সহিহ মুসলিম > যে ঈমানের বদৌলত জান্নাতে পাওয়া যাবে এবং যে ব্যক্তি (আল্লাহর) নির্দেশকে আঁকড়ে ধরবে সে জান্নাতে প্রবেশ করবে
সহিহ মুসলিম ১৭
وحدثني حجاج بن الشاعر، والقاسم بن زكرياء، قالا حدثنا عبيد الله بن موسى، عن شيبان، عن الأعمش، عن أبي صالح، وأبي، سفيان عن جابر، قال قال النعمان بن قوقل يا رسول الله . بمثله . وزاد فيه ولم أزد على ذلك شيئا .
জাবির (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ
নু‘মান ইবনু কাওকাল (রাঃ) বলেছেন, হে আল্লাহর রসূল! বাকী অংশ উপরোক্ত বর্ণনার অনুরূপ। তবে তিনি তাঁর বর্ণনায় ‘তাতে কোন কিছু বর্ধিত করব না’ কথাটি অতিরিক্ত উল্লেখ করেছেন। (ই.ফা. ১৭; ই.সে. ১৭)
জাবির (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ
নু‘মান ইবনু কাওকাল (রাঃ) বলেছেন, হে আল্লাহর রসূল! বাকী অংশ উপরোক্ত বর্ণনার অনুরূপ। তবে তিনি তাঁর বর্ণনায় ‘তাতে কোন কিছু বর্ধিত করব না’ কথাটি অতিরিক্ত উল্লেখ করেছেন। (ই.ফা. ১৭; ই.সে. ১৭)
وحدثني حجاج بن الشاعر، والقاسم بن زكرياء، قالا حدثنا عبيد الله بن موسى، عن شيبان، عن الأعمش، عن أبي صالح، وأبي، سفيان عن جابر، قال قال النعمان بن قوقل يا رسول الله . بمثله . وزاد فيه ولم أزد على ذلك شيئا .
সহিহ মুসলিম ১৩
وحدثني محمد بن حاتم، وعبد الرحمن بن بشر، قالا حدثنا بهز، حدثنا شعبة، حدثنا محمد بن عثمان بن عبد الله بن موهب، وأبوه، عثمان أنهما سمعا موسى بن طلحة، يحدث عن أبي أيوب، عن النبي صلى الله عليه وسلم بمثل هذا الحديث .
আবূ আইয়ূব (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ
তিনি নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) হতে উপরের হাদীসের অনুরূপ বর্ণনা করেছেন।
আবূ আইয়ূব (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ
তিনি নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) হতে উপরের হাদীসের অনুরূপ বর্ণনা করেছেন।
وحدثني محمد بن حاتم، وعبد الرحمن بن بشر، قالا حدثنا بهز، حدثنا شعبة، حدثنا محمد بن عثمان بن عبد الله بن موهب، وأبوه، عثمان أنهما سمعا موسى بن طلحة، يحدث عن أبي أيوب، عن النبي صلى الله عليه وسلم بمثل هذا الحديث .
সহিহ মুসলিম ১৪
حدثنا يحيى بن يحيى التميمي، أخبرنا أبو الأحوص، ح وحدثنا أبو بكر بن أبي شيبة، حدثنا أبو الأحوص، عن أبي إسحاق، عن موسى بن طلحة، عن أبي أيوب، قال جاء رجل إلى النبي صلى الله عليه وسلم فقال دلني على عمل أعمله يدنيني من الجنة ويباعدني من النار . قال " تعبد الله لا تشرك به شيئا وتقيم الصلاة وتؤتي الزكاة وتصل ذا رحمك " فلما أدبر قال رسول الله صلى الله عليه وسلم " إن تمسك بما أمر به دخل الجنة " . وفي رواية ابن أبي شيبة " إن تمسك به "
আবূ আইয়ূব (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ
এক ব্যক্তি নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর খিদমাতে হাযির হয়ে আরয করলো, আমাকে এমন একটি ‘আমালের কথা বলে দিন, যে ‘আমাল আমাকে জান্নাতের কাছে পৌঁছে দিবে এবং জাহান্নাম থেকে দূরে রাখবে। ন্নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললে, তুমি আল্লাহর ‘ইবাদাত করবে, তাঁর সাথে কোন কিছু শারীক করবে না, সলাত কায়িম করবে, যাকাত দিবে এবং আত্মীতার সম্বর্ক বজায় রাখবে। সে ব্যক্তি চলে গেলে রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললে, তাকে যে ‘আমালের নির্দেশ দেয়া হয়েছে তা দৃঢ়তার সাথে পালন করলে জান্নতে প্রবেশ করবে। আর আবূ শাইবার বর্ণনায় (আরবী) এর স্থলে (আরবী) রয়েছে। (ই.ফা. ১৪, ই.সে ১৪)
আবূ আইয়ূব (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ
এক ব্যক্তি নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর খিদমাতে হাযির হয়ে আরয করলো, আমাকে এমন একটি ‘আমালের কথা বলে দিন, যে ‘আমাল আমাকে জান্নাতের কাছে পৌঁছে দিবে এবং জাহান্নাম থেকে দূরে রাখবে। ন্নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললে, তুমি আল্লাহর ‘ইবাদাত করবে, তাঁর সাথে কোন কিছু শারীক করবে না, সলাত কায়িম করবে, যাকাত দিবে এবং আত্মীতার সম্বর্ক বজায় রাখবে। সে ব্যক্তি চলে গেলে রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললে, তাকে যে ‘আমালের নির্দেশ দেয়া হয়েছে তা দৃঢ়তার সাথে পালন করলে জান্নতে প্রবেশ করবে। আর আবূ শাইবার বর্ণনায় (আরবী) এর স্থলে (আরবী) রয়েছে। (ই.ফা. ১৪, ই.সে ১৪)
حدثنا يحيى بن يحيى التميمي، أخبرنا أبو الأحوص، ح وحدثنا أبو بكر بن أبي شيبة، حدثنا أبو الأحوص، عن أبي إسحاق، عن موسى بن طلحة، عن أبي أيوب، قال جاء رجل إلى النبي صلى الله عليه وسلم فقال دلني على عمل أعمله يدنيني من الجنة ويباعدني من النار . قال " تعبد الله لا تشرك به شيئا وتقيم الصلاة وتؤتي الزكاة وتصل ذا رحمك " فلما أدبر قال رسول الله صلى الله عليه وسلم " إن تمسك بما أمر به دخل الجنة " . وفي رواية ابن أبي شيبة " إن تمسك به "
সহিহ মুসলিম ১৫
وحدثني أبو بكر بن إسحاق، حدثنا عفان، حدثنا وهيب، حدثنا يحيى بن سعيد، عن أبي زرعة، عن أبي هريرة، أن أعرابيا، جاء إلى رسول الله صلى الله عليه وسلم فقال يا رسول الله دلني على عمل إذا عملته دخلت الجنة . قال " تعبد الله لا تشرك به شيئا وتقيم الصلاة المكتوبة وتؤدي الزكاة المفروضة وتصوم رمضان " . قال والذي نفسي بيده لا أزيد على هذا شيئا أبدا ولا أنقص منه . فلما ولى قال النبي صلى الله عليه وسلم " من سره أن ينظر إلى رجل من أهل الجنة فلينظر إلى هذا " .
আবূ হুরায়রাহ (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ
এক বেদুঈন রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর কাছে এসে আরয করলো, হে আল্লাহর রসূল! আমাকে এমন কাজের নির্দেশ দিন, যা করলে আমি জান্নাতে প্রবেশ করতে পারি। তিনি বললেন, আল্লাহর ‘ইবাদাত করো, তাঁর সাথে কাউকে অংশীদার করো না, ফারয সলাত কায়িম করো, নির্ধারিত যাকাত আদায় করো এবং রমাযানের সওম পালন করো। সে লোক বলল : সে সত্তার শপথ! যাঁর হাতে আমার প্রাণ, আমি কখনো এর মধ্যে বৃদ্ধিও করবো না, আর তা থেকে কমাবও না। লোকটি যখন চলে গেলো, নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেনঃ যদি কেউ কোন জান্নাতী লোক দেখে আনন্দিত হতে চায়, সে যেন এ ব্যক্তিকে দেখে নেয়। (ই.ফা. ১৫; ই.সে. ১৫)
আবূ হুরায়রাহ (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ
এক বেদুঈন রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর কাছে এসে আরয করলো, হে আল্লাহর রসূল! আমাকে এমন কাজের নির্দেশ দিন, যা করলে আমি জান্নাতে প্রবেশ করতে পারি। তিনি বললেন, আল্লাহর ‘ইবাদাত করো, তাঁর সাথে কাউকে অংশীদার করো না, ফারয সলাত কায়িম করো, নির্ধারিত যাকাত আদায় করো এবং রমাযানের সওম পালন করো। সে লোক বলল : সে সত্তার শপথ! যাঁর হাতে আমার প্রাণ, আমি কখনো এর মধ্যে বৃদ্ধিও করবো না, আর তা থেকে কমাবও না। লোকটি যখন চলে গেলো, নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেনঃ যদি কেউ কোন জান্নাতী লোক দেখে আনন্দিত হতে চায়, সে যেন এ ব্যক্তিকে দেখে নেয়। (ই.ফা. ১৫; ই.সে. ১৫)
وحدثني أبو بكر بن إسحاق، حدثنا عفان، حدثنا وهيب، حدثنا يحيى بن سعيد، عن أبي زرعة، عن أبي هريرة، أن أعرابيا، جاء إلى رسول الله صلى الله عليه وسلم فقال يا رسول الله دلني على عمل إذا عملته دخلت الجنة . قال " تعبد الله لا تشرك به شيئا وتقيم الصلاة المكتوبة وتؤدي الزكاة المفروضة وتصوم رمضان " . قال والذي نفسي بيده لا أزيد على هذا شيئا أبدا ولا أنقص منه . فلما ولى قال النبي صلى الله عليه وسلم " من سره أن ينظر إلى رجل من أهل الجنة فلينظر إلى هذا " .
