সহিহ মুসলিম > উম্মুল মু’মিনীন যাইনাব (রাঃ)-এর ফযিলত
সহিহ মুসলিম ৬২১০
حدثنا محمود بن غيلان أبو أحمد، حدثنا الفضل بن موسى السيناني، أخبرنا طلحة بن يحيى بن طلحة، عن عائشة بنت طلحة، عن عائشة أم المؤمنين، قالت قال رسول الله صلى الله عليه وسلم " أسرعكن لحاقا بي أطولكن يدا " . قالت فكن يتطاولن أيتهن أطول يدا . قالت فكانت أطولنا يدا زينب لأنها كانت تعمل بيدها وتصدق .
আয়িশাহ্ (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ
তিনি বলেন, রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: তোমাদের মাঝে সর্বপ্রথম সেই-আমার সঙ্গে দেখা হবে যার হাত অধিক লম্বা। অতএব সব স্ত্রীরা নিজ নিজ হাত মেপে দেখতে লাগলেন কার হাত অধিক লম্বা। ‘আয়িশা (রাঃ) বলেন, পরিশেষে আমাদের মাঝে যাইনাবের হাতই সবচেয়ে লম্বা বলে ঠিক হলো। কেননা, তিনি হাত দ্বারা কাজ করতেন এবং দান করতেন। (ই. ফা. ৬০৯৪, ই. সে. ৬১৩৫)
আয়িশাহ্ (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ
তিনি বলেন, রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: তোমাদের মাঝে সর্বপ্রথম সেই-আমার সঙ্গে দেখা হবে যার হাত অধিক লম্বা। অতএব সব স্ত্রীরা নিজ নিজ হাত মেপে দেখতে লাগলেন কার হাত অধিক লম্বা। ‘আয়িশা (রাঃ) বলেন, পরিশেষে আমাদের মাঝে যাইনাবের হাতই সবচেয়ে লম্বা বলে ঠিক হলো। কেননা, তিনি হাত দ্বারা কাজ করতেন এবং দান করতেন। (ই. ফা. ৬০৯৪, ই. সে. ৬১৩৫)
حدثنا محمود بن غيلان أبو أحمد، حدثنا الفضل بن موسى السيناني، أخبرنا طلحة بن يحيى بن طلحة، عن عائشة بنت طلحة، عن عائشة أم المؤمنين، قالت قال رسول الله صلى الله عليه وسلم " أسرعكن لحاقا بي أطولكن يدا " . قالت فكن يتطاولن أيتهن أطول يدا . قالت فكانت أطولنا يدا زينب لأنها كانت تعمل بيدها وتصدق .
সহিহ মুসলিম > উম্মুল মু’মিনীন উম্মু আইমান (রাঃ)-এর ফযিলত
সহিহ মুসলিম ৬২১১
حدثنا أبو كريب، محمد بن العلاء حدثنا أبو أسامة، عن سليمان بن المغيرة، عن ثابت، عن أنس، قال انطلق رسول الله صلى الله عليه وسلم إلى أم أيمن فانطلقت معه فناولته إناء فيه شراب - قال - فلا أدري أصادفته صائما أو لم يرده فجعلت تصخب عليه وتذمر عليه .
আনাস (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ
তিনি বলেন, রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) উম্মু আইমানের নিকট গেলেন। আমিও তাঁর সাথে গেলাম। তিনি তাঁর দিকে একটি শরবতের পাত্র এগয়ে দিলেন। আমি জানি না যে, নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) সিয়াম পালন করছিলেন, না এমনিতেই তা ফিরিয়ে দিলেন। উম্মু আইমান (রাঃ) এতে চীৎকার শুরু করে উঠলেন এবং তাঁর (সাঃ-এর) উপর (শরবত পানে) চাপ দিতে লাগলেন। (ই. ফা. ৬০৯৫, ই. সে. ৬১৩৬)
আনাস (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ
তিনি বলেন, রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) উম্মু আইমানের নিকট গেলেন। আমিও তাঁর সাথে গেলাম। তিনি তাঁর দিকে একটি শরবতের পাত্র এগয়ে দিলেন। আমি জানি না যে, নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) সিয়াম পালন করছিলেন, না এমনিতেই তা ফিরিয়ে দিলেন। উম্মু আইমান (রাঃ) এতে চীৎকার শুরু করে উঠলেন এবং তাঁর (সাঃ-এর) উপর (শরবত পানে) চাপ দিতে লাগলেন। (ই. ফা. ৬০৯৫, ই. সে. ৬১৩৬)
حدثنا أبو كريب، محمد بن العلاء حدثنا أبو أسامة، عن سليمان بن المغيرة، عن ثابت، عن أنس، قال انطلق رسول الله صلى الله عليه وسلم إلى أم أيمن فانطلقت معه فناولته إناء فيه شراب - قال - فلا أدري أصادفته صائما أو لم يرده فجعلت تصخب عليه وتذمر عليه .
