সহিহ বুখারী > খুমুস নির্ধারণ প্রসঙ্গে।

সহিহ বুখারী ৩০৯৩

فقال لها أبو بكر إن رسول الله قال لا نورث ما تركنا صدقة فغضبت فاطمة بنت رسول الله فهجرت أبا بكر فلم تزل مهاجرته حتى توفيت وعاشت بعد رسول الله صلى الله عليه وسلم ستة أشهر قالت وكانت فاطمة تسأل أبا بكر نصيبها مما ترك رسول الله صلى الله عليه وسلم من خيبر وفدك وصدقته بالمدينة فأبى أبو بكر عليها ذلك وقال لست تاركا شيئا كان رسول الله صلى الله عليه وسلم يعمل به إلا عملت به فإني أخشى إن تركت شيئا من أمره أن أزيغ فأما صدقته بالمدينة فدفعها عمر إلى علي وعباس وأما خيبر وفدك فأمسكها عمر وقال هما صدقة رسول الله صلى الله عليه وسلم كانتا لحقوقه التي تعروه ونوائبه وأمرهما إلى من ولي الأمر قال فهما على ذلك إلى اليوم قال أبو عبد الله اعتراك افتعلت من عروته فأصبته ومنه يعروه واعتراني

উম্মুল মু’মিনীন ‘আয়িশা (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ

অতঃপর আবূ বকর (রাঃ) তাঁকে বললেন, আল্লাহর রসূল (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন, ‘আমাদের পরিত্যক্ত সম্পদ বণ্টিত হবে না, আমরা যা ছেড়ে যাই, তা সদকা রূপে গণ্য হয়।’ এতে আল্লাহর রসূলের কন্যা ফাতিমা (রাঃ) অসুন্তুষ্ট হলেন এবং আবূ বক্‌র সিদ্দিক (রাঃ) -এর সঙ্গে কথাবার্তা বলা ছেড়ে দিলেন। এ অবস্থা তাঁর মৃত্যু পর্যন্ত বহাল ছিল। আল্লাহর রসূল (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) -এর ওফাতের পর ফাতিমা (রাঃ) ছয় মাস জীবিত ছিলেন। ‘আয়িশা (রাঃ) বলেন, ফাতিমা (রাঃ) আবূ বক্‌র সিদ্দিক (রাঃ) -এর নিকটা আল্লাহর রসূল (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) কর্তৃক ত্যাজ্য খায়বার ও ফাদাকের ভূমি এবং মদীনার সদকাতে তাঁর অংশ দাবী করেছিলেন। আবূ বকর (রাঃ) তাঁকে তা প্রদানে অস্বীকৃতি জানান এবং তিনি বলেন, আল্লাহর রসূল (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) যা ‘আমল করতেন, আমি তাই ‘আমল করব। আমি তাঁর কোন কিছুই ছেড়ে দিতে পারি না। কেননা আমি আশংকা করি যে, তাঁর কোন কথা ছেড়ে দিয়ে আমি পথভ্রষ্ট হয়ে না যাই। অবশ্য আল্লাহর রসূল (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) -এর মদীনার সদকাকে ‘উমর (রাঃ) ‘আলী ও ‘আব্বাস (রাঃ) -এর নিকট হস্তান্তর করেন। আর খায়বার ও ফাদাকের ভূমিকে আগের মত রেখে দেন। ‘উমর (রাঃ) এ প্রসঙ্গে বলেন, ‘এ সম্পত্তি দু’টিকে রসূলুল্লাহ্‌ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) জরুরী প্রয়োজন পূরণ ও বিপদকালীন সময়ে ব্যয়ের জন্য রেখেছিলেন। সুতরাং এ সম্পত্তি দু’টি তাঁরই দায়িত্বে নিয়োজিত থাকবে, যিনি মুসলিমদের শাসক খলীফা হবেন।’ যুহরী (রহঃ) বলেন, এ সম্পত্তি দু’টির ব্যবস্থাপনা আজ পর্যন্ত ও রকমই আছে।

উম্মুল মু’মিনীন ‘আয়িশা (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ

অতঃপর আবূ বকর (রাঃ) তাঁকে বললেন, আল্লাহর রসূল (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন, ‘আমাদের পরিত্যক্ত সম্পদ বণ্টিত হবে না, আমরা যা ছেড়ে যাই, তা সদকা রূপে গণ্য হয়।’ এতে আল্লাহর রসূলের কন্যা ফাতিমা (রাঃ) অসুন্তুষ্ট হলেন এবং আবূ বক্‌র সিদ্দিক (রাঃ) -এর সঙ্গে কথাবার্তা বলা ছেড়ে দিলেন। এ অবস্থা তাঁর মৃত্যু পর্যন্ত বহাল ছিল। আল্লাহর রসূল (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) -এর ওফাতের পর ফাতিমা (রাঃ) ছয় মাস জীবিত ছিলেন। ‘আয়িশা (রাঃ) বলেন, ফাতিমা (রাঃ) আবূ বক্‌র সিদ্দিক (রাঃ) -এর নিকটা আল্লাহর রসূল (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) কর্তৃক ত্যাজ্য খায়বার ও ফাদাকের ভূমি এবং মদীনার সদকাতে তাঁর অংশ দাবী করেছিলেন। আবূ বকর (রাঃ) তাঁকে তা প্রদানে অস্বীকৃতি জানান এবং তিনি বলেন, আল্লাহর রসূল (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) যা ‘আমল করতেন, আমি তাই ‘আমল করব। আমি তাঁর কোন কিছুই ছেড়ে দিতে পারি না। কেননা আমি আশংকা করি যে, তাঁর কোন কথা ছেড়ে দিয়ে আমি পথভ্রষ্ট হয়ে না যাই। অবশ্য আল্লাহর রসূল (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) -এর মদীনার সদকাকে ‘উমর (রাঃ) ‘আলী ও ‘আব্বাস (রাঃ) -এর নিকট হস্তান্তর করেন। আর খায়বার ও ফাদাকের ভূমিকে আগের মত রেখে দেন। ‘উমর (রাঃ) এ প্রসঙ্গে বলেন, ‘এ সম্পত্তি দু’টিকে রসূলুল্লাহ্‌ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) জরুরী প্রয়োজন পূরণ ও বিপদকালীন সময়ে ব্যয়ের জন্য রেখেছিলেন। সুতরাং এ সম্পত্তি দু’টি তাঁরই দায়িত্বে নিয়োজিত থাকবে, যিনি মুসলিমদের শাসক খলীফা হবেন।’ যুহরী (রহঃ) বলেন, এ সম্পত্তি দু’টির ব্যবস্থাপনা আজ পর্যন্ত ও রকমই আছে।

فقال لها أبو بكر إن رسول الله قال لا نورث ما تركنا صدقة فغضبت فاطمة بنت رسول الله فهجرت أبا بكر فلم تزل مهاجرته حتى توفيت وعاشت بعد رسول الله صلى الله عليه وسلم ستة أشهر قالت وكانت فاطمة تسأل أبا بكر نصيبها مما ترك رسول الله صلى الله عليه وسلم من خيبر وفدك وصدقته بالمدينة فأبى أبو بكر عليها ذلك وقال لست تاركا شيئا كان رسول الله صلى الله عليه وسلم يعمل به إلا عملت به فإني أخشى إن تركت شيئا من أمره أن أزيغ فأما صدقته بالمدينة فدفعها عمر إلى علي وعباس وأما خيبر وفدك فأمسكها عمر وقال هما صدقة رسول الله صلى الله عليه