সহিহ মুসলিম > আখিরাতে মু’মিনগণ তাদের প্রভুকে দেখতে পাবে
সহিহ মুসলিম ৩৩৭
حدثنا نصر بن علي الجهضمي، وأبو غسان المسمعي وإسحاق بن إبراهيم جميعا عن عبد العزيز بن عبد الصمد، - واللفظ لأبي غسان قال حدثنا أبو عبد الصمد، - حدثنا أبو عمران الجوني، عن أبي بكر بن عبد الله بن قيس، عن أبيه، عن النبي صلى الله عليه وسلم قال " جنتان من فضة آنيتهما وما فيهما وجنتان من ذهب آنيتهما وما فيهما وما بين القوم وبين أن ينظروا إلى ربهم إلا رداء الكبرياء على وجهه في جنة عدن " .
‘আবদুল্লাহ ইবনু কায়স (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ
নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) ইরশাদ করেন, দু’টি জান্নাত এমন যে, এগুলোর বাসনপত্র ও সমুদয় সামগ্রী রূপার তৈরি। অন্য দু’টি জান্নাত এমন, যেগুলোর পাত্রাদি ও সমুদয় সামগ্রী স্বর্ণের তৈরি। ‘আদ্ন নামক জান্নাতে জান্নাতীগণ আল্লাহর দর্শন লাভ করবেন। এ সময় তাঁদের ও আল্লাহর মাঝে তাঁর মহিমার চাদর ব্যতীত আর কোন অন্তরায় থাকবে না। (ই.ফা. ৩৪৫; ই.সে. ৩৫৬)
‘আবদুল্লাহ ইবনু কায়স (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ
নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) ইরশাদ করেন, দু’টি জান্নাত এমন যে, এগুলোর বাসনপত্র ও সমুদয় সামগ্রী রূপার তৈরি। অন্য দু’টি জান্নাত এমন, যেগুলোর পাত্রাদি ও সমুদয় সামগ্রী স্বর্ণের তৈরি। ‘আদ্ন নামক জান্নাতে জান্নাতীগণ আল্লাহর দর্শন লাভ করবেন। এ সময় তাঁদের ও আল্লাহর মাঝে তাঁর মহিমার চাদর ব্যতীত আর কোন অন্তরায় থাকবে না। (ই.ফা. ৩৪৫; ই.সে. ৩৫৬)
حدثنا نصر بن علي الجهضمي، وأبو غسان المسمعي وإسحاق بن إبراهيم جميعا عن عبد العزيز بن عبد الصمد، - واللفظ لأبي غسان قال حدثنا أبو عبد الصمد، - حدثنا أبو عمران الجوني، عن أبي بكر بن عبد الله بن قيس، عن أبيه، عن النبي صلى الله عليه وسلم قال " جنتان من فضة آنيتهما وما فيهما وجنتان من ذهب آنيتهما وما فيهما وما بين القوم وبين أن ينظروا إلى ربهم إلا رداء الكبرياء على وجهه في جنة عدن " .
সহিহ মুসলিম ৩৩৮
حدثنا عبيد الله بن عمر بن ميسرة، قال حدثني عبد الرحمن بن مهدي، حدثنا حماد بن سلمة، عن ثابت البناني، عن عبد الرحمن بن أبي ليلى، عن صهيب، عن النبي صلى الله عليه وسلم قال " إذا دخل أهل الجنة الجنة - قال - يقول الله تبارك وتعالى تريدون شيئا أزيدكم فيقولون ألم تبيض وجوهنا ألم تدخلنا الجنة وتنجنا من النار - قال - فيكشف الحجاب فما أعطوا شيئا أحب إليهم من النظر إلى ربهم عز وجل " .
সুহায়ব (রহঃ) থেকে বর্নিতঃ
নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেন, জান্নাতীগণ যখন জান্নাতে প্রবেশ করবে তখন আল্লাহ তা’আলা তাদেরকে বলবেন, তোমরা কি চাও, আমি আরো অনুগ্রহ বাড়িয়ে দেই? তারা বলবে, আপনি কি আমাদের চেহারাগুলো আলোকোজ্জ্বল করে দেননি, আমাদের জান্নাতে দাখিল করেননি এবং জাহান্নাম থেকে নাযাত দেননি? রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেন, এরপর আল্লাহ তা’আলা আবরণ তুলে নিবেন। আল্লাহর দর্শন লাভের চেয়ে অধিক পছন্দনীয় জিনিস আর কিছুই তাদের দেয়া হয়নি। [৭৮] (ই.ফা. ৩৪৬; ই.সে. ৩৫৭)
সুহায়ব (রহঃ) থেকে বর্নিতঃ
নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেন, জান্নাতীগণ যখন জান্নাতে প্রবেশ করবে তখন আল্লাহ তা’আলা তাদেরকে বলবেন, তোমরা কি চাও, আমি আরো অনুগ্রহ বাড়িয়ে দেই? তারা বলবে, আপনি কি আমাদের চেহারাগুলো আলোকোজ্জ্বল করে দেননি, আমাদের জান্নাতে দাখিল করেননি এবং জাহান্নাম থেকে নাযাত দেননি? রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেন, এরপর আল্লাহ তা’আলা আবরণ তুলে নিবেন। আল্লাহর দর্শন লাভের চেয়ে অধিক পছন্দনীয় জিনিস আর কিছুই তাদের দেয়া হয়নি। [৭৮] (ই.ফা. ৩৪৬; ই.সে. ৩৫৭)
حدثنا عبيد الله بن عمر بن ميسرة، قال حدثني عبد الرحمن بن مهدي، حدثنا حماد بن سلمة، عن ثابت البناني، عن عبد الرحمن بن أبي ليلى، عن صهيب، عن النبي صلى الله عليه وسلم قال " إذا دخل أهل الجنة الجنة - قال - يقول الله تبارك وتعالى تريدون شيئا أزيدكم فيقولون ألم تبيض وجوهنا ألم تدخلنا الجنة وتنجنا من النار - قال - فيكشف الحجاب فما أعطوا شيئا أحب إليهم من النظر إلى ربهم عز وجل " .
সহিহ মুসলিম ৩৩৯
حدثنا أبو بكر بن أبي شيبة، حدثنا يزيد بن هارون، عن حماد بن سلمة، بهذا الإسناد وزاد ثم تلا هذه الآية { للذين أحسنوا الحسنى وزيادة}
হাম্মাদ ইবনু সালামাহ্ (রাঃ)-এর সূত্রে থেকে বর্নিতঃ
তবে এতে তিনি আরো বলেন, তারপর রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) এ আয়াত তিলাওয়াত করেনঃ “যারা ভাল ‘আমাল করে তাদের জন্য আছে কল্যাণ (জান্নাত) এবং আরো অধিক কিছু (আল্লাহর দর্শন) ”-(সূরাহ ইউনুস ১০ : ২৬) (ই.ফা. ৩৪৭; ই.সে. ৩৫৮)
হাম্মাদ ইবনু সালামাহ্ (রাঃ)-এর সূত্রে থেকে বর্নিতঃ
তবে এতে তিনি আরো বলেন, তারপর রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) এ আয়াত তিলাওয়াত করেনঃ “যারা ভাল ‘আমাল করে তাদের জন্য আছে কল্যাণ (জান্নাত) এবং আরো অধিক কিছু (আল্লাহর দর্শন) ”-(সূরাহ ইউনুস ১০ : ২৬) (ই.ফা. ৩৪৭; ই.সে. ৩৫৮)
حدثنا أبو بكر بن أبي شيبة، حدثنا يزيد بن هارون، عن حماد بن سلمة، بهذا الإسناد وزاد ثم تلا هذه الآية { للذين أحسنوا الحسنى وزيادة}
সহিহ মুসলিম > মহান আল্লাহর দর্শন পথের জ্ঞান
সহিহ মুসলিম ৩৪১
حدثنا عبد الله بن عبد الرحمن الدارمي، أخبرنا أبو اليمان، أخبرنا شعيب، عن الزهري، قال أخبرني سعيد بن المسيب، وعطاء بن يزيد الليثي، أن أبا هريرة، أخبرهما أن الناس قالوا للنبي صلى الله عليه وسلم يا رسول الله هل نرى ربنا يوم القيامة وساق الحديث بمثل معنى حديث إبراهيم بن سعد .
আবূ হুরাইরাহ (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ
সহাবাগণ রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে জিজ্ঞেস করলেন, হে আল্লাহর রসূল! কিয়ামাতের দিন আমরা কি আমাদের রবকে দেখতে পাব? ..... এরপর রাবী ইবরাহীম ইবনু সা’দ বর্ণিত হাদীসের অনুরূপ উল্লেখ করেন। (ই.ফা. ৩৪৯; ই.সে. ৩৬০)
আবূ হুরাইরাহ (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ
সহাবাগণ রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে জিজ্ঞেস করলেন, হে আল্লাহর রসূল! কিয়ামাতের দিন আমরা কি আমাদের রবকে দেখতে পাব? ..... এরপর রাবী ইবরাহীম ইবনু সা’দ বর্ণিত হাদীসের অনুরূপ উল্লেখ করেন। (ই.ফা. ৩৪৯; ই.সে. ৩৬০)
حدثنا عبد الله بن عبد الرحمن الدارمي، أخبرنا أبو اليمان، أخبرنا شعيب، عن الزهري، قال أخبرني سعيد بن المسيب، وعطاء بن يزيد الليثي، أن أبا هريرة، أخبرهما أن الناس قالوا للنبي صلى الله عليه وسلم يا رسول الله هل نرى ربنا يوم القيامة وساق الحديث بمثل معنى حديث إبراهيم بن سعد .
সহিহ মুসলিম ৩৪৪
قال مسلم قرأت على عيسى بن حماد زغبة المصري هذا الحديث في الشفاعة وقلت له أحدث بهذا الحديث عنك أنك سمعت من الليث بن سعد فقال نعم . قلت لعيسى بن حماد أخبركم الليث بن سعد عن خالد بن يزيد عن سعيد بن أبي هلال عن زيد بن أسلم عن عطاء بن يسار عن أبي سعيد الخدري أنه قال قلنا يا رسول الله أنرى ربنا قال رسول الله صلى الله عليه وسلم " هل تضارون في رؤية الشمس إذا كان يوم صحو " . قلنا لا . وسقت الحديث حتى انقضى آخره وهو نحو حديث حفص بن ميسرة . وزاد بعد قوله بغير عمل عملوه ولا قدم قدموه " فيقال لهم لكم ما رأيتم ومثله معه " . قال أبو سعيد بلغني أن الجسر أدق من الشعرة وأحد من السيف . وليس في حديث الليث " فيقولون ربنا أعطيتنا ما لم تعط أحدا من العالمين " وما بعده فأقر به عيسى بن حماد .
যায়দ ইবনু আসলাম (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ
পূর্ব বর্ণিত হাদীসদ্বয়ের সানাদের হাফ্স ইবনু মাইসারার অনুরূপ বর্ণনা করেছেন। তবে এ রিওয়ায়াতে শব্দগুলো কিছু কম বর্ণনা আছে। (ই.ফা. ৩৫২; ই.সে. ৩৬৩)
যায়দ ইবনু আসলাম (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ
পূর্ব বর্ণিত হাদীসদ্বয়ের সানাদের হাফ্স ইবনু মাইসারার অনুরূপ বর্ণনা করেছেন। তবে এ রিওয়ায়াতে শব্দগুলো কিছু কম বর্ণনা আছে। (ই.ফা. ৩৫২; ই.সে. ৩৬৩)
قال مسلم قرأت على عيسى بن حماد زغبة المصري هذا الحديث في الشفاعة وقلت له أحدث بهذا الحديث عنك أنك سمعت من الليث بن سعد فقال نعم . قلت لعيسى بن حماد أخبركم الليث بن سعد عن خالد بن يزيد عن سعيد بن أبي هلال عن زيد بن أسلم عن عطاء بن يسار عن أبي سعيد الخدري أنه قال قلنا يا رسول الله أنرى ربنا قال رسول الله صلى الله عليه وسلم " هل تضارون في رؤية الشمس إذا كان يوم صحو " . قلنا لا . وسقت الحديث حتى انقضى آخره وهو نحو حديث حفص بن ميسرة . وزاد بعد قوله بغير عمل عملوه ولا قدم قدموه " فيقال لهم لكم ما رأيتم ومثله معه " . قال أبو سعيد بلغني أن الجسر أدق من الشعرة وأحد من السيف . وليس في حديث الليث " فيقولون ربنا أعطيتنا ما لم تعط أحدا من العالمين " وما بعده فأقر به عيسى بن حماد .
সহিহ মুসলিম ৩৪২
وحدثنا محمد بن رافع، حدثنا عبد الرزاق، أخبرنا معمر، عن همام بن منبه، قال هذا ما حدثنا أبو هريرة، عن رسول الله صلى الله عليه وسلم . فذكر أحاديث منها وقال رسول الله صلى الله عليه وسلم " إن أدنى مقعد أحدكم من الجنة أن يقول له تمن . فيتمنى ويتمنى فيقول له هل تمنيت فيقول نعم . فيقول له فإن لك ما تمنيت ومثله معه " .
হাম্মাম ইবনু মুনাব্বিহ (রহঃ) থেকে বর্নিতঃ
আবূ হুরায়রা (রাঃ) আমাদেরকে রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) থেকে কতিপয় হাদীস বর্ণনা করেন। তন্মধ্যে এটিও ছিল, তিনি বলেন, তোমাদের মধ্যে সর্বনিম্ন পর্যায়ের জান্নাতীকে বলা হবে যে, তুমি কামনা কর। সে কামনা করতে থাকবে এবং আরো কামনা করবে। আল্লাহ তাকে বলবেন, তোমার যা কামনা করার তা কি করেছ? সে বলবে, জ্বী! আল্লাহ বলবেন, যা কামনা করেছ তা এবং এর অনুরূপ তোমাকে প্রদান করা হল। (ই.ফা. ৩৫০; ই.সে. ৩৬১)
হাম্মাম ইবনু মুনাব্বিহ (রহঃ) থেকে বর্নিতঃ
আবূ হুরায়রা (রাঃ) আমাদেরকে রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) থেকে কতিপয় হাদীস বর্ণনা করেন। তন্মধ্যে এটিও ছিল, তিনি বলেন, তোমাদের মধ্যে সর্বনিম্ন পর্যায়ের জান্নাতীকে বলা হবে যে, তুমি কামনা কর। সে কামনা করতে থাকবে এবং আরো কামনা করবে। আল্লাহ তাকে বলবেন, তোমার যা কামনা করার তা কি করেছ? সে বলবে, জ্বী! আল্লাহ বলবেন, যা কামনা করেছ তা এবং এর অনুরূপ তোমাকে প্রদান করা হল। (ই.ফা. ৩৫০; ই.সে. ৩৬১)
وحدثنا محمد بن رافع، حدثنا عبد الرزاق، أخبرنا معمر، عن همام بن منبه، قال هذا ما حدثنا أبو هريرة، عن رسول الله صلى الله عليه وسلم . فذكر أحاديث منها وقال رسول الله صلى الله عليه وسلم " إن أدنى مقعد أحدكم من الجنة أن يقول له تمن . فيتمنى ويتمنى فيقول له هل تمنيت فيقول نعم . فيقول له فإن لك ما تمنيت ومثله معه " .