সহিহ মুসলিম ৬২১২
حدثنا زهير بن حرب، أخبرني عمرو بن عاصم الكلابي، حدثنا سليمان بن المغيرة، عن ثابت، عن أنس، قال قال أبو بكر رضى الله عنه بعد وفاة رسول الله صلى الله عليه وسلم لعمر انطلق بنا إلى أم أيمن نزورها كما كان رسول الله صلى الله عليه وسلم يزورها . فلما انتهينا إليها بكت فقالا لها ما يبكيك ما عند الله خير لرسوله صلى الله عليه وسلم . فقالت ما أبكي أن لا أكون أعلم أن ما عند الله خير لرسوله صلى الله عليه وسلم ولكن أبكي أن الوحى قد انقطع من السماء . فهيجتهما على البكاء فجعلا يبكيان معها .
আনাস (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ
তিনি বলেন, রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর ইন্তিকালের পর আবূ বকর (রাঃ) ‘উমার (রাঃ)-কে বললেন, চলো উম্মু আইমানের নিকট যাই, তাঁর সাথে দেখা করতে যাবো, রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তাঁর সাথে দেখা করতেন। যখন আমরা তাঁর নিকট গেলাম, তখন তিনি কাঁদতে লাগলেন। তাঁরা উভয়ে বললেন, তুমি কাঁদছ কনে? আল্লাহ তা‘আলার নিকট যা কিছু আছে তা তাঁর রসূলের জন্য সর্বাধিক উত্তম। উম্মু আইমান (রাঃ) বললেন, এজন্য আমি কাঁদছি না যে, আমি জানি না আল্লাহর কাছে যা কিছু আছে, তা রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর জন্য উত্তম বরং এজন্য আমি কাঁদছি যে, আকাশ হতে ওয়াহী আসা বন্ধ হয়ে গেল। উম্মু আইমানের এ কথা তাঁদেরকে কান্নাপ্লুত করে তুলল। অতএব তাঁরাও তাঁর সঙ্গে কাঁদতে শুরু করলেন। (ই. ফা. ৬০৯৬, ই. সে. ৬১৩৭)
আনাস (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ
তিনি বলেন, রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর ইন্তিকালের পর আবূ বকর (রাঃ) ‘উমার (রাঃ)-কে বললেন, চলো উম্মু আইমানের নিকট যাই, তাঁর সাথে দেখা করতে যাবো, রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তাঁর সাথে দেখা করতেন। যখন আমরা তাঁর নিকট গেলাম, তখন তিনি কাঁদতে লাগলেন। তাঁরা উভয়ে বললেন, তুমি কাঁদছ কনে? আল্লাহ তা‘আলার নিকট যা কিছু আছে তা তাঁর রসূলের জন্য সর্বাধিক উত্তম। উম্মু আইমান (রাঃ) বললেন, এজন্য আমি কাঁদছি না যে, আমি জানি না আল্লাহর কাছে যা কিছু আছে, তা রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর জন্য উত্তম বরং এজন্য আমি কাঁদছি যে, আকাশ হতে ওয়াহী আসা বন্ধ হয়ে গেল। উম্মু আইমানের এ কথা তাঁদেরকে কান্নাপ্লুত করে তুলল। অতএব তাঁরাও তাঁর সঙ্গে কাঁদতে শুরু করলেন। (ই. ফা. ৬০৯৬, ই. সে. ৬১৩৭)
حدثنا زهير بن حرب، أخبرني عمرو بن عاصم الكلابي، حدثنا سليمان بن المغيرة، عن ثابت، عن أنس، قال قال أبو بكر رضى الله عنه بعد وفاة رسول الله صلى الله عليه وسلم لعمر انطلق بنا إلى أم أيمن نزورها كما كان رسول الله صلى الله عليه وسلم يزورها . فلما انتهينا إليها بكت فقالا لها ما يبكيك ما عند الله خير لرسوله صلى الله عليه وسلم . فقالت ما أبكي أن لا أكون أعلم أن ما عند الله خير لرسوله صلى الله عليه وسلم ولكن أبكي أن الوحى قد انقطع من السماء . فهيجتهما على البكاء فجعلا يبكيان معها .
