ‘উজরা (রা) থেকে বর্নিতঃ
রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়াসাল্লাম) আমাকে বললেন, মনে হয় উকুন তাকে খুবই কষ্ট দিচ্ছে? আমি বললাম হ্যাঁ, ইয়া রসূলুল্লাহ্! তিনি তখন বললেন, চুল কামায়ে ফেল এবং তিনদিন রোযা রাখ বা ছয়জন মিসকীনকে আহার করাও বা একটি বকরী কুরবানী দিয়ে দিও। (বুখারী ১৮১৪)
কা’ব ইবনু ‘উজরা (রা) থেকে বর্নিতঃ
রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়াসাল্লাম) আমাকে বললেন, মনে হয় উকুন তাকে খুবই কষ্ট দিচ্ছে? আমি বললাম হ্যাঁ, ইয়া রসূলুল্লাহ্! তিনি তখন বললেন, চুল কামায়ে ফেল এবং তিনদিন রোযা রাখ বা ছয়জন মিসকীনকে আহার করাও বা একটি বকরী কুরবানী দিয়ে দিও। (বুখারী ১৮১৪)
حدثني عن مالك عن حميد بن قيس عن مجاهد أبي الحجاج عن ابن أبي ليلى عن كعب بن عجرة أن رسول الله صلى الله عليه وسلم قال له لعلك آذاك هوامك فقلت نعم يا رسول الله فقال رسول الله صلى الله عليه وسلم احلق رأسك وصم ثلاثة أيام أو أطعم ستة مساكين أو انسك بشاة.
মুয়াত্তা ইমাম মালিক ৯৩২
حدثني يحيى عن مالك عن عبد الكريم بن مالك الجزري عن عبد الرحمن بن أبي ليلى عن كعب بن عجرة أنه كان مع رسول الله صلى الله عليه وسلم محرما فآذاه القمل في رأسه فأمره رسول الله صلى الله عليه وسلم أن يحلق رأسه وقال صم ثلاثة أيام أو أطعم ستة مساكين مدين مدين لكل إنسان أو انسك بشاة أي ذلك فعلت أجزأ عنك.
কা’ব ইবনু ‘উজরা (রা) থেকে বর্নিতঃ
তিনি ইহরাম অবস্থায় রসূলুল্লাহ্ (সল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম)-এর সাথে ছিলেন। তাঁর মাথায় উকুন তাঁকে কষ্ট দিচ্ছিল। রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়াসাল্লাম) তখন তাঁকে মাথার চুল কামায়ে ফেলতে হুকুম করে বললেন, এর পরিবর্তে তিনদিন রোযা বা ছয়জন মিসকীনের প্রত্যেককে দুই মুদ পরিমাণ খাদ্য কিংবা একটি বকরী কুরবানী দিয়ে দাও। উপরিউক্ত তিনটি বিষয়ের যেকোন একটিই তোমার জন্য যথেষ্ট। (বুখারী ১৮১৫, মুসলিম ১২০১)
কা’ব ইবনু ‘উজরা (রা) থেকে বর্নিতঃ
তিনি ইহরাম অবস্থায় রসূলুল্লাহ্ (সল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম)-এর সাথে ছিলেন। তাঁর মাথায় উকুন তাঁকে কষ্ট দিচ্ছিল। রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়াসাল্লাম) তখন তাঁকে মাথার চুল কামায়ে ফেলতে হুকুম করে বললেন, এর পরিবর্তে তিনদিন রোযা বা ছয়জন মিসকীনের প্রত্যেককে দুই মুদ পরিমাণ খাদ্য কিংবা একটি বকরী কুরবানী দিয়ে দাও। উপরিউক্ত তিনটি বিষয়ের যেকোন একটিই তোমার জন্য যথেষ্ট। (বুখারী ১৮১৫, মুসলিম ১২০১)
حدثني يحيى عن مالك عن عبد الكريم بن مالك الجزري عن عبد الرحمن بن أبي ليلى عن كعب بن عجرة أنه كان مع رسول الله صلى الله عليه وسلم محرما فآذاه القمل في رأسه فأمره رسول الله صلى الله عليه وسلم أن يحلق رأسه وقال صم ثلاثة أيام أو أطعم ستة مساكين مدين مدين لكل إنسان أو انسك بشاة أي ذلك فعلت أجزأ عنك.
মুয়াত্তা ইমাম মালিক ৯৩৪
و حدثني عن مالك عن عطاء بن عبد الله الخراساني أنه قال: حدثني شيخ بسوق البرم بالكوفة عن كعب بن عجرة أنه قال: جاءني رسول الله صلى الله عليه وسلم وأنا أنفخ تحت قدر لأصحابي وقد امتلأ رأسي ولحيتي قملا فأخذ بجبهتي ثم قال احلق هذا الشعر وصم ثلاثة أيام أو أطعم ستة مساكين وقد كان رسول الله صلى الله عليه وسلم علم أنه ليس عندي ما أنسك به. قال مالك في فدية الأذى إن الأمر فيه أن أحدا لا يفتدي حتى يفعل ما يوجب عليه الفدية وإن الكفارة إنما تكون بعد وجوبها على صاحبها وأنه يضع فديته حيث ما شاء النسك أو الصيام أو الصدقة بمكة أو بغيرها من البلاد. ১৫৭৯-قال مالك لا يصلح للمحرم أن ينتف من شعره شيئا ولا يحلقه ولا يقصره حتى يحل إلا أن يصيبه أذى في رأسه فعليه فدية كما أمره الله تعالى ولا يصلح له أن يقلم أظفاره ولا يقتل قملة ولا يطرحها من رأسه إلى الأرض ولا من جلده ولا من ثوبه فإن طرحها المحرم من جلده أو من ثوبه فليطعم حفنة من طعام. قال مالك من نتف شعرا من أنفه أو من إبطه أو اطلى جسده بنورة أو يحلق عن شجة في رأسه لضرورة أو يحلق قفاه لموضع المحاجم وهو محرم ناسيا أو جاهلا إن من فعل شيئا من ذلك فعليه الفدية في ذلك كله ولا ينبغي له أن يحلق موضع المحاجم ومن جهل فحلق رأسه قبل أن يرمي الجمرة افتدى
কা’ব ইবনু ‘উজরা (রা) থেকে বর্নিতঃ
রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়াসাল্লাম) আমার কাছে এলেন। আমি চুলায় আগুন ধরিয়ে সঙ্গীদের জন্য রান্ন-বান্নায় ব্যস্ত ছিলাম। আমার মাথা ও দাড়ি উকুনে ভরা ছিল। রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়াসাল্লাম) আমার পেরেশানী অনুভব করে আমার ললাটে হাত রাখলেন এবং বললেন, চুল কেটে ফেল এবং তিনদিন রোযা রাখ বা ছয় জন মিসকীনকে খাদ্য দিয়ে দাও। আর আমার নিকট কুরবানী করার মত কিছু ছিল না, এ কথা তিনি জানতেন। (বুখারী ৪১৯০, মুসলিম ১২০১, ইমাম মালিক (র)-এর সনদে মুবহাম রয়েছে) মালিক (র) বলেন, অপরাধ না হওয়া পর্যন্ত কেউ কিছু ফিদ্য়া দিবে না। কারণ অপরাধ করার পরই শুধু কাফ্ফারা ওয়াজিব হয়ে থাকে। কাফ্ফারার বেলায় কুরবানী বা রোযা বা মিসকীনকে খাদ্য প্রদান, এই তিনটির যেকোন একটি এবং মক্কা বা মক্কার বাহিরে যেকোন শহরে উহা আদায় করার ইখতিয়ার রয়েছে। মালিক (র) বলেন, ইহরাম না খোলা পর্যন্ত মুহরিমের জন্য চুল উপড়ান বা কামানো বা ছাঁটা কিছুই জায়েয নয়। চুলে উকুন ইত্যাদি হয়ে গেলে তা জায়েয। কিন্তু উহার পরিবর্তে আল্লাহর নির্দেশমত ফিদ্য়া দিতে হবে। মুহরিমের জন্য নখ কাটা, উকুন মারা বা মাথার চুল হতে উকুন বের করে মাটিতে ফেলে দেওয়া বা শরীর ও কাপড়ের উকুন বের করা জায়েয নয়। এইরূপ করলে এক মুষ্টি খাদ্য খয়রাত করবে। মালিক (র) বলেন, যদি ইহরাম অবস্থায় কোন ব্যক্তি নাকের চুল বা বগলতলা বা নাভীর নিচের লোম চিমটি দ্বারা উপড়ায় অথবা মাথায় যখম হওয়ার দরুন প্রয়োজনের খাতিরে চুল কামায় বা শিঙ্গা লাগাবার উদ্দেশ্যে গর্দানের চুল কাটে, এসব জেনে করুক বা ভুলবশত করুক, সকল অবস্থায়ই তার জন্য ফিদ্য়া দেওয়া ওয়াজিব। শিঙ্গা লাগানো স্থানের চুল কামানো মুহরিমের জন্য জায়েয নয়। মালিক (র) বলেন, অজ্ঞতার দরুন যদি কেউ কঙ্কর নিক্ষেপের পূর্বেই মাথার চুল কামায়ে ফেলে তবে তাকে ফিদ্য়া দিতে হবে।