সহিহ মুসলিম ১৬
حدثنا أبو بكر بن أبي شيبة، وأبو كريب - واللفظ لأبي كريب - قالا حدثنا أبو معاوية، عن الأعمش، عن أبي سفيان، عن جابر، قال أتى النبي صلى الله عليه وسلم النعمان بن قوقل فقال يا رسول الله أرأيت إذا صليت المكتوبة وحرمت الحرام وأحللت الحلال أأدخل الجنة فقال النبي صلى الله عليه وسلم " نعم " .
জাবির (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ
তিনি বলেন, নু‘মান ইবনু কাওকাল (রাঃ) নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর নিকট এসে বললেনঃ হে আল্লাহ্র রসূল! আপনি বলুন, যদি আমি হারামকে জেনে বর্জন করি এবং হালালকে হালাল বলে গ্রহণ করি তাহলে আমি কি জান্নাতে প্রবেশ করতে পারবো? নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন, ‘হ্যাঁ’। (ই.ফা. ১৬; ই.সে. ১৬)
জাবির (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ
তিনি বলেন, নু‘মান ইবনু কাওকাল (রাঃ) নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর নিকট এসে বললেনঃ হে আল্লাহ্র রসূল! আপনি বলুন, যদি আমি হারামকে জেনে বর্জন করি এবং হালালকে হালাল বলে গ্রহণ করি তাহলে আমি কি জান্নাতে প্রবেশ করতে পারবো? নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন, ‘হ্যাঁ’। (ই.ফা. ১৬; ই.সে. ১৬)
حدثنا أبو بكر بن أبي شيبة، وأبو كريب - واللفظ لأبي كريب - قالا حدثنا أبو معاوية، عن الأعمش، عن أبي سفيان، عن جابر، قال أتى النبي صلى الله عليه وسلم النعمان بن قوقل فقال يا رسول الله أرأيت إذا صليت المكتوبة وحرمت الحرام وأحللت الحلال أأدخل الجنة فقال النبي صلى الله عليه وسلم " نعم " .
সহিহ মুসলিম ১২
وحدثني أبو بكر بن إسحاق، حدثنا عفان، حدثنا وهيب، حدثنا يحيى بن سعيد، عن أبي زرعة، عن أبي هريرة، أن أعرابيا، جاء إلى رسول الله صلى الله عليه وسلم فقال يا رسول الله دلني على عمل إذا عملته دخلت الجنة . قال " تعبد الله لا تشرك به شيئا وتقيم الصلاة المكتوبة وتؤدي الزكاة المفروضة وتصوم رمضان " . قال والذي نفسي بيده لا أزيد على هذا شيئا أبدا ولا أنقص منه . فلما ولى قال النبي صلى الله عليه وسلم " من سره أن ينظر إلى رجل من أهل الجنة فلينظر إلى هذا " .
আবূ আইয়ূব (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ
আবূ আইয়ূব (রাঃ) বলেন যে, কোন এক সফরে এক বেদুঈন রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর সম্মুখে এসে তাঁর উটনীর লাগাম ধরে ফেললো। এ সময় তিনি সফরে ছিলেন। সে বলল, হে আল্লাহর রসূল! অথবা হে মুহাম্মদ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)! আমাকে এমন কিছু কাজের কথা বলুন যা আমাকে জান্নাতের নিকটবর্তী করে দিবে এবং আগুন (জাহান্নাম) থেকে দূরে রাখবে। বর্ণনাকালী বলেন, নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) থেমে গেলেন। তিনি সহাবাদের দিকে তাকালেন। অতঃপর বললেনঃ নিশ্চয়ই তাকে অনুগ্রহ করা হয়েছে, অথবা তিনি বললেনঃ তাকে হিদায়াত দান করা হয়েছে। তিনি বললেনঃ তুমি কি বলেছিলে? রাবী বলেন, লোকটি তার কথার পুনরাবৃত্তি করলো। নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন, আল্লাহর ‘ইবাদাত করো, তাঁর সাথে কোন কিছুকে অংশী স্থাপন করো না, সলাত কায়িম কর, যাকাত আদায় কর, আত্মীয়তার সম্পর্ক বজায় রাখ, এবার উটনীটি ছেড়ে দাও। (ই.ফা. ১২, ই.সে ১২)
আবূ আইয়ূব (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ
আবূ আইয়ূব (রাঃ) বলেন যে, কোন এক সফরে এক বেদুঈন রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর সম্মুখে এসে তাঁর উটনীর লাগাম ধরে ফেললো। এ সময় তিনি সফরে ছিলেন। সে বলল, হে আল্লাহর রসূল! অথবা হে মুহাম্মদ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)! আমাকে এমন কিছু কাজের কথা বলুন যা আমাকে জান্নাতের নিকটবর্তী করে দিবে এবং আগুন (জাহান্নাম) থেকে দূরে রাখবে। বর্ণনাকালী বলেন, নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) থেমে গেলেন। তিনি সহাবাদের দিকে তাকালেন। অতঃপর বললেনঃ নিশ্চয়ই তাকে অনুগ্রহ করা হয়েছে, অথবা তিনি বললেনঃ তাকে হিদায়াত দান করা হয়েছে। তিনি বললেনঃ তুমি কি বলেছিলে? রাবী বলেন, লোকটি তার কথার পুনরাবৃত্তি করলো। নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন, আল্লাহর ‘ইবাদাত করো, তাঁর সাথে কোন কিছুকে অংশী স্থাপন করো না, সলাত কায়িম কর, যাকাত আদায় কর, আত্মীয়তার সম্পর্ক বজায় রাখ, এবার উটনীটি ছেড়ে দাও। (ই.ফা. ১২, ই.সে ১২)
وحدثني أبو بكر بن إسحاق، حدثنا عفان، حدثنا وهيب، حدثنا يحيى بن سعيد، عن أبي زرعة، عن أبي هريرة، أن أعرابيا، جاء إلى رسول الله صلى الله عليه وسلم فقال يا رسول الله دلني على عمل إذا عملته دخلت الجنة . قال " تعبد الله لا تشرك به شيئا وتقيم الصلاة المكتوبة وتؤدي الزكاة المفروضة وتصوم رمضان " . قال والذي نفسي بيده لا أزيد على هذا شيئا أبدا ولا أنقص منه . فلما ولى قال النبي صلى الله عليه وسلم " من سره أن ينظر إلى رجل من أهل الجنة فلينظر إلى هذا " .
সহিহ মুসলিম ১৮
وحدثني سلمة بن شبيب، حدثنا الحسن بن أعين، حدثنا معقل، - وهو ابن عبيد الله - عن أبي الزبير، عن جابر، أن رجلا، سأل رسول الله صلى الله عليه وسلم فقال أرأيت إذا صليت الصلوات المكتوبات وصمت رمضان وأحللت الحلال وحرمت الحرام ولم أزد على ذلك شيئا أأدخل الجنة قال " نعم " . قال والله لا أزيد على ذلك شيئا .
জাবির (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ
কোন এক ব্যক্তি রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর খিদমাতে আরয করলেন, আপনি কি মনে করেন, যদি আমি ফারয সলাত সমূহ আদায় করি, রমাযানের সিয়াম পালন করি, হালালকে হালাল জানি এবং হারামকে হারাম জানি এবং যদি এর অতিরিক্ত কিছু না করি, তাহলে আমি কি জান্নাতে প্রবেশ করতে পারবো? রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন, হ্যাঁ। সে ব্যক্তি বললেন, আল্লাহর কসম! আমি এর উপর কিছুমাত্র বাড়াবো না। (ই.ফা. ১৮; ই.সে. ১৮)
জাবির (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ
কোন এক ব্যক্তি রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর খিদমাতে আরয করলেন, আপনি কি মনে করেন, যদি আমি ফারয সলাত সমূহ আদায় করি, রমাযানের সিয়াম পালন করি, হালালকে হালাল জানি এবং হারামকে হারাম জানি এবং যদি এর অতিরিক্ত কিছু না করি, তাহলে আমি কি জান্নাতে প্রবেশ করতে পারবো? রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন, হ্যাঁ। সে ব্যক্তি বললেন, আল্লাহর কসম! আমি এর উপর কিছুমাত্র বাড়াবো না। (ই.ফা. ১৮; ই.সে. ১৮)
وحدثني سلمة بن شبيب، حدثنا الحسن بن أعين، حدثنا معقل، - وهو ابن عبيد الله - عن أبي الزبير، عن جابر، أن رجلا، سأل رسول الله صلى الله عليه وسلم فقال أرأيت إذا صليت الصلوات المكتوبات وصمت رمضان وأحللت الحلال وحرمت الحرام ولم أزد على ذلك شيئا أأدخل الجنة قال " نعم " . قال والله لا أزيد على ذلك شيئا .
সহিহ মুসলিম > ইসলামের রুকনসমূহ ও তার গুরুত্বপূর্ণ স্তম্ভসমূহ
সহিহ মুসলিম ১৯
حدثنا محمد بن عبد الله بن نمير الهمداني، حدثنا أبو خالد، - يعني سليمان بن حيان الأحمر - عن أبي مالك الأشجعي، عن سعد بن عبيدة، عن ابن عمر، عن النبي صلى الله عليه وسلم قال " بني الإسلام على خمسة على أن يوحد الله وإقام الصلاة وإيتاء الزكاة وصيام رمضان والحج " . فقال رجل الحج وصيام رمضان قال لا . صيام رمضان والحج . هكذا سمعته من رسول الله صلى الله عليه وسلم .