সহিহ মুসলিম > আনাস ইবনু মালিকের মা উম্মু সুলায়ম এবং বিলাল (রাঃ)-এর ফযিলত
সহিহ মুসলিম ৬২১৩
حدثنا حسن الحلواني، حدثنا عمرو بن عاصم، حدثنا همام، عن إسحاق بن عبد، الله عن أنس، قال كان النبي صلى الله عليه وسلم لا يدخل على أحد من النساء إلا على أزواجه إلا أم سليم فإنه كان يدخل عليها فقيل له في ذلك فقال " إني أرحمها قتل أخوها معي " .
আনাস (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ
রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) আপন স্ত্রীদের ব্যতীত অন্য কোন নারীর গৃহে ঢুকতেন না। কিন্তু উম্মু সালায়মের নিকট যেতেন। লোকেরা এর কারণ জানতে চাইলে তিনি বললেন, এর উপর আমার বড় মায়া হয়। আমার সাথে থেকে তাঁর ভাই নিহত (শাহীদ) হয়েছে। (ই. ফা. ৬০৯৭, ই. সে. ৬১৩৮)
আনাস (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ
রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) আপন স্ত্রীদের ব্যতীত অন্য কোন নারীর গৃহে ঢুকতেন না। কিন্তু উম্মু সালায়মের নিকট যেতেন। লোকেরা এর কারণ জানতে চাইলে তিনি বললেন, এর উপর আমার বড় মায়া হয়। আমার সাথে থেকে তাঁর ভাই নিহত (শাহীদ) হয়েছে। (ই. ফা. ৬০৯৭, ই. সে. ৬১৩৮)
حدثنا حسن الحلواني، حدثنا عمرو بن عاصم، حدثنا همام، عن إسحاق بن عبد، الله عن أنس، قال كان النبي صلى الله عليه وسلم لا يدخل على أحد من النساء إلا على أزواجه إلا أم سليم فإنه كان يدخل عليها فقيل له في ذلك فقال " إني أرحمها قتل أخوها معي " .
সহিহ মুসলিম ৬২১৪
وحدثنا ابن أبي عمر، حدثنا بشر، - يعني ابن السري - حدثنا حماد بن سلمة، عن ثابت، عن أنس، عن النبي صلى الله عليه وسلم قال " دخلت الجنة فسمعت خشفة فقلت من هذا قالوا هذه الغميصاء بنت ملحان أم أنس بن مالك " .
আনাস (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ
নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: আমি জান্নাতে প্রবেশ করলাম, সেখানে আমি কারও চলার আওয়াজ পেলাম। আমি প্রশ্ন করলাম, কে? লোকেরা বলল, তিনি আনাস ইবনু মালিকের মাতা গুমাইসা বিনতু মিলহান (রাঃ)। (ই. ফা. ৬০৯৮, ই. সে. ৬১৩৯)
আনাস (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ
নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: আমি জান্নাতে প্রবেশ করলাম, সেখানে আমি কারও চলার আওয়াজ পেলাম। আমি প্রশ্ন করলাম, কে? লোকেরা বলল, তিনি আনাস ইবনু মালিকের মাতা গুমাইসা বিনতু মিলহান (রাঃ)। (ই. ফা. ৬০৯৮, ই. সে. ৬১৩৯)
وحدثنا ابن أبي عمر، حدثنا بشر، - يعني ابن السري - حدثنا حماد بن سلمة، عن ثابت، عن أنس، عن النبي صلى الله عليه وسلم قال " دخلت الجنة فسمعت خشفة فقلت من هذا قالوا هذه الغميصاء بنت ملحان أم أنس بن مالك " .
সহিহ মুসলিম ৬২১৫
حدثني أبو جعفر، محمد بن الفرج حدثنا زيد بن الحباب، أخبرني عبد العزيز، بن أبي سلمة أخبرنا محمد بن المنكدر، عن جابر بن عبد الله، أن رسول الله صلى الله عليه وسلم قال " أريت الجنة فرأيت امرأة أبي طلحة ثم سمعت خشخشة أمامي فإذا بلال " .