কা’ব ইবনু ‘উজরা (রা) থেকে বর্নিতঃ
রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়াসাল্লাম) আমার কাছে এলেন। আমি চুলায় আগুন ধরিয়ে সঙ্গীদের জন্য রান্ন-বান্নায় ব্যস্ত ছিলাম। আমার মাথা ও দাড়ি উকুনে ভরা ছিল। রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়াসাল্লাম) আমার পেরেশানী অনুভব করে আমার ললাটে হাত রাখলেন এবং বললেন, চুল কেটে ফেল এবং তিনদিন রোযা রাখ বা ছয় জন মিসকীনকে খাদ্য দিয়ে দাও। আর আমার নিকট কুরবানী করার মত কিছু ছিল না, এ কথা তিনি জানতেন। (বুখারী ৪১৯০, মুসলিম ১২০১, ইমাম মালিক (র)-এর সনদে মুবহাম রয়েছে) মালিক (র) বলেন, অপরাধ না হওয়া পর্যন্ত কেউ কিছু ফিদ্য়া দিবে না। কারণ অপরাধ করার পরই শুধু কাফ্ফারা ওয়াজিব হয়ে থাকে। কাফ্ফারার বেলায় কুরবানী বা রোযা বা মিসকীনকে খাদ্য প্রদান, এই তিনটির যেকোন একটি এবং মক্কা বা মক্কার বাহিরে যেকোন শহরে উহা আদায় করার ইখতিয়ার রয়েছে। মালিক (র) বলেন, ইহরাম না খোলা পর্যন্ত মুহরিমের জন্য চুল উপড়ান বা কামানো বা ছাঁটা কিছুই জায়েয নয়। চুলে উকুন ইত্যাদি হয়ে গেলে তা জায়েয। কিন্তু উহার পরিবর্তে আল্লাহর নির্দেশমত ফিদ্য়া দিতে হবে। মুহরিমের জন্য নখ কাটা, উকুন মারা বা মাথার চুল হতে উকুন বের করে মাটিতে ফেলে দেওয়া বা শরীর ও কাপড়ের উকুন বের করা জায়েয নয়। এইরূপ করলে এক মুষ্টি খাদ্য খয়রাত করবে। মালিক (র) বলেন, যদি ইহরাম অবস্থায় কোন ব্যক্তি নাকের চুল বা বগলতলা বা নাভীর নিচের লোম চিমটি দ্বারা উপড়ায় অথবা মাথায় যখম হওয়ার দরুন প্রয়োজনের খাতিরে চুল কামায় বা শিঙ্গা লাগাবার উদ্দেশ্যে গর্দানের চুল কাটে, এসব জেনে করুক বা ভুলবশত করুক, সকল অবস্থায়ই তার জন্য ফিদ্য়া দেওয়া ওয়াজিব। শিঙ্গা লাগানো স্থানের চুল কামানো মুহরিমের জন্য জায়েয নয়। মালিক (র) বলেন, অজ্ঞতার দরুন যদি কেউ কঙ্কর নিক্ষেপের পূর্বেই মাথার চুল কামায়ে ফেলে তবে তাকে ফিদ্য়া দিতে হবে।
و حدثني عن مالك عن عطاء بن عبد الله الخراساني أنه قال: حدثني شيخ بسوق البرم بالكوفة عن كعب بن عجرة أنه قال: جاءني رسول الله صلى الله عليه وسلم وأنا أنفخ تحت قدر لأصحابي وقد امتلأ رأسي ولحيتي قملا فأخذ بجبهتي ثم قال احلق هذا الشعر وصم ثلاثة أيام أو أطعم ستة مساكين وقد كان رسول الله صلى الله عليه وسلم علم أنه ليس عندي ما أنسك به. قال مالك في فدية الأذى إن الأمر فيه أن أحدا لا يفتدي حتى يفعل ما يوجب عليه الفدية وإن الكفارة إنما تكون بعد وجوبها على صاحبها وأنه يضع فديته حيث ما شاء النسك أو الصيام أو الصدقة بمكة أو بغيرها من البلاد. ১৫৭৯-قال مالك لا يصلح للمحرم أن ينتف من شعره شيئا ولا يحلقه ولا يقصره حتى يحل إلا أن يصيبه أذى في رأسه فعليه فدية كما أمره الله تعالى ولا يصلح له أن يقلم أظفاره ولا يقتل قملة ولا يطرحها من رأسه إلى الأرض ولا من جلده ولا من ثوبه فإن طرحها المحرم من جلده أو من ثوبه فليطعم حفنة من طعام. قال مالك من نتف شعرا من أنفه أو من إبطه أو اطلى جسده بنورة أو يحلق عن شجة في رأسه لضرورة أو يحلق قفاه لموضع المحاجم وهو محرم ناسيا أو جاهلا إن من فعل شيئا من ذلك فعليه الفدية في ذلك كله ولا ينبغي له أن يحلق موضع المحاجم ومن جهل فحلق رأسه قبل أن يرمي الجمرة افتدى
মুয়াত্তা ইমাম মালিক > হজ্জের কোন রুকনে ভুল করলে কি করতে হবে
মুয়াত্তা ইমাম মালিক ৯৩৫
حدثني يحيى عن مالك عن أيوب بن أبي تميمة السختياني عن سعيد بن جبير عن عبد الله بن عباس قال من نسي من نسكه شيئا أو تركه فليهرق دما ال أيوب لا أدري قال ترك أو نسي قال مالك ما كان من ذلك هديا فلا يكون إلا بمكة وما كان من ذلك نسكا فهو يكون حيث أحب صاحب النسك.
সাঈদ ইবনু যুবায়র (র) থেকে বর্নিতঃ
আবদুল্লাহ্ ইবনু আব্বাস (রা) বলেছেন, যদি কেউ হজ্জে কোন রুকন আদায় করতে ভুলে যায় বা তা ছেড়ে দেয় তবে তাকে কুরবানী দিতে হবে। আইয়ূব (আইয়ূব ইবনু আবি তমীমা সখতিয়ানী) (র) বলেন, আমার মনে নাই সাঈদ (র) ভুলে গেলে বলেছেন, না ছেড়ে দিলে বলেছিলেন। (হাদীসটি ইমাম মালিক (রঃ) একক ভাবে বর্ণনা করেছেন) মালিক (র) বলেন, উক্ত কুরবানী মক্কায় পৌঁছাতে হবে। অন্য কোন ইবাদত হলে যেকোন স্থানেই তা আদায় করা যায়।
সাঈদ ইবনু যুবায়র (র) থেকে বর্নিতঃ
আবদুল্লাহ্ ইবনু আব্বাস (রা) বলেছেন, যদি কেউ হজ্জে কোন রুকন আদায় করতে ভুলে যায় বা তা ছেড়ে দেয় তবে তাকে কুরবানী দিতে হবে। আইয়ূব (আইয়ূব ইবনু আবি তমীমা সখতিয়ানী) (র) বলেন, আমার মনে নাই সাঈদ (র) ভুলে গেলে বলেছেন, না ছেড়ে দিলে বলেছিলেন। (হাদীসটি ইমাম মালিক (রঃ) একক ভাবে বর্ণনা করেছেন) মালিক (র) বলেন, উক্ত কুরবানী মক্কায় পৌঁছাতে হবে। অন্য কোন ইবাদত হলে যেকোন স্থানেই তা আদায় করা যায়।
حدثني يحيى عن مالك عن أيوب بن أبي تميمة السختياني عن سعيد بن جبير عن عبد الله بن عباس قال من نسي من نسكه شيئا أو تركه فليهرق دما ال أيوب لا أدري قال ترك أو نسي قال مالك ما كان من ذلك هديا فلا يكون إلا بمكة وما كان من ذلك نسكا فهو يكون حيث أحب صاحب النسك.