সহিহ মুসলিম ৩৪০
حدثني زهير بن حرب، حدثنا يعقوب بن إبراهيم، حدثنا أبي، عن ابن شهاب، عن عطاء بن يزيد الليثي، أن أبا هريرة، أخبره أن ناسا قالوا لرسول الله صلى الله عليه وسلم يا رسول الله هل نرى ربنا يوم القيامة فقال رسول الله صلى الله عليه وسلم " هل تضارون في رؤية القمر ليلة البدر " . قالوا لا يا رسول الله . قال " هل تضارون في الشمس ليس دونها سحاب " . قالوا لا يا رسول الله . قال " فإنكم ترونه كذلك يجمع الله الناس يوم القيامة فيقول من كان يعبد شيئا فليتبعه . فيتبع من كان يعبد الشمس الشمس ويتبع من كان يعبد القمر القمر ويتبع من كان يعبد الطواغيت الطواغيت وتبقى هذه الأمة فيها منافقوها فيأتيهم الله - تبارك وتعالى - في صورة غير صورته التي يعرفون فيقول أنا ربكم . فيقولون نعوذ بالله منك هذا مكاننا حتى يأتينا ربنا فإذا جاء ربنا عرفناه . فيأتيهم الله تعالى في صورته التي يعرفون فيقول أنا ربكم . فيقولون أنت ربنا . فيتبعونه ويضرب الصراط بين ظهرى جهنم فأكون أنا وأمتي أول من يجيز ولا يتكلم يومئذ إلا الرسل ودعوى الرسل يومئذ اللهم سلم سلم . وفي جهنم كلاليب مثل شوك السعدان هل رأيتم السعدان " . قالوا نعم يا رسول الله . قال " فإنها مثل شوك السعدان غير أنه لا يعلم ما قدر عظمها إلا الله تخطف الناس بأعمالهم فمنهم المؤمن بقي بعمله ومنهم المجازى حتى ينجى حتى إذا فرغ الله من القضاء بين العباد وأراد أن يخرج برحمته من أراد من أهل النار أمر الملائكة أن يخرجوا من النار من كان لا يشرك بالله شيئا ممن أراد الله تعالى أن يرحمه ممن يقول لا إله إلا الله . فيعرفونهم في النار يعرفونهم بأثر السجود تأكل النار من ابن آدم إلا أثر السجود حرم الله على النار أن تأكل أثر السجود . فيخرجون من النار وقد امتحشوا فيصب عليهم ماء الحياة فينبتون منه كما تنبت الحبة في حميل السيل ثم يفرغ الله تعالى من القضاء بين العباد ويبقى رجل مقبل بوجهه على النار وهو آخر أهل الجنة دخولا الجنة فيقول أى رب اصرف وجهي عن النار فإنه قد قشبني ريحها وأحرقني ذكاؤها فيدعو الله ما شاء الله أن يدعوه ثم يقول الله تبارك وتعالى هل عسيت إن فعلت ذلك بك أن تسأل غيره . فيقول لا أسألك غيره . ويعطي ربه من عهود ومواثيق ما شاء الله فيصرف الله وجهه عن النار فإذا أقبل على الجنة ورآها سكت ما شاء الله أن يسكت ثم يقول أى رب قدمني إلى باب الجنة . فيقول الله له أليس قد أعطيت عهودك ومواثيقك لا تسألني غير الذي أعطيتك ويلك يا ابن آدم ما أغدرك . فيقول أى رب ويدعو الله حتى يقول له فهل عسيت إن أعطيتك ذلك أن تسأل غيره . فيقول لا وعزتك . فيعطي ربه ما شاء الله من عهود ومواثيق فيقدمه إلى باب الجنة فإذا قام على باب الجنة انفهقت له الجنة فرأى ما فيها من الخير والسرور فيسكت ما شاء الله أن يسكت ثم يقول أى رب أدخلني الجنة . فيقول الله تبارك وتعالى له أليس قد أعطيت عهودك ومواثيقك أن لا تسأل غير ما أعطيت ويلك يا ابن آدم ما أغدرك . فيقول أى رب لا أكون أشقى خلقك . فلا يزال يدعو الله حتى يضحك الله تبارك وتعالى منه فإذا ضحك الله منه قال ادخل الجنة . فإذا دخلها قال الله له تمنه . فيسأل ربه ويتمنى حتى إن الله ليذكره من كذا وكذا حتى إذا انقطعت به الأماني قال الله تعالى ذلك لك ومثله معه " . قال عطاء بن يزيد وأبو سعيد الخدري مع أبي هريرة لا يرد عليه من حديثه شيئا . حتى إذا حدث أبو هريرة أن الله قال لذلك الرجل ومثله معه . قال أبو سعيد وعشرة أمثاله معه يا أبا هريرة . قال أبو هريرة ما حفظت إلا قوله ذلك لك ومثله معه . قال أبو سعيد أشهد أني حفظت من رسول الله صلى الله عليه وسلم قوله ذلك لك وعشرة أمثاله . قال أبو هريرة وذلك الرجل آخر أهل الجنة دخولا الجنة .
আবূ হুরাইরাহ (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ
কয়েকজন সহাবা রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে বললেন, হে আল্লাহর রসূল! কিয়ামাত দিবসে আমরা কি আমাদের প্রতিপালককে দেখতে পাবো? রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেনঃ পূর্ণিমার রাতে চাঁদ দেখতে কি তোমাদের পরস্পরের মাঝে কষ্ট হয়? সহাবাগণ বললেন, না। রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেনঃ মেঘমুক্ত আকাশে সূর্য দেখতে কি তোমাদের পরস্পরের কষ্টবোধ হয়? তাঁরা বললেন, না। রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেনঃ তদ্রূপ তোমরা তাঁকেও দেখবে। কিয়ামাত দিবসে আল্লাহ সকল মানুষকে জমায়েত করে বলবেন, পৃথিবীতে তোমাদের যে যার ‘ইবাদাত করেছিলে আজ তাকেই অনুসরণ কর। তখন যারা সূর্যের উপাসনা করতো, তারা সূর্যের সাথে থাকবে। যারা চন্দ্রের উপাসনা করতো, তারা চন্দ্রের সাথে থাকবে। আর যারা আল্লাহদ্রোহীদের (তাগূতের) উপাসনা করতো, তারা আল্লাহদ্রোহীদের সাথে জমায়েত হয়ে যাবে। কেবল এ উম্মাত অবশিষ্ট থাকবে। তন্মধ্যে মুনাফিকরাও থাকবে। তখন আল্লাহ তা’আলা তাদের নিকট এমন আকৃতিতে উপস্থিত হবেন যা তারা চিনে না। তারপর (আল্লাহ তা’আলা) বলবেন, আমি তোমাদের প্রতিপালক (সুতরাং তোমরা আমার পিছনে চল)। তারা বলবে, না’ঊযুবিল্লাহ। আমাদের প্রভু না আসা পর্যন্ত আমরা এখানেই দাঁড়িয়ে থাকবো। আর তিনি যখন আসবেন, তখন আমরা তাকে চিনতে পারবো। এরপর আল্লাহ তা’আলা তাদের নিকট তাদের পরিচিত আকৃতিতে আসবেন, বলবেন : আমি তোমাদের প্রভু। তারা বলবে, হ্যাঁ, আপনি আমাদের প্রভু। এ বলে তারা তাঁকে অনুসরণ করবে। এমন সময়ে জাহান্নামের উপর দিয়ে সিরাত (সাঁকো) বসানো হবে। [নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেন] আর আমি ও আমার উম্মাতই হব প্রথম এ পথ অতিক্রমকারী। সেদিন রসূলগণ ব্যতীত অন্য কেউ মুখ খোলারও সাহস করবে না। আর রসূলগণও কেবল এ দু’আ করবেন। হে আল্লাহ! নিরাপত্তা দাও, নিরাপত্তা দাও। আর জাহান্নামে থাকবে সা’দান বৃক্ষের কাঁটার মত অনেক কাঁটাযুক্ত লৌহদণ্ড। তোমরা সা’দান বৃক্ষটি দেখেছ কি? সহাবাগণ বললেন, হ্যাঁ দেখেছি। রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেনঃ তা সা’দান বৃক্ষের কাঁটার মতই, তবে সেটা যে কত বিরাট তা আল্লাহ ব্যতীত কেউ জানে না। পাপ কাজের জন্য কাঁটার আংটাগুলো ছোবল দিতে থাকবে। তাদের কেউ কেউ মু’মিন (যারা সাময়িক জাহান্নামী) তারা রক্ষা পাবে, আর কেউ তো শাস্তি ভোগ করে নাযাত পাবে। এরপর আল্লাহ বান্দাদের মধ্যে ফায়সালা হতে অবসর হলে স্বীয় রহমাতে কিছু সংখ্যক জাহান্নামীদের (জাহান্নাম হতে) বের করতে দেয়ার ইচ্ছা করবেন তখন ফেরেশতাদেরকে নির্দেশ দিবেন যারা কালিমায় বিশ্বাসী ও শির্ক করেনি যাদের উপর আল্লাহ তা’আলা রহম করতে চাইবেন যে, তাদেরকে জাহান্নাম থেকে বের করে নিয়ে আসো। আর যাদের উপর আল্লাহ তা’আলা দয়া করতে চেয়েছেন তারা ঐ সকল লোক যারা ‘লা-ইলা-হা ইল্লাল্ল-হ’ বলত। অতঃপর ফেরেশতাগণ তাদের সনাক্ত করবেন। তারা সাজদাহ চিহ্নের সাহায্যে তাদের চিনবেন। কারণ, অগ্নি মানুষের দেহের সবকিছু জ্বালিয়ে ফেললেও সাজদার স্থান অক্ষত থাকবে। আল্লাহ তা’আলা সাজদার চিহ্ন নষ্ট করা হারাম (নিষিদ্ধ) করে দিয়েছেন। মোটকথা, ফেরেশতাগণ এদেরকে জাহান্নাম থেকে বের করে আনবে এমন অবস্থায় যে, তাদের দেহ আগুনে দগ্ধ। তাদের উপর ‘মাউল-হায়াত’ (সঞ্জীবনী পানি) ঢেলে দেয়া হবে। তখন তারা এতে এমনভাবে সতেজ হয়ে উঠবে যেমনভাবে শস্য অঙ্কুর পানিসিক্ত উর্বর জমিতে সতেজ হয়ে উঠে। তারপর আল্লাহ তা’আলা বান্দাদের বিচার সমাপ্ত করবেন। শেষে এক ব্যক্তি থেকে যাবে। তার মুখমণ্ডল হবে জাহান্নামের দিকে। এই হবে সর্বশেষ জান্নাতে প্রবেশকারী। সে বলবে, হে আমার প্রভু! (অনুগ্রহ করে) আমার মুখটি জাহান্নামের দিক থেকে ফিরিয়ে দিন। কারণ জাহান্নামের দুর্গন্ধ আমাকে অসহনীয় কষ্ট দিচ্ছে; এর লেলিহান অগ্নিশিখা আমাকে দগ্ধ করে দিচ্ছে। আল্লাহ যতদিন চান ততদিন পর্যন্ত সে তাঁর নিকট দু’আ করতে থাকবে। পরে আল্লাহ বলবেন, তোমার এ দু’আ কবূল করলে তুমি কি আরো কিছু কামনা করবে? সে বিভিন্ন ধরণের ও’য়াদা ও অঙ্গীকার করে বলবে যে, জাহান্নামের দিক থেকে ফিরিয়ে দিবেন। তার চেহারা যখন জান্নাতের দিকে ফিরিয়ে দেয়া হবে, আর সে জান্নাত দেখবে, তখন আল্লাহ যতদিন চান সে নীরব থাকবে। পরে আবার বলবে, হে আমার প্রতিপালক! কেবল জান্নাতের দরজা পর্যন্ত আমাকে পৌঁছে দিন। আল্লাহ তাকে বলবেন, তুমি না অঙ্গীকার দিয়েছিলে যে, আমি তোমাকে যা দিয়েছি তা ছাড়া আর কিছু চাইবে না। হে আদাম সন্তান! তুমি হতভাগা ও তুমি সাংঘাতিক ওয়া’দাভঙ্গকারী। তখন সে বলবে, হে আমার রব! এই বলে আল্লাহর কাছে দু’আ করতে থাকবে। আল্লাহ বলবেন, তুমি যা চাও তা যদি দিয়ে দেই তবে আর কিছু চাইবে না তো? সে বলবে, আপনার ইজ্জতের কসম! আর কিছু চাইব না। এভাবে সে তার অক্ষমতা (আল্লাহর কাছে) পেশ করতে থাকবে যতদিন আল্লাহর ইচ্ছা হয়। তারপর তাকে জান্নাতের দরজা পর্যন্ত এগিয়ে দেয়া হবে। এবার যখন সে জান্নাতের দরজায় দাঁড়াবে, তখন জান্নাত তার সামনে উদ্ভাসিত হয়ে উঠবে। সে জান্নাতের সমৃদ্ধি ও সুখ দেখতে থাকবে। সেখানে আল্লাহ যতক্ষণ চান সে ততক্ষণ চুপ করে থাকবে। পরে বলবে, হে আমার রব! আমাকে জান্নাতে প্রবেশ করিয়ে দিন। আল্লাহ বলবেন, তুমি না সকল ধরণের ওয়া’দা ও অঙ্গীকার করে বলেছিলে, আমি যা দান করেছি এর চাইতে বেশি আর কিছু চাইবে না? হে হতভাগা আদাম সন্তান! তুমি তো ভীষণ ওয়াদাভঙ্গকারী। সে বলবে, হে আমার রব! আমি যেন আপনার সৃষ্টির সবচেয়ে দুর্ভাগা না হই। সে বার বার দু’আ করতে থাকবে। পরিশেষে তার অবস্থা দেখে আল্লাহ তা’আলা হেসে ফেলবেন। আল্লাহ তা’আলা বলবেন, যাও জান্নাতে প্রবেশ কর। (জান্নাতে প্রবেশের পর) আল্লাহ তাকে বলবেন, (যা চাওয়ার) চাও। তখন সে তার সকল কামনা চেয়ে শেষ করবে। এরপর আল্লাহ নিজেই স্মরন করায়ে বলবেন, অমুক অমুকটা চাও। এভাবে তার কামনা শেষ হয়ে গেলে আল্লাহ বলবেন, তোমাকে এ সব এবং এর সমপরিমাণ আরো দেয়া হলো। ‘আতা ইবনু ইয়াযীদ বলেন, এবং আবূ সা’ঈদ আল খুদরী (রাঃ) এ হাদীসটি আবূ হুরায়রা (রাঃ)-এর অনুরূপ বর্ণনা করেছেন। তিনি আবূ হুরায়রা (রাঃ) বর্ণিত এ হাদীসের কোন কথাই রদ করেননি। তবে আবূ হুরায়রা (রাঃ) যখন এ কথা উল্লেখ করলেন, “আল্লাহ তা’আলা ঐ ব্যক্তিকে বলবেন, তোমাকে এ সব এবং এর সমপরিমাণ আরো দেয়া হলো” তখন আবূ সা’ঈদ (রাঃ) বললেনঃ হে আবূ হুরায়রা! বরং তা সহ আরো দশগুণ দেয়া হবে। আবূ হুরায়রা (রাঃ) বললেন, আমি রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) থেকে “এর সম-পরিমাণ” এ শব্দ স্মরণ রেখেছি। আবূ সা’ঈদ (রাঃ) বললেন, আমি সাক্ষ্য দিচ্ছি, আমি রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) থেকে “আরো দশগুণ” এ শব্দ সংরক্ষিত রেখেছি। রাবী বলেন, আবূ হুরায়রা (রাঃ) পরিশেষে বলেন, এ ব্যক্তি হবে জান্নাতে সর্বশেষ প্রবেশকারী। (ই.ফা. ৩৪৮; ই.সে. ৩৫৯)