জাবির ইবনু ‘আবদুল্লাহ (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ
রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: আমাকে জান্নাত দেখানো হয়েছে যে, আমি আবূ তালাহর সহধর্মিণীকে দেখলাম। তারপর আমার সম্মুখে পদধ্বনি শুনতে পেলাম, লক্ষ্য করে দেখি তিনি বিলাল। (ই. ফা. ৬০৯৯, ই. সে. ৬১৪০)
জাবির ইবনু ‘আবদুল্লাহ (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ
রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন: আমাকে জান্নাত দেখানো হয়েছে যে, আমি আবূ তালাহর সহধর্মিণীকে দেখলাম। তারপর আমার সম্মুখে পদধ্বনি শুনতে পেলাম, লক্ষ্য করে দেখি তিনি বিলাল। (ই. ফা. ৬০৯৯, ই. সে. ৬১৪০)
حدثني أبو جعفر، محمد بن الفرج حدثنا زيد بن الحباب، أخبرني عبد العزيز، بن أبي سلمة أخبرنا محمد بن المنكدر، عن جابر بن عبد الله، أن رسول الله صلى الله عليه وسلم قال " أريت الجنة فرأيت امرأة أبي طلحة ثم سمعت خشخشة أمامي فإذا بلال " .
সহিহ মুসলিম > আবূ তালহা আনসারী (রাঃ)-এর ফযিলত
সহিহ মুসলিম ৬২১৭
حدثنا أحمد بن الحسن بن خراش، حدثنا عمرو بن عاصم، حدثنا سليمان بن، المغيرة حدثنا ثابت، حدثني أنس بن مالك، قال مات ابن لأبي طلحة . واقتص الحديث بمثله .
আনাস ইবনু মালিক (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ
তিনি বলেন, আবূ তাল্হার একটি পুত্র মৃত্যুবরণ করল . . . –এর পরের অংশ উপরোল্লিখিত হাদীসের অবিকল। (ই. ফা. ৬১০১, ই. সে. ৬১৪২)
আনাস ইবনু মালিক (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ
তিনি বলেন, আবূ তাল্হার একটি পুত্র মৃত্যুবরণ করল . . . –এর পরের অংশ উপরোল্লিখিত হাদীসের অবিকল। (ই. ফা. ৬১০১, ই. সে. ৬১৪২)
حدثنا أحمد بن الحسن بن خراش، حدثنا عمرو بن عاصم، حدثنا سليمان بن، المغيرة حدثنا ثابت، حدثني أنس بن مالك، قال مات ابن لأبي طلحة . واقتص الحديث بمثله .
সহিহ মুসলিম ৬২১৬
حدثني محمد بن حاتم بن ميمون، حدثنا بهز، حدثنا سليمان بن المغيرة، عن ثابت، عن أنس، قال مات ابن لأبي طلحة من أم سليم فقالت لأهلها لا تحدثوا أبا طلحة بابنه حتى أكون أنا أحدثه - قال - فجاء فقربت إليه عشاء فأكل وشرب - فقال - ثم تصنعت له أحسن ما كان تصنع قبل ذلك فوقع بها فلما رأت أنه قد شبع وأصاب منها قالت يا أبا طلحة أرأيت لو أن قوما أعاروا عاريتهم أهل بيت فطلبوا عاريتهم ألهم أن يمنعوهم قال لا . قالت فاحتسب ابنك . قال فغضب وقال تركتني حتى تلطخت ثم أخبرتني بابني . فانطلق حتى أتى رسول الله صلى الله عليه وسلم فأخبره بما كان فقال رسول الله صلى الله عليه وسلم " بارك الله لكما في غابر ليلتكما " . قال فحملت - قال - فكان رسول الله صلى الله عليه وسلم في سفر وهي معه وكان رسول الله صلى الله عليه وسلم إذا أتى المدينة من سفر لا يطرقها طروقا فدنوا من المدينة فضربها المخاض فاحتبس عليها أبو طلحة وانطلق رسول الله صلى الله عليه وسلم - قال - يقول أبو طلحة إنك لتعلم يا رب إنه يعجبني أن أخرج مع رسولك إذا خرج وأدخل معه إذا دخل وقد احتبست بما ترى - قال - تقول أم سليم يا أبا طلحة ما أجد الذي كنت أجد انطلق . فانطلقنا - قال - وضربها المخاض حين قدما فولدت غلاما فقالت لي أمي يا أنس لا يرضعه أحد حتى تغدو به على رسول الله صلى الله عليه وسلم . فلما أصبح احتملته فانطلقت به إلى رسول الله صلى الله عليه وسلم - قال - فصادفته ومعه ميسم فلما رآني قال " لعل أم سليم ولدت " . قلت نعم . فوضع الميسم - قال - وجئت به فوضعته في حجره ودعا رسول الله صلى الله عليه وسلم بعجوة من عجوة المدينة فلاكها في فيه حتى ذابت ثم قذفها في في الصبي فجعل الصبي يتلمظها - قال - فقال رسول الله صلى الله عليه وسلم " انظروا إلى حب الأنصار التمر " . قال فمسح وجهه وسماه عبد الله .