মুয়াত্তা ইমাম মালিক > ফিদ্য়া সম্পর্কিত বিবিধ আহকাম
মুয়াত্তা ইমাম মালিক ৯৩৬
قال مالك فيمن أراد أن يلبس شيئا من الثياب التي لا ينبغي له أن يلبسها وهو محرم أو يقصر شعره أو يمس طيبا من غير ضرورة ليسارة مؤنة الفدية عليه قال لا ينبغي لأحد أن يفعل ذلك وإنما أرخص فيه للضرورة وعلى من فعل ذلك الفدية و سئل مالك عن الفدية من الصيام أو الصدقة أو النسك أصاحبه بالخيار في ذلك وما النسك وكم الطعام وبأي مد هو وكم الصيام وهل يؤخر شيئا من ذلك أم يفعله في فوره ذلك قال مالك كل شيء في كتاب الله في الكفارات كذا أو كذا فصاحبه مخير في ذلك أي شيء أحب أن يفعل ذلك فعل قال وأما النسك فشاة وأما الصيام فثلاثة أيام وأما الطعام فيطعم ستة مساكين لكل مسكين مدان بالمد الأول مد النبي صلى الله عليه وسلم ১৫৮৮-قال مالك وسمعت بعض أهل العلم يقول إذا رمى المحرم شيئا فأصاب شيئا من الصيد لم يرده فقتله إن عليه أن يفديه وكذلك الحلال يرمي في الحرم شيئا فيصيب صيدا لم يرده فيقتله إن عليه أن يفديه لأن العمد والخطأ في ذلك بمنزلة سواء. ১৫৮৯- قال مالك في القوم يصيبون الصيد جميعا وهم محرمون أو في الحرم قال أرى أن على كل إنسان منهم جزاءه إن حكم عليهم بالهدي فعلى كل إنسان منهم هدي وإن حكم عليهم بالصيام كان على كل إنسان منهم الصيام ومثل ذلك القوم يقتلون الرجل خطأ فتكون كفارة ذلك عتق رقبة على كل إنسان منهم أو صيام شهرين متتابعين على كل إنسان منهم. قال مالك من رمى صيدا أو صاده بعد رميه الجمرة وحلاق رأسه غير أنه لم يفض إن عليه جزاء ذلك الصيد لأن الله تبارك وتعالى قال { وإذا حللتم فاصطادوا } ومن لم يفض فقد بقي عليه مس الطيب والنساء. ১৫৯১-قال مالك ليس على المحرم فيما قطع من الشجر في الحرم شيء ولم يبلغنا أن أحدا حكم عليه فيه بشيء وبئس ما صنع. ১৫৯২-قال مالك في الذي يجهل أو ينسى صيام ثلاثة أيام في الحج أو يمرض فيها فلا يصومها حتى يقدم بلده قال ليهد إن وجد هديا وإلا فليصم ثلاثة أيام في أهله وسبعة بعد ذلك.
মালিক (র) থেকে বর্নিতঃ
ফিদ্য়া দেওয়া সহজ মনে করে যদি কেউ ইহরাম অবস্থায় পড়া নাজায়েয এমন ধরনের কাপড় পরে বা চুল কেটে ফেলে বা বিনা প্রয়োজনে সুগন্ধি দ্রব্য ব্যবহার করে, তবে এটা তার জন্য অনুচিত হবে। একান্ত প্রয়োজনের খাতিরেই একজন ঐ সমস্ত কাজ করতে পারে তা করলে তাকে অবশ্যই ফিদ্য়া দিতে হবে। মালিক (র)-কে জিজ্ঞেস করা হল আল্লাহ্ তা’আলা ইরশাদ করেছেন যে ব্যক্তি ফিদ্য়া দিবে তার পক্ষে রোযা বা সদকা বা নুসুক’ এই তিনটির যেকোন একটি দ্বারা ফিদ্য়া দেওয়ার ইখতিয়ার আছে কিনা? নুসুক অর্থ কি? সদকা বা মিসকীনদের কতটুকু খাদ্য প্রদান করতে হবে এবং কোন ধরনের ‘মুদের’ (এক প্রকার মাপ) মাপে উহা আদায় করতে হবে? রোযা কয়টি রাখতে হবে? সঙ্গে সঙ্গে রাখতে হবে, না বিলম্ব করলেও চলবে? মালিক (রা) উত্তরে বললেন, আল্লাহ্ তা’আলা যত জায়গায় কাফফারা সম্পর্কে ‘ইহা’ বা ‘উহা’ এই ধরনের শব্দ ব্যবহার করেছেন সকল স্থানেই উল্লিখিত বিষয়সমূহের যেকোন একটি আদায় করার ইখতিয়ার থাকে। ‘নুসুক’ অর্থ এইখানে একটি বকরী কুরবানী করা। রোযা তিনটি রাখতে হবে। ছয়জন মিসকীনকে খাদ্য প্রদান করতে হবে। প্রত্যেক মিসকীনকেই নাবী (সল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম)-এর মুদে দুই মুদ পরিমাণ খাদ্য প্রদান করতে হবে। মালিক (র) বলেন, কতিপয় আলিমের নিকট শুনেছি তাঁরা বলেন, কোন বস্তুকে লক্ষ করে মুহরিম ব্যক্তি যদি কিছু নিক্ষেপ করে আর উহা লক্ষ্যভ্রষ্ট হয়ে কোন পশু বা পাখির গায়ে আঘাত করার ফলে যদি তা মারা যায়, তবে উক্ত প্রাণী হত্যা করার ইচছা না থাকা সত্ত্বেও ঐ ব্যক্তিকে ফিদ্য়া দিতে হবে। এমনিভাবে মুহরিম নয় এরূপ কোন ব্যক্তি হারমের ভিতর কোন বস্তুর প্রতি লক্ষ করে কিছু ছুঁড়লে আর উহা কোন প্রাণীর গায়ে লেগে যদি তা মারা যায়, তবে উহার উপরও ফিদ্য়া ধার্য হবে। এই বিষয়টির ইচ্ছাকৃতভাবে মারা বা লক্ষ্যভ্রষ্ট হয়ে মারা যাওয়া উভয় অবস্থার হুকুমই এক। মালিক (র) বলেন, কয়েকজন ব্যক্তি মিলে যদি একটি শিকার হত্যা করে আর সকলেই যদি মুহরিম হয় অথবা হারাম শরীফে থাকে তবে প্রত্যেককেই সম্পূর্ণভাবে এক একটি ফিদ্য়া আদায় করতে হবে। কুরবানী দিতে হলে প্রত্যেককেই একটি করে দিতে হবে। আর রোযা রাখতে হলে প্রত্যেককেই রোযা রাখতে হবে। যেমন কয়েক ব্যক্তি যদি ভুলক্রমে একজনকে হত্যা করে ফেলে, তবে হত্যার কাফফারা (অর্থাৎ একটি গোলাম আযাদ করা) প্রত্যেকের উপর আলাদাভাবে ওয়াজিব হয় বা প্রত্যেককেই একাধারে দুই মাস রোযা রাখতে হয়। এইখানেও তদ্রূপ হুকুম হবে। মালিক (র) বলেন, কেউ যদি তাওয়াফে যিয়ারতের পূর্বে এবং কঙ্কর নিক্ষেপ ও মাথার চুল কাটার পর কোন কিছু শিকার করে তবে তাকেও ফিদ্য়া দিতে হবে। কেননা আল্লাহ্ তা’আলা ইরশাদ করেছেন,وَإِذَا حَلَلْتُمْ فَاصْطَادُوا ‘ তোমরা ইহরাম হতে যখন হালাল হও তখন শিকার করতে পার।’ আর তাওয়াফে যিয়ারত না করা পর্যন্ত মুহরিম থাকে, পুরাপুরি হালাল হয় না। তাওয়াফে ইফাযার পূর্বে স্ত্রীসহবাস ও সুগন্ধি দ্রব্য ব্যবহার করা বৈধ নয়। মালিক (র) বলেন, হারাম শরীফের গাছপালা উপড়ান মুহরিমের জন্য ভাল নয়। তবে এর জন্য কোন ফিদ্য়া দিতে হবে না। কেউ এই কাজের জন্য ফিদ্য়া দিতে বলেছেন এমন কথা আমরা শুনি নাই। মালিক (র) বলেন, হজ্জের সময় যদি তিনদিন রোযা রাখতে কেউ (যার উপর উহা রাখা ওয়াজিব) ভুলে যায় বা অসুস্থতার দরুন রাখতে না পারে আর সে নিজ বাড়ি চলে আসে, তবে সম্ভব হলে সে কুরবানী করবে। আর তা না পারলে বাড়িতে প্রথমে তিনদিন রোযা রেখে পরে সাতদিন রোযা রাখবে।
মালিক (র) থেকে বর্নিতঃ