ইবনু ‘উমার (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ
নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন, ইসলামের বুনিয়াদ পাঁচটি বিষয়ের উপর প্রতিষ্ঠিত- আল্লাহকে এক বলে বিশ্বাস করা, সলাত কায়িম করা, যাকাত দেয়া, রমাযানের সিয়াম পালন করা এবং হাজ্জ করা। এক ব্যক্তি (এ ক্রম পাঁচটিতে) বলল, হাজ্জ করা ও রমাযানের সিয়াম পালন করা। রাবী বললেন, না ‘রমাযানের সিয়াম পালন করা ও হাজ্জ করা’ এভাবে রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) থেকে শুনেছি। (ই.ফা. ১৯, ই.সে ১৯)
ইবনু ‘উমার (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ
নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন, ইসলামের বুনিয়াদ পাঁচটি বিষয়ের উপর প্রতিষ্ঠিত- আল্লাহকে এক বলে বিশ্বাস করা, সলাত কায়িম করা, যাকাত দেয়া, রমাযানের সিয়াম পালন করা এবং হাজ্জ করা। এক ব্যক্তি (এ ক্রম পাঁচটিতে) বলল, হাজ্জ করা ও রমাযানের সিয়াম পালন করা। রাবী বললেন, না ‘রমাযানের সিয়াম পালন করা ও হাজ্জ করা’ এভাবে রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) থেকে শুনেছি। (ই.ফা. ১৯, ই.সে ১৯)
حدثنا محمد بن عبد الله بن نمير الهمداني، حدثنا أبو خالد، - يعني سليمان بن حيان الأحمر - عن أبي مالك الأشجعي، عن سعد بن عبيدة، عن ابن عمر، عن النبي صلى الله عليه وسلم قال " بني الإسلام على خمسة على أن يوحد الله وإقام الصلاة وإيتاء الزكاة وصيام رمضان والحج " . فقال رجل الحج وصيام رمضان قال لا . صيام رمضان والحج . هكذا سمعته من رسول الله صلى الله عليه وسلم .
সহিহ মুসলিম ২১
حدثنا عبيد الله بن معاذ، حدثنا أبي، حدثنا عاصم، - وهو ابن محمد بن زيد بن عبد الله بن عمر - عن أبيه، قال قال عبد الله قال رسول الله صلى الله عليه وسلم " بني الإسلام على خمس شهادة أن لا إله إلا الله وأن محمدا عبده ورسوله وإقام الصلاة وإيتاء الزكاة وحج البيت وصوم رمضان "
ইবনু ‘উমার (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ
রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন, পাঁচটি বিষয়ের উপর ইসলামের ভিত্তি প্রতিষ্ঠিত, আল্লাহ ছাড়া প্রকৃত কোন ইলাহ নেই, আর মুহাম্মাদ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তাঁর বান্দা ও রসূল- এ কথার সাক্ষ্য প্রদান করা, সলাত কায়িম করা, যাকাত দেয়া, বাইতুল্লাহর হাজ্জ করা ও রমাযানের সিয়াম পালন করা। (ই.ফা. ২১; ই.সে. ২১)
ইবনু ‘উমার (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ
রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন, পাঁচটি বিষয়ের উপর ইসলামের ভিত্তি প্রতিষ্ঠিত, আল্লাহ ছাড়া প্রকৃত কোন ইলাহ নেই, আর মুহাম্মাদ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তাঁর বান্দা ও রসূল- এ কথার সাক্ষ্য প্রদান করা, সলাত কায়িম করা, যাকাত দেয়া, বাইতুল্লাহর হাজ্জ করা ও রমাযানের সিয়াম পালন করা। (ই.ফা. ২১; ই.সে. ২১)
حدثنا عبيد الله بن معاذ، حدثنا أبي، حدثنا عاصم، - وهو ابن محمد بن زيد بن عبد الله بن عمر - عن أبيه، قال قال عبد الله قال رسول الله صلى الله عليه وسلم " بني الإسلام على خمس شهادة أن لا إله إلا الله وأن محمدا عبده ورسوله وإقام الصلاة وإيتاء الزكاة وحج البيت وصوم رمضان "
সহিহ মুসলিম ২২
وحدثني ابن نمير، حدثنا أبي، حدثنا حنظلة، قال سمعت عكرمة بن خالد، يحدث طاوسا أن رجلا، قال لعبد الله بن عمر ألا تغزو فقال إني سمعت رسول الله صلى الله عليه وسلم يقول " إن الإسلام بني على خمس شهادة أن لا إله إلا الله وإقام الصلاة وإيتاء الزكاة وصيام رمضان وحج البيت " .
তাউস (রহঃ) থেকে বর্নিতঃ
এক ব্যক্তি ‘আবদুল্লাহ ইবনু ‘উমার (রাঃ)-কে জিজ্ঞেস করলো, আপনি জিহাদে অংশগ্রহণ করেছেন না কেন? [২০] তিনি বললেন, আমি রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে বলতে শুনেছিঃ ইসলাম পাঁচটি স্তম্ভের উপর প্রতিষ্ঠিত- এ কথার সাক্ষ্য দেয়া যে, আল্লাহ ছাড়া প্রকৃত কোন ইলাহ নেই, সলাত কায়িম করা, যাকাত আদায় করা, রমাযানের সওম পালন করা ও বাইতুল্লাহ্র হাজ্জ করা। (ই.ফা. ২২; ই.সে. ২২)
তাউস (রহঃ) থেকে বর্নিতঃ
এক ব্যক্তি ‘আবদুল্লাহ ইবনু ‘উমার (রাঃ)-কে জিজ্ঞেস করলো, আপনি জিহাদে অংশগ্রহণ করেছেন না কেন? [২০] তিনি বললেন, আমি রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-কে বলতে শুনেছিঃ ইসলাম পাঁচটি স্তম্ভের উপর প্রতিষ্ঠিত- এ কথার সাক্ষ্য দেয়া যে, আল্লাহ ছাড়া প্রকৃত কোন ইলাহ নেই, সলাত কায়িম করা, যাকাত আদায় করা, রমাযানের সওম পালন করা ও বাইতুল্লাহ্র হাজ্জ করা। (ই.ফা. ২২; ই.সে. ২২)
وحدثني ابن نمير، حدثنا أبي، حدثنا حنظلة، قال سمعت عكرمة بن خالد، يحدث طاوسا أن رجلا، قال لعبد الله بن عمر ألا تغزو فقال إني سمعت رسول الله صلى الله عليه وسلم يقول " إن الإسلام بني على خمس شهادة أن لا إله إلا الله وإقام الصلاة وإيتاء الزكاة وصيام رمضان وحج البيت " .
সহিহ মুসলিম ২০
وحدثنا سهل بن عثمان العسكري، حدثنا يحيى بن زكرياء، حدثنا سعد بن طارق، قال حدثني سعد بن عبيدة السلمي، عن ابن عمر، عن النبي صلى الله عليه وسلم قال " بني الإسلام على خمس على أن يعبد الله ويكفر بما دونه وإقام الصلاة وإيتاء الزكاة وحج البيت وصوم رمضان " .
ইবনু ‘উমার (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ
নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেনঃ পাচঁটি জিনিসের উপর ইসলামের ভিত্তি স্থাপিত। আল্লাহর ‘ইবাদাত করা এবং তাঁকে ছাড়া আর সব কিছু অস্বীকার করা (অর্থাৎ ‘ইবাদাতের মালিক তিনি একাই), সলাত কায়িম করা, যাকাত আদায় করা, বাইতুল্লাহ্র হাজ্জ করা ও রমাযানের সওম পালন করা। (ই.ফা. ২০; ই.সে. ২০)
ইবনু ‘উমার (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ
নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেনঃ পাচঁটি জিনিসের উপর ইসলামের ভিত্তি স্থাপিত। আল্লাহর ‘ইবাদাত করা এবং তাঁকে ছাড়া আর সব কিছু অস্বীকার করা (অর্থাৎ ‘ইবাদাতের মালিক তিনি একাই), সলাত কায়িম করা, যাকাত আদায় করা, বাইতুল্লাহ্র হাজ্জ করা ও রমাযানের সওম পালন করা। (ই.ফা. ২০; ই.সে. ২০)
وحدثنا سهل بن عثمان العسكري، حدثنا يحيى بن زكرياء، حدثنا سعد بن طارق، قال حدثني سعد بن عبيدة السلمي، عن ابن عمر، عن النبي صلى الله عليه وسلم قال " بني الإسلام على خمس على أن يعبد الله ويكفر بما دونه وإقام الصلاة وإيتاء الزكاة وحج البيت وصوم رمضان " .
সহিহ মুসলিম > আল্লাহ ও তাঁর রসূল (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর দ্বীনের অনুশাসনের প্রতি ঈমান আনার নির্দেশ দেয়া এবং তার প্রতি মানুষকে আহবান করা, দ্বীন সম্বন্ধে (জানার জন্য) প্রশ্ন করা ও তা সংরক্ষণ করা আর যার কাছে দ্বীন পৌঁছায়নি তার নিকট দ্বীনের দা’ওয়াত পেশ করা
সহিহ মুসলিম ২৫
وحدثني عبيد الله بن معاذ، حدثنا أبي ح، وحدثنا نصر بن علي الجهضمي، قال أخبرني أبي قالا، جميعا حدثنا قرة بن خالد، عن أبي جمرة، عن ابن عباس، عن النبي صلى الله عليه وسلم بهذا الحديث نحو حديث شعبة . وقال " أنهاكم عما ينبذ في الدباء والنقير والحنتم والمزفت " . وزاد ابن معاذ في حديثه عن أبيه قال وقال رسول الله صلى الله عليه وسلم للأشج أشج عبد القيس " إن فيك خصلتين يحبهما الله الحلم والأناة " .
ইবনু ‘আব্বাস (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ
শু‘বাহ্র বর্ণনার অনুরূপ রিওয়ায়াত বর্ণনা করেছেন। রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেন, আমি তোমাদের দুব্বা, নাকীর, হানতাম ও মুযাফ্ফাত নামক নাবীয তৈরীর পাত্রের ব্যবহার নিষেধ করছি। ইবনু মু’আয (রাঃ) তাঁর পিতার সূত্রে বর্ণিত রিওয়ায়াতে আরো উল্লেখ করেন যে ইবনু ‘আব্বাস (রাঃ) বলেন, রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) ‘আবদুল কায়স গোত্রের ‘আশাজ্জ’ (ক্ষত বিশিষ্ট দলপতিকে) বললেন, তোমাদের দু’টো বিশেষ গুণ রয়েছে, যা আল্লাহ পছন্দ করেন – ধৈর্য ও সহিষ্ণুতা। (ই.ফা. ২৫, ই.সে ২৫)
ইবনু ‘আব্বাস (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ
শু‘বাহ্র বর্ণনার অনুরূপ রিওয়ায়াত বর্ণনা করেছেন। রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেন, আমি তোমাদের দুব্বা, নাকীর, হানতাম ও মুযাফ্ফাত নামক নাবীয তৈরীর পাত্রের ব্যবহার নিষেধ করছি। ইবনু মু’আয (রাঃ) তাঁর পিতার সূত্রে বর্ণিত রিওয়ায়াতে আরো উল্লেখ করেন যে ইবনু ‘আব্বাস (রাঃ) বলেন, রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) ‘আবদুল কায়স গোত্রের ‘আশাজ্জ’ (ক্ষত বিশিষ্ট দলপতিকে) বললেন, তোমাদের দু’টো বিশেষ গুণ রয়েছে, যা আল্লাহ পছন্দ করেন – ধৈর্য ও সহিষ্ণুতা। (ই.ফা. ২৫, ই.সে ২৫)
وحدثني عبيد الله بن معاذ، حدثنا أبي ح، وحدثنا نصر بن علي الجهضمي، قال أخبرني أبي قالا، جميعا حدثنا قرة بن خالد، عن أبي جمرة، عن ابن عباس، عن النبي صلى الله عليه وسلم بهذا الحديث نحو حديث شعبة . وقال " أنهاكم عما ينبذ في الدباء والنقير والحنتم والمزفت " . وزاد ابن معاذ في حديثه عن أبيه قال وقال رسول الله صلى الله عليه وسلم للأشج أشج عبد القيس " إن فيك خصلتين يحبهما الله الحلم والأناة " .