আবূ হুরাইরাহ (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ
কয়েকজন সহাবা রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে বললেন, হে আল্লাহর রসূল! কিয়ামাত দিবসে আমরা কি আমাদের প্রতিপালককে দেখতে পাবো? রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেনঃ পূর্ণিমার রাতে চাঁদ দেখতে কি তোমাদের পরস্পরের মাঝে কষ্ট হয়? সহাবাগণ বললেন, না। রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেনঃ মেঘমুক্ত আকাশে সূর্য দেখতে কি তোমাদের পরস্পরের কষ্টবোধ হয়? তাঁরা বললেন, না। রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেনঃ তদ্রূপ তোমরা তাঁকেও দেখবে। কিয়ামাত দিবসে আল্লাহ সকল মানুষকে জমায়েত করে বলবেন, পৃথিবীতে তোমাদের যে যার ‘ইবাদাত করেছিলে আজ তাকেই অনুসরণ কর। তখন যারা সূর্যের উপাসনা করতো, তারা সূর্যের সাথে থাকবে। যারা চন্দ্রের উপাসনা করতো, তারা চন্দ্রের সাথে থাকবে। আর যারা আল্লাহদ্রোহীদের (তাগূতের) উপাসনা করতো, তারা আল্লাহদ্রোহীদের সাথে জমায়েত হয়ে যাবে। কেবল এ উম্মাত অবশিষ্ট থাকবে। তন্মধ্যে মুনাফিকরাও থাকবে। তখন আল্লাহ তা’আলা তাদের নিকট এমন আকৃতিতে উপস্থিত হবেন যা তারা চিনে না। তারপর (আল্লাহ তা’আলা) বলবেন, আমি তোমাদের প্রতিপালক (সুতরাং তোমরা আমার পিছনে চল)। তারা বলবে, না’ঊযুবিল্লাহ। আমাদের প্রভু না আসা পর্যন্ত আমরা এখানেই দাঁড়িয়ে থাকবো। আর তিনি যখন আসবেন, তখন আমরা তাকে চিনতে পারবো। এরপর আল্লাহ তা’আলা তাদের নিকট তাদের পরিচিত আকৃতিতে আসবেন, বলবেন : আমি তোমাদের প্রভু। তারা বলবে, হ্যাঁ, আপনি আমাদের প্রভু। এ বলে তারা তাঁকে অনুসরণ করবে। এমন সময়ে জাহান্নামের উপর দিয়ে সিরাত (সাঁকো) বসানো হবে। [নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেন] আর আমি ও আমার উম্মাতই হব প্রথম এ পথ অতিক্রমকারী। সেদিন রসূলগণ ব্যতীত অন্য কেউ মুখ খোলারও সাহস করবে না। আর রসূলগণও কেবল এ দু’আ করবেন। হে আল্লাহ! নিরাপত্তা দাও, নিরাপত্তা দাও। আর জাহান্নামে থাকবে সা’দান বৃক্ষের কাঁটার মত অনেক কাঁটাযুক্ত লৌহদণ্ড। তোমরা সা’দান বৃক্ষটি দেখেছ কি? সহাবাগণ বললেন, হ্যাঁ দেখেছি। রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেনঃ তা সা’দান বৃক্ষের কাঁটার মতই, তবে সেটা যে কত বিরাট তা আল্লাহ ব্যতীত কেউ জানে না। পাপ কাজের জন্য কাঁটার আংটাগুলো ছোবল দিতে থাকবে। তাদের কেউ কেউ মু’মিন (যারা সাময়িক জাহান্নামী) তারা রক্ষা পাবে, আর কেউ তো শাস্তি ভোগ করে নাযাত পাবে। এরপর আল্লাহ বান্দাদের মধ্যে ফায়সালা হতে অবসর হলে স্বীয় রহমাতে কিছু সংখ্যক জাহান্নামীদের (জাহান্নাম হতে) বের করতে দেয়ার ইচ্ছা করবেন তখন ফেরেশতাদেরকে নির্দেশ দিবেন যারা কালিমায় বিশ্বাসী ও শির্ক করেনি যাদের উপর আল্লাহ তা’আলা রহম করতে চাইবেন যে, তাদেরকে জাহান্নাম থেকে বের করে নিয়ে আসো। আর যাদের উপর আল্লাহ তা’আলা দয়া করতে চেয়েছেন তারা ঐ সকল লোক যারা ‘লা-ইলা-হা ইল্লাল্ল-হ’ বলত। অতঃপর ফেরেশতাগণ তাদের সনাক্ত করবেন। তারা সাজদাহ চিহ্নের সাহায্যে তাদের চিনবেন। কারণ, অগ্নি মানুষের দেহের সবকিছু জ্বালিয়ে ফেললেও সাজদার স্থান অক্ষত থাকবে। আল্লাহ তা’আলা সাজদার চিহ্ন নষ্ট করা হারাম (নিষিদ্ধ) করে দিয়েছেন। মোটকথা, ফেরেশতাগণ এদেরকে জাহান্নাম থেকে বের করে আনবে এমন অবস্থায় যে, তাদের দেহ আগুনে দগ্ধ। তাদের উপর ‘মাউল-হায়াত’ (সঞ্জীবনী পানি) ঢেলে দেয়া হবে। তখন তারা এতে এমনভাবে সতেজ হয়ে উঠবে যেমনভাবে শস্য অঙ্কুর পানিসিক্ত উর্বর জমিতে সতেজ হয়ে উঠে। তারপর আল্লাহ তা’আলা বান্দাদের বিচার সমাপ্ত করবেন। শেষে এক ব্যক্তি থেকে যাবে। তার মুখমণ্ডল হবে জাহান্নামের দিকে। এই হবে সর্বশেষ জান্নাতে প্রবেশকারী। সে বলবে, হে আমার প্রভু! (অনুগ্রহ করে) আমার মুখটি জাহান্নামের দিক থেকে ফিরিয়ে দিন। কারণ জাহান্নামের দুর্গন্ধ আমাকে অসহনীয় কষ্ট দিচ্ছে; এর লেলিহান অগ্নিশিখা আমাকে দগ্ধ করে দিচ্ছে। আল্লাহ যতদিন চান ততদিন পর্যন্ত সে তাঁর নিকট দু’আ করতে থাকবে। পরে আল্লাহ বলবেন, তোমার এ দু’আ কবূল করলে তুমি কি আরো কিছু কামনা করবে? সে বিভিন্ন ধরণের ও’য়াদা ও অঙ্গীকার করে বলবে যে, জাহান্নামের দিক থেকে ফিরিয়ে দিবেন। তার চেহারা যখন জান্নাতের দিকে ফিরিয়ে দেয়া হবে, আর সে জান্নাত দেখবে, তখন আল্লাহ যতদিন চান সে নীরব থাকবে। পরে আবার বলবে, হে আমার প্রতিপালক! কেবল জান্নাতের দরজা পর্যন্ত আমাকে পৌঁছে দিন। আল্লাহ তাকে বলবেন, তুমি না অঙ্গীকার দিয়েছিলে যে, আমি তোমাকে যা দিয়েছি তা ছাড়া আর কিছু চাইবে না। হে আদাম সন্তান! তুমি হতভাগা ও তুমি সাংঘাতিক ওয়া’দাভঙ্গকারী। তখন সে বলবে, হে আমার রব! এই বলে আল্লাহর কাছে দু’আ করতে থাকবে। আল্লাহ বলবেন, তুমি যা চাও তা যদি দিয়ে দেই তবে আর কিছু চাইবে না তো? সে বলবে, আপনার ইজ্জতের কসম! আর কিছু চাইব না। এভাবে সে তার অক্ষমতা (আল্লাহর কাছে) পেশ করতে থাকবে যতদিন আল্লাহর ইচ্ছা হয়। তারপর তাকে জান্নাতের দরজা পর্যন্ত এগিয়ে দেয়া হবে। এবার যখন সে জান্নাতের দরজায় দাঁড়াবে, তখন জান্নাত তার সামনে উদ্ভাসিত হয়ে উঠবে। সে জান্নাতের সমৃদ্ধি ও সুখ দেখতে থাকবে। সেখানে আল্লাহ যতক্ষণ চান সে ততক্ষণ চুপ করে থাকবে। পরে বলবে, হে আমার রব! আমাকে জান্নাতে প্রবেশ করিয়ে দিন। আল্লাহ বলবেন, তুমি না সকল ধরণের ওয়া’দা ও অঙ্গীকার করে বলেছিলে, আমি যা দান করেছি এর চাইতে বেশি আর কিছু চাইবে না? হে হতভাগা আদাম সন্তান! তুমি তো ভীষণ ওয়াদাভঙ্গকারী। সে বলবে, হে আমার রব! আমি যেন আপনার সৃষ্টির সবচেয়ে দুর্ভাগা না হই। সে বার বার দু’আ করতে থাকবে। পরিশেষে তার অবস্থা দেখে আল্লাহ তা’আলা হেসে ফেলবেন। আল্লাহ তা’আলা বলবেন, যাও জান্নাতে প্রবেশ কর। (জান্নাতে প্রবেশের পর) আল্লাহ তাকে বলবেন, (যা চাওয়ার) চাও। তখন সে তার সকল কামনা চেয়ে শেষ করবে। এরপর আল্লাহ নিজেই স্মরন করায়ে বলবেন, অমুক অমুকটা চাও। এভাবে তার কামনা শেষ হয়ে গেলে আল্লাহ বলবেন, তোমাকে এ সব এবং এর সমপরিমাণ আরো দেয়া হলো। ‘আতা ইবনু ইয়াযীদ বলেন, এবং আবূ সা’ঈদ আল খুদরী (রাঃ) এ হাদীসটি আবূ হুরায়রা (রাঃ)-এর অনুরূপ বর্ণনা করেছেন। তিনি আবূ হুরায়রা (রাঃ) বর্ণিত এ হাদীসের কোন কথাই রদ করেননি। তবে আবূ হুরায়রা (রাঃ) যখন এ কথা উল্লেখ করলেন, “আল্লাহ তা’আলা ঐ ব্যক্তিকে বলবেন, তোমাকে এ সব এবং এর সমপরিমাণ আরো দেয়া হলো” তখন আবূ সা’ঈদ (রাঃ) বললেনঃ হে আবূ হুরায়রা! বরং তা সহ আরো দশগুণ দেয়া হবে। আবূ হুরায়রা (রাঃ) বললেন, আমি রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) থেকে “এর সম-পরিমাণ” এ শব্দ স্মরণ রেখেছি। আবূ সা’ঈদ (রাঃ) বললেন, আমি সাক্ষ্য দিচ্ছি, আমি রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) থেকে “আরো দশগুণ” এ শব্দ সংরক্ষিত রেখেছি। রাবী বলেন, আবূ হুরায়রা (রাঃ) পরিশেষে বলেন, এ ব্যক্তি হবে জান্নাতে সর্বশেষ প্রবেশকারী। (ই.ফা. ৩৪৮; ই.সে. ৩৫৯)
حدثني زهير بن حرب، حدثنا يعقوب بن إبراهيم، حدثنا أبي، عن ابن شهاب، عن عطاء بن يزيد الليثي، أن أبا هريرة، أخبره أن ناسا قالوا لرسول الله صلى الله عليه وسلم يا رسول الله هل نرى ربنا يوم القيامة فقال رسول الله صلى الله عليه وسلم " هل تضارون في رؤية القمر ليلة البدر " . قالوا لا يا رسول الله . قال " هل تضارون في الشمس ليس دونها سحاب " . قالوا لا يا رسول الله . قال " فإنكم ترونه كذلك يجمع الله الناس يوم القيامة فيقول من كان يعبد شيئا فليتبعه . فيتبع من كان يعبد الشمس الشمس ويتبع من كان يعبد القمر القمر ويتبع من كان يعبد الطواغيت الطواغيت وتبقى هذه الأمة فيها منافقوها فيأتيهم الله - تبارك وتعالى - في صورة غير صورته التي يعرفون فيقول أنا ربكم . فيقولون نعوذ بالله منك هذا مكاننا حتى يأتينا ربنا فإذا جاء ربنا عرفناه . فيأتيهم الله تعالى في صورته التي يعرفون فيقول أنا ربكم . فيقولون أنت ربنا . فيتبعونه ويضرب الصراط بين ظهرى جهنم فأكون أنا وأمتي أول من يجيز ولا يتكلم يومئذ إلا الرسل ودعوى الرسل يومئذ اللهم سلم سلم . وفي جهنم كلاليب مثل شوك السعدان هل رأيتم السعدان " . قالوا نعم يا رسول الله . قال " فإنها مثل شوك السعدان غير أنه لا يعلم ما قدر عظمها إلا الله تخطف الناس بأعمالهم فمنهم المؤمن بقي بعمله ومنهم المجازى حتى ينجى حتى إذا فرغ الله من القضاء بين العباد وأراد أن يخرج برحمته من أراد من أهل النار أمر الملائكة أن يخرجوا من النار من كان لا يشرك بالله شيئا ممن أراد الله تعالى أن يرحمه ممن يقول لا إله إلا الله . فيعرفونهم في النار يعرفونهم بأثر السجود تأكل النار من ابن آدم إلا أثر السجود حرم الله على النار أن تأكل أثر السجود . فيخرجون من النار وقد امتحشوا فيصب عليهم ماء الحياة فينبتون منه كما تنبت الحبة في حميل السيل ثم يفرغ الله تعالى من القضاء بين العباد ويبقى رجل مقبل بوجهه على النار وهو آخر أهل الجنة دخولا الجنة فيقول أى رب اصرف وجهي عن النار فإنه قد قشبني ريحها وأحرقني ذكاؤها فيدعو الله ما شاء الله أن يدعوه ثم يقول الله تبارك وتعالى هل عسيت إن فعلت ذلك بك أن تسأل غيره . فيقول لا أسألك غيره . ويعطي ربه من عهود ومواثيق ما شاء الله فيصرف الله وجهه عن النار فإذا أقبل على الجنة ورآها سكت ما شاء الله أن يسكت ثم يقول أى رب قدمني إلى باب الجنة . فيقول الله له أليس قد أعطيت عهودك ومواثيقك لا تسألني غير الذي أعطيتك ويلك يا ابن آدم ما أغدرك . فيقول أى رب ويدعو الله حتى يقول له فهل عسيت إن أعطيتك ذلك أن تسأل غيره . فيقول لا وعزتك . فيعطي ربه ما شاء الله من عهود ومواثيق فيقدمه إلى باب الجنة فإذا قام على باب الجنة انفهقت له الجنة فرأى ما فيها من الخير والسرور فيسكت ما شاء الله أن يسكت ثم يقول أى رب أدخلني الجنة . فيقول الله تبارك وتعالى له أليس قد أعطيت عهودك ومواثيقك أن لا تسأل غير ما أعطيت ويلك يا ابن آدم ما أغدرك . فيقول أى رب لا أكون أشقى خلقك . فلا يزال يدعو الله حتى يضحك الله تبارك وتعالى منه فإذا ضحك الله منه قال ادخل الجنة . فإذا دخلها قال الله له تمنه . فيسأل ربه ويتمنى حتى إن الله ليذكره من كذا وكذا حتى إذا انقطعت به الأماني قال الله تعالى ذلك لك ومثله معه " . قال عطاء بن يزيد وأبو سعيد الخدري مع أبي هريرة لا يرد عليه من حديثه شيئا . حتى إذا حدث أبو هريرة أن الله قال لذلك الرجل ومثله معه . قال أبو سعيد وعشرة أمثاله معه يا أبا هريرة . قال أبو هريرة ما حفظت إلا قوله ذلك لك ومثله معه . قال أبو سعيد أشهد أني حفظت من رسول الله صلى الله عليه وسلم قوله ذلك لك وعشرة أمثاله . قال أبو هريرة وذلك الرجل آخر أهل الجنة دخولا الجنة .