ফিদ্য়া দেওয়া সহজ মনে করে যদি কেউ ইহরাম অবস্থায় পড়া নাজায়েয এমন ধরনের কাপড় পরে বা চুল কেটে ফেলে বা বিনা প্রয়োজনে সুগন্ধি দ্রব্য ব্যবহার করে, তবে এটা তার জন্য অনুচিত হবে। একান্ত প্রয়োজনের খাতিরেই একজন ঐ সমস্ত কাজ করতে পারে তা করলে তাকে অবশ্যই ফিদ্য়া দিতে হবে। মালিক (র)-কে জিজ্ঞেস করা হল আল্লাহ্ তা’আলা ইরশাদ করেছেন যে ব্যক্তি ফিদ্য়া দিবে তার পক্ষে রোযা বা সদকা বা নুসুক’ এই তিনটির যেকোন একটি দ্বারা ফিদ্য়া দেওয়ার ইখতিয়ার আছে কিনা? নুসুক অর্থ কি? সদকা বা মিসকীনদের কতটুকু খাদ্য প্রদান করতে হবে এবং কোন ধরনের ‘মুদের’ (এক প্রকার মাপ) মাপে উহা আদায় করতে হবে? রোযা কয়টি রাখতে হবে? সঙ্গে সঙ্গে রাখতে হবে, না বিলম্ব করলেও চলবে? মালিক (রা) উত্তরে বললেন, আল্লাহ্ তা’আলা যত জায়গায় কাফফারা সম্পর্কে ‘ইহা’ বা ‘উহা’ এই ধরনের শব্দ ব্যবহার করেছেন সকল স্থানেই উল্লিখিত বিষয়সমূহের যেকোন একটি আদায় করার ইখতিয়ার থাকে। ‘নুসুক’ অর্থ এইখানে একটি বকরী কুরবানী করা। রোযা তিনটি রাখতে হবে। ছয়জন মিসকীনকে খাদ্য প্রদান করতে হবে। প্রত্যেক মিসকীনকেই নাবী (সল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম)-এর মুদে দুই মুদ পরিমাণ খাদ্য প্রদান করতে হবে। মালিক (র) বলেন, কতিপয় আলিমের নিকট শুনেছি তাঁরা বলেন, কোন বস্তুকে লক্ষ করে মুহরিম ব্যক্তি যদি কিছু নিক্ষেপ করে আর উহা লক্ষ্যভ্রষ্ট হয়ে কোন পশু বা পাখির গায়ে আঘাত করার ফলে যদি তা মারা যায়, তবে উক্ত প্রাণী হত্যা করার ইচছা না থাকা সত্ত্বেও ঐ ব্যক্তিকে ফিদ্য়া দিতে হবে। এমনিভাবে মুহরিম নয় এরূপ কোন ব্যক্তি হারমের ভিতর কোন বস্তুর প্রতি লক্ষ করে কিছু ছুঁড়লে আর উহা কোন প্রাণীর গায়ে লেগে যদি তা মারা যায়, তবে উহার উপরও ফিদ্য়া ধার্য হবে। এই বিষয়টির ইচ্ছাকৃতভাবে মারা বা লক্ষ্যভ্রষ্ট হয়ে মারা যাওয়া উভয় অবস্থার হুকুমই এক। মালিক (র) বলেন, কয়েকজন ব্যক্তি মিলে যদি একটি শিকার হত্যা করে আর সকলেই যদি মুহরিম হয় অথবা হারাম শরীফে থাকে তবে প্রত্যেককেই সম্পূর্ণভাবে এক একটি ফিদ্য়া আদায় করতে হবে। কুরবানী দিতে হলে প্রত্যেককেই একটি করে দিতে হবে। আর রোযা রাখতে হলে প্রত্যেককেই রোযা রাখতে হবে। যেমন কয়েক ব্যক্তি যদি ভুলক্রমে একজনকে হত্যা করে ফেলে, তবে হত্যার কাফফারা (অর্থাৎ একটি গোলাম আযাদ করা) প্রত্যেকের উপর আলাদাভাবে ওয়াজিব হয় বা প্রত্যেককেই একাধারে দুই মাস রোযা রাখতে হয়। এইখানেও তদ্রূপ হুকুম হবে। মালিক (র) বলেন, কেউ যদি তাওয়াফে যিয়ারতের পূর্বে এবং কঙ্কর নিক্ষেপ ও মাথার চুল কাটার পর কোন কিছু শিকার করে তবে তাকেও ফিদ্য়া দিতে হবে। কেননা আল্লাহ্ তা’আলা ইরশাদ করেছেন,وَإِذَا حَلَلْتُمْ فَاصْطَادُوا ‘ তোমরা ইহরাম হতে যখন হালাল হও তখন শিকার করতে পার।’ আর তাওয়াফে যিয়ারত না করা পর্যন্ত মুহরিম থাকে, পুরাপুরি হালাল হয় না। তাওয়াফে ইফাযার পূর্বে স্ত্রীসহবাস ও সুগন্ধি দ্রব্য ব্যবহার করা বৈধ নয়। মালিক (র) বলেন, হারাম শরীফের গাছপালা উপড়ান মুহরিমের জন্য ভাল নয়। তবে এর জন্য কোন ফিদ্য়া দিতে হবে না। কেউ এই কাজের জন্য ফিদ্য়া দিতে বলেছেন এমন কথা আমরা শুনি নাই। মালিক (র) বলেন, হজ্জের সময় যদি তিনদিন রোযা রাখতে কেউ (যার উপর উহা রাখা ওয়াজিব) ভুলে যায় বা অসুস্থতার দরুন রাখতে না পারে আর সে নিজ বাড়ি চলে আসে, তবে সম্ভব হলে সে কুরবানী করবে। আর তা না পারলে বাড়িতে প্রথমে তিনদিন রোযা রেখে পরে সাতদিন রোযা রাখবে।
قال مالك فيمن أراد أن يلبس شيئا من الثياب التي لا ينبغي له أن يلبسها وهو محرم أو يقصر شعره أو يمس طيبا من غير ضرورة ليسارة مؤنة الفدية عليه قال لا ينبغي لأحد أن يفعل ذلك وإنما أرخص فيه للضرورة وعلى من فعل ذلك الفدية و سئل مالك عن الفدية من الصيام أو الصدقة أو النسك أصاحبه بالخيار في ذلك وما النسك وكم الطعام وبأي مد هو وكم الصيام وهل يؤخر شيئا من ذلك أم يفعله في فوره ذلك قال مالك كل شيء في كتاب الله في الكفارات كذا أو كذا فصاحبه مخير في ذلك أي شيء أحب أن يفعل ذلك فعل قال وأما النسك فشاة وأما الصيام فثلاثة أيام وأما الطعام فيطعم ستة مساكين لكل مسكين مدان بالمد الأول مد النبي صلى الله عليه وسلم ১৫৮৮-قال مالك وسمعت بعض أهل العلم يقول إذا رمى المحرم شيئا فأصاب شيئا من الصيد لم يرده فقتله إن عليه أن يفديه وكذلك الحلال يرمي في الحرم شيئا فيصيب صيدا لم يرده فيقتله إن عليه أن يفديه لأن العمد والخطأ في ذلك بمنزلة سواء. ১৫৮৯- قال مالك في القوم يصيبون الصيد جميعا وهم محرمون أو في الحرم قال أرى أن على كل إنسان منهم جزاءه إن حكم عليهم بالهدي فعلى كل إنسان منهم هدي وإن حكم عليهم بالصيام كان على كل إنسان منهم الصيام ومثل ذلك القوم يقتلون الرجل خطأ فتكون كفارة ذلك عتق رقبة على كل إنسان منهم أو صيام شهرين متتابعين على كل إنسان منهم. قال مالك من رمى صيدا أو صاده بعد رميه الجمرة وحلاق رأسه غير أنه لم يفض إن عليه جزاء ذلك الصيد لأن الله تبارك وتعالى قال { وإذا حللتم فاصطادوا } ومن لم يفض فقد بقي عليه مس الطيب والنساء. ১৫৯১-قال مالك ليس على المحرم فيما قطع من الشجر في الحرم شيء ولم يبلغنا أن أحدا حكم عليه فيه بشيء وبئس ما صنع. ১৫৯২-قال مالك في الذي يجهل أو ينسى صيام ثلاثة أيام في الحج أو يمرض فيها فلا يصومها حتى يقدم بلده قال ليهد إن وجد هديا وإلا فليصم ثلاثة أيام في أهله وسبعة بعد ذلك.
মুয়াত্তা ইমাম মালিক > হজ্জ সম্পর্কীয় বিবিধ আহকাম
মুয়াত্তা ইমাম মালিক ৯৩৭
حدثني يحيى عن مالك عن ابن شهاب عن عيسى بن طلحة عن عبد الله بن عمرو بن العاص أنه قال: وقف رسول الله صلى الله عليه وسلم للناس بمنى والناس يسألونه فجاءه رجل فقال له يا رسول الله لم أشعر فحلقت قبل أن أنحر فقال رسول الله صلى الله عليه وسلم انحر ولا حرج ثم جاءه آخر فقال يا رسول الله لم أشعر فنحرت قبل أن أرمي قال ارم ولا حرج قال فما سئل رسول الله صلى الله عليه وسلم عن شيء قدم ولا أخر إلا قال افعل ولا حرج.