আনাস (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ
তিনি বলন, আবূ তালহার ঔরসজাত উম্মু সুলায়মের একটি ছেলে মৃত্যুবরণ করল। তখন উম্মু সালায়ম (রাঃ) তার পরিবার-পরিজনের ব্যক্তিদের বলল, আবূ তালহাকে তাঁর পুত্রের সংবাদ দিও না, যতক্ষণ আমি না বলি। আবূ তাল্হাহ্ (রাঃ) আসলেন। উম্মু সুলায়ম (রাঃ) রাতের খানা সম্মুখে নিয়ে আসলে তিনি খাবার খেলেন। এরপর উম্মু সুলায়ম আগের চাইতে ভাল মতো সাজগোজ করলেন। আবূ তাল্হাহ্ (রাঃ) তাঁর সঙ্গে মিলিত হলেন। যখন উম্মু সুলায়ম (রাঃ) দেখলেন যে, তিনি মিলনে পরিতৃপ্ত। তখন তাঁকে বললেন, হে আবূ তাল্হাহ্! কেউ যদি কারো কোন জিনিস রাখতে দেয়, তারপর তা নিয়ে নেয় তবে কি সে তা ফিরাতে পারে? আবূ তাল্হাহ্ (রাঃ) বললেন, না। উম্মু সুলায়ম (রাঃ) বললেন, তাহলে তোমার ছেলের ব্যাপারে মনে কর (আল্লাহ তাকে নিয়ে নিয়েছেন)। আবূ তাল্হাহ্ (রাঃ) রেগে গিয়ে বললেন, তুমি আমাকে আগে বলোনি, এখন আমি অপবিত্র, এখন ছেলের সংবাদটা দিলে। অতঃপর তিনি রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর নিকট গিয়ে ছেলের যা ঘটেছে সব জানালেন। রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেনঃতোমাদের গত রাতটিতে আল্লাহ তা‘আলা বারাকাত দিন। উম্মু সুলায়ম গর্ভবতী হলেন। অতঃপর রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) এক সফরে ছিলেন, উম্মু সুলায়মও এ সফরে তাঁর সাথে ছিলেন। রসূল (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) যখন কোন সফর হতে প্রত্যাবর্তন করতেন তখন রাতের বেলা মাদীনায় ঢুকতেন না। যখন লোকেরা মাদীনার কাছাকাছি পৌঁছলো তখন উম্মু সুলায়মের প্রসব বেদনা আরম্ভ হলো। আবূ তাল্হাহ্ (রাঃ) তাঁর নিকট থেকে গেলেন এবং রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) চলে গেলেন। আবূ তাল্হাহ্ (রাঃ) বললেন, হে প্রতিপালক! তুমি তো জানো যে, আমার ভাল লাগে তোমার রসূলের সঙ্গে বের হতে যখন তিনি বের হন এবং তাঁর সাথে প্রবেশ করত যখন তিনি প্রবেশ করেন। কিন্তু তুমি জানো, কেন আমি থেমে গেছি। উম্মু সুলায়ম (রাঃ) বললেন, হে আবূ তাল্হাহ্! আগের মতো যাতনা আমার নেই। চলুন আমরা চলে যাই। স্বামী-স্ত্রী মাদীনায় পৌঁছলে উম্মু সুলায়মের ব্যথা আবার আরম্ভ হলো। আর তিনি একটি শিশু ছেলে প্রসব করলেন। আমার মা বললেন, হে আনাস! শিশুটিকে যেন কেউ দুধ না খাওয়ায়, যতক্ষণ তুমি তাঁকে ভোরবেলা রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর নিকট নিয়ে না যাও। সকাল হলে আমি সন্তানটিকে নিয়ে রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর নিকট গেলাম। আমি লক্ষ্য করলাম, তাঁর হাতে উট দাগানোর যন্ত্র। আমাকে যখন তিনি দেখলেন, বললেন, হয়তো উম্মু সুলায়ম এ পুত্রটি প্রসব করেছে। আমি বললাম, হ্যাঁ। তিনি সে যন্ত্রটি