সহিহ মুসলিম ৩৪৩
وحدثني سويد بن سعيد، قال حدثني حفص بن ميسرة، عن زيد بن أسلم، عن عطاء بن يسار، عن أبي سعيد الخدري، أن ناسا، في زمن رسول الله صلى الله عليه وسلم قالوا يا رسول الله هل نرى ربنا يوم القيامة قال رسول الله صلى الله عليه وسلم " نعم " . قال " هل تضارون في رؤية الشمس بالظهيرة صحوا ليس معها سحاب وهل تضارون في رؤية القمر ليلة البدر صحوا ليس فيها سحاب " . قالوا لا يا رسول الله . قال " ما تضارون في رؤية الله تبارك وتعالى يوم القيامة إلا كما تضارون في رؤية أحدهما إذا كان يوم القيامة أذن مؤذن ليتبع كل أمة ما كانت تعبد . فلا يبقى أحد كان يعبد غير الله سبحانه من الأصنام والأنصاب إلا يتساقطون في النار حتى إذا لم يبق إلا من كان يعبد الله من بر وفاجر وغبر أهل الكتاب فيدعى اليهود فيقال لهم ما كنتم تعبدون قالوا كنا نعبد عزير ابن الله . فيقال كذبتم ما اتخذ الله من صاحبة ولا ولد فماذا تبغون قالوا عطشنا يا ربنا فاسقنا . فيشار إليهم ألا تردون فيحشرون إلى النار كأنها سراب يحطم بعضها بعضا فيتساقطون في النار . ثم يدعى النصارى فيقال لهم ما كنتم تعبدون قالوا كنا نعبد المسيح ابن الله . فيقال لهم كذبتم . ما اتخذ الله من صاحبة ولا ولد . فيقال لهم ماذا تبغون فيقولون عطشنا يا ربنا فاسقنا . - قال - فيشار إليهم ألا تردون فيحشرون إلى جهنم كأنها سراب يحطم بعضها بعضا فيتساقطون في النار حتى إذا لم يبق إلا من كان يعبد الله تعالى من بر وفاجر أتاهم رب العالمين سبحانه وتعالى في أدنى صورة من التي رأوه فيها . قال فما تنتظرون تتبع كل أمة ما كانت تعبد . قالوا يا ربنا فارقنا الناس في الدنيا أفقر ما كنا إليهم ولم نصاحبهم . فيقول أنا ربكم . فيقولون نعوذ بالله منك لا نشرك بالله شيئا - مرتين أو ثلاثا - حتى إن بعضهم ليكاد أن ينقلب . فيقول هل بينكم وبينه آية فتعرفونه بها فيقولون نعم . فيكشف عن ساق فلا يبقى من كان يسجد لله من تلقاء نفسه إلا أذن الله له بالسجود ولا يبقى من كان يسجد اتقاء ورياء إلا جعل الله ظهره طبقة واحدة كلما أراد أن يسجد خر على قفاه . ثم يرفعون رءوسهم وقد تحول في صورته التي رأوه فيها أول مرة فقال أنا ربكم . فيقولون أنت ربنا . ثم يضرب الجسر على جهنم وتحل الشفاعة ويقولون اللهم سلم سلم " . قيل يا رسول الله وما الجسر قال " دحض مزلة . فيه خطاطيف وكلاليب وحسك تكون بنجد فيها شويكة يقال لها السعدان فيمر المؤمنون كطرف العين وكالبرق وكالريح وكالطير وكأجاويد الخيل والركاب فناج مسلم ومخدوش مرسل ومكدوس في نار جهنم . حتى إذا خلص المؤمنون من النار فوالذي نفسي بيده ما منكم من أحد بأشد مناشدة لله في استقصاء الحق من المؤمنين لله يوم القيامة لإخوانهم الذين في النار يقولون ربنا كانوا يصومون معنا ويصلون ويحجون . فيقال لهم أخرجوا من عرفتم . فتحرم صورهم على النار فيخرجون خلقا كثيرا قد أخذت النار إلى نصف ساقيه وإلى ركبتيه ثم يقولون ربنا ما بقي فيها أحد ممن أمرتنا به . فيقول ارجعوا فمن وجدتم في قلبه مثقال دينار من خير فأخرجوه . فيخرجون خلقا كثيرا ثم يقولون ربنا لم نذر فيها أحدا ممن أمرتنا . ثم يقول ارجعوا فمن وجدتم في قلبه مثقال نصف دينار من خير فأخرجوه . فيخرجون خلقا كثيرا ثم يقولون ربنا لم نذر فيها ممن أمرتنا أحدا . ثم يقول ارجعوا فمن وجدتم في قلبه مثقال ذرة من خير فأخرجوه . فيخرجون خلقا كثيرا ثم يقولون ربنا لم نذر فيها خيرا " . وكان أبو سعيد الخدري يقول إن لم تصدقوني بهذا الحديث فاقرءوا إن شئتم { إن الله لا يظلم مثقال ذرة وإن تك حسنة يضاعفها ويؤت من لدنه أجرا عظيما} " فيقول الله عز وجل شفعت الملائكة وشفع النبيون وشفع المؤمنون ولم يبق إلا أرحم الراحمين فيقبض قبضة من النار فيخرج منها قوما لم يعملوا خيرا قط قد عادوا حمما فيلقيهم في نهر في أفواه الجنة يقال له نهر الحياة فيخرجون كما تخرج الحبة في حميل السيل ألا ترونها تكون إلى الحجر أو إلى الشجر ما يكون إلى الشمس أصيفر وأخيضر وما يكون منها إلى الظل يكون أبيض " . فقالوا يا رسول الله كأنك كنت ترعى بالبادية قال " فيخرجون كاللؤلؤ في رقابهم الخواتم يعرفهم أهل الجنة هؤلاء عتقاء الله الذين أدخلهم الله الجنة بغير عمل عملوه ولا خير قدموه ثم يقول ادخلوا الجنة فما رأيتموه فهو لكم . فيقولون ربنا أعطيتنا ما لم تعط أحدا من العالمين . فيقول لكم عندي أفضل من هذا فيقولون يا ربنا أى شىء أفضل من هذا . فيقول رضاى فلا أسخط عليكم بعده أبدا " .
আবূ সা’ঈদ আল খুদরী (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ
রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর যুগে কতিপয় লোক তাঁকে জিজ্ঞেস করে বলল, হে আল্লাহর রসূল! কিয়ামাত দিবসে আমরা কি আমাদের প্রতিপালককে দেখতে পাবো? রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেনঃ হ্যাঁ! তিনি আরো বললেনঃ দুপুরে মেঘমুক্ত আকাশে সূর্য দেখতে কি তোমাদের কষ্ট হয়? চন্দ্রের চৌদ্দ তারিখে মেঘমুক্ত অবস্থায় চন্দ্র দেখতে কি তোমাদের কষ্ট হয়? সকলে বললেন, হে আল্লাহর রসূল! তা হয় না। নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেনঃ ঠিক তদ্রূপ কিয়ামাত দিবসে তোমাদের বারাকাতময় মহামহিম প্রতিপালককে দেখতে কোনই কষ্ট অনুভব হবে না যেমন চন্দ্র ও সূর্য দেখতে কষ্ট অনুভব কর না। সে দিন এক ঘোষণাকারী ঘোষণা দিবে, ‘যে যার উপাসনা করতো সে আজ তার অনুসরণ করুক।’ তখন আল্লাহ ব্যতীত তারা অন্য দেব-দেবী ও মূর্তিপূজার বেদীর উপাসনা করত তাদের কেউ অবশিষ্ট থাকবে না; সকলেই জাহান্নামে নিক্ষিপ্ত হবে। সৎ হোক বা অসৎ যারা আল্লাহর ‘ইবাদাত করত তারাই কেবল অবশিষ্ট থাকবে এবং কিতাবীদের (যারা দেব-দেবী ও বেদীর উপাসক ছিল না তারাও বাকী থাকবে)। এরপর ইয়াহূদীদেরকে ডেকে জিজ্ঞাসা করা হবে, তোমরা কার ‘ইবাদাত করতে? তারা বলবে, আল্লাহর পুত্র ‘উযায়র-এর। তাদেরকে বলা হবে মিথ্যা বলছো। আল্লাহ কোন স্ত্রী বা সন্তান গ্রহণ করেননি। তোমরা কি চাও? তারা বলবে, হে আল্লাহ! আমাদের খুবই পিপাসা পেয়েছে। আমাদের পিপাসা নিবারণ করুন। প্রার্থনা শুনে তাদেরকে ইঙ্গিত করে মরীচিকাময় জাহান্নামের দিকে জমায়েত করা হবে। সেখানে আগুনের লেলিহান শিখা যেন পানির ঢেউ খেলবে। এর একাংশ আরেক অংশকে গ্রাস করতে থাকবে। তারা এতে ঝাঁপিয়ে পড়বে। এরপর খৃস্টানদেরকে ডাকা হবে, বলা হবে, তোমরা কার ‘ইবাদাত করতে? তারা বলবে, আল্লাহর পুত্র মাসীহ-এর (‘ঈসার) উপাসনা করতাম। বলা হবে, মিথ্যা বলছ। আল্লাহ কোন স্ত্রী বা সন্তান গ্রহণ করেননি। জিজ্ঞেস করা হবে, এখন কি চাও? তারা বলবে, হে আমাদের রব! আমাদের দারুণ পিপাসা পেয়েছে, আমাদের পিপাসা নিবারণ করুন। তখন তাদেরকেও পানির ঘাটে যাবার ইঙ্গিত করে জাহান্নামের দিকে হাকিয়ে নিয়ে জমায়েত করা হবে। এটিকে মরীচিকার ন্যায় মনে হবে। সেখানে আগুনের লেলিহান শিখা যেন পানির ঢেউ খেলবে। এর একাংশ অপর অংশকে গ্রাস করে নিবে। তারা তখন জাহান্নামে ঝাঁপিয়ে পড়তে থাকবে। শেষে সৎ হোক বা অসৎ এক আল্লাহর উপাসক ব্যতীত আর কেউ (ময়দানে) অবশিষ্ট থাকবে না। তখন আল্লাহ তা’আলা পরিচিত আকৃতিতে তাদের নিকট আসবেন। বলবেন, সবাই তাদের স্ব স্ব উপাস্যের অনুসরণ করে চলে গেছে, আর তোমরা কার অপেক্ষা করছ? তারা বলবে, হে আমাদের প্রভু! যেখানে আমরা বেশী মুখাপেক্ষী ছিলাম সে দুনিয়াতেই আমরা অপরাপর মানুষ থেকে পৃথক থেকেছি এবং তাদের সঙ্গী হইনি। তখন আল্লাহ বলবেন, আমিই তো তোমাদের প্রভু। মু’মিনরা বলবে, “আমরা তোমার থেকে আল্লাহর নিকট আশ্রয় প্রার্থনা করছি” আল্লাহর সঙ্গে আমরা কিছুই শারীক করি না। এ কথা তারা দুই বা তিনবার বলবে। এমন কি কেউ কেউ অবাধ্যতা প্রদর্শনেও অবতীর্ণ হয়ে যাবে। আল্লাহ বলবেন, আচ্ছা, তোমাদের নিকট এমন কোন নিদর্শন আছে যদ্বারা তাঁকে তোমরা চিনতে পার? তারা বলবে অবশ্যই আছে। এরপর পায়ের ‘সাক’ (গোছা) উন্মোচিত হবে। তখন পৃথিবীতে যারা স্বতঃপ্রণোদিত হয়ে আল্লাহর উদ্দেশ্যে সাজদাহ্ করত, সে মূহুর্তে তাদেরকে আল্লাহ সাজদাহ্ করার অনুমতি দিবেন এবং তারা সবাই সাজদাহ্বনত হয়ে পড়বে। আর যে কারো ভয়-ভীতি কিংবা লোক দেখানোর জন্য সাজদাহ্ করতো তার মেরুদণ্ড শক্ত ও অনমনীয় করে দেয়া হবে। যখনই তারা সাজদাহ্ করতে ইচ্ছা করবে তখনই তারা চিত হয়ে পড়ে যাবে। অতঃপর তারা তাদের মাথা উঠাবে এবং তিনি তাঁর আসলরূপে আবির্ভূত হবেন। অতঃপর বলবেন, আমি তোমাদের রব, তারা বলবে, হ্যাঁ! আপনি আমাদের রব। তারপর জাহান্নামের উপর “জাস্র” (পুল) স্থাপন করা হবে। শাফা’আতেরও অনুমতি দেয়া হবে। মানুষ বলতে থাকবে, হে আল্লাহ! আমাদের নিরাপত্তা দিন, আমাদের নিরাপত্তা দিন। জিজ্ঞেস করা হলো, হে আল্লাহর রসূল (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) ! “জাস্র” কী? রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেনঃ এটি এমন স্থান যেখানে পা পিছলে যায়। সেখানে আছে নানা প্রকারের লৌহ শলাকা ও কাঁটা, দেখতে নাজ্দের সা’দান বৃক্ষের কাঁটার ন্যায়। মু’মিনগণের কেউ তো এ পথ চোখের পলকের গতিতে, কেউ বিদ্যুৎ গতিতে, কেউ বায়ুর গতিতে, কেউ উত্তম অশ্ব গতিতে, কেউ উষ্ট্রের গতিতে অতিক্রম করবে। কেউ তো অক্ষত অবস্থায় নাযাত পাবে, আর কেউ তো হবে ক্ষতবিক্ষত অবস্থায় নাযাতপ্রাপ্ত। আর কতককে কাঁটাবিদ্ধ অবস্থায় জাহান্নামে নিক্ষেপ করা হবে। অবশেষে মু’মিনগণ জাহান্নাম থেকে মুক্তি লাভ করবে। রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেনঃ সে সত্তার কসম! যাঁর হাতে আমার প্রাণ, ঐ দিন মু’মিনগণ তাদের ঐ সব ভাইদের স্বার্থে আল্লাহর সাথে এত অধিক বিতর্কে লিপ্ত হবে যারা জাহান্নামে রয়ে গেছে যে, তোমাদের পার্থিব অধিকারের ক্ষেত্রেও এমন বিতর্কে লিপ্ত হয়ো না। তারা বলবে, হে রব! এরা তো আমাদের সাথেই সিয়াম, সলাত আদায় করত, হাজ্জ করত। তখন তাদেরকে নির্দেশ দেয়া হবে যে, যাও, তোমাদের পরিচিতদের উদ্ধার করে আন। উল্লেখ্য এরা জাহান্নামে পতিত হলেও মুখমণ্ডল ‘আযাব থেকে রক্ষিত থাকবে। (তাই তাদেরকে চিনতে কোন অসুবিধা হবে না।) মু’মিনগণ জাহান্নাম হতে এক বিরাট দলকে উদ্ধার করে আনবে। এদের অবস্থা এমন হবে যে, কারোর তো পায়ের নলা পর্যন্ত, আবার কারো হাঁটু পর্যন্ত দেহ আগুন ছাই করে দিবে। উদ্ধার শেষ করে মু’মিনগণ বলবে, হে রব! যাদের সম্পর্কে আপনি নির্দেশ প্রদান করেছিলেন, তাদের মাঝে আর কেউ অবশিষ্ট নেই। আল্লাহ বলবেন, পুনরায় যাও, যার অন্তরে এক দীনার পরিমাণও ঈমান অবশিষ্ট পাবে তাকেও উদ্ধার করে আন। তখন তারা আরো একদলকে উদ্ধার করে এনে বলবে, হে রব! অনুমতিপ্রাপ্তদের কাউকেও রেখে আসিনি। আল্লাহ বলবেন : আবার যাও, যার অন্তরে অর্ধ দীনার পরিমাণও ঈমান অবশিষ্ট পাবে তাকেও বের করে আন। তখন আবার এক বিরাট দলকে উদ্ধার করে এনে তারা বলবে, হে রব! যাদের আপনি উদ্ধার করতে বলেছিলেন তাদের কাউকে ছেড়ে আসিনি। আল্লাহ বলবেন : আবার যাও, যার অন্তরে অণু পরিমাণও ঈমান বিদ্যমান, তাকেও উদ্ধার করে আন। তখন আবারও এক বিরাট দলকে উদ্ধার করে এনে তারা বলবে, হে রব! যাদের কথা বলেছিলেন তাদের কাউকেও রেখে আসিনি। সহাবা আবূ সা’ঈদ আল খুদরী (রাঃ) বলেন, তোমরা যদি এ হাদীসের ব্যাপারে আমাকে সত্যবাদী মনে না কর তবে এর সমর্থনে নিম্নোক্ত আয়াতটি যদি চাও তবে তিলাওয়াত করতে পার : “আল্লাহ অণু পরিমাণও যুল্ম করেন না এবং অণু পরিমাণ নেক কাজ হলেও আল্লাহ তা দ্বিগুণ করে দেন এবং তাঁর নিকট হতে মহাপুরস্কার প্রদান করেন”— (সূরাহ আন্ নিসা ৪ : ৪০)। এরপর আল্লাহ তা’আলা বলবেন : ফেরেশতারা সুপারিশ করলেন, নাবীগণও সুপারিশ করলেন এবং মু’মিনরাও সুপারিশ করেছে, কেবলমাত্র আরহামুর রাহিমীন-পরম দয়াময়ই রয়ে গেছেন। এরপর তিনি জাহান্নাম থেকে এক মুঠো