আবদুল্লাহ্ ইবনু ‘আমর ইবনু ‘আস (রা) থেকে বর্নিতঃ
বিদায় হজ্জের (হাজ্জাতুল বিদা) সময় রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়াসাল্লাম) মানুষের খাতিরে মিনায় দাঁড়ান। বিভিন্ন লোক এসে তাঁর কাছে বিভিন্ন মাসআলা জিজ্ঞেস করতে লাগল। এমন সময় এক ব্যক্তি এসে বলল, হে আল্লাহর রসূল! আমি জানতাম না, তাই কুরবানী করার পূর্বেই মাথা কামায়ে ফেলেছি। রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়াসাল্লাম) বললেন, এখন কুরবানী করে নাও। কোন অসুবিধা নাই। অন্য এক ব্যক্তি এসে বলল, হে আল্লাহর রসূল! আমি কঙ্কর নিক্ষেপ করার পূর্বেই কুরবানী দিয়ে ফেলেছি। রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়াসাল্লাম) বললেন, এখন কঙ্কর নিক্ষেপ করে নাও; কোন অসুবিধা হবে না। আবদুল্লাহ্ (রা) বলেন, আগে বা পরে ফেলা সম্পর্কে সেই দিন রসূলুল্লাহ্ (সল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম)কে যত প্রশ্ন করা হয়েছে সকলের বেলায়ই তিনি বলেছেন, এখন করে নাও। কোন অসুবিধা হবে না। (বুখারী ১২৪, মুসলিম ১৩০৬)
আবদুল্লাহ্ ইবনু ‘আমর ইবনু ‘আস (রা) থেকে বর্নিতঃ
বিদায় হজ্জের (হাজ্জাতুল বিদা) সময় রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়াসাল্লাম) মানুষের খাতিরে মিনায় দাঁড়ান। বিভিন্ন লোক এসে তাঁর কাছে বিভিন্ন মাসআলা জিজ্ঞেস করতে লাগল। এমন সময় এক ব্যক্তি এসে বলল, হে আল্লাহর রসূল! আমি জানতাম না, তাই কুরবানী করার পূর্বেই মাথা কামায়ে ফেলেছি। রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়াসাল্লাম) বললেন, এখন কুরবানী করে নাও। কোন অসুবিধা নাই। অন্য এক ব্যক্তি এসে বলল, হে আল্লাহর রসূল! আমি কঙ্কর নিক্ষেপ করার পূর্বেই কুরবানী দিয়ে ফেলেছি। রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়াসাল্লাম) বললেন, এখন কঙ্কর নিক্ষেপ করে নাও; কোন অসুবিধা হবে না। আবদুল্লাহ্ (রা) বলেন, আগে বা পরে ফেলা সম্পর্কে সেই দিন রসূলুল্লাহ্ (সল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম)কে যত প্রশ্ন করা হয়েছে সকলের বেলায়ই তিনি বলেছেন, এখন করে নাও। কোন অসুবিধা হবে না। (বুখারী ১২৪, মুসলিম ১৩০৬)
حدثني يحيى عن مالك عن ابن شهاب عن عيسى بن طلحة عن عبد الله بن عمرو بن العاص أنه قال: وقف رسول الله صلى الله عليه وسلم للناس بمنى والناس يسألونه فجاءه رجل فقال له يا رسول الله لم أشعر فحلقت قبل أن أنحر فقال رسول الله صلى الله عليه وسلم انحر ولا حرج ثم جاءه آخر فقال يا رسول الله لم أشعر فنحرت قبل أن أرمي قال ارم ولا حرج قال فما سئل رسول الله صلى الله عليه وسلم عن شيء قدم ولا أخر إلا قال افعل ولا حرج.
মুয়াত্তা ইমাম মালিক ৯৩৯
و حدثني عن مالك عن إبراهيم بن عقبة عن كريب مولى عبد الله بن عباس عن ابن عباس أن رسول الله صلى الله عليه وسلم مر بامرأة وهي في محفتها فقيل لها هذا رسول الله صلى الله عليه وسلم فأخذت بضبعي صبي كان معها فقالت ألهذا حج يا رسول الله قال نعم ولك أجر.
আবদুল্লাহ্ ইবনু আব্বাস (রা) থেকে বর্নিতঃ
হাওদাজে আরোহিণী এক মহিলার নিকট দিয়ে রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়াসাল্লাম) পথ অতিক্রম করে যাচ্ছিলেন। মহিলাটিকে কেউ তখন বলল, ইনি রসূলুল্লাহ্ (সল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম)। মহিলাটি তখন স্বীয় শিশু সন্তানটির হাত ধারণ করে বলল, হে আল্লাহর রসূল! এই শিশুটিও হজ্জ আমার সাথে আদায় হবে কি? রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়াসাল্লাম) বললেন, হ্যাঁ, আদায় হবে। আর এর সওয়াব তুমি পাবে। (সহীহ, মুসলিম ১৩৩৬)
আবদুল্লাহ্ ইবনু আব্বাস (রা) থেকে বর্নিতঃ
হাওদাজে আরোহিণী এক মহিলার নিকট দিয়ে রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়াসাল্লাম) পথ অতিক্রম করে যাচ্ছিলেন। মহিলাটিকে কেউ তখন বলল, ইনি রসূলুল্লাহ্ (সল্লাল্লাহু আলাইহি ওয়াসাল্লাম)। মহিলাটি তখন স্বীয় শিশু সন্তানটির হাত ধারণ করে বলল, হে আল্লাহর রসূল! এই শিশুটিও হজ্জ আমার সাথে আদায় হবে কি? রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়াসাল্লাম) বললেন, হ্যাঁ, আদায় হবে। আর এর সওয়াব তুমি পাবে। (সহীহ, মুসলিম ১৩৩৬)
و حدثني عن مالك عن إبراهيم بن عقبة عن كريب مولى عبد الله بن عباس عن ابن عباس أن رسول الله صلى الله عليه وسلم مر بامرأة وهي في محفتها فقيل لها هذا رسول الله صلى الله عليه وسلم فأخذت بضبعي صبي كان معها فقالت ألهذا حج يا رسول الله قال نعم ولك أجر.
মুয়াত্তা ইমাম মালিক ৯৪১
و حدثني عن مالك عن زياد بن أبي زياد مولى عبد الله بن عياش بن أبي ربيعة عن طلحة بن عبيد الله بن كريز أن رسول الله صلى الله عليه وسلم قال أفضل الدعاء دعاء يوم عرفة وأفضل ما قلت أنا والنبيون من قبلي لا إله إلا الله وحده لا شريك له.
তালহা ইবনু উবায়দুল্লাহ্ ইবন্ কারীয (র) থেকে বর্নিতঃ
রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়াসাল্লাম) বলেছেন, সর্বোত্তম দু’আ হল আরাফাতের দু’আ। আর আরাফাতের সর্বোত্তম দু’আ হল ঐ দু’আ যা আমি এবং আমার পূর্ববর্তী পয়গম্বরগণ করেছিলেন। দু’আটি এই لَا إِلَهَ إِلَّا اللهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ. আল্লাহ্ ব্যতীত কেউ ইলাহ্ নেই, তিনি এক, তাঁর কোন শরীক নেই। (ইমাম মালিক (র) বলেছেন, সনদ মুরসাল সহীহ, ইমাম বাইহাকী আবূ হুরাইরা হতে মারফু বলেছেন [সিলসিলাতুস সহীহা ৭/৪])
তালহা ইবনু উবায়দুল্লাহ্ ইবন্ কারীয (র) থেকে বর্নিতঃ
রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়াসাল্লাম) বলেছেন, সর্বোত্তম দু’আ হল আরাফাতের দু’আ। আর আরাফাতের সর্বোত্তম দু’আ হল ঐ দু’আ যা আমি এবং আমার পূর্ববর্তী পয়গম্বরগণ করেছিলেন। দু’আটি এই لَا إِلَهَ إِلَّا اللهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ. আল্লাহ্ ব্যতীত কেউ ইলাহ্ নেই, তিনি এক, তাঁর কোন শরীক নেই। (ইমাম মালিক (র) বলেছেন, সনদ মুরসাল সহীহ, ইমাম বাইহাকী আবূ হুরাইরা হতে মারফু বলেছেন [সিলসিলাতুস সহীহা ৭/৪])
و حدثني عن مالك عن زياد بن أبي زياد مولى عبد الله بن عياش بن أبي ربيعة عن طلحة بن عبيد الله بن كريز أن رسول الله صلى الله عليه وسلم قال أفضل الدعاء دعاء يوم عرفة وأفضل ما قلت أنا والنبيون من قبلي لا إله إلا الله وحده لا شريك له.
মুয়াত্তা ইমাম মালিক ৯৪২
و حدثني عن مالك عن ابن شهاب عن أنس بن مالك أن رسول الله صلى الله عليه وسلم دخل مكة عام الفتح وعلى رأسه المغفر فلما نزعه جاءه رجل فقال له يا رسول الله ابن خطل متعلق بأستار الكعبة فقال رسول الله صلى الله عليه وسلم اقتلوه قال مالك ولم يكن رسول الله صلى الله عليه وسلم يومئذ محرما والله أعلم.