হাত থেকে রেখে দিলেন। আমি শিশুটিকে নিয়ে তাঁর কোলে রাখলাম। তিনি মাদীনার ‘আজ্ওয়া’ খেজুর আনালেন এবং নিজের মুখে দিয়ে চিবুলেন। যখন খেজুর গলে গেল, তখন শিশুটির মুখে দিলেন। শিশুটি তা চুষতে লাগল। আনাস (রাঃ) বলনে, রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন, দেখো আনসারদের খেজুর-প্রীতি! অবশেষে তিনি শিশুর মুখে হাত বুলিয়ে তার নাম ‘আবদুল্লাহ’ রাখলেন। (ই. ফা. ৬১০০, ই. সে. ৬১৪১)
আনাস (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ
তিনি বলন, আবূ তালহার ঔরসজাত উম্মু সুলায়মের একটি ছেলে মৃত্যুবরণ করল। তখন উম্মু সালায়ম (রাঃ) তার পরিবার-পরিজনের ব্যক্তিদের বলল, আবূ তালহাকে তাঁর পুত্রের সংবাদ দিও না, যতক্ষণ আমি না বলি। আবূ তাল্হাহ্ (রাঃ) আসলেন। উম্মু সুলায়ম (রাঃ) রাতের খানা সম্মুখে নিয়ে আসলে তিনি খাবার খেলেন। এরপর উম্মু সুলায়ম আগের চাইতে ভাল মতো সাজগোজ করলেন। আবূ তাল্হাহ্ (রাঃ) তাঁর সঙ্গে মিলিত হলেন। যখন উম্মু সুলায়ম (রাঃ) দেখলেন যে, তিনি মিলনে পরিতৃপ্ত। তখন তাঁকে বললেন, হে আবূ তাল্হাহ্! কেউ যদি কারো কোন জিনিস রাখতে দেয়, তারপর তা নিয়ে নেয় তবে কি সে তা ফিরাতে পারে? আবূ তাল্হাহ্ (রাঃ) বললেন, না। উম্মু সুলায়ম (রাঃ) বললেন, তাহলে তোমার ছেলের ব্যাপারে মনে কর (আল্লাহ তাকে নিয়ে নিয়েছেন)। আবূ তাল্হাহ্ (রাঃ) রেগে গিয়ে বললেন, তুমি আমাকে আগে বলোনি, এখন আমি অপবিত্র, এখন ছেলের সংবাদটা দিলে। অতঃপর তিনি রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর নিকট গিয়ে ছেলের যা ঘটেছে সব জানালেন। রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেনঃতোমাদের গত রাতটিতে আল্লাহ তা‘আলা বারাকাত দিন। উম্মু সুলায়ম গর্ভবতী হলেন। অতঃপর রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) এক সফরে ছিলেন, উম্মু সুলায়মও এ সফরে তাঁর সাথে ছিলেন। রসূল (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) যখন কোন সফর হতে প্রত্যাবর্তন করতেন তখন রাতের বেলা মাদীনায় ঢুকতেন না। যখন লোকেরা মাদীনার কাছাকাছি পৌঁছলো তখন উম্মু সুলায়মের প্রসব বেদনা আরম্ভ হলো। আবূ তাল্হাহ্ (রাঃ) তাঁর নিকট থেকে গেলেন এবং রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) চলে গেলেন। আবূ তাল্হাহ্ (রাঃ) বললেন, হে প্রতিপালক! তুমি তো জানো যে, আমার ভাল লাগে তোমার রসূলের সঙ্গে বের হতে যখন তিনি বের হন এবং তাঁর সাথে প্রবেশ করত যখন তিনি প্রবেশ করেন। কিন্তু তুমি জানো, কেন আমি থেমে গেছি। উম্মু সুলায়ম (রাঃ) বললেন, হে আবূ তাল্হাহ্! আগের মতো যাতনা আমার নেই। চলুন আমরা চলে যাই। স্বামী-স্ত্রী মাদীনায় পৌঁছলে উম্মু সুলায়মের ব্যথা আবার আরম্ভ হলো। আর তিনি একটি শিশু ছেলে প্রসব করলেন। আমার মা বললেন, হে