তুলে আনবেন, ফলে এমন একদল লোক মুক্তি পাবে যারা কখনো কোন সৎকর্ম করেনি এবং আগুনে জ্বলে লাল হয়ে গেছে। পরে তাদেরকে জান্নাতের প্রবেশ মুখের ‘নাহরুল হায়াতে’ ফেলে দেয়া হবে। তারা এতে এমনভাবে সতেজ হয়ে উঠবে, যেমনভাবে শস্য অঙ্কুর স্রোতবাহিত পানি ভেজা উর্বর জমিতে সতেজ হয়ে উঠে। (রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেনঃ) তোমরা কি কোন বৃক্ষ কিংবা পাথরের আড়াল কোন শস্যদানা অঙ্কুরিত হতে দেখনি? যেগুলো সূর্য কিরণের মাঝে থাকে সেগুলো হলদে ও সবুজ রূপ ধারণ করে আর যেগুলো ছায়াযুক্ত স্থানে থাকে সেগুলো সাদা হয়ে যায়। সহাবাগণ বললেনঃ হে আল্লাহর রসূল! মনে হয় আপনি যেন গ্রামাঞ্চলে পশু চরিয়েছেন। রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেনঃ এরপর তারা নহর থেকে মুক্তার ন্যায় ঝকঝকে অবস্থায় উঠে আসবে এবং তাদের গ্রীবাদেশে মোহরাঙ্কিত থাকবে যা দেখে জান্নাতীগণ তাদের চিনতে পারবেন। এরা হর ‘উতাকাউল্লাহ’-আল্লাহর পক্ষ থেকে মুক্তিপ্রাপ্ত। আল্লাহ তা’আলা সৎ ‘আমাল ব্যতীতই তাদেরকে জান্নাতে দাখিল করবেন। এরপর আল্লাহ তাদেরকে লক্ষ্য করে বলবেন : যাও, জান্নাতে প্রবেশ কর। আর যা কিছু দেখছ সব কিছু তোমাদেরই। তারা বলবে, হে রব! আপনি আমাদেরকে এত দিয়েছেন যা সৃষ্টজগতের কাউকে দেননি। আল্লাহ বলবেন : তোমাদের জন্য আমার নিকট এর চেয়েও উত্তম বস্তু আছে। তারা বলবে, কী সে উত্তম বস্তু? আল্লাহ বলবেন : সে হলো আমার সন্তুষ্টি। এরপর আর কখনো তোমাদের উপর অসন্তুষ্ট হবো না। ইমাম মুসলিম (রহঃ) বলেনঃ শাফা’আত সম্পর্কীয় এ হাদীসটি আমি ‘ঈসা ইবনু হাম্মাদ যুগবাতুর মিসরী-এর নিকট পাঠ করতে বললাম, আপনি লায়স ইবনু সা’দ থেকে নিজে এ হাদীসটি শুনেছেন? আমি কি আপনার পক্ষ থেকে এ হাদীসটি বর্ণনা করতে পারি? তিনি উত্তর করলেন, হ্যাঁ! এরপর আমি ‘ঈসা ইবনু হাম্মাদকে হাদীসটি এ সূত্রে শুনিয়েছি যে, ‘ঈসা ইবনু হাম্মাদ (রহঃ) আবূ সা’ঈদ আল খুদরী (রাঃ)-এর সূত্রে বর্ণনা করেছেন। তিনি বলেন, আমরা রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে বললাম, হে আল্লাহর রসূল! আমরা কি আমাদের প্রভুকে দেখতে পাবো? রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) উত্তর করলেন : মেঘমুক্ত আকাশে সূর্য দেখতে ভীড়ের কারণে তোমাদের কি কোন অসুবিধা হয়? আমরা বললাম, না .....। এভাবে হাদীসটির শেষ পর্যন্ত তুলে ধরলাম। এ হাদীসটি হাফিয ইবনু মাইসারাহ্ বর্ণিত হাদিসেরই অনুরূপ। তিনি (আরবী) এ অংশটুকুর পর (আরবী) অর্থাৎ তাদের বলা হবে : তোমাদের জন্য রয়েছে যা তোমরা দেখছ। আবূ সা’ঈদ আল খুদরী (রাঃ) বলেন, আমার কাছে রিওয়ায়াতে পৌঁছেছে যে, ‘জাস্র’ (পুল) চুল অপেক্ষা অধিক সূক্ষ্ম ও তরবারি অপেক্ষা অধিক তীক্ষ্ণ। তাছাড়া লায়সের হাদীসে (আরবী) বাক্যটির পরবর্তী অংশগুলো উল্লেখ নেই। (ই.ফা. ৩৫১; ই.সে. ৩৬২)
আবূ সা’ঈদ আল খুদরী (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ
রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর যুগে কতিপয় লোক তাঁকে জিজ্ঞেস করে বলল, হে আল্লাহর রসূল! কিয়ামাত দিবসে আমরা কি আমাদের প্রতিপালককে দেখতে পাবো? রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেনঃ হ্যাঁ! তিনি আরো বললেনঃ দুপুরে মেঘমুক্ত আকাশে সূর্য দেখতে কি তোমাদের কষ্ট হয়? চন্দ্রের চৌদ্দ তারিখে মেঘমুক্ত অবস্থায় চন্দ্র দেখতে কি তোমাদের কষ্ট হয়? সকলে বললেন, হে আল্লাহর রসূল! তা হয় না। নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেনঃ ঠিক তদ্রূপ কিয়ামাত দিবসে তোমাদের বারাকাতময় মহামহিম প্রতিপালককে দেখতে কোনই কষ্ট অনুভব হবে না যেমন চন্দ্র ও সূর্য দেখতে কষ্ট অনুভব কর না। সে দিন এক ঘোষণাকারী ঘোষণা দিবে, ‘যে যার উপাসনা করতো সে আজ তার অনুসরণ করুক।’ তখন আল্লাহ ব্যতীত তারা অন্য দেব-দেবী ও মূর্তিপূজার বেদীর উপাসনা করত তাদের কেউ অবশিষ্ট থাকবে না; সকলেই জাহান্নামে নিক্ষিপ্ত হবে। সৎ হোক বা অসৎ যারা আল্লাহর ‘ইবাদাত করত তারাই কেবল অবশিষ্ট থাকবে এবং কিতাবীদের (যারা দেব-দেবী ও বেদীর উপাসক ছিল না তারাও বাকী থাকবে)। এরপর ইয়াহূদীদেরকে ডেকে জিজ্ঞাসা করা হবে, তোমরা কার ‘ইবাদাত করতে? তারা বলবে, আল্লাহর পুত্র ‘উযায়র-এর। তাদেরকে বলা হবে মিথ্যা বলছো। আল্লাহ কোন স্ত্রী বা সন্তান গ্রহণ করেননি। তোমরা কি চাও? তারা বলবে, হে আল্লাহ! আমাদের খুবই পিপাসা পেয়েছে। আমাদের পিপাসা নিবারণ করুন। প্রার্থনা শুনে তাদেরকে ইঙ্গিত করে মরীচিকাময় জাহান্নামের দিকে জমায়েত করা হবে। সেখানে আগুনের লেলিহান শিখা যেন পানির ঢেউ খেলবে। এর একাংশ আরেক অংশকে গ্রাস করতে থাকবে। তারা এতে ঝাঁপিয়ে পড়বে। এরপর খৃস্টানদেরকে ডাকা হবে, বলা হবে, তোমরা কার ‘ইবাদাত করতে? তারা বলবে, আল্লাহর পুত্র মাসীহ-এর (‘ঈসার) উপাসনা করতাম। বলা হবে, মিথ্যা বলছ। আল্লাহ কোন স্ত্রী বা সন্তান গ্রহণ করেননি। জিজ্ঞেস করা হবে, এখন কি চাও? তারা বলবে, হে আমাদের রব! আমাদের দারুণ পিপাসা পেয়েছে, আমাদের পিপাসা নিবারণ করুন। তখন তাদেরকেও পানির ঘাটে যাবার ইঙ্গিত করে জাহান্নামের দিকে হাকিয়ে নিয়ে জমায়েত করা হবে। এটিকে মরীচিকার ন্যায় মনে হবে। সেখানে আগুনের লেলিহান শিখা যেন পানির ঢেউ খেলবে। এর একাংশ অপর অংশকে গ্রাস করে নিবে। তারা তখন জাহান্নামে ঝাঁপিয়ে পড়তে থাকবে। শেষে সৎ হোক বা অসৎ এক আল্লাহর উপাসক ব্যতীত আর কেউ (ময়দানে) অবশিষ্ট থাকবে না। তখন আল্লাহ তা’আলা পরিচিত আকৃতিতে তাদের নিকট আসবেন। বলবেন, সবাই তাদের স্ব স্ব উপাস্যের অনুসরণ করে চলে গেছে, আর তোমরা কার অপেক্ষা করছ? তারা বলবে, হে আমাদের প্রভু! যেখানে আমরা বেশী মুখাপেক্ষী ছিলাম সে দুনিয়াতেই আমরা অপরাপর মানুষ থেকে পৃথক থেকেছি এবং তাদের সঙ্গী হইনি। তখন আল্লাহ বলবেন, আমিই তো তোমাদের প্রভু। মু’মিনরা বলবে, “আমরা তোমার থেকে আল্লাহর নিকট আশ্রয় প্রার্থনা করছি” আল্লাহর সঙ্গে আমরা কিছুই শারীক করি না। এ কথা তারা দুই বা তিনবার বলবে। এমন কি কেউ কেউ অবাধ্যতা প্রদর্শনেও অবতীর্ণ হয়ে যাবে। আল্লাহ বলবেন, আচ্ছা, তোমাদের নিকট এমন কোন নিদর্শন আছে যদ্বারা তাঁকে তোমরা চিনতে পার? তারা বলবে অবশ্যই আছে। এরপর পায়ের ‘সাক’ (গোছা) উন্মোচিত হবে। তখন পৃথিবীতে যারা স্বতঃপ্রণোদিত হয়ে আল্লাহর উদ্দেশ্যে সাজদাহ্ করত, সে মূহুর্তে তাদেরকে আল্লাহ সাজদাহ্ করার অনুমতি দিবেন এবং তারা সবাই সাজদাহ্বনত হয়ে পড়বে। আর যে কারো ভয়-ভীতি কিংবা লোক দেখানোর জন্য সাজদাহ্ করতো তার মেরুদণ্ড শক্ত ও অনমনীয় করে দেয়া হবে। যখনই তারা সাজদাহ্ করতে ইচ্ছা করবে তখনই তারা চিত হয়ে পড়ে যাবে। অতঃপর তারা তাদের মাথা উঠাবে এবং তিনি তাঁর আসলরূপে আবির্ভূত হবেন। অতঃপর বলবেন, আমি তোমাদের রব, তারা বলবে, হ্যাঁ! আপনি আমাদের রব। তারপর জাহান্নামের উপর “জাস্র” (পুল) স্থাপন করা হবে। শাফা’আতেরও অনুমতি দেয়া হবে। মানুষ বলতে থাকবে, হে আল্লাহ! আমাদের নিরাপত্তা দিন, আমাদের নিরাপত্তা দিন। জিজ্ঞেস করা হলো, হে আল্লাহর রসূল (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) ! “জাস্র” কী? রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেনঃ এটি এমন স্থান যেখানে পা পিছলে যায়। সেখানে আছে নানা প্রকারের লৌহ শলাকা ও কাঁটা, দেখতে নাজ্দের সা’দান বৃক্ষের কাঁটার ন্যায়। মু’মিনগণের কেউ তো এ পথ চোখের পলকের গতিতে, কেউ বিদ্যুৎ গতিতে, কেউ বায়ুর গতিতে, কেউ উত্তম অশ্ব গতিতে, কেউ উষ্ট্রের গতিতে অতিক্রম করবে। কেউ তো অক্ষত অবস্থায় নাযাত পাবে, আর কেউ তো হবে ক্ষতবিক্ষত অবস্থায় নাযাতপ্রাপ্ত। আর কতককে কাঁটাবিদ্ধ অবস্থায় জাহান্নামে নিক্ষেপ করা হবে। অবশেষে মু’মিনগণ জাহান্নাম থেকে মুক্তি লাভ করবে। রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেনঃ সে সত্তার কসম! যাঁর হাতে আমার প্রাণ, ঐ দিন মু’মিনগণ তাদের ঐ সব ভাইদের স্বার্থে আল্লাহর সাথে এত অধিক বিতর্কে লিপ্ত হবে যারা জাহান্নামে রয়ে গেছে যে, তোমাদের পার্থিব অধিকারের ক্ষেত্রেও এমন বিতর্কে লিপ্ত হয়ো না। তারা বলবে, হে রব! এরা তো আমাদের সাথেই সিয়াম, সলাত আদায় করত, হাজ্জ করত। তখন তাদেরকে নির্দেশ দেয়া হবে যে, যাও, তোমাদের পরিচিতদের উদ্ধার করে আন। উল্লেখ্য এরা জাহান্নামে পতিত হলেও মুখমণ্ডল ‘আযাব থেকে রক্ষিত থাকবে। (তাই তাদেরকে চিনতে কোন অসুবিধা হবে না।) মু’মিনগণ জাহান্নাম হতে এক বিরাট দলকে উদ্ধার করে আনবে। এদের অবস্থা এমন হবে যে, কারোর তো পায়ের নলা পর্যন্ত, আবার কারো হাঁটু পর্যন্ত দেহ আগুন ছাই করে দিবে। উদ্ধার শেষ করে মু’মিনগণ বলবে, হে রব! যাদের সম্পর্কে আপনি নির্দেশ প্রদান করেছিলেন, তাদের মাঝে আর কেউ অবশিষ্ট নেই। আল্লাহ বলবেন, পুনরায় যাও, যার অন্তরে এক দীনার পরিমাণও ঈমান অবশিষ্ট পাবে তাকেও উদ্ধার করে আন। তখন তারা আরো একদলকে উদ্ধার করে এনে বলবে, হে রব! অনুমতিপ্রাপ্তদের কাউকেও রেখে আসিনি। আল্লাহ বলবেন : আবার যাও, যার অন্তরে অর্ধ দীনার পরিমাণও ঈমান অবশিষ্ট পাবে তাকেও বের করে আন। তখন আবার এক বিরাট দলকে উদ্ধার করে এনে তারা বলবে, হে রব! যাদের আপনি উদ্ধার করতে বলেছিলেন তাদের কাউকে ছেড়ে আসিনি। আল্লাহ বলবেন : আবার যাও, যার অন্তরে অণু পরিমাণও ঈমান বিদ্যমান, তাকেও উদ্ধার করে আন। তখন আবারও এক বিরাট দলকে উদ্ধার করে এনে তারা বলবে, হে রব! যাদের কথা বলেছিলেন তাদের কাউকেও রেখে আসিনি। সহাবা আবূ সা’ঈদ আল খুদরী (রাঃ) বলেন, তোমরা যদি এ হাদীসের ব্যাপারে আমাকে সত্যবাদী মনে না কর তবে এর সমর্থনে নিম্নোক্ত আয়াতটি যদি চাও তবে তিলাওয়াত করতে পার : “আল্লাহ অণু পরিমাণও যুল্ম করেন না এবং অণু পরিমাণ নেক কাজ হলেও আল্লাহ তা দ্বিগুণ করে দেন এবং তাঁর নিকট হতে মহাপুরস্কার প্রদান করেন”— (সূরাহ আন্ নিসা ৪ : ৪০)। এরপর আল্লাহ তা’আলা বলবেন : ফেরেশতারা সুপারিশ করলেন, নাবীগণও সুপারিশ করলেন এবং মু’মিনরাও সুপারিশ করেছে, কেবলমাত্র আরহামুর রাহিমীন-পরম দয়াময়ই রয়ে গেছেন। এরপর তিনি জাহান্নাম থেকে এক মুঠো তুলে আনবেন, ফলে এমন একদল লোক মুক্তি পাবে যারা কখনো কোন সৎকর্ম করেনি এবং আগুনে জ্বলে লাল হয়ে গেছে। পরে তাদেরকে জান্নাতের প্রবেশ মুখের ‘নাহরুল হায়াতে’ ফেলে দেয়া হবে। তারা এতে এমনভাবে সতেজ হয়ে উঠবে, যেমনভাবে শস্য অঙ্কুর স্রোতবাহিত পানি ভেজা উর্বর জমিতে সতেজ হয়ে উঠে। (রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেনঃ) তোমরা কি কোন বৃক্ষ কিংবা পাথরের আড়াল কোন শস্যদানা অঙ্কুরিত হতে দেখনি? যেগুলো সূর্য কিরণের মাঝে থাকে সেগুলো হলদে ও সবুজ রূপ ধারণ করে আর যেগুলো ছায়াযুক্ত স্থানে থাকে সেগুলো সাদা হয়ে যায়। সহাবাগণ বললেনঃ হে আল্লাহর রসূল! মনে হয় আপনি যেন গ্রামাঞ্চলে পশু চরিয়েছেন। রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেনঃ এরপর তারা নহর থেকে মুক্তার ন্যায় ঝকঝকে অবস্থায় উঠে আসবে এবং তাদের গ্রীবাদেশে মোহরাঙ্কিত থাকবে যা দেখে জান্নাতীগণ তাদের চিনতে পারবেন। এরা হর ‘উতাকাউল্লাহ’-আল্লাহর পক্ষ থেকে মুক্তিপ্রাপ্ত। আল্লাহ তা’আলা সৎ ‘আমাল ব্যতীতই তাদেরকে জান্নাতে দাখিল করবেন। এরপর আল্লাহ তাদেরকে লক্ষ্য করে বলবেন : যাও, জান্নাতে প্রবেশ কর। আর যা কিছু দেখছ সব কিছু তোমাদেরই। তারা বলবে, হে রব! আপনি আমাদেরকে এত দিয়েছেন যা সৃষ্টজগতের কাউকে দেননি। আল্লাহ বলবেন : তোমাদের জন্য আমার নিকট এর চেয়েও উত্তম বস্তু আছে। তারা বলবে, কী সে উত্তম বস্তু? আল্লাহ বলবেন : সে হলো আমার সন্তুষ্টি। এরপর আর কখনো তোমাদের উপর অসন্তুষ্ট হবো না। ইমাম মুসলিম (রহঃ) বলেনঃ শাফা’আত সম্পর্কীয় এ হাদীসটি আমি ‘ঈসা ইবনু হাম্মাদ যুগবাতুর মিসরী-এর নিকট পাঠ করতে বললাম, আপনি লায়স ইবনু সা’দ থেকে নিজে এ হাদীসটি শুনেছেন? আমি কি আপনার পক্ষ থেকে এ হাদীসটি বর্ণনা করতে পারি? তিনি উত্তর করলেন, হ্যাঁ! এরপর আমি ‘ঈসা ইবনু হাম্মাদকে হাদীসটি এ সূত্রে শুনিয়েছি যে, ‘ঈসা ইবনু হাম্মাদ (রহঃ) আবূ সা’ঈদ আল খুদরী (রাঃ)-এর সূত্রে বর্ণনা করেছেন। তিনি বলেন, আমরা রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে বললাম, হে আল্লাহর রসূল! আমরা কি আমাদের প্রভুকে দেখতে পাবো? রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) উত্তর করলেন : মেঘমুক্ত আকাশে সূর্য দেখতে ভীড়ের কারণে তোমাদের কি কোন অসুবিধা হয়? আমরা বললাম, না .....। এভাবে হাদীসটির শেষ পর্যন্ত তুলে ধরলাম। এ হাদীসটি হাফিয ইবনু মাইসারাহ্ বর্ণিত হাদিসেরই অনুরূপ। তিনি (আরবী) এ অংশটুকুর পর (আরবী) অর্থাৎ তাদের বলা হবে : তোমাদের জন্য রয়েছে যা তোমরা দেখছ। আবূ সা’ঈদ আল খুদরী (রাঃ) বলেন, আমার কাছে রিওয়ায়াতে পৌঁছেছে যে, ‘জাস্র’ (পুল) চুল অপেক্ষা অধিক সূক্ষ্ম ও তরবারি অপেক্ষা অধিক তীক্ষ্ণ। তাছাড়া লায়সের হাদীসে (আরবী) বাক্যটির পরবর্তী অংশগুলো উল্লেখ নেই। (ই.ফা. ৩৫১; ই.সে. ৩৬২)