আনাস ইবনু মালিক (র) থেকে বর্নিতঃ
মক্কা বিজয়ের সময় রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়াসাল্লাম) যখন মক্কায় প্রবেশ করেন তখন তিনি মাথায় লৌহ শিরস্ত্রাণ পরিহিত ছিলেন। মাথা হতে উহা যখন খুলে রাখলেন, তখন এক ব্যক্তি এসে বলল, হে আল্লাহর রসূল! ইবনু খতল কা’বার গিলাফ ধরে দাঁড়িয়ে রয়েছে। রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়াসাল্লাম) বললেন, তাকে হত্যা কর। ইমাম মালিক (র) বলেন, ইবনু শিহাব (র) বলেছেন, ঐদিন রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়াসাল্লাম) ইহরাম বাঁধা অবস্থায় ছিলেন না। আল্লাহই সর্বজ্ঞ। (বুখারী ১৮৪৬, মুসলিম ১৩৫৭)
আনাস ইবনু মালিক (র) থেকে বর্নিতঃ
মক্কা বিজয়ের সময় রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়াসাল্লাম) যখন মক্কায় প্রবেশ করেন তখন তিনি মাথায় লৌহ শিরস্ত্রাণ পরিহিত ছিলেন। মাথা হতে উহা যখন খুলে রাখলেন, তখন এক ব্যক্তি এসে বলল, হে আল্লাহর রসূল! ইবনু খতল কা’বার গিলাফ ধরে দাঁড়িয়ে রয়েছে। রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়াসাল্লাম) বললেন, তাকে হত্যা কর। ইমাম মালিক (র) বলেন, ইবনু শিহাব (র) বলেছেন, ঐদিন রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়াসাল্লাম) ইহরাম বাঁধা অবস্থায় ছিলেন না। আল্লাহই সর্বজ্ঞ। (বুখারী ১৮৪৬, মুসলিম ১৩৫৭)
و حدثني عن مالك عن ابن شهاب عن أنس بن مالك أن رسول الله صلى الله عليه وسلم دخل مكة عام الفتح وعلى رأسه المغفر فلما نزعه جاءه رجل فقال له يا رسول الله ابن خطل متعلق بأستار الكعبة فقال رسول الله صلى الله عليه وسلم اقتلوه قال مالك ولم يكن رسول الله صلى الله عليه وسلم يومئذ محرما والله أعلم.
মুয়াত্তা ইমাম মালিক ৯৩৮
و حدثني عن مالك عن نافع عن عبد الله بن عمر أن رسول الله صلى الله عليه وسلم كان إذا قفل من غزو أو حج أو عمرة يكبر على كل شرف من الأرض ثلاث تكبيرات ثم يقول لا إله إلا الله وحده لا شريك له له الملك وله الحمد وهو على كل شيء قدير آيبون تائبون عابدون ساجدون لربنا حامدون صدق الله وعده ونصر عبده وهزم الأحزاب وحده.
আবদুল্লাহ্ ইবনু উমার (রা) থেকে বর্নিতঃ
রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়াসাল্লাম) যখন জিহাদ বা হজ্জ বা উমরা হতে প্রত্যাবর্তন করতেন, তখন প্রতিটি উচুস্থান অতিক্রম করার সময় তিনি ‘আল্লাহু আকবার’ বলে নিম্নোক্ত দু’আ পাঠ করতেন لَا إِلَهَ إِلَّا اللهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ لَهُ الْمُلْكُ وَلَهُ الْحَمْدُ وَهُوَ عَلَى كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ آيِبُونَ تَائِبُونَ عَابِدُونَ سَاجِدُونَ لِرَبِّنَا حَامِدُونَ صَدَقَ اللهُ وَعْدَهُ وَنَصَرَ عَبْدَهُ وَهَزَمَ الْأَحْزَابَ وَحْدَهُ. ‘আল্লাহ্ ছাড়া কোন ইলাহ্ বা মাবূদ নেই, তিনি এক, তাঁর কোন শরীক নেই। তাঁর সকল সাম্রাজ্য এবং তাঁরই সকল প্রশংসা এবং তিনি সকল জিনিসের উপর ক্ষমতাশীল। আমরা প্রত্যাবর্তনকারী, তওবাকারী, ইবাদত-গুজার, সিজদা আদায়কারী এবং প্রভুর প্রশংসাকারী। আল্লাহ্ তাঁর ওয়াদা পূরণ করেছেন, তার বান্দাকে সাহায্য করেছেন এবং একাই তিনি পরাজিত করেছেন সকল শত্রু বাহিনী। (বুখারী ১৭৯৭, মুসলিম ১৩৪৪)
আবদুল্লাহ্ ইবনু উমার (রা) থেকে বর্নিতঃ
রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়াসাল্লাম) যখন জিহাদ বা হজ্জ বা উমরা হতে প্রত্যাবর্তন করতেন, তখন প্রতিটি উচুস্থান অতিক্রম করার সময় তিনি ‘আল্লাহু আকবার’ বলে নিম্নোক্ত দু’আ পাঠ করতেন لَا إِلَهَ إِلَّا اللهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ لَهُ الْمُلْكُ وَلَهُ الْحَمْدُ وَهُوَ عَلَى كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ آيِبُونَ تَائِبُونَ عَابِدُونَ سَاجِدُونَ لِرَبِّنَا حَامِدُونَ صَدَقَ اللهُ وَعْدَهُ وَنَصَرَ عَبْدَهُ وَهَزَمَ الْأَحْزَابَ وَحْدَهُ. ‘আল্লাহ্ ছাড়া কোন ইলাহ্ বা মাবূদ নেই, তিনি এক, তাঁর কোন শরীক নেই। তাঁর সকল সাম্রাজ্য এবং তাঁরই সকল প্রশংসা এবং তিনি সকল জিনিসের উপর ক্ষমতাশীল। আমরা প্রত্যাবর্তনকারী, তওবাকারী, ইবাদত-গুজার, সিজদা আদায়কারী এবং প্রভুর প্রশংসাকারী। আল্লাহ্ তাঁর ওয়াদা পূরণ করেছেন, তার বান্দাকে সাহায্য করেছেন এবং একাই তিনি পরাজিত করেছেন সকল শত্রু বাহিনী। (বুখারী ১৭৯৭, মুসলিম ১৩৪৪)
و حدثني عن مالك عن نافع عن عبد الله بن عمر أن رسول الله صلى الله عليه وسلم كان إذا قفل من غزو أو حج أو عمرة يكبر على كل شرف من الأرض ثلاث تكبيرات ثم يقول لا إله إلا الله وحده لا شريك له له الملك وله الحمد وهو على كل شيء قدير آيبون تائبون عابدون ساجدون لربنا حامدون صدق الله وعده ونصر عبده وهزم الأحزاب وحده.
মুয়াত্তা ইমাম মালিক ৯৪০
و حدثني عن مالك عن إبراهيم بن أبي عبلة عن طلحة بن عبيد الله بن كريز أن رسول الله صلى الله عليه وسلم قال ما رئي الشيطان يوما هو فيه أصغر ولا أدحر ولا أحقر ولا أغيظ منه في يوم عرفة وما ذاك إلا لما رأى من تنزل الرحمة وتجاوز الله عن الذنوب العظام إلا ما أري يوم بدر قيل وما رأى يوم بدر يا رسول الله قال أما إنه قد رأى جبريل يزع الملائكة.
তালহা ইবনু উবায়দুল্লাহ্ ইবনু কারীয (র) থেকে বর্নিতঃ
রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়াসাল্লাম) বলেছেন, আরাফাতের দিন হতে বেশি আর কোনদিন শয়তানকে লাঞ্ছিত, অপমানিত এবং রাগান্বিত হতে দেখা যায়নি। কারণ এই দিন সে আল্লাহ্ তা’আলার অপার রহমত নাযিল হতে এবং বড় বড় গুনাহসমূহ মাফ হয়ে যেতে দেখতে পায়। বদর যুদ্ধের দিনও তার ঐ অবস্থা হতে দেখা গিয়েছিল। কেউ জিজ্ঞেস করল বদরের দিন সে কি দেখেছিল? রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়াসাল্লাম) বললেন, ঐ দিন সে জিবরাঈল (আ)-কে ফেরেশতা বাহিনীকে কাতারবন্দী করতে দেখেছিল। (যয়ীফ, ইমাম হাকিম বর্ণনা করেছেন মুসতাদরাকে, ইবনু আব্বাস (রা) ও আবূ দারদা (রা) হতে। আল্লামা আলবানী জয়ীফ বলেছেন, [মিশকাত ২৬০০])
তালহা ইবনু উবায়দুল্লাহ্ ইবনু কারীয (র) থেকে বর্নিতঃ
রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়াসাল্লাম) বলেছেন, আরাফাতের দিন হতে বেশি আর কোনদিন শয়তানকে লাঞ্ছিত, অপমানিত এবং রাগান্বিত হতে দেখা যায়নি। কারণ এই দিন সে আল্লাহ্ তা’আলার অপার রহমত নাযিল হতে এবং বড় বড় গুনাহসমূহ মাফ হয়ে যেতে দেখতে পায়। বদর যুদ্ধের দিনও তার ঐ অবস্থা হতে দেখা গিয়েছিল। কেউ জিজ্ঞেস করল বদরের দিন সে কি দেখেছিল? রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়াসাল্লাম) বললেন, ঐ দিন সে জিবরাঈল (আ)-কে ফেরেশতা বাহিনীকে কাতারবন্দী করতে দেখেছিল। (যয়ীফ, ইমাম হাকিম বর্ণনা করেছেন মুসতাদরাকে, ইবনু আব্বাস (রা) ও আবূ দারদা (রা) হতে। আল্লামা আলবানী জয়ীফ বলেছেন, [মিশকাত ২৬০০])
و حدثني عن مالك عن إبراهيم بن أبي عبلة عن طلحة بن عبيد الله بن كريز أن رسول الله صلى الله عليه وسلم قال ما رئي الشيطان يوما هو فيه أصغر ولا أدحر ولا أحقر ولا أغيظ منه في يوم عرفة وما ذاك إلا لما رأى من تنزل الرحمة وتجاوز الله عن الذنوب العظام إلا ما أري يوم بدر قيل وما رأى يوم بدر يا رسول الله قال أما إنه قد رأى جبريل يزع الملائكة.