আনাস! শিশুটিকে যেন কেউ দুধ না খাওয়ায়, যতক্ষণ তুমি তাঁকে ভোরবেলা রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর নিকট নিয়ে না যাও। সকাল হলে আমি সন্তানটিকে নিয়ে রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর নিকট গেলাম। আমি লক্ষ্য করলাম, তাঁর হাতে উট দাগানোর যন্ত্র। আমাকে যখন তিনি দেখলেন, বললেন, হয়তো উম্মু সুলায়ম এ পুত্রটি প্রসব করেছে। আমি বললাম, হ্যাঁ। তিনি সে যন্ত্রটি হাত থেকে রেখে দিলেন। আমি শিশুটিকে নিয়ে তাঁর কোলে রাখলাম। তিনি মাদীনার ‘আজ্ওয়া’ খেজুর আনালেন এবং নিজের মুখে দিয়ে চিবুলেন। যখন খেজুর গলে গেল, তখন শিশুটির মুখে দিলেন। শিশুটি তা চুষতে লাগল। আনাস (রাঃ) বলনে, রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন, দেখো আনসারদের খেজুর-প্রীতি! অবশেষে তিনি শিশুর মুখে হাত বুলিয়ে তার নাম ‘আবদুল্লাহ’ রাখলেন। (ই. ফা. ৬১০০, ই. সে. ৬১৪১)
حدثني محمد بن حاتم بن ميمون، حدثنا بهز، حدثنا سليمان بن المغيرة، عن ثابت، عن أنس، قال مات ابن لأبي طلحة من أم سليم فقالت لأهلها لا تحدثوا أبا طلحة بابنه حتى أكون أنا أحدثه - قال - فجاء فقربت إليه عشاء فأكل وشرب - فقال - ثم تصنعت له أحسن ما كان تصنع قبل ذلك فوقع بها فلما رأت أنه قد شبع وأصاب منها قالت يا أبا طلحة أرأيت لو أن قوما أعاروا عاريتهم أهل بيت فطلبوا عاريتهم ألهم أن يمنعوهم قال لا . قالت فاحتسب ابنك . قال فغضب وقال تركتني حتى تلطخت ثم أخبرتني بابني . فانطلق حتى أتى رسول الله صلى الله عليه وسلم فأخبره بما كان فقال رسول الله صلى الله عليه وسلم " بارك الله لكما في غابر ليلتكما " . قال فحملت - قال - فكان رسول الله صلى الله عليه وسلم في سفر وهي معه وكان رسول الله صلى الله عليه وسلم إذا أتى المدينة من سفر لا يطرقها طروقا فدنوا من المدينة فضربها المخاض فاحتبس عليها أبو طلحة وانطلق رسول الله صلى الله عليه وسلم - قال - يقول أبو طلحة إنك لتعلم يا رب إنه يعجبني أن أخرج مع رسولك إذا خرج وأدخل معه إذا دخل وقد احتبست بما ترى - قال - تقول أم سليم يا أبا طلحة ما أجد الذي كنت أجد انطلق . فانطلقنا - قال - وضربها المخاض حين قدما فولدت غلاما فقالت لي أمي يا أنس لا يرضعه أحد حتى تغدو به على رسول الله صلى الله عليه وسلم . فلما أصبح احتملته فانطلقت به إلى رسول الله صلى الله عليه وسلم - قال - فصادفته ومعه ميسم فلما رآني قال " لعل أم سليم ولدت " . قلت نعم . فوضع الميسم - قال - وجئت به فوضعته في حجره ودعا رسول الله صلى الله عليه وسلم بعجوة من عجوة المدينة فلاكها في فيه حتى ذابت ثم قذفها في في الصبي فجعل الصبي يتلمظها - قال - فقال رسول الله صلى الله عليه وسلم " انظروا إلى حب الأنصار التمر " . قال فمسح وجهه وسماه عبد الله .