সহিহ মুসলিম ২৭
حدثني محمد بن المثنى، وابن، بشار قالا حدثنا ابن أبي عدي، عن سعيد، عن قتادة، قال حدثني غير، واحد، لقي ذاك الوفد . وذكر أبا نضرة عن أبي سعيد الخدري، أن وفد عبد القيس، لما قدموا على رسول الله صلى الله عليه وسلم بمثل حديث ابن علية غير أن فيه " وتذيفون فيه من القطيعاء أو التمر والماء " . ولم يقل قال سعيد أو قال من التمر
আবূ সা‘ঈদ আল খুদরী (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ
তিনি বলেন, (‘আবদুল কায়স-এর) প্রতিনিধি দলের সাথে যাদের সাক্ষাৎ হয়েছিল তাদের একাধিক ব্যক্তি আমাকে বলেছেন। আবূ নায্রাহ আবূ সা’ঈদ আল খুদরী (রাঃ) থেকে বর্ণনা করেছেন যে, ‘আবদুল কায়স গোত্রের প্রতিনিধিগণ যখন রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর কাছে আসলো। হাদীসটির বাকী অংশ ইবনু ‘উলাইয়্যার বর্ণনার অনুরূপ। তবে তাতে উল্লেখ আছে যে, তোমরা এক (কাষ্ঠ পাত্রের) মধ্যে ক্ষুদ্র ক্ষুদ্র খেজুর, খুরমা এবং পানি ঢেলে দিয়ে থাকো। (আরবী) এর পরিবর্তে (আরবী) রয়েছে এবং সা‘ঈদের ‘খেজুর থেকে’ কথাটি উল্লেখ নেই। (ই.ফা. ২৭; ই.সে. ২৭)
আবূ সা‘ঈদ আল খুদরী (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ
তিনি বলেন, (‘আবদুল কায়স-এর) প্রতিনিধি দলের সাথে যাদের সাক্ষাৎ হয়েছিল তাদের একাধিক ব্যক্তি আমাকে বলেছেন। আবূ নায্রাহ আবূ সা’ঈদ আল খুদরী (রাঃ) থেকে বর্ণনা করেছেন যে, ‘আবদুল কায়স গোত্রের প্রতিনিধিগণ যখন রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর কাছে আসলো। হাদীসটির বাকী অংশ ইবনু ‘উলাইয়্যার বর্ণনার অনুরূপ। তবে তাতে উল্লেখ আছে যে, তোমরা এক (কাষ্ঠ পাত্রের) মধ্যে ক্ষুদ্র ক্ষুদ্র খেজুর, খুরমা এবং পানি ঢেলে দিয়ে থাকো। (আরবী) এর পরিবর্তে (আরবী) রয়েছে এবং সা‘ঈদের ‘খেজুর থেকে’ কথাটি উল্লেখ নেই। (ই.ফা. ২৭; ই.সে. ২৭)
حدثني محمد بن المثنى، وابن، بشار قالا حدثنا ابن أبي عدي، عن سعيد، عن قتادة، قال حدثني غير، واحد، لقي ذاك الوفد . وذكر أبا نضرة عن أبي سعيد الخدري، أن وفد عبد القيس، لما قدموا على رسول الله صلى الله عليه وسلم بمثل حديث ابن علية غير أن فيه " وتذيفون فيه من القطيعاء أو التمر والماء " . ولم يقل قال سعيد أو قال من التمر
সহিহ মুসলিম ২৮
حدثني محمد بن بكار البصري، حدثنا أبو عاصم، عن ابن جريج، ح وحدثني محمد بن رافع، - واللفظ له - حدثنا عبد الرزاق، أخبرنا ابن جريج، قال أخبرني أبو قزعة، أن أبا نضرة، أخبره وحسنا، أخبرهما أن أبا سعيد الخدري أخبره أن وفد عبد القيس لما أتوا نبي الله صلى الله عليه وسلم قالوا يا نبي الله جعلنا الله فداءك ماذا يصلح لنا من الأشربة فقال " لا تشربوا في النقير " . قالوا يا نبي الله جعلنا الله فداءك أوتدري ما النقير قال " نعم الجذع ينقر وسطه ولا في الدباء ولا في الحنتمة وعليكم بالموكى " .
আবূ সা‘ঈদ আল খুদরী (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ
তিনি বলেন, ‘আবদুল কায়স গোত্রের প্রতিনিধি দল নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর নিকট আসল, তখন বলল, হে আল্লাহর নবী! আল্লাহ আপনার কল্যাণ করুন, অথবা আল্লাহ আমাদের প্রাণ আপনার জন্য উৎসর্গ করুন। পানপাত্রের মধ্যে আমাদের জন্য কোন্ ধরনের পাত্র উপযোগী? তিনি বললেন, ‘নাকীরের’ পানীয় দ্রব্য পান করো না। এবার তারা বলল, হে আল্লাহর নবী! আল্লাহ আপনার জন্য আমাদের কুরবান করুন। ‘নাকীর’ কী, তা আপনি কি জানেন? তিনি বললেন, ‘হ্যাঁ’! নাকীর এক প্রকার পাত্র যা খেজুর গাছ খোদাই করে তৈরিকরা হয়। তিনি আরো বললেন, ‘দুববা বা হানতাম’-এর মধ্যেও পানীয় পান করতে পারবে না, তবে তোমাদের উচিত যে পাত্রের মুখ রশি দ্বারা বাঁধা যায় (অর্থাৎ চামড়ার মশক বা থলি) তা ব্যবহার করা। (ই.ফা. ২৮; ই.সে. ২৮)
আবূ সা‘ঈদ আল খুদরী (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ
তিনি বলেন, ‘আবদুল কায়স গোত্রের প্রতিনিধি দল নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর নিকট আসল, তখন বলল, হে আল্লাহর নবী! আল্লাহ আপনার কল্যাণ করুন, অথবা আল্লাহ আমাদের প্রাণ আপনার জন্য উৎসর্গ করুন। পানপাত্রের মধ্যে আমাদের জন্য কোন্ ধরনের পাত্র উপযোগী? তিনি বললেন, ‘নাকীরের’ পানীয় দ্রব্য পান করো না। এবার তারা বলল, হে আল্লাহর নবী! আল্লাহ আপনার জন্য আমাদের কুরবান করুন। ‘নাকীর’ কী, তা আপনি কি জানেন? তিনি বললেন, ‘হ্যাঁ’! নাকীর এক প্রকার পাত্র যা খেজুর গাছ খোদাই করে তৈরিকরা হয়। তিনি আরো বললেন, ‘দুববা বা হানতাম’-এর মধ্যেও পানীয় পান করতে পারবে না, তবে তোমাদের উচিত যে পাত্রের মুখ রশি দ্বারা বাঁধা যায় (অর্থাৎ চামড়ার মশক বা থলি) তা ব্যবহার করা। (ই.ফা. ২৮; ই.সে. ২৮)
حدثني محمد بن بكار البصري، حدثنا أبو عاصم، عن ابن جريج، ح وحدثني محمد بن رافع، - واللفظ له - حدثنا عبد الرزاق، أخبرنا ابن جريج، قال أخبرني أبو قزعة، أن أبا نضرة، أخبره وحسنا، أخبرهما أن أبا سعيد الخدري أخبره أن وفد عبد القيس لما أتوا نبي الله صلى الله عليه وسلم قالوا يا نبي الله جعلنا الله فداءك ماذا يصلح لنا من الأشربة فقال " لا تشربوا في النقير " . قالوا يا نبي الله جعلنا الله فداءك أوتدري ما النقير قال " نعم الجذع ينقر وسطه ولا في الدباء ولا في الحنتمة وعليكم بالموكى " .
সহিহ মুসলিম ২৬
حدثنا يحيى بن أيوب، حدثنا ابن علية، حدثنا سعيد بن أبي عروبة، عن قتادة، قال حدثنا من، لقي الوفد الذين قدموا على رسول الله صلى الله عليه وسلم من عبد القيس . قال سعيد وذكر قتادة أبا نضرة عن أبي سعيد الخدري في حديثه هذا . أن أناسا من عبد القيس قدموا على رسول الله صلى الله عليه وسلم فقالوا يا نبي الله إنا حى من ربيعة وبيننا وبينك كفار مضر ولا نقدر عليك إلا في أشهر الحرم فمرنا بأمر نأمر به من وراءنا وندخل به الجنة إذا نحن أخذنا به . فقال رسول الله صلى الله عليه وسلم " آمركم بأربع وأنهاكم عن أربع اعبدوا الله ولا تشركوا به شيئا وأقيموا الصلاة وآتوا الزكاة وصوموا رمضان وأعطوا الخمس من الغنائم وأنهاكم عن أربع عن الدباء والحنتم والمزفت والنقير " . قالوا يا نبي الله ما علمك بالنقير قال " بلى جذع تنقرونه فتقذفون فيه من القطيعاء - قال سعيد أو قال من التمر - ثم تصبون فيه من الماء حتى إذا سكن غليانه شربتموه حتى إن أحدكم - أو إن أحدهم - ليضرب ابن عمه بالسيف " . قال وفي القوم رجل أصابته جراحة كذلك . قال وكنت أخبأها حياء من رسول الله صلى الله عليه وسلم فقلت ففيم نشرب يا رسول الله قال " في أسقية الأدم التي يلاث على أفواهها " . قالوا يا رسول الله إن أرضنا كثيرة الجرذان ولا تبقى بها أسقية الأدم . فقال نبي الله صلى الله عليه وسلم " وإن أكلتها الجرذان وإن أكلتها الجرذان وإن أكلتها الجرذان " . قال وقال نبي الله صلى الله عليه وسلم لأشج عبد القيس " إن فيك لخصلتين يحبهما الله الحلم والأناة " .