মুয়াত্তা ইমাম মালিক ৯৪৩
و حدثني عن مالك عن نافع أن عبد الله بن عمر أقبل من مكة حتى إذا كان بقديد جاءه خبر من المدينة فرجع فدخل مكة بغير إحرام.
আবদুল্লাহ্ ইবনু উমার (রা) থেকে বর্নিতঃ
মদীনায় প্রত্যাবর্তন করেছিলেন। কুদায়দ নামক স্থানে পৌঁছে তিনি মদীনার বিশৃংখলা [১] সম্পর্কে সংবাদ শুনেন। শেষে তিনি পুনরায় মক্কা ফিরে যান এবং ইহরাম ছাড়াই মক্কায় প্রবেশ করেন। (হাদীসটি ইমাম মালিক (রঃ) একক ভাবে বর্ণনা করেছেন) ২৪৮/৯৪৯-و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ بِمِثْلِ ذَلِكَ. মালিক (র) এইরূপ রেওয়ায়ত ইবনু শিহাব হতেও বর্ণনা করেছেন। (হাদীসটি ইমাম মালিক (রঃ) একক ভাবে বর্ণনা করেছেন)
আবদুল্লাহ্ ইবনু উমার (রা) থেকে বর্নিতঃ
মদীনায় প্রত্যাবর্তন করেছিলেন। কুদায়দ নামক স্থানে পৌঁছে তিনি মদীনার বিশৃংখলা [১] সম্পর্কে সংবাদ শুনেন। শেষে তিনি পুনরায় মক্কা ফিরে যান এবং ইহরাম ছাড়াই মক্কায় প্রবেশ করেন। (হাদীসটি ইমাম মালিক (রঃ) একক ভাবে বর্ণনা করেছেন) ২৪৮/৯৪৯-و حَدَّثَنِي عَنْ مَالِك عَنْ ابْنِ شِهَابٍ بِمِثْلِ ذَلِكَ. মালিক (র) এইরূপ রেওয়ায়ত ইবনু শিহাব হতেও বর্ণনা করেছেন। (হাদীসটি ইমাম মালিক (রঃ) একক ভাবে বর্ণনা করেছেন)
و حدثني عن مالك عن نافع أن عبد الله بن عمر أقبل من مكة حتى إذا كان بقديد جاءه خبر من المدينة فرجع فدخل مكة بغير إحرام.
মুয়াত্তা ইমাম মালিক ৯৪৫
و حدثني عن مالك عن عبد الله بن أبي بكر بن حزم عن ابن أبي مليكة أن عمر بن الخطاب مر بامرأة مجذومة وهي تطوف بالبيت فقال لها يا أمة الله لا تؤذي الناس لو جلست في بيتك فجلست فمر بها رجل بعد ذلك فقال لها إن الذي كان قد نهاك قد مات فاخرجي فقالت ما كنت لأطيعه حيا وأعصيه ميتا.
ইবনু আবি মুলায়কা (র) থেকে বর্নিতঃ
বায়তুল্লাহর তাওয়াফরত কুষ্ঠ রোগাক্রান্ত এক মহিলার নিকট দিয়ে উমার ইবনু খাত্তাব (রা) যাচ্ছিলেন। তখন তিনি তাঁকে বললেন, হে আল্লাহর দাসী, অন্য মানুষকে কষ্ট দিও না। হায়, তুমি যদি তোমার বাড়িতেই বসে থাকতে। পরে উক্ত মেয়েলোকটি নিজের বাড়িতেই বসে থাকত। একদিন একটি লোক তাকে বললঃ যিনি তোমাকে বাড়ির বাহিরে যেতে নিষেধ করেছেন, তিনি ইন্তিকাল করেছেন। এখন তুমি বের হয়ে আসতে পার। মেয়েটি বলল, জীবদ্দশায় তাঁকে মানব, আর মৃত্যুর পর অবাধ্য হব, আমি এমন স্ত্রীলোক নই; (হাদীসটি ইমাম মালিক (রঃ) একক ভাবে বর্ণনা করেছেন)
ইবনু আবি মুলায়কা (র) থেকে বর্নিতঃ
বায়তুল্লাহর তাওয়াফরত কুষ্ঠ রোগাক্রান্ত এক মহিলার নিকট দিয়ে উমার ইবনু খাত্তাব (রা) যাচ্ছিলেন। তখন তিনি তাঁকে বললেন, হে আল্লাহর দাসী, অন্য মানুষকে কষ্ট দিও না। হায়, তুমি যদি তোমার বাড়িতেই বসে থাকতে। পরে উক্ত মেয়েলোকটি নিজের বাড়িতেই বসে থাকত। একদিন একটি লোক তাকে বললঃ যিনি তোমাকে বাড়ির বাহিরে যেতে নিষেধ করেছেন, তিনি ইন্তিকাল করেছেন। এখন তুমি বের হয়ে আসতে পার। মেয়েটি বলল, জীবদ্দশায় তাঁকে মানব, আর মৃত্যুর পর অবাধ্য হব, আমি এমন স্ত্রীলোক নই; (হাদীসটি ইমাম মালিক (রঃ) একক ভাবে বর্ণনা করেছেন)
و حدثني عن مالك عن عبد الله بن أبي بكر بن حزم عن ابن أبي مليكة أن عمر بن الخطاب مر بامرأة مجذومة وهي تطوف بالبيت فقال لها يا أمة الله لا تؤذي الناس لو جلست في بيتك فجلست فمر بها رجل بعد ذلك فقال لها إن الذي كان قد نهاك قد مات فاخرجي فقالت ما كنت لأطيعه حيا وأعصيه ميتا.
মুয়াত্তা ইমাম মালিক ৯৪৬
و حدثني عن مالك أنه بلغه أن عبد الله بن عباس كان يقول ما بين الركن والباب الملتزم.
মালিক (র) থেকে বর্নিতঃ
আমি জেনেছি, আবদুল্লাহ ইবনু আব্বাস (রা) বলতেন, হাজরে আসওয়াদ এবং কা’বা শরীফের দরজার মধ্যবর্তী স্থানটি হল মুলতাযাম। (হাদীসটি ইমাম মালিক (রঃ) একক ভাবে বর্ণনা করেছেন)
মালিক (র) থেকে বর্নিতঃ
আমি জেনেছি, আবদুল্লাহ ইবনু আব্বাস (রা) বলতেন, হাজরে আসওয়াদ এবং কা’বা শরীফের দরজার মধ্যবর্তী স্থানটি হল মুলতাযাম। (হাদীসটি ইমাম মালিক (রঃ) একক ভাবে বর্ণনা করেছেন)
و حدثني عن مالك أنه بلغه أن عبد الله بن عباس كان يقول ما بين الركن والباب الملتزم.
মুয়াত্তা ইমাম মালিক ৯৪৮
و حدثني عن مالك أنه سأل ابن شهاب عن الاستثناء في الحج فقال أو يصنع ذلك أحد وأنكر ذلك سئل مالك هل يحتش الرجل لدابته من الحرم فقال لا.
মালিক (র) থেকে বর্নিতঃ
শিহাব (র)-এর নিকট জিজ্ঞেস করলেন হজ্জের মধ্যে কোন কিছুর শর্ত আরোপ করা কিরূপ? তিনি বললেন, এমনও কেউ করে নাকি? এবং তিনি উক্ত বিষয়টির বিপক্ষে মতপ্রকাশ করলেন। (হাদীসটি ইমাম মালিক (রঃ) একক ভাবে বর্ণনা করেছেন) মালিক (র)-কে জিজ্ঞেস করা হয়েছিল স্বীয় পশুর (খাদ্যের) নিমিত্তে হারাম শরীফের ঘাস কাটা যেতে পারে কি? তিনি বললেন, না।
মালিক (র) থেকে বর্নিতঃ
শিহাব (র)-এর নিকট জিজ্ঞেস করলেন হজ্জের মধ্যে কোন কিছুর শর্ত আরোপ করা কিরূপ? তিনি বললেন, এমনও কেউ করে নাকি? এবং তিনি উক্ত বিষয়টির বিপক্ষে মতপ্রকাশ করলেন। (হাদীসটি ইমাম মালিক (রঃ) একক ভাবে বর্ণনা করেছেন) মালিক (র)-কে জিজ্ঞেস করা হয়েছিল স্বীয় পশুর (খাদ্যের) নিমিত্তে হারাম শরীফের ঘাস কাটা যেতে পারে কি? তিনি বললেন, না।
و حدثني عن مالك أنه سأل ابن شهاب عن الاستثناء في الحج فقال أو يصنع ذلك أحد وأنكر ذلك سئل مالك هل يحتش الرجل لدابته من الحرم فقال لا.