وحدثني سويد بن سعيد، قال حدثني حفص بن ميسرة، عن زيد بن أسلم، عن عطاء بن يسار، عن أبي سعيد الخدري، أن ناسا، في زمن رسول الله صلى الله عليه وسلم قالوا يا رسول الله هل نرى ربنا يوم القيامة قال رسول الله صلى الله عليه وسلم " نعم " . قال " هل تضارون في رؤية الشمس بالظهيرة صحوا ليس معها سحاب وهل تضارون في رؤية القمر ليلة البدر صحوا ليس فيها سحاب " . قالوا لا يا رسول الله . قال " ما تضارون في رؤية الله تبارك وتعالى يوم القيامة إلا كما تضارون في رؤية أحدهما إذا كان يوم القيامة أذن مؤذن ليتبع كل أمة ما كانت تعبد . فلا يبقى أحد كان يعبد غير الله سبحانه من الأصنام والأنصاب إلا يتساقطون في النار حتى إذا لم يبق إلا من كان يعبد الله من بر وفاجر وغبر أهل الكتاب فيدعى اليهود فيقال لهم ما كنتم تعبدون قالوا كنا نعبد عزير ابن الله . فيقال كذبتم ما اتخذ الله من صاحبة ولا ولد فماذا تبغون قالوا عطشنا يا ربنا فاسقنا . فيشار إليهم ألا تردون فيحشرون إلى النار كأنها سراب يحطم بعضها بعضا فيتساقطون في النار . ثم يدعى النصارى فيقال لهم ما كنتم تعبدون قالوا كنا نعبد المسيح ابن الله . فيقال لهم كذبتم . ما اتخذ الله من صاحبة ولا ولد . فيقال لهم ماذا تبغون فيقولون عطشنا يا ربنا فاسقنا . - قال - فيشار إليهم ألا تردون فيحشرون إلى جهنم كأنها سراب يحطم بعضها بعضا فيتساقطون في النار حتى إذا لم يبق إلا من كان يعبد الله تعالى من بر وفاجر أتاهم رب العالمين سبحانه وتعالى في أدنى صورة من التي رأوه فيها . قال فما تنتظرون تتبع كل أمة ما كانت تعبد . قالوا يا ربنا فارقنا الناس في الدنيا أفقر ما كنا إليهم ولم نصاحبهم . فيقول أنا ربكم . فيقولون نعوذ بالله منك لا نشرك بالله شيئا - مرتين أو ثلاثا - حتى إن بعضهم ليكاد أن ينقلب . فيقول هل بينكم وبينه آية فتعرفونه بها فيقولون نعم . فيكشف عن ساق فلا يبقى من كان يسجد لله من تلقاء نفسه إلا أذن الله له بالسجود ولا يبقى من كان يسجد اتقاء ورياء إلا جعل الله ظهره طبقة واحدة كلما أراد أن يسجد خر على قفاه . ثم يرفعون رءوسهم وقد تحول في صورته التي رأوه فيها أول مرة فقال أنا ربكم . فيقولون أنت ربنا . ثم يضرب الجسر على جهنم وتحل الشفاعة ويقولون اللهم سلم سلم " . قيل يا رسول الله وما الجسر قال " دحض مزلة . فيه خطاطيف وكلاليب وحسك تكون بنجد فيها شويكة يقال لها السعدان فيمر المؤمنون كطرف العين وكالبرق وكالريح وكالطير وكأجاويد الخيل والركاب فناج مسلم ومخدوش مرسل ومكدوس في نار جهنم . حتى إذا خلص المؤمنون من النار فوالذي نفسي بيده ما منكم من أحد بأشد مناشدة لله في استقصاء الحق من المؤمنين لله يوم القيامة لإخوانهم الذين في النار يقولون ربنا كانوا يصومون معنا ويصلون ويحجون . فيقال لهم أخرجوا من عرفتم . فتحرم صورهم على النار فيخرجون خلقا كثيرا قد أخذت النار إلى نصف ساقيه وإلى ركبتيه ثم يقولون ربنا ما بقي فيها أحد ممن أمرتنا به . فيقول ارجعوا فمن وجدتم في قلبه مثقال دينار من خير فأخرجوه . فيخرجون خلقا كثيرا ثم يقولون ربنا لم نذر فيها أحدا ممن أمرتنا . ثم يقول ارجعوا فمن وجدتم في قلبه مثقال نصف دينار من خير فأخرجوه . فيخرجون خلقا كثيرا ثم يقولون ربنا لم نذر فيها ممن أمرتنا أحدا . ثم يقول ارجعوا فمن وجدتم في قلبه مثقال ذرة من خير فأخرجوه . فيخرجون خلقا كثيرا ثم يقولون ربنا لم نذر فيها خيرا " . وكان أبو سعيد الخدري يقول إن لم تصدقوني بهذا الحديث فاقرءوا إن شئتم { إن الله لا يظلم مثقال ذرة وإن تك حسنة يضاعفها ويؤت من لدنه أجرا عظيما} " فيقول الله عز وجل شفعت الملائكة وشفع النبيون وشفع المؤمنون ولم يبق إلا أرحم الراحمين فيقبض قبضة من النار فيخرج منها قوما لم يعملوا خيرا قط قد عادوا حمما فيلقيهم في نهر في أفواه الجنة يقال له نهر الحياة فيخرجون كما تخرج الحبة في حميل السيل ألا ترونها تكون إلى الحجر أو إلى الشجر ما يكون إلى الشمس أصيفر وأخيضر وما يكون منها إلى الظل يكون أبيض " . فقالوا يا رسول الله كأنك كنت ترعى بالبادية قال " فيخرجون كاللؤلؤ في رقابهم الخواتم يعرفهم أهل الجنة هؤلاء عتقاء الله الذين أدخلهم الله الجنة بغير عمل عملوه ولا خير قدموه ثم يقول ادخلوا الجنة فما رأيتموه فهو لكم . فيقولون ربنا أعطيتنا ما لم تعط أحدا من العالمين . فيقول لكم عندي أفضل من هذا فيقولون يا ربنا أى شىء أفضل من هذا . فيقول رضاى فلا أسخط عليكم بعده أبدا " .
সহিহ মুসলিম > শাফা’আত ও তাওহীদবাদীদের জাহান্নাম থেকে উদ্ধার লাভের প্রমাণ
সহিহ মুসলিম ৩৪৫
وحدثني هارون بن سعيد الأيلي، حدثنا ابن وهب، قال أخبرني مالك بن أنس، عن عمرو بن يحيى بن عمارة، قال حدثني أبي، عن أبي سعيد الخدري، أن رسول الله صلى الله عليه وسلم قال " يدخل الله أهل الجنة الجنة يدخل من يشاء برحمته ويدخل أهل النار النار ثم يقول انظروا من وجدتم في قلبه مثقال حبة من خردل من إيمان فأخرجوه . فيخرجون منها حمما قد امتحشوا . فيلقون في نهر الحياة أو الحيا فينبتون فيه كما تنبت الحبة إلى جانب السيل ألم تروها كيف تخرج صفراء ملتوية " .
আবূ সা’ঈদ আল খুদরী (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ
রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেনঃ জান্নাতীদেরকে আল্লাহ তা’আলা জান্নাতে প্রবেশ করাবেন। তাঁর রহমাতেই তিনি যাকে ইচ্ছা জান্নাতে প্রবেশ করাবেন। আর জাহান্নামীদেরকে জাহান্নামে প্রবেশ করাবেন। তারপর (ফেরেশতাদেরকে) বলবেন : যার অন্তরে সরিষা দানা পরিমাণও ঈমান দেখতে পাবে তাকেও জাহান্নাম থেকে উদ্ধার করে আনবে এবং তারা এমন কিছু লোককে সেখান থেকে বের করে আনবে, যারা আগুনে জ্বলে কালো হয়ে গেছে এবং ‘হায়াত’ বা ‘হায়া’ নামক নহরে নিক্ষেপ করবে। তখন তারা এতে এমন সতেজ হয়ে উঠবে যেমনভাবে শস্য অঙ্কুর স্রোতবাহিত পলিতে সতেজ হয়ে উঠে। তোমরা কি দেখনি, কত সুন্দররূপে সে শস্যদানা কেমনভাবে হলদে মাথা মোড়ানো অবস্থায় অঙ্কুরিত হয়? (ই.ফা. ৩৫৩; ই.সে. ৩৬৪)
আবূ সা’ঈদ আল খুদরী (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ
রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেনঃ জান্নাতীদেরকে আল্লাহ তা’আলা জান্নাতে প্রবেশ করাবেন। তাঁর রহমাতেই তিনি যাকে ইচ্ছা জান্নাতে প্রবেশ করাবেন। আর জাহান্নামীদেরকে জাহান্নামে প্রবেশ করাবেন। তারপর (ফেরেশতাদেরকে) বলবেন : যার অন্তরে সরিষা দানা পরিমাণও ঈমান দেখতে পাবে তাকেও জাহান্নাম থেকে উদ্ধার করে আনবে এবং তারা এমন কিছু লোককে সেখান থেকে বের করে আনবে, যারা আগুনে জ্বলে কালো হয়ে গেছে এবং ‘হায়াত’ বা ‘হায়া’ নামক নহরে নিক্ষেপ করবে। তখন তারা এতে এমন সতেজ হয়ে উঠবে যেমনভাবে শস্য অঙ্কুর স্রোতবাহিত পলিতে সতেজ হয়ে উঠে। তোমরা কি দেখনি, কত সুন্দররূপে সে শস্যদানা কেমনভাবে হলদে মাথা মোড়ানো অবস্থায় অঙ্কুরিত হয়? (ই.ফা. ৩৫৩; ই.সে. ৩৬৪)
وحدثني هارون بن سعيد الأيلي، حدثنا ابن وهب، قال أخبرني مالك بن أنس، عن عمرو بن يحيى بن عمارة، قال حدثني أبي، عن أبي سعيد الخدري، أن رسول الله صلى الله عليه وسلم قال " يدخل الله أهل الجنة الجنة يدخل من يشاء برحمته ويدخل أهل النار النار ثم يقول انظروا من وجدتم في قلبه مثقال حبة من خردل من إيمان فأخرجوه . فيخرجون منها حمما قد امتحشوا . فيلقون في نهر الحياة أو الحيا فينبتون فيه كما تنبت الحبة إلى جانب السيل ألم تروها كيف تخرج صفراء ملتوية " .
সহিহ মুসলিম ৩৪৮
وحدثناه محمد بن المثنى، وابن، بشار قالا حدثنا محمد بن جعفر، حدثنا شعبة، عن أبي مسلمة، قال سمعت أبا نضرة، عن أبي سعيد الخدري، عن النبي صلى الله عليه وسلم بمثله إلى قوله " في حميل السيل " . ولم يذكر ما بعده .
আবূ সা’ঈদ আল খুদরী (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ
তিনি রসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) থেকে ‘ফী হামীলিস সাইলি’ কথাটি পর্যন্ত বর্ণনা করেছেন। তবে পরবর্তী অংশটুকু উল্লেখ করেননি। (ই.ফা. ৩৫৬; ই.সে. ৩৬৭)
আবূ সা’ঈদ আল খুদরী (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ
তিনি রসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) থেকে ‘ফী হামীলিস সাইলি’ কথাটি পর্যন্ত বর্ণনা করেছেন। তবে পরবর্তী অংশটুকু উল্লেখ করেননি। (ই.ফা. ৩৫৬; ই.সে. ৩৬৭)
وحدثناه محمد بن المثنى، وابن، بشار قالا حدثنا محمد بن جعفر، حدثنا شعبة، عن أبي مسلمة، قال سمعت أبا نضرة، عن أبي سعيد الخدري، عن النبي صلى الله عليه وسلم بمثله إلى قوله " في حميل السيل " . ولم يذكر ما بعده .
সহিহ মুসলিম ৩৪৬
وحدثنا أبو بكر بن أبي شيبة، حدثنا عفان، حدثنا وهيب، ح وحدثنا حجاج بن الشاعر، حدثنا عمرو بن عون، أخبرنا خالد، كلاهما عن عمرو بن يحيى، بهذا الإسناد وقالا فيلقون في نهر يقال له الحياة . ولم يشكا . وفي حديث خالد كما تنبت الغثاءة في جانب السيل . وفي حديث وهيب كما تنبت الحبة في حمئة أو حميلة السيل .
উহায়ব ও খালিদ উভয়ে ‘আম্র ইবনু ইয়াহ্ইয়ার সূত্রে থেকে বর্নিতঃ
উপরের হাদীসের অনুরূপ হাদীস বর্ণনা করেছেন। নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেনঃ অতঃপর তাদেরকে (জাহান্নাম থেকে সদ্য মুক্তিপ্রাপ্ত লোকদের) ‘হায়াত’ নামক নহরে ফেলে দেয়া হবে। খালিদের বর্ণনায় আছে, প্লাবনে সিক্ত মাটিতে বীজ যেমন অঙ্কুরিত হয়ে উঠে। উহায়বের বর্ণনায় রয়েছে : যেমন বীজ আপনা আপনি তরতাজা হয়ে ওঠে পানির স্রোতের কিনারায় কাদা মাটির মধ্যে। (ই.ফা. ৩৫৪; ই.সে. ৩৬৫)
উহায়ব ও খালিদ উভয়ে ‘আম্র ইবনু ইয়াহ্ইয়ার সূত্রে থেকে বর্নিতঃ
উপরের হাদীসের অনুরূপ হাদীস বর্ণনা করেছেন। নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেনঃ অতঃপর তাদেরকে (জাহান্নাম থেকে সদ্য মুক্তিপ্রাপ্ত লোকদের) ‘হায়াত’ নামক নহরে ফেলে দেয়া হবে। খালিদের বর্ণনায় আছে, প্লাবনে সিক্ত মাটিতে বীজ যেমন অঙ্কুরিত হয়ে উঠে। উহায়বের বর্ণনায় রয়েছে : যেমন বীজ আপনা আপনি তরতাজা হয়ে ওঠে পানির স্রোতের কিনারায় কাদা মাটির মধ্যে। (ই.ফা. ৩৫৪; ই.সে. ৩৬৫)
وحدثنا أبو بكر بن أبي شيبة، حدثنا عفان، حدثنا وهيب، ح وحدثنا حجاج بن الشاعر، حدثنا عمرو بن عون، أخبرنا خالد، كلاهما عن عمرو بن يحيى، بهذا الإسناد وقالا فيلقون في نهر يقال له الحياة . ولم يشكا . وفي حديث خالد كما تنبت الغثاءة في جانب السيل . وفي حديث وهيب كما تنبت الحبة في حمئة أو حميلة السيل .
সহিহ মুসলিম ৩৪৭
وحدثني نصر بن علي الجهضمي، حدثنا بشر، - يعني ابن المفضل - عن أبي مسلمة، عن أبي نضرة، عن أبي سعيد، قال قال رسول الله صلى الله عليه وسلم " أما أهل النار الذين هم أهلها فإنهم لا يموتون فيها ولا يحيون ولكن ناس أصابتهم النار بذنوبهم - أو قال بخطاياهم - فأماتهم إماتة حتى إذا كانوا فحما أذن بالشفاعة فجيء بهم ضبائر ضبائر فبثوا على أنهار الجنة ثم قيل يا أهل الجنة أفيضوا عليهم . فينبتون نبات الحبة تكون في حميل السيل " . فقال رجل من القوم كأن رسول الله صلى الله عليه وسلم قد كان بالبادية .
আবূ সা‘ঈদ আল খুদরী (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ
রসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেনঃ জাহান্নামীদের মধ্যে যারা প্রকৃত জাহান্নামী তাদের মৃত্যুও ঘটবে না এবং তারা বেঁচেও থাকবে না। তবে তন্মধ্যে তাদের এমন কতিপয় লোকও থাকবে যারা গুনাহের দায়ে জাহান্নামে নিক্ষিপ্ত হয়েছে। এরপর আল্লাহ তা‘আলা (তাদের উপর পতিত ‘আযাবের নির্ধারিত সময় অতিক্রান্ত হয়ে গেলে) তাদেরকে কিছুকাল নির্জীব করে রেখে দিবেন। অবশেষে তারা পুড়ে কয়লার মতো হয়ে যাবে। এ সময়ে আল্লাহর পক্ষ থেকে শাফা‘আতের অনুমতি হবে। তখন এদেরকে দলে দলে নিয়ে আসা হবে এবং জান্নাতের নহরগুলোতে ছড়িয়ে দেয়া হবে। পরে বলা হবে, হে জান্নাতীরা! তোমরা এদের গায়ে পানি ঢেলে দাও। ফলতঃ স্রোতবাহিত পলিতে গজিয়ে উঠা শস্য দানার ন্যায় তারা সজীব হয়ে উঠবে। উপস্থিতদের মধ্যে একজন বললেন, রসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) যেন এককালে গ্রামে অবস্থান করতেন। (ই.ফা. ৩৫৫; ই.সে. ৩৬৬)
আবূ সা‘ঈদ আল খুদরী (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ
রসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেনঃ জাহান্নামীদের মধ্যে যারা প্রকৃত জাহান্নামী তাদের মৃত্যুও ঘটবে না এবং তারা বেঁচেও থাকবে না। তবে তন্মধ্যে তাদের এমন কতিপয় লোকও থাকবে যারা গুনাহের দায়ে জাহান্নামে নিক্ষিপ্ত হয়েছে। এরপর আল্লাহ তা‘আলা (তাদের উপর পতিত ‘আযাবের নির্ধারিত সময় অতিক্রান্ত হয়ে গেলে) তাদেরকে কিছুকাল নির্জীব করে রেখে দিবেন। অবশেষে তারা পুড়ে কয়লার মতো হয়ে যাবে। এ সময়ে আল্লাহর পক্ষ থেকে শাফা‘আতের অনুমতি হবে। তখন এদেরকে দলে দলে নিয়ে আসা হবে এবং জান্নাতের নহরগুলোতে ছড়িয়ে দেয়া হবে। পরে বলা হবে, হে জান্নাতীরা! তোমরা এদের গায়ে পানি ঢেলে দাও। ফলতঃ স্রোতবাহিত পলিতে গজিয়ে উঠা শস্য দানার ন্যায় তারা সজীব হয়ে উঠবে। উপস্থিতদের মধ্যে একজন বললেন, রসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) যেন এককালে গ্রামে অবস্থান করতেন। (ই.ফা. ৩৫৫; ই.সে. ৩৬৬)
وحدثني نصر بن علي الجهضمي، حدثنا بشر، - يعني ابن المفضل - عن أبي مسلمة، عن أبي نضرة، عن أبي سعيد، قال قال رسول الله صلى الله عليه وسلم " أما أهل النار الذين هم أهلها فإنهم لا يموتون فيها ولا يحيون ولكن ناس أصابتهم النار بذنوبهم - أو قال بخطاياهم - فأماتهم إماتة حتى إذا كانوا فحما أذن بالشفاعة فجيء بهم ضبائر ضبائر فبثوا على أنهار الجنة ثم قيل يا أهل الجنة أفيضوا عليهم . فينبتون نبات الحبة تكون في حميل السيل " . فقال رجل من القوم كأن رسول الله صلى الله عليه وسلم قد كان بالبادية .
সহিহ মুসলিম > জাহান্নাম থেকে মুক্তিপ্রাপ্ত সর্বশেষ ব্যক্তি
সহিহ মুসলিম ৩৪৯
حدثنا عثمان بن أبي شيبة، وإسحاق بن إبراهيم الحنظلي، كلاهما عن جرير، قال عثمان حدثنا جرير، عن منصور، عن إبراهيم، عن عبيدة، عن عبد الله بن مسعود، قال قال رسول الله صلى الله عليه وسلم " إني لأعلم آخر أهل النار خروجا منها وآخر أهل الجنة دخولا الجنة رجل يخرج من النار حبوا فيقول الله تبارك وتعالى له اذهب فادخل الجنة فيأتيها فيخيل إليه أنها ملأى فيرجع فيقول يا رب وجدتها ملأى . فيقول الله تبارك وتعالى له اذهب فادخل الجنة - قال - فيأتيها فيخيل إليه أنها ملأى فيرجع فيقول يا رب وجدتها ملأى فيقول الله له اذهب فادخل الجنة فإن لك مثل الدنيا وعشرة أمثالها أو إن لك عشرة أمثال الدنيا - قال - فيقول أتسخر بي - أو أتضحك بي - وأنت الملك " قال لقد رأيت رسول الله صلى الله عليه وسلم ضحك حتى بدت نواجذه . قال فكان يقال ذاك أدنى أهل الجنة منزلة .
‘আবদুল্লাহ ইবনু মাস’ঊদ (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ
রসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেনঃ জাহান্নাম থেকে সর্বশেষ মুক্তিপ্রাপ্ত ও জান্নাতে সর্বশেষ প্রবেশকারী লোকটিকে আমি অবশ্যই জানি। সে হামাগুড়ি দিয়ে বা হেচঁড়িয়ে হেচঁড়িয়ে জাহান্নাম থেকে বেরিয়ে আসবে। আল্লাহ তা‘আলা তাকে বলবেন : যাও জান্নাতে প্রবেশ করো। সে সেখানে আসবে। আর তার ধারণা হবে যে, তাতো পূর্ণ হয়ে গেছে। সেখানে কোন স্থান নেই তাই সে ফিরে এসে বলবে, হে প্রভু! আমিতো তা পরিপূর্ণ পেয়েছি। আল্লাহ তা‘আলা আবার তাকে বলবেন : যাও জান্নাতে প্রবেশ করো। তিনি (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেনঃ এ ব্যক্তি সেখানে আসলে তার ধারণা হবে যে, তাতো পরিপূর্ণ হয়ে গেছে। সে ফিরে এসে বলবে, হে প্রভু! আমিতো তা পূর্ণ পেয়েছি। আল্লাহ তাকে পুনরায় বলবেন : যাও জান্নাতে প্রবেশ করো। তোমাকে দুনিয়ার মতো এবং তার দশগুণ দেয়া হলো। অথবা তিনি বলেছেন, তোমাকে পৃথিবীর দশগুণ দেয়া হলো। অতঃপর সে বলবে, আপনি কি আমার সাথে ঠাট্টা করছেন? অথবা সে বলবে, এ সময় আমি রসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে এমনভাবে হাসতে দেখেছি যে, তাঁর মাড়ির দাঁত পর্যন্ত প্রকাশ হয়ে পড়েছিল। তিনি বলেনঃ এ হবে সবচেয়ে নিম্নশ্রেণীর জান্নাতী। (ই.ফা.৩৫৭; ই.সে. ৩৬৮)
‘আবদুল্লাহ ইবনু মাস’ঊদ (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ
রসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেনঃ জাহান্নাম থেকে সর্বশেষ মুক্তিপ্রাপ্ত ও জান্নাতে সর্বশেষ প্রবেশকারী লোকটিকে আমি অবশ্যই জানি। সে হামাগুড়ি দিয়ে বা হেচঁড়িয়ে হেচঁড়িয়ে জাহান্নাম থেকে বেরিয়ে আসবে। আল্লাহ তা‘আলা তাকে বলবেন : যাও জান্নাতে প্রবেশ করো। সে সেখানে আসবে। আর তার ধারণা হবে যে, তাতো পূর্ণ হয়ে গেছে। সেখানে কোন স্থান নেই তাই সে ফিরে এসে বলবে, হে প্রভু! আমিতো তা পরিপূর্ণ পেয়েছি। আল্লাহ তা‘আলা আবার তাকে বলবেন : যাও জান্নাতে প্রবেশ করো। তিনি (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেনঃ এ ব্যক্তি সেখানে আসলে তার ধারণা হবে যে, তাতো পরিপূর্ণ হয়ে গেছে। সে ফিরে এসে বলবে, হে প্রভু! আমিতো তা পূর্ণ পেয়েছি। আল্লাহ তাকে পুনরায় বলবেন : যাও জান্নাতে প্রবেশ করো। তোমাকে দুনিয়ার মতো এবং তার দশগুণ দেয়া হলো। অথবা তিনি বলেছেন, তোমাকে পৃথিবীর দশগুণ দেয়া হলো। অতঃপর সে বলবে, আপনি কি আমার সাথে ঠাট্টা করছেন? অথবা সে বলবে, এ সময় আমি রসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে এমনভাবে হাসতে দেখেছি যে, তাঁর মাড়ির দাঁত পর্যন্ত প্রকাশ হয়ে পড়েছিল। তিনি বলেনঃ এ হবে সবচেয়ে নিম্নশ্রেণীর জান্নাতী। (ই.ফা.৩৫৭; ই.সে. ৩৬৮)
حدثنا عثمان بن أبي شيبة، وإسحاق بن إبراهيم الحنظلي، كلاهما عن جرير، قال عثمان حدثنا جرير، عن منصور، عن إبراهيم، عن عبيدة، عن عبد الله بن مسعود، قال قال رسول الله صلى الله عليه وسلم " إني لأعلم آخر أهل النار خروجا منها وآخر أهل الجنة دخولا الجنة رجل يخرج من النار حبوا فيقول الله تبارك وتعالى له اذهب فادخل الجنة فيأتيها فيخيل إليه أنها ملأى فيرجع فيقول يا رب وجدتها ملأى . فيقول الله تبارك وتعالى له اذهب فادخل الجنة - قال - فيأتيها فيخيل إليه أنها ملأى فيرجع فيقول يا رب وجدتها ملأى فيقول الله له اذهب فادخل الجنة فإن لك مثل الدنيا وعشرة أمثالها أو إن لك عشرة أمثال الدنيا - قال - فيقول أتسخر بي - أو أتضحك بي - وأنت الملك " قال لقد رأيت رسول الله صلى الله عليه وسلم ضحك حتى بدت نواجذه . قال فكان يقال ذاك أدنى أهل الجنة منزلة .
সহিহ মুসলিম ৩৫০
وحدثنا أبو بكر بن أبي شيبة، وأبو كريب - واللفظ لأبي كريب - قالا حدثنا أبو معاوية، عن الأعمش، عن إبراهيم، عن عبيدة، عن عبد الله، قال قال رسول الله صلى الله عليه وسلم " إني لأعرف آخر أهل النار خروجا من النار رجل يخرج منها زحفا فيقال له انطلق فادخل الجنة - قال - فيذهب فيدخل الجنة فيجد الناس قد أخذوا المنازل فيقال له أتذكر الزمان الذي كنت فيه فيقول نعم . فيقال له تمن . فيتمنى فيقال له لك الذي تمنيت وعشرة أضعاف الدنيا - قال - فيقول أتسخر بي وأنت الملك " قال فلقد رأيت رسول الله صلى الله عليه وسلم ضحك حتى بدت نواجذه .
‘আবদুল্লাহ (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ
রসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেনঃ জাহান্নাম থেকে সর্বশেষ বের হয়ে আসা লোকটিকে অবশ্যই আমি জানি। সে হেচঁড়িয়ে হেচঁড়িয়ে জাহান্নাম থেকে বেরিয়ে আসবে। তারপর তাকে বলা হবে, যাও জান্নাতে প্রবেশ করো। সে গিয়ে জান্নাতে প্রবেশ করে লোকদেরকে দেখতে পাবে যে, তারা পূর্বেই জান্নাতের সকল স্থান দখল করে রেখেছে। তখন তাকে জিজ্ঞেস করা হবে, তোমার কি পূর্বকালের কথা (জাহান্নামের) স্মরণ আছে? সে বলবে, হ্যাঁ! তাকে বলা হবে : তুমি কামনা করো। সে তখন কামনা করবে। তখন তাকে বলা হবে, যাও, তোমার আশা পূর্ণ করলাম। সেই সাথে পৃথিবীর আরও দশগুণ বেশি প্রদান করলাম। লোকটি বলবে, আপনি সর্বশক্তিমান প্রভু! আর আপনি আমার সাথে তামাশা করছেন? সহাবা বলেন, এ কথাটি বলে রসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) এত হাসলেন যে, তাঁর মাড়ির দাঁত প্রকাশিত হয়ে গেল। (ই.ফা. ৩৫৮; ই.সে.৩৬৯)
‘আবদুল্লাহ (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ
রসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেনঃ জাহান্নাম থেকে সর্বশেষ বের হয়ে আসা লোকটিকে অবশ্যই আমি জানি। সে হেচঁড়িয়ে হেচঁড়িয়ে জাহান্নাম থেকে বেরিয়ে আসবে। তারপর তাকে বলা হবে, যাও জান্নাতে প্রবেশ করো। সে গিয়ে জান্নাতে প্রবেশ করে লোকদেরকে দেখতে পাবে যে, তারা পূর্বেই জান্নাতের সকল স্থান দখল করে রেখেছে। তখন তাকে জিজ্ঞেস করা হবে, তোমার কি পূর্বকালের কথা (জাহান্নামের) স্মরণ আছে? সে বলবে, হ্যাঁ! তাকে বলা হবে : তুমি কামনা করো। সে তখন কামনা করবে। তখন তাকে বলা হবে, যাও, তোমার আশা পূর্ণ করলাম। সেই সাথে পৃথিবীর আরও দশগুণ বেশি প্রদান করলাম। লোকটি বলবে, আপনি সর্বশক্তিমান প্রভু! আর আপনি আমার সাথে তামাশা করছেন? সহাবা বলেন, এ কথাটি বলে রসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) এত হাসলেন যে, তাঁর মাড়ির দাঁত প্রকাশিত হয়ে গেল। (ই.ফা. ৩৫৮; ই.সে.৩৬৯)
وحدثنا أبو بكر بن أبي شيبة، وأبو كريب - واللفظ لأبي كريب - قالا حدثنا أبو معاوية، عن الأعمش، عن إبراهيم، عن عبيدة، عن عبد الله، قال قال رسول الله صلى الله عليه وسلم " إني لأعرف آخر أهل النار خروجا من النار رجل يخرج منها زحفا فيقال له انطلق فادخل الجنة - قال - فيذهب فيدخل الجنة فيجد الناس قد أخذوا المنازل فيقال له أتذكر الزمان الذي كنت فيه فيقول نعم . فيقال له تمن . فيتمنى فيقال له لك الذي تمنيت وعشرة أضعاف الدنيا - قال - فيقول أتسخر بي وأنت الملك " قال فلقد رأيت رسول الله صلى الله عليه وسلم ضحك حتى بدت نواجذه .
সহিহ মুসলিম ৩৫১
حدثنا أبو بكر بن أبي شيبة، حدثنا عفان بن مسلم، حدثنا حماد بن سلمة، حدثنا ثابت، عن أنس، عن ابن مسعود، أن رسول الله صلى الله عليه وسلم قال " آخر من يدخل الجنة رجل فهو يمشي مرة ويكبو مرة وتسفعه النار مرة فإذا ما جاوزها التفت إليها فقال تبارك الذي نجاني منك لقد أعطاني الله شيئا ما أعطاه أحدا من الأولين والآخرين . فترفع له شجرة فيقول أى رب أدنني من هذه الشجرة فلأستظل بظلها وأشرب من مائها . فيقول الله عز وجل يا ابن آدم لعلي إن أعطيتكها سألتني غيرها . فيقول لا يا رب . ويعاهده أن لا يسأله غيرها وربه يعذره لأنه يرى ما لا صبر له عليه فيدنيه منها فيستظل بظلها ويشرب من مائها ثم ترفع له شجرة هي أحسن من الأولى فيقول أى رب أدنني من هذه لأشرب من مائها وأستظل بظلها لا أسألك غيرها . فيقول يا ابن آدم ألم تعاهدني أن لا تسألني غيرها فيقول لعلي إن أدنيتك منها تسألني غيرها . فيعاهده أن لا يسأله غيرها وربه يعذره لأنه يرى ما لا صبر له عليه فيدنيه منها فيستظل بظلها ويشرب من مائها . ثم ترفع له شجرة عند باب الجنة هي أحسن من الأوليين . فيقول أى رب أدنني من هذه لأستظل بظلها وأشرب من مائها لا أسألك غيرها . فيقول يا ابن آدم ألم تعاهدني أن لا تسألني غيرها قال بلى يا رب هذه لا أسألك غيرها . وربه يعذره لأنه يرى ما لا صبر له عليها فيدنيه منها فإذا أدناه منها فيسمع أصوات أهل الجنة فيقول أى رب أدخلنيها . فيقول يا ابن آدم ما يصريني منك أيرضيك أن أعطيك الدنيا ومثلها معها قال يا رب أتستهزئ مني وأنت رب العالمين " . فضحك ابن مسعود فقال ألا تسألوني مم أضحك فقالوا مم تضحك قال هكذا ضحك رسول الله صلى الله عليه وسلم . فقالوا مم تضحك يا رسول الله قال " من ضحك رب العالمين حين قال أتستهزئ مني وأنت رب العالمين فيقول إني لا أستهزئ منك ولكني على ما أشاء قادر " .
ইবনু মাস’ঊদ (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ
রসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেনঃ সবার শেষে এক ব্যক্তি জান্নাতে প্রবেশ করবে। সে একবার সম্মুখে হাঁটবে আবার একবার উপুড় হয়ে পড়ে যাবে। জাহান্নামের আগুন তাকে ঝাপটা দিবে। অগ্নিসীমা অতিক্রম করার পর সে তার দিকে ফিরে দেখবে এবং বলবে, সে সত্ত্বা কত মহিমাময় যিনি আমাকে তোমা হতে নাযাত দিয়েছেন। তিনি আমাকে এমন জিনিস দান করেছেন যা পূর্বের বা পরের কাউকেও প্রদান করেননি। এরপর তার সামনে একটি গাছ উদ্ভাসিত হয়ে উঠবে; (যা দেখে) সে বলবে, হে প্রতিপালক! আমাকে এ গাছটির নিকটবর্তী করে দিন, যেন আমি এর ছায়া গ্রহণ করতে পারি এবং এর নীচে প্রবাহিত পানি থেকে পিপাসা নিবারণ করতে পারি। আল্লাহ তা‘আলা বলবেন : হে আদাম সন্তান! যদি আমি তোমাকে তা দান করি, তবে হয়ত তুমি আবার অন্য একটির প্রার্থনা করে বসবে। তখন সে বলবে, না, হে প্রভু! এর অতিরিক্ত কিছু চাইব না, বলে সে আল্লাহ তা’আলার নিকট কসম করবে এবং আল্লাহও তার ওযর গ্রহণ করবেন। কারণ সে এমন সব জিনিস প্রত্যক্ষ করেছে যা দেখে সবর করা যায় না। অতএব আল্লাহ তা‘আলা তাকে এ গাছটির নিকটবর্তী করে দিবেন। আর সে তার ছায়া গ্রহণ করবে ও পানি পান করবে। তারপর আবার একটি গাছ উদ্ভাসিত হয়ে উঠবে; যেটি প্রথমটি অপেক্ষা অধিক সুন্দর। তা দেখেই সে প্রার্থনা করবে, হে পরওয়ারদিগার! আমাকে এ গাছের নিকটবর্তী করে দিন, যেন আমি তা থেকে পানি পান করতে পারি এবং এর ছায়া গ্রহণ করতে পারি। এরপর আর কিছুর প্রার্থনা করবো না। আল্লাহ উত্তর দিবেন : আদম সন্তান! তুমি না আমার কসম করে বলেছিলে, আর কোনটির প্রার্থনা জানাবে না। তিনি আরো বলবেন : যদি আমি তোমাকে তার নিকটবর্তী করে দেই তবে তুমি হয়ত আরো কিছুর জন্য প্রার্থনা করবে। সে আর কিছু চাইবে না বলে কসম করবে। আল্লাহ তা‘আলা তার এ ওযর কবূল করবেন। কারণ সে এমন সব জিনিস প্রত্যক্ষ করেছে যা দেখে সবর করা যায় না। অতঃপর তিনি তাকে এর নিকটবর্তী করে দিবেন। আর সে এর ছায়া গ্রহণ করবে ও পানি পান করবে। এরপর আবার জান্নাতের দরজার কাছে আরেকটি গাছ উদ্ভাসিত হয়ে উঠবে, এটি পূর্বের দু’টি গাছ অপেক্ষাও সুন্দর। তাই সে বলে উঠবে, হে প্রতিপালক! আমাকে এ গাছের নিকটবর্তী করে দিন, যেন আমি এর ছায়া গ্রহণ করতে পারি ও পানি পান করতে পারি। আমি আর কিছু প্রার্থনা করবো না। আল্লাহ বলবেন : হে আদাম সন্তান! তুমি আমার নিকট আর কিছু চাইবে না বলে কসম করনি? সে উত্তরে বলবে, অবশ্যই করেছি। হে প্রভু! তবে এটিই। আর কিছু চাইবো না। আল্লাহ তার ওযর গ্রহণ করবেন, কারণ সে এমন সব জিনিস প্রত্যক্ষ করছে যা দেখে সবর করা যায় না। তিনি তাকে এর নিকটবর্তী করে দিবেন। যখন তাকে নিকটবর্তী করে দেয়া হবে! আর জান্নাতীদের কন্ঠস্বর তার কান ধ্বনিত হবে, তখন সে বলবে, হে প্রতিপালক! আমাকে জান্নাতে প্রবেশ করিয়ে দিন। আল্লাহ বলবেন : হে আদাম সন্তান! তোমার কামনা কোথায় গিয়ে শেষ হবে? আমি যদি তোমাকে পৃথিবী এবং তার সমপরিমাণ বস্তু দান করি তবে কি তুমি পরিতৃপ্ত হবে? সে বলবে, হে প্রতিপালক! আপনি ঠাট্রা বিদ্রূপ করছেন। আপনি তো সারা জাহানের প্রতিপালক। এ কথাটি বর্ণনা করতে গিয়ে বর্ণনাকারী ইবনে মাস’ঊদ (রাঃ) হেসে ফেললেন। আর বললেন, আমি কেন হাসছি তা তোমরা জিজ্ঞেস করবে না? তারা বলল, কেন হাসছেন? তখন তিনি বললেন, রসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-ও অনুরূপ হেসেছিলেন। সহাবাগণ জিজ্ঞেস করেছিলেন, হে আল্লাহর রসূল! কেন হাসছেন? রসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেনঃ এজন্য যে, ঐ ব্যক্তিটির এ উক্তি “আপনি আমার সাথে ঠাট্রা বিদ্রূপ করছেন, আপনিতো সারা জাহানের প্রতিপালক” শুনে আল্লাহ রব্বুল আলামীন হেসেছেন বলে আমি হাসলাম। যা হোক আল্লাহ তাকে বলবেন : তোমার সাথে ঠাট্টা করছি না। মনে রেখ, আমি আমার সকল ইচ্ছার উপর ক্ষমতাবান। (ই.ফা. ৩৫৯; ই.সে. ৩৭০)
ইবনু মাস’ঊদ (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ
রসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেনঃ সবার শেষে এক ব্যক্তি জান্নাতে প্রবেশ করবে। সে একবার সম্মুখে হাঁটবে আবার একবার উপুড় হয়ে পড়ে যাবে। জাহান্নামের আগুন তাকে ঝাপটা দিবে। অগ্নিসীমা অতিক্রম করার পর সে তার দিকে ফিরে দেখবে এবং বলবে, সে সত্ত্বা কত মহিমাময় যিনি আমাকে তোমা হতে নাযাত দিয়েছেন। তিনি আমাকে এমন জিনিস দান করেছেন যা পূর্বের বা পরের কাউকেও প্রদান করেননি। এরপর তার সামনে একটি গাছ উদ্ভাসিত হয়ে উঠবে; (যা দেখে) সে বলবে, হে প্রতিপালক! আমাকে এ গাছটির নিকটবর্তী করে দিন, যেন আমি এর ছায়া গ্রহণ করতে পারি এবং এর নীচে প্রবাহিত পানি থেকে পিপাসা নিবারণ করতে পারি। আল্লাহ তা‘আলা বলবেন : হে আদাম সন্তান! যদি আমি তোমাকে তা দান করি, তবে হয়ত তুমি আবার অন্য একটির প্রার্থনা করে বসবে। তখন সে বলবে, না, হে প্রভু! এর অতিরিক্ত কিছু চাইব না, বলে সে আল্লাহ তা’আলার নিকট কসম করবে এবং আল্লাহও তার ওযর গ্রহণ করবেন। কারণ সে এমন সব জিনিস প্রত্যক্ষ করেছে যা দেখে সবর করা যায় না। অতএব আল্লাহ তা‘আলা তাকে এ গাছটির নিকটবর্তী করে দিবেন। আর সে তার ছায়া গ্রহণ করবে ও পানি পান করবে। তারপর আবার একটি গাছ উদ্ভাসিত হয়ে উঠবে; যেটি প্রথমটি অপেক্ষা অধিক সুন্দর। তা দেখেই সে প্রার্থনা করবে, হে পরওয়ারদিগার! আমাকে এ গাছের নিকটবর্তী করে দিন, যেন আমি তা থেকে পানি পান করতে পারি এবং এর ছায়া গ্রহণ করতে পারি। এরপর আর কিছুর প্রার্থনা করবো না। আল্লাহ উত্তর দিবেন : আদম সন্তান! তুমি না আমার কসম করে বলেছিলে, আর কোনটির প্রার্থনা জানাবে না। তিনি আরো বলবেন : যদি আমি তোমাকে তার নিকটবর্তী করে দেই তবে তুমি হয়ত আরো কিছুর জন্য প্রার্থনা করবে। সে আর কিছু চাইবে না বলে কসম করবে। আল্লাহ তা‘আলা তার এ ওযর কবূল করবেন। কারণ সে এমন সব জিনিস প্রত্যক্ষ করেছে যা দেখে সবর করা যায় না। অতঃপর তিনি তাকে এর নিকটবর্তী করে দিবেন। আর সে এর ছায়া গ্রহণ করবে ও পানি পান করবে। এরপর আবার জান্নাতের দরজার কাছে আরেকটি গাছ উদ্ভাসিত হয়ে উঠবে, এটি পূর্বের দু’টি গাছ অপেক্ষাও সুন্দর। তাই সে বলে উঠবে, হে প্রতিপালক! আমাকে এ গাছের নিকটবর্তী করে দিন, যেন আমি এর ছায়া গ্রহণ করতে পারি ও পানি পান করতে পারি। আমি আর কিছু প্রার্থনা করবো না। আল্লাহ বলবেন : হে আদাম সন্তান! তুমি আমার নিকট আর কিছু চাইবে না বলে কসম করনি? সে উত্তরে বলবে, অবশ্যই করেছি। হে প্রভু! তবে এটিই। আর কিছু চাইবো না। আল্লাহ তার ওযর গ্রহণ করবেন, কারণ সে এমন সব জিনিস প্রত্যক্ষ করছে যা দেখে সবর করা যায় না। তিনি তাকে এর নিকটবর্তী করে দিবেন। যখন তাকে নিকটবর্তী করে দেয়া হবে! আর জান্নাতীদের কন্ঠস্বর তার কান ধ্বনিত হবে, তখন সে বলবে, হে প্রতিপালক! আমাকে জান্নাতে প্রবেশ করিয়ে দিন। আল্লাহ বলবেন : হে আদাম সন্তান! তোমার কামনা কোথায় গিয়ে শেষ হবে? আমি যদি তোমাকে পৃথিবী এবং তার সমপরিমাণ বস্তু দান করি তবে কি তুমি পরিতৃপ্ত হবে? সে বলবে, হে প্রতিপালক! আপনি ঠাট্রা বিদ্রূপ করছেন। আপনি তো সারা জাহানের প্রতিপালক। এ কথাটি বর্ণনা করতে গিয়ে বর্ণনাকারী ইবনে মাস’ঊদ (রাঃ) হেসে ফেললেন। আর বললেন, আমি কেন হাসছি তা তোমরা জিজ্ঞেস করবে না? তারা বলল, কেন হাসছেন? তখন তিনি বললেন, রসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-ও অনুরূপ হেসেছিলেন। সহাবাগণ জিজ্ঞেস করেছিলেন, হে আল্লাহর রসূল! কেন হাসছেন? রসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেনঃ এজন্য যে, ঐ ব্যক্তিটির এ উক্তি “আপনি আমার সাথে ঠাট্রা বিদ্রূপ করছেন, আপনিতো সারা জাহানের প্রতিপালক” শুনে আল্লাহ রব্বুল আলামীন হেসেছেন বলে আমি হাসলাম। যা হোক আল্লাহ তাকে বলবেন : তোমার সাথে ঠাট্টা করছি না। মনে রেখ, আমি আমার সকল ইচ্ছার উপর ক্ষমতাবান। (ই.ফা. ৩৫৯; ই.সে. ৩৭০)
حدثنا أبو بكر بن أبي شيبة، حدثنا عفان بن مسلم، حدثنا حماد بن سلمة، حدثنا ثابت، عن أنس، عن ابن مسعود، أن رسول الله صلى الله عليه وسلم قال " آخر من يدخل الجنة رجل فهو يمشي مرة ويكبو مرة وتسفعه النار مرة فإذا ما جاوزها التفت إليها فقال تبارك الذي نجاني منك لقد أعطاني الله شيئا ما أعطاه أحدا من الأولين والآخرين . فترفع له شجرة فيقول أى رب أدنني من هذه الشجرة فلأستظل بظلها وأشرب من مائها . فيقول الله عز وجل يا ابن آدم لعلي إن أعطيتكها سألتني غيرها . فيقول لا يا رب . ويعاهده أن لا يسأله غيرها وربه يعذره لأنه يرى ما لا صبر له عليه فيدنيه منها فيستظل بظلها ويشرب من مائها ثم ترفع له شجرة هي أحسن من الأولى فيقول أى رب أدنني من هذه لأشرب من مائها وأستظل بظلها لا أسألك غيرها . فيقول يا ابن آدم ألم تعاهدني أن لا تسألني غيرها فيقول لعلي إن أدنيتك منها تسألني غيرها . فيعاهده أن لا يسأله غيرها وربه يعذره لأنه يرى ما لا صبر له عليه فيدنيه منها فيستظل بظلها ويشرب من مائها . ثم ترفع له شجرة عند باب الجنة هي أحسن من الأوليين . فيقول أى رب أدنني من هذه لأستظل بظلها وأشرب من مائها لا أسألك غيرها . فيقول يا ابن آدم ألم تعاهدني أن لا تسألني غيرها قال بلى يا رب هذه لا أسألك غيرها . وربه يعذره لأنه يرى ما لا صبر له عليها فيدنيه منها فإذا أدناه منها فيسمع أصوات أهل الجنة فيقول أى رب أدخلنيها . فيقول يا ابن آدم ما يصريني منك أيرضيك أن أعطيك الدنيا ومثلها معها قال يا رب أتستهزئ مني وأنت رب العالمين " . فضحك ابن مسعود فقال ألا تسألوني مم أضحك فقالوا مم تضحك قال هكذا ضحك رسول الله صلى الله عليه وسلم . فقالوا مم تضحك يا رسول الله قال " من ضحك رب العالمين حين قال أتستهزئ مني وأنت رب العالمين فيقول إني لا أستهزئ منك ولكني على ما أشاء قادر " .