কাতাদাহ্ (রহঃ) থেকে বর্নিতঃ
তিনি বলেন, রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর কাছে ‘আবদুল কায়স গোত্রের প্রতিনিধি দলের সাথে সাক্ষাৎকারী এক ব্যক্তি আমার কাছে হাদীস বর্ণনা করেছেন। (বর্ণনাকারী) সা‘ঈদ বলেছেন, কাতাদাহ্ আবূ নায্রার নাম উল্লেখ করেছেন। তিনি আবূ সা‘ঈদ আল খুদরী (রাঃ) থেকে বর্ণনা করেন যে, ‘আবদুল কায়স গোত্রের ক’জন লোক রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর কাছে এসে বলল, হে আল্লাহর নবী! আমরা রাবী’আহ্ গোত্রের লোক। আমাদের ও আপনার মাঝখানে কাফির মুযার গোত্রের অবস্থান। তাই আমরা মাহে হারাম ব্যতীত অন্য কোন সময় আপনার কাছে আসতে পারি না। কাজেই আপনি আমাদেরকে এমন কিছু কাজের নির্দেশ দিন, যা করার জন্য আমরা আমাদের পশ্চাতের অন্যান্য লোকদেরকে হুকুম করবো এবং আমরা নিজেরাও তা বাস্তবায়ন করবো যাতে এর মাধ্যমে জান্নাতে প্রবেশ করতে পারি। অতঃপর রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন, আমি তোমাদেরকে চারটি কাজের হুকুম করবো, আর চারটি জিনিস থেকে নিষেধ করবো। তোমরা আল্লাহর ‘ইবাদাত করো, তাঁর সাথে অন্য কাউকে অংশীদার করো না, সলাত কায়িম করো, যাকাত দাও এবং রমাযানের সওম পালন কর। আর গনীমাতের সম্পদ থেকে এক পঞ্চমাংশ দান কর এবং তোমাদেরকে চারটি জিনিস (ব্যবহারে) নিষেধ করবোঃ কদুর শুকনো খোল, সবুজ রং লাগানো কলসী, আলকাতরা লাগানো হাঁড়ি-পাতিল ও কাষ্ঠ পাত্র ব্যবহার করতে। তারা বলল, হে আল্লাহর নবী! ‘নাকীর’ (কাষ্ঠ পাত্র) সম্বন্ধে আপনি কতটুকু অবগত? তিনি বললেন, হ্যাঁ। খেজুর গাছের কাণ্ড যা তোমরা খোদাই করে নাও, পরে এর মধ্যে খেজুরের টুকরাগুলো নিক্ষেপ করো, (অর্থাৎ খেজুরের মধ্যে পানি ঢেলে তা দ্বারা ‘নাবীয’ অথবা ‘মদ’ প্রস্তুত করে থাকো)। সা’ঈদ বলেন, অথবা তিনি (নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)) বলেছেন, খেজুরের টুকরা নিক্ষেপ করো, পরে তম্মধ্যে কিছু পানি ঢেলে দাও। অবশেষে যখন তার ফেনা থেমে যায় (অর্থাৎ তা মদে পরিণত হয়) তখন তোমরা পান করো। ফলে তোমাদের কেউ অথবা তাদের কেউ মদের নেশায় হিতাহিত জ্ঞান হারিয়ে আপন চাচাত ভাইকে তরবারি দিয়ে হত্যা করে। তিনি (বর্ণনাকারী) বলেন, উক্ত প্রতিনিধি দলের মধ্যে এমন এক ব্যক্তি ছিল যার শরীরের মধ্যে ছিল ক্ষতের চিহ্ন। সে বলল, লজ্জাবশতঃ আমি রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) থেকে আমার ক্ষত চিহ্নটি লুকিয়ে রাখলাম এবং বললাম, হে আল্লাহর রসূল! তা হলে আমরা পানীয় বস্তু কিসে পান করবো? তিনি বললেন, চামড়ার থলি বা মশকের মধ্যে যার মুখ রশি দ্বারা বেঁধে দেয়া হয়। তারা বলল, হে আল্লাহর রসূল! আমাদের এলাকায় ইঁদুরের উপদ্রব খুব বেশী, ফলে চামড়ার থলি একটিও নিরাপদে থাকে না। নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেনঃ যদিও তা ইঁদুর খেয়ে ফেলে, যদিও তা ইঁদুর খেয়ে ফেলে, যদিও তা ইঁদুর খেয়ে ফেলে। অতঃপর নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) ‘আবদুল কায়স গোত্রের ক্ষত চিহ্নওয়ালা লোকটির উদ্দেশ্যে বললেন, অবশ্য তোমার মধ্যে এমন দু’টি বৈশিষ্ট্য বিদ্যমান যা আল্লাহর কাছে খুবই প্রিয়- সহিষ্ণুতা ও ধীরতা-নম্রতা। (ই.ফা. ২৬, ই.সে ২৬)
কাতাদাহ্ (রহঃ) থেকে বর্নিতঃ
তিনি বলেন, রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর কাছে ‘আবদুল কায়স গোত্রের প্রতিনিধি দলের সাথে সাক্ষাৎকারী এক ব্যক্তি আমার কাছে হাদীস বর্ণনা করেছেন। (বর্ণনাকারী) সা‘ঈদ বলেছেন, কাতাদাহ্ আবূ নায্রার নাম উল্লেখ করেছেন। তিনি আবূ সা‘ঈদ আল খুদরী (রাঃ) থেকে বর্ণনা করেন যে, ‘আবদুল কায়স গোত্রের ক’জন লোক রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর কাছে এসে বলল, হে আল্লাহর নবী! আমরা রাবী’আহ্ গোত্রের লোক। আমাদের ও আপনার মাঝখানে কাফির মুযার গোত্রের অবস্থান। তাই আমরা মাহে হারাম ব্যতীত অন্য কোন সময় আপনার কাছে আসতে পারি না। কাজেই আপনি আমাদেরকে এমন কিছু কাজের নির্দেশ দিন, যা করার জন্য আমরা আমাদের পশ্চাতের অন্যান্য লোকদেরকে হুকুম করবো এবং আমরা নিজেরাও তা বাস্তবায়ন করবো যাতে এর মাধ্যমে জান্নাতে প্রবেশ করতে পারি। অতঃপর রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন, আমি তোমাদেরকে চারটি কাজের হুকুম করবো, আর চারটি জিনিস থেকে নিষেধ করবো। তোমরা আল্লাহর ‘ইবাদাত করো, তাঁর সাথে অন্য কাউকে অংশীদার করো না, সলাত কায়িম করো, যাকাত দাও এবং রমাযানের সওম পালন কর। আর গনীমাতের সম্পদ থেকে এক পঞ্চমাংশ দান কর এবং তোমাদেরকে চারটি জিনিস (ব্যবহারে) নিষেধ করবোঃ কদুর শুকনো খোল, সবুজ রং লাগানো কলসী, আলকাতরা লাগানো হাঁড়ি-পাতিল ও কাষ্ঠ পাত্র ব্যবহার করতে। তারা বলল, হে আল্লাহর নবী! ‘নাকীর’ (কাষ্ঠ পাত্র) সম্বন্ধে আপনি কতটুকু অবগত? তিনি বললেন, হ্যাঁ। খেজুর গাছের কাণ্ড যা তোমরা খোদাই করে নাও, পরে এর মধ্যে খেজুরের টুকরাগুলো নিক্ষেপ করো, (অর্থাৎ খেজুরের মধ্যে পানি ঢেলে তা দ্বারা ‘নাবীয’ অথবা ‘মদ’ প্রস্তুত করে থাকো)। সা’ঈদ বলেন, অথবা তিনি (নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)) বলেছেন, খেজুরের টুকরা নিক্ষেপ করো, পরে তম্মধ্যে কিছু পানি ঢেলে দাও। অবশেষে যখন তার ফেনা থেমে যায় (অর্থাৎ তা মদে পরিণত হয়) তখন তোমরা পান করো। ফলে তোমাদের কেউ অথবা তাদের কেউ মদের নেশায় হিতাহিত জ্ঞান হারিয়ে আপন চাচাত ভাইকে তরবারি দিয়ে হত্যা করে। তিনি (বর্ণনাকারী) বলেন, উক্ত প্রতিনিধি দলের মধ্যে এমন এক ব্যক্তি ছিল যার শরীরের মধ্যে ছিল ক্ষতের চিহ্ন। সে বলল, লজ্জাবশতঃ আমি রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) থেকে আমার ক্ষত চিহ্নটি লুকিয়ে রাখলাম এবং বললাম, হে আল্লাহর রসূল! তা হলে আমরা পানীয় বস্তু কিসে পান করবো? তিনি বললেন, চামড়ার থলি বা মশকের মধ্যে যার মুখ রশি দ্বারা বেঁধে দেয়া হয়। তারা বলল, হে আল্লাহর রসূল! আমাদের এলাকায় ইঁদুরের উপদ্রব খুব বেশী, ফলে চামড়ার থলি একটিও নিরাপদে থাকে না। নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেনঃ যদিও তা ইঁদুর খেয়ে ফেলে, যদিও তা ইঁদুর খেয়ে ফেলে, যদিও তা ইঁদুর খেয়ে ফেলে। অতঃপর নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) ‘আবদুল কায়স গোত্রের ক্ষত চিহ্নওয়ালা লোকটির উদ্দেশ্যে বললেন, অবশ্য তোমার মধ্যে এমন দু’টি বৈশিষ্ট্য বিদ্যমান যা আল্লাহর কাছে খুবই প্রিয়- সহিষ্ণুতা ও ধীরতা-নম্রতা। (ই.ফা. ২৬, ই.সে ২৬)
حدثنا يحيى بن أيوب، حدثنا ابن علية، حدثنا سعيد بن أبي عروبة، عن قتادة، قال حدثنا من، لقي الوفد الذين قدموا على رسول الله صلى الله عليه وسلم من عبد القيس . قال سعيد وذكر قتادة أبا نضرة عن أبي سعيد الخدري في حديثه هذا . أن أناسا من عبد القيس قدموا على رسول الله صلى الله عليه وسلم فقالوا يا نبي الله إنا حى من ربيعة وبيننا وبينك كفار مضر ولا نقدر عليك إلا في أشهر الحرم فمرنا بأمر نأمر به من وراءنا وندخل به الجنة إذا نحن أخذنا به . فقال رسول الله صلى الله عليه وسلم " آمركم بأربع وأنهاكم عن أربع اعبدوا الله ولا تشركوا به شيئا وأقيموا الصلاة وآتوا الزكاة وصوموا رمضان وأعطوا الخمس من الغنائم وأنهاكم عن أربع عن الدباء والحنتم والمزفت والنقير " . قالوا يا نبي الله ما علمك بالنقير قال " بلى جذع تنقرونه فتقذفون فيه من القطيعاء - قال سعيد أو قال من التمر - ثم تصبون فيه من الماء حتى إذا سكن غليانه شربتموه حتى إن أحدكم - أو إن أحدهم - ليضرب ابن عمه بالسيف " . قال وفي القوم رجل أصابته جراحة كذلك . قال وكنت أخبأها حياء من رسول الله صلى الله عليه وسلم فقلت ففيم نشرب يا رسول الله قال " في أسقية الأدم التي يلاث على أفواهها " . قالوا يا رسول الله إن أرضنا كثيرة الجرذان ولا تبقى بها أسقية الأدم . فقال نبي الله صلى الله عليه وسلم " وإن أكلتها الجرذان وإن أكلتها الجرذان وإن أكلتها الجرذان " . قال وقال نبي الله صلى الله عليه وسلم لأشج عبد القيس " إن فيك لخصلتين يحبهما الله الحلم والأناة " .
সহিহ মুসলিম ২৪
حدثنا أبو بكر بن أبي شيبة، ومحمد بن المثنى، ومحمد بن بشار، وألفاظهم، متقاربة - قال أبو بكر حدثنا غندر، عن شعبة، وقال الآخران، حدثنا محمد بن جعفر، حدثنا شعبة، - عن أبي جمرة، قال كنت أترجم بين يدى ابن عباس وبين الناس فأتته امرأة تسأله عن نبيذ الجر، فقال إن وفد عبد القيس أتوا رسول الله صلى الله عليه وسلم فقال رسول الله صلى الله عليه وسلم " من الوفد أو من القوم " . قالوا ربيعة . قال " مرحبا بالقوم أو بالوفد غير خزايا ولا الندامى " . قال فقالوا يا رسول الله إنا نأتيك من شقة بعيدة وإن بيننا وبينك هذا الحى من كفار مضر وإنا لا نستطيع أن نأتيك إلا في شهر الحرام فمرنا بأمر فصل نخبر به من وراءنا ندخل به الجنة . قال فأمرهم بأربع ونهاهم عن أربع . قال أمرهم بالإيمان بالله وحده . وقال " هل تدرون ما الإيمان بالله " . قالوا الله ورسوله أعلم . قال " شهادة أن لا إله إلا الله وأن محمدا رسول الله وإقام الصلاة وإيتاء الزكاة وصوم رمضان وأن تؤدوا خمسا من المغنم " . ونهاهم عن الدباء والحنتم والمزفت . قال شعبة وربما قال النقير . قال شعبة وربما قال المقير . وقال " احفظوه وأخبروا به من ورائكم " . وقال أبو بكر في روايته " من وراءكم " وليس في روايته المقير .
আবূ জামরাহ্ (নাস্র ইবনু ‘ইমরান) থেকে বর্নিতঃ
আমি ইবনু ‘আব্বাস (রাঃ)-এর সম্মুখে তাঁর ও ভিনদেশী লোকদের মধ্যে দোভাষীর কাজ করতাম। একদা জনৈক মহিলা এসে তাঁকে মাটির কলসীর মধ্যে ‘নাবীয [২৩] প্রস্তুত করা সম্পর্কে জিজ্ঞেস করলো। তিনি বললেন, ‘আবদুল কায়সের প্রতিনিধি দল রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর কাছে আসলো। রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) জিজ্ঞেস করলেনঃ কাদের এ প্রতিনিধি দল? অথবা তিনি বললেন, কোন গোত্রের লোক? তারা বলল, রাবী‘আহ্ গোত্রের। তিনি বললেন, ঐ গোত্রের অথবা বললেন, প্রতিনিধি দলের আগমন শুভ হোক। তাদের লজ্জিত হওয়ার ও অপমানিত হওয়ারও কোন কারণ নেই (তারা ইতিপূর্বে স্বেচ্ছায় ইসলাম গ্রহণ করেছে)। ইবনু ‘আব্বাস (রাঃ) বলেন, এরপর তারা বলল, হে আল্লাহর রসূল! আমরা দূর-দূরান্ত থেকে সফর করে আপনার কাছে এসেছি। আমাদের ও আপনার মাঝখানে কাফির মুযারা গোত্র বাস করে। তাই আমরা মাহে-হারাম (সম্মানিত মাস) ছাড়া অন্য সময় আপনার কাছে আসতে পারি না। আপনি আমাদেরকে সুস্পষ্টভাবে কোন কাজের কথা বলে দিন যেন আমরা তা আমাদের পশ্চাতের অন্যান্য লোকদের জানিয়ে দিতে পারি এবং সে অনুযায়ী ‘আমাল করে আমরা জান্নাতে প্রবেশ করতে পারি। বর্ণনাকারী বলেন, রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তখন তাদের চারটি বিষয় পালনের নির্দেশ দিলেন এবং চারটি বিষয় থেকে নিষেধ করলেন। এক আল্লাহর প্রতি ঈমান আনার নির্দেশ দিলেন এবং বললেন, তোমরা জান এক আল্লাহর প্রতি ঈমান আনা কী? তারা আরয করলো, আল্লাহ ও তাঁর রসূল (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) এ বিষয়ে ভালো জানেন। রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন, এ সাক্ষ্য দেয়া যে, আল্লাহ ব্যতীত প্রকৃত কোন ইলাহ নেই এবং মুহাম্মাদ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) আল্লাহর রসূল আর তোমরা সলাত কায়িম করবে, যাকাত দিবে, রমাযানের সিয়াম পালন করবে এবং গনীমাতলদ্ধ সামগ্রীর এক পঞ্চমাংশ দান করবে। তিনি তাদের চারটি বিষয়ে বিরত থাকার নির্দেশ দেন। তা হচ্ছে দুব্বা, হানতাম, মুযাফফাত। চতুর্থটি সম্বন্ধে শু‘বাহ্ বলেন, এরপর রাবী কখনো নাকীর কখনো বা মুকাইয়্যার শব্দ উল্লেখ করেছেন। রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন, এসব বিধান হিফাযাত করবে এবং যারা আসেনি তাদের তা জানিয়ে দিবে। আবূ বকর (রাঃ)-এর রিওয়ায়াতে (আরবী) (যারা আসেনি) কথাটি রয়েছে কিন্তু (আরবী) শব্দটি নেই। (ই.ফা. ২৪; ই.সে. ২৪)
আবূ জামরাহ্ (নাস্র ইবনু ‘ইমরান) থেকে বর্নিতঃ
আমি ইবনু ‘আব্বাস (রাঃ)-এর সম্মুখে তাঁর ও ভিনদেশী লোকদের মধ্যে দোভাষীর কাজ করতাম। একদা জনৈক মহিলা এসে তাঁকে মাটির কলসীর মধ্যে ‘নাবীয [২৩] প্রস্তুত করা সম্পর্কে জিজ্ঞেস করলো। তিনি বললেন, ‘আবদুল কায়সের প্রতিনিধি দল রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর কাছে আসলো। রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) জিজ্ঞেস করলেনঃ কাদের এ প্রতিনিধি দল? অথবা তিনি বললেন, কোন গোত্রের লোক? তারা বলল, রাবী‘আহ্ গোত্রের। তিনি বললেন, ঐ গোত্রের অথবা বললেন, প্রতিনিধি দলের আগমন শুভ হোক। তাদের লজ্জিত হওয়ার ও অপমানিত হওয়ারও কোন কারণ নেই (তারা ইতিপূর্বে স্বেচ্ছায় ইসলাম গ্রহণ করেছে)। ইবনু ‘আব্বাস (রাঃ) বলেন, এরপর তারা বলল, হে আল্লাহর রসূল! আমরা দূর-দূরান্ত থেকে সফর করে আপনার কাছে এসেছি। আমাদের ও আপনার মাঝখানে কাফির মুযারা গোত্র বাস করে। তাই আমরা মাহে-হারাম (সম্মানিত মাস) ছাড়া অন্য সময় আপনার কাছে আসতে পারি না। আপনি আমাদেরকে সুস্পষ্টভাবে কোন কাজের কথা বলে দিন যেন আমরা তা আমাদের পশ্চাতের অন্যান্য লোকদের জানিয়ে দিতে পারি এবং সে অনুযায়ী ‘আমাল করে আমরা জান্নাতে প্রবেশ করতে পারি। বর্ণনাকারী বলেন, রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তখন তাদের চারটি বিষয় পালনের নির্দেশ দিলেন এবং চারটি বিষয় থেকে নিষেধ করলেন। এক আল্লাহর প্রতি ঈমান আনার নির্দেশ দিলেন এবং বললেন, তোমরা জান এক আল্লাহর প্রতি ঈমান আনা কী? তারা আরয করলো, আল্লাহ ও তাঁর রসূল (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) এ বিষয়ে ভালো জানেন। রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন, এ সাক্ষ্য দেয়া যে, আল্লাহ ব্যতীত প্রকৃত কোন ইলাহ নেই এবং মুহাম্মাদ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) আল্লাহর রসূল আর তোমরা সলাত কায়িম করবে, যাকাত দিবে, রমাযানের সিয়াম পালন করবে এবং গনীমাতলদ্ধ সামগ্রীর এক পঞ্চমাংশ দান করবে। তিনি তাদের চারটি বিষয়ে বিরত থাকার নির্দেশ দেন। তা হচ্ছে দুব্বা, হানতাম, মুযাফফাত। চতুর্থটি সম্বন্ধে শু‘বাহ্ বলেন, এরপর রাবী কখনো নাকীর কখনো বা মুকাইয়্যার শব্দ উল্লেখ করেছেন। রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন, এসব বিধান হিফাযাত করবে এবং যারা আসেনি তাদের তা জানিয়ে দিবে। আবূ বকর (রাঃ)-এর রিওয়ায়াতে (আরবী) (যারা আসেনি) কথাটি রয়েছে কিন্তু (আরবী) শব্দটি নেই। (ই.ফা. ২৪; ই.সে. ২৪)
حدثنا أبو بكر بن أبي شيبة، ومحمد بن المثنى، ومحمد بن بشار، وألفاظهم، متقاربة - قال أبو بكر حدثنا غندر، عن شعبة، وقال الآخران، حدثنا محمد بن جعفر، حدثنا شعبة، - عن أبي جمرة، قال كنت أترجم بين يدى ابن عباس وبين الناس فأتته امرأة تسأله عن نبيذ الجر، فقال إن وفد عبد القيس أتوا رسول الله صلى الله عليه وسلم فقال رسول الله صلى الله عليه وسلم " من الوفد أو من القوم " . قالوا ربيعة . قال " مرحبا بالقوم أو بالوفد غير خزايا ولا الندامى " . قال فقالوا يا رسول الله إنا نأتيك من شقة بعيدة وإن بيننا وبينك هذا الحى من كفار مضر وإنا لا نستطيع أن نأتيك إلا في شهر الحرام فمرنا بأمر فصل نخبر به من وراءنا ندخل به الجنة . قال فأمرهم بأربع ونهاهم عن أربع . قال أمرهم بالإيمان بالله وحده . وقال " هل تدرون ما الإيمان بالله " . قالوا الله ورسوله أعلم . قال " شهادة أن لا إله إلا الله وأن محمدا رسول الله وإقام الصلاة وإيتاء الزكاة وصوم رمضان وأن تؤدوا خمسا من المغنم " . ونهاهم عن الدباء والحنتم والمزفت . قال شعبة وربما قال النقير . قال شعبة وربما قال المقير . وقال " احفظوه وأخبروا به من ورائكم " . وقال أبو بكر في روايته " من وراءكم " وليس في روايته المقير .
সহিহ মুসলিম ২৩
حدثنا خلف بن هشام، حدثنا حماد بن زيد، عن أبي جمرة، قال سمعت ابن عباس، ح وحدثنا يحيى بن يحيى، - واللفظ له - أخبرنا عباد بن عباد، عن أبي جمرة، عن ابن عباس، قال قدم وفد عبد القيس على رسول الله صلى الله عليه وسلم فقالوا يا رسول الله إنا هذا الحى من ربيعة وقد حالت بيننا وبينك كفار مضر فلا نخلص إليك إلا في شهر الحرام فمرنا بأمر نعمل به وندعو إليه من وراءنا . قال " آمركم بأربع وأنهاكم عن أربع الإيمان بالله - ثم فسرها لهم فقال - شهادة أن لا إله إلا الله وأن محمدا رسول الله وإقام الصلاة وإيتاء الزكاة وأن تؤدوا خمس ما غنمتم وأنهاكم عن الدباء والحنتم والنقير والمقير " . زاد خلف في روايته " شهادة أن لا إله إلا الله " . وعقد واحدة
ইবনু ‘আব্বাস (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ
‘আবদুল কায়স-এর (গোত্রের) একটি ওয়াফ্দ [২১] (প্রতিনিধি দল) রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর খিদমাতে উপস্থিত হয়ে আরয করলো, হে আল্লাহর রসূল! আমরা রাবী‘আহ্ গোত্রের লোক। আমাদের এবং আপনার মধ্যে কাফির মুযার গোত্র বিদ্যমান। আমরা শাহরুল হারাম ব্যতীত আপনার নিকট নিরাপদে পৌঁছাতে পারি না। কাজেই আপনি আমাদের এমন কিছু শিক্ষা দিন আমরা যে সবের উপর ‘আমাল করতে পারি এবং আমাদের অন্যান্যদের তৎপ্রতি আহবান জানাতে পারি। রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন, তোমাদের আমি চারটি বিষয় পালনের আদেশ করছি এবং চারটি বিষয়ে নিষেধ করছি। তারপর তাদের এ সম্বন্ধে বর্ণনা দিলেন এবং বললেন, আল্লাহ ছাড়া প্রকৃত কোন ইলাহ নেই এবং মুহাম্মাদ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) আল্লাহর রসূল- এ কথার সাক্ষ্য দেয়া, সলাত কায়িম করা, যাকাত দেয়া এবং তোমাদের গনীমাতলদ্ধ সামগ্রীর এক পঞ্চমাংশ আদায় করা। আর আমি তোমাদের নিষেধ করছি দুববা, হানতাম, নাকীর, মুকাইয়্যার থেকে। [২২] খালাফ তাঁর বর্ণনায় আরও উল্লেখ করছেন, ‘আল্লাহ ছাড়া প্রকৃত কোন ইলাহ নেই’ বলে রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) একটি অঙ্গুলি (সংকেতসূচক) বন্ধ করেন। (ই.ফা. ২৩; ই.সে. ২৩)
ইবনু ‘আব্বাস (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ
‘আবদুল কায়স-এর (গোত্রের) একটি ওয়াফ্দ [২১] (প্রতিনিধি দল) রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)-এর খিদমাতে উপস্থিত হয়ে আরয করলো, হে আল্লাহর রসূল! আমরা রাবী‘আহ্ গোত্রের লোক। আমাদের এবং আপনার মধ্যে কাফির মুযার গোত্র বিদ্যমান। আমরা শাহরুল হারাম ব্যতীত আপনার নিকট নিরাপদে পৌঁছাতে পারি না। কাজেই আপনি আমাদের এমন কিছু শিক্ষা দিন আমরা যে সবের উপর ‘আমাল করতে পারি এবং আমাদের অন্যান্যদের তৎপ্রতি আহবান জানাতে পারি। রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন, তোমাদের আমি চারটি বিষয় পালনের আদেশ করছি এবং চারটি বিষয়ে নিষেধ করছি। তারপর তাদের এ সম্বন্ধে বর্ণনা দিলেন এবং বললেন, আল্লাহ ছাড়া প্রকৃত কোন ইলাহ নেই এবং মুহাম্মাদ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) আল্লাহর রসূল- এ কথার সাক্ষ্য দেয়া, সলাত কায়িম করা, যাকাত দেয়া এবং তোমাদের গনীমাতলদ্ধ সামগ্রীর এক পঞ্চমাংশ আদায় করা। আর আমি তোমাদের নিষেধ করছি দুববা, হানতাম, নাকীর, মুকাইয়্যার থেকে। [২২] খালাফ তাঁর বর্ণনায় আরও উল্লেখ করছেন, ‘আল্লাহ ছাড়া প্রকৃত কোন ইলাহ নেই’ বলে রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) একটি অঙ্গুলি (সংকেতসূচক) বন্ধ করেন। (ই.ফা. ২৩; ই.সে. ২৩)
حدثنا خلف بن هشام، حدثنا حماد بن زيد، عن أبي جمرة، قال سمعت ابن عباس، ح وحدثنا يحيى بن يحيى، - واللفظ له - أخبرنا عباد بن عباد، عن أبي جمرة، عن ابن عباس، قال قدم وفد عبد القيس على رسول الله صلى الله عليه وسلم فقالوا يا رسول الله إنا هذا الحى من ربيعة وقد حالت بيننا وبينك كفار مضر فلا نخلص إليك إلا في شهر الحرام فمرنا بأمر نعمل به وندعو إليه من وراءنا . قال " آمركم بأربع وأنهاكم عن أربع الإيمان بالله - ثم فسرها لهم فقال - شهادة أن لا إله إلا الله وأن محمدا رسول الله وإقام الصلاة وإيتاء الزكاة وأن تؤدوا خمس ما غنمتم وأنهاكم عن الدباء والحنتم والنقير والمقير " . زاد خلف في روايته " شهادة أن لا إله إلا الله " . وعقد واحدة
সহিহ মুসলিম > তাওহীদ ও রিসলাতের শাহাদাত এবং ইসলামের বিধানের দিকে আহবান
সহিহ মুসলিম ৩০
حدثنا ابن أبي عمر، حدثنا بشر بن السري، حدثنا زكرياء بن إسحاق، ح وحدثنا عبد بن حميد، حدثنا أبو عاصم، عن زكرياء بن إسحاق، عن يحيى بن عبد الله بن صيفي، عن أبي معبد، عن ابن عباس، أن النبي صلى الله عليه وسلم بعث معاذا إلى اليمن فقال " إنك ستأتي قوما " بمثل حديث وكيع .
ইবনু ‘আব্বাস (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ
নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেনঃ নিশ্চয় তুমি এক সম্প্রদায়ের নিকট যাচ্ছ ..... বাকী অংশ ওয়াকী‘র বর্ণনার অনুরূপ। (ই.ফা. ৩০; ই.সে. ৩০)
ইবনু ‘আব্বাস (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ
নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেনঃ নিশ্চয় তুমি এক সম্প্রদায়ের নিকট যাচ্ছ ..... বাকী অংশ ওয়াকী‘র বর্ণনার অনুরূপ। (ই.ফা. ৩০; ই.সে. ৩০)
حدثنا ابن أبي عمر، حدثنا بشر بن السري، حدثنا زكرياء بن إسحاق، ح وحدثنا عبد بن حميد، حدثنا أبو عاصم، عن زكرياء بن إسحاق، عن يحيى بن عبد الله بن صيفي، عن أبي معبد، عن ابن عباس، أن النبي صلى الله عليه وسلم بعث معاذا إلى اليمن فقال " إنك ستأتي قوما " بمثل حديث وكيع .
সহিহ মুসলিম ৩১
حدثنا أبو بكر بن أبي شيبة، وأبو كريب وإسحاق بن إبراهيم جميعا عن وكيع، - قال أبو بكر حدثنا وكيع، - عن زكرياء بن إسحاق، قال حدثني يحيى بن عبد الله بن صيفي، عن أبي معبد، عن ابن عباس، عن معاذ بن جبل، - قال أبو بكر ربما قال وكيع عن ابن عباس، أن معاذا، - قال بعثني رسول الله صلى الله عليه وسلم قال " إنك تأتي قوما من أهل الكتاب . فادعهم إلى شهادة أن لا إله إلا الله وأني رسول الله فإن هم أطاعوا لذلك فأعلمهم أن الله افترض عليهم خمس صلوات في كل يوم وليلة فإن هم أطاعوا لذلك فأعلمهم أن الله افترض عليهم صدقة تؤخذ من أغنيائهم فترد في فقرائهم فإن هم أطاعوا لذلك فإياك وكرائم أموالهم واتق دعوة المظلوم فإنه ليس بينها وبين الله حجاب " .
ইবনু ‘আব্বাস (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ
রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) মু’আয ইবনু জাবাল (রাঃ)-কে ইয়ামানের প্রশাসক করে পাঠানোর সময় বলেছিলেন তুমি আহলে কিতাব সম্প্রদায়ের নিকট যাচ্ছ। তাদের প্রথম যে দা‘ওয়াত দিবে তা হলো, মহান মহিমাময় আল্লাহর ‘ইবাদাতের দিকে আহবান করা। যখন তারা আল্লাহকে চিনে নিবে তখন তাদের জানিয়ে দিবে যে, আল্লাহ তা’আলা তাদের জন্য দিন ও রাতে পাঁচ ওয়াক্ত সলাত ফার্য করেছেন। তারা তা করলে তাদের জানিয়ে দিবে যে, আল্লাহ তাদের উপর যাকাত ফার্য করেছেন। তাদের সম্পদ ধনীদের থেকে আদায় করা হবে এবং তা তাদের গরীবদের মাঝে বিতরণ করা হবে। এর প্রতি আনুগত্য প্রদর্শন করলে তুমি তাদের থেকে তা আদায় করবে কিন্তু তাদের উত্তম মালগুলো গ্রহণ করা থেকে সাবধান থাকবে। (ই.ফা. ৩১; ই.সে. ৩১)
ইবনু ‘আব্বাস (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ
রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) মু’আয ইবনু জাবাল (রাঃ)-কে ইয়ামানের প্রশাসক করে পাঠানোর সময় বলেছিলেন তুমি আহলে কিতাব সম্প্রদায়ের নিকট যাচ্ছ। তাদের প্রথম যে দা‘ওয়াত দিবে তা হলো, মহান মহিমাময় আল্লাহর ‘ইবাদাতের দিকে আহবান করা। যখন তারা আল্লাহকে চিনে নিবে তখন তাদের জানিয়ে দিবে যে, আল্লাহ তা’আলা তাদের জন্য দিন ও রাতে পাঁচ ওয়াক্ত সলাত ফার্য করেছেন। তারা তা করলে তাদের জানিয়ে দিবে যে, আল্লাহ তাদের উপর যাকাত ফার্য করেছেন। তাদের সম্পদ ধনীদের থেকে আদায় করা হবে এবং তা তাদের গরীবদের মাঝে বিতরণ করা হবে। এর প্রতি আনুগত্য প্রদর্শন করলে তুমি তাদের থেকে তা আদায় করবে কিন্তু তাদের উত্তম মালগুলো গ্রহণ করা থেকে সাবধান থাকবে। (ই.ফা. ৩১; ই.সে. ৩১)
حدثنا أبو بكر بن أبي شيبة، وأبو كريب وإسحاق بن إبراهيم جميعا عن وكيع، - قال أبو بكر حدثنا وكيع، - عن زكرياء بن إسحاق، قال حدثني يحيى بن عبد الله بن صيفي، عن أبي معبد، عن ابن عباس، عن معاذ بن جبل، - قال أبو بكر ربما قال وكيع عن ابن عباس، أن معاذا، - قال بعثني رسول الله صلى الله عليه وسلم قال " إنك تأتي قوما من أهل الكتاب . فادعهم إلى شهادة أن لا إله إلا الله وأني رسول الله فإن هم أطاعوا لذلك فأعلمهم أن الله افترض عليهم خمس صلوات في كل يوم وليلة فإن هم أطاعوا لذلك فأعلمهم أن الله افترض عليهم صدقة تؤخذ من أغنيائهم فترد في فقرائهم فإن هم أطاعوا لذلك فإياك وكرائم أموالهم واتق دعوة المظلوم فإنه ليس بينها وبين الله حجاب " .
সহিহ মুসলিম ২৯
حدثنا خلف بن هشام، حدثنا حماد بن زيد، عن أبي جمرة، قال سمعت ابن عباس، ح وحدثنا يحيى بن يحيى، - واللفظ له - أخبرنا عباد بن عباد، عن أبي جمرة، عن ابن عباس، قال قدم وفد عبد القيس على رسول الله صلى الله عليه وسلم فقالوا يا رسول الله إنا هذا الحى من ربيعة وقد حالت بيننا وبينك كفار مضر فلا نخلص إليك إلا في شهر الحرام فمرنا بأمر نعمل به وندعو إليه من وراءنا . قال " آمركم بأربع وأنهاكم عن أربع الإيمان بالله - ثم فسرها لهم فقال - شهادة أن لا إله إلا الله وأن محمدا رسول الله وإقام الصلاة وإيتاء الزكاة وأن تؤدوا خمس ما غنمتم وأنهاكم عن الدباء والحنتم والنقير والمقير " . زاد خلف في روايته " شهادة أن لا إله إلا الله " . وعقد واحدة .
ইবনু ‘আব্বাস (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ
মু’আয ইবনু জাবাল (রাঃ) বলেছেন, রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) আমাকে (ইয়ামানের প্রশাসক নিযুক্ত করে) পাঠালেন। তিনি বললেন, তুমি এমন এক সম্প্রদায়ের নিকট যাচ্ছো যারা কিতাবধারী। সুতরাং তাদেরকে আহবান জানাবে এ সাক্ষ্য দেয়ার জন্য, আল্লাহ ব্যতীত প্রকৃত কোন ইলাহ (উপাস্য) নেই আর আমি আল্লাহর রসূল। যদি তারা তোমার এ কথা মেনে নেয়, তবে তাদেরকে জানিয়ে দিবে যে, প্রত্যহ দিন ও রাতে আল্লাহ তাদের উপর পাঁচ ওয়াক্ত সলাত ফার্য করেছেন। যদি তারা তোমার এ কথাও মেনে নেয়, তবে তাদেরকে জানিয়ে দিবে যে, আল্লাহ তাদের উপর যাকাত ফার্য করেছেন- যা তাদের ধনীদের থেকে আদায় করা হবে এবং তাদের দরিদ্রদের মাঝে বিতরণ করা হবে। যদি তারা এ কথাও মেনে নেয়, তবে তাদের ভালো ভালো সম্পদগুলো গ্রহণ করা থেকে বিরত থেকো। আর মাযলূমের অভিশাপকে ভয় কর, কেননা তার ও আল্লাহর মাঝখানে কোন আড়াল নেই। (ই.ফা. ২৯; ই.সে. ২৯)
ইবনু ‘আব্বাস (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ
মু’আয ইবনু জাবাল (রাঃ) বলেছেন, রসূলুল্লাহ্ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) আমাকে (ইয়ামানের প্রশাসক নিযুক্ত করে) পাঠালেন। তিনি বললেন, তুমি এমন এক সম্প্রদায়ের নিকট যাচ্ছো যারা কিতাবধারী। সুতরাং তাদেরকে আহবান জানাবে এ সাক্ষ্য দেয়ার জন্য, আল্লাহ ব্যতীত প্রকৃত কোন ইলাহ (উপাস্য) নেই আর আমি আল্লাহর রসূল। যদি তারা তোমার এ কথা মেনে নেয়, তবে তাদেরকে জানিয়ে দিবে যে, প্রত্যহ দিন ও রাতে আল্লাহ তাদের উপর পাঁচ ওয়াক্ত সলাত ফার্য করেছেন। যদি তারা তোমার এ কথাও মেনে নেয়, তবে তাদেরকে জানিয়ে দিবে যে, আল্লাহ তাদের উপর যাকাত ফার্য করেছেন- যা তাদের ধনীদের থেকে আদায় করা হবে এবং তাদের দরিদ্রদের মাঝে বিতরণ করা হবে। যদি তারা এ কথাও মেনে নেয়, তবে তাদের ভালো ভালো সম্পদগুলো গ্রহণ করা থেকে বিরত থেকো। আর মাযলূমের অভিশাপকে ভয় কর, কেননা তার ও আল্লাহর মাঝখানে কোন আড়াল নেই। (ই.ফা. ২৯; ই.সে. ২৯)
حدثنا خلف بن هشام، حدثنا حماد بن زيد، عن أبي جمرة، قال سمعت ابن عباس، ح وحدثنا يحيى بن يحيى، - واللفظ له - أخبرنا عباد بن عباد، عن أبي جمرة، عن ابن عباس، قال قدم وفد عبد القيس على رسول الله صلى الله عليه وسلم فقالوا يا رسول الله إنا هذا الحى من ربيعة وقد حالت بيننا وبينك كفار مضر فلا نخلص إليك إلا في شهر الحرام فمرنا بأمر نعمل به وندعو إليه من وراءنا . قال " آمركم بأربع وأنهاكم عن أربع الإيمان بالله - ثم فسرها لهم فقال - شهادة أن لا إله إلا الله وأن محمدا رسول الله وإقام الصلاة وإيتاء الزكاة وأن تؤدوا خمس ما غنمتم وأنهاكم عن الدباء والحنتم والنقير والمقير " . زاد خلف في روايته " شهادة أن لا إله إلا الله " . وعقد واحدة .