মুয়াত্তা ইমাম মালিক ৯৪৪
و حدثني عن مالك عن محمد بن عمرو بن حلحلة الديلي عن محمد بن عمران الأنصاري عن أبيه أنه قال عدل إلي عبد الله بن عمر وأنا نازل تحت سرحة بطريق مكة فقال ما أنزلك تحت هذه السرحة فقلت أردت ظلها فقال هل غير ذلك فقلت لا ما أنزلني إلا ذلك فقال عبد الله بن عمر قال رسول الله صلى الله عليه وسلم إذا كنت بين الأخشبين من منى ونفخ بيده نحو المشرق فإن هناك واديا يقال له السرر به شجرة سر تحتها سبعون نبيا.
মুহাম্মদ ইমরান আনসারী (র) থেকে বর্নিতঃ
মক্কার পথে একটি বড় গাছের নিচে আমি বিশ্রাম নিচ্ছিলাম। আবদুল্লাহ ইবনু উমার (রা) তখন আমার নিকট এসে বললেন, এই গাছটির নিচে এসে কেন নেমে পড়লে? আমি বললাম একটু ছায়া লাভের জন্য। তিনি বললেন, আর কোন উদ্দেশ্য নয়তো? আমি বললাম না, ছায়ার জন্যই। তখন আবদুল্লাহ ইবনু উমার (রা) বললেন, রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়াসাল্লাম) বলেছেন, যখন তুমি মিনায় বড় বড় দুটি পর্বতের মধ্যবর্তী স্থানে হবে, এই বলে রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়াসাল্লাম) পূর্বদিকে হস্ত দ্বারা ইশারা করলেন, তখন (জানিও যে,) ঐ উপত্যকায় যাকে সিরার বলা হয়, উহার একটি বড় গাছের নিচে সত্তর জন নবীর (জন্মের পর) নাড়ী কর্তন করা হয়েছিল। (যয়ীফ, নাসায়ী ২৯৫৫, আহমাদ ৬২৩৩, আলবানী যয়ীফ বলেছেন, [সিলসিলাতুয যয়ীফা ২৭০১])
মুহাম্মদ ইমরান আনসারী (র) থেকে বর্নিতঃ
মক্কার পথে একটি বড় গাছের নিচে আমি বিশ্রাম নিচ্ছিলাম। আবদুল্লাহ ইবনু উমার (রা) তখন আমার নিকট এসে বললেন, এই গাছটির নিচে এসে কেন নেমে পড়লে? আমি বললাম একটু ছায়া লাভের জন্য। তিনি বললেন, আর কোন উদ্দেশ্য নয়তো? আমি বললাম না, ছায়ার জন্যই। তখন আবদুল্লাহ ইবনু উমার (রা) বললেন, রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়াসাল্লাম) বলেছেন, যখন তুমি মিনায় বড় বড় দুটি পর্বতের মধ্যবর্তী স্থানে হবে, এই বলে রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়াসাল্লাম) পূর্বদিকে হস্ত দ্বারা ইশারা করলেন, তখন (জানিও যে,) ঐ উপত্যকায় যাকে সিরার বলা হয়, উহার একটি বড় গাছের নিচে সত্তর জন নবীর (জন্মের পর) নাড়ী কর্তন করা হয়েছিল। (যয়ীফ, নাসায়ী ২৯৫৫, আহমাদ ৬২৩৩, আলবানী যয়ীফ বলেছেন, [সিলসিলাতুয যয়ীফা ২৭০১])
و حدثني عن مالك عن محمد بن عمرو بن حلحلة الديلي عن محمد بن عمران الأنصاري عن أبيه أنه قال عدل إلي عبد الله بن عمر وأنا نازل تحت سرحة بطريق مكة فقال ما أنزلك تحت هذه السرحة فقلت أردت ظلها فقال هل غير ذلك فقلت لا ما أنزلني إلا ذلك فقال عبد الله بن عمر قال رسول الله صلى الله عليه وسلم إذا كنت بين الأخشبين من منى ونفخ بيده نحو المشرق فإن هناك واديا يقال له السرر به شجرة سر تحتها سبعون نبيا.
মুয়াত্তা ইমাম মালিক ৯৪৭
و حدثني عن مالك عن يحيى بن سعيد عن محمد بن يحيى بن حبان أنه سمعه يذكر أن رجلا مر على أبي ذر بالربذة وأن أبا ذر سأله أين تريد فقال أردت الحج فقال هل نزعك غيره فقال لا قال فأتنف العمل قال الرجل فخرجت حتى قدمت مكة فمكثت ما شاء الله ثم إذا أنا بالناس منقصفين على رجل فضاغطت عليه الناس فإذا أنا بالشيخ الذي وجدت بالربذة يعني أبا ذر قال فلما رآني عرفني فقال هو الذي حدثتك.
মুহাম্মদ ইবনু ইয়াহইয়া ইবনু হাব্বান (র) থেকে বর্নিতঃ
রবাযা নামক স্থানে আবূযার (রা)-এর নিকট দিয়ে এক ব্যক্তি পথ অতিক্রম করে যাচ্ছিলেন। তাঁকে দেখে তিনি বললেন, কোথায় যাচ্ছ? তিনি বললেন, হজ্জের উদ্দেশ্যে যাত্রা করেছি। তিনি বললেন, অন্য কোন উদ্দেশ্য তো নেই? তিনি বললেন, না। আবূযার (রা) বললেন, আচ্ছা যাও, তোমার কাজ তুমি কর। ঐ ব্যক্তি বলেন, আমি মক্কায় চলে গেলাম। আল্লাহর যতদিন ইচ্ছা হল আমি সেখানে রয়ে গেলাম। একদিন দেখি এক ব্যক্তিকে কেন্দ্র করে মানুষ খুবই ভিড় করে আছে। ভিড়ের ভিতরে যেয়ে দেখি, রবাযায় যাঁর সাথে আমার সাক্ষাৎ হয়েছিল (আবূযর রা.) তিনি বসে আছেন। তিনি আমাকে দেখে চিনে ফেললেন এবং বললেন, তুমি সেই ব্যক্তি না, যাকে আমি হাদীস বর্ণনা করে শুনেছিলাম। (হাদীসটি ইমাম মালিক (রঃ) একক ভাবে বর্ণনা করেছেন)
মুহাম্মদ ইবনু ইয়াহইয়া ইবনু হাব্বান (র) থেকে বর্নিতঃ
রবাযা নামক স্থানে আবূযার (রা)-এর নিকট দিয়ে এক ব্যক্তি পথ অতিক্রম করে যাচ্ছিলেন। তাঁকে দেখে তিনি বললেন, কোথায় যাচ্ছ? তিনি বললেন, হজ্জের উদ্দেশ্যে যাত্রা করেছি। তিনি বললেন, অন্য কোন উদ্দেশ্য তো নেই? তিনি বললেন, না। আবূযার (রা) বললেন, আচ্ছা যাও, তোমার কাজ তুমি কর। ঐ ব্যক্তি বলেন, আমি মক্কায় চলে গেলাম। আল্লাহর যতদিন ইচ্ছা হল আমি সেখানে রয়ে গেলাম। একদিন দেখি এক ব্যক্তিকে কেন্দ্র করে মানুষ খুবই ভিড় করে আছে। ভিড়ের ভিতরে যেয়ে দেখি, রবাযায় যাঁর সাথে আমার সাক্ষাৎ হয়েছিল (আবূযর রা.) তিনি বসে আছেন। তিনি আমাকে দেখে চিনে ফেললেন এবং বললেন, তুমি সেই ব্যক্তি না, যাকে আমি হাদীস বর্ণনা করে শুনেছিলাম। (হাদীসটি ইমাম মালিক (রঃ) একক ভাবে বর্ণনা করেছেন)
و حدثني عن مالك عن يحيى بن سعيد عن محمد بن يحيى بن حبان أنه سمعه يذكر أن رجلا مر على أبي ذر بالربذة وأن أبا ذر سأله أين تريد فقال أردت الحج فقال هل نزعك غيره فقال لا قال فأتنف العمل قال الرجل فخرجت حتى قدمت مكة فمكثت ما شاء الله ثم إذا أنا بالناس منقصفين على رجل فضاغطت عليه الناس فإذا أنا بالشيخ الذي وجدت بالربذة يعني أبا ذر قال فلما رآني عرفني فقال هو الذي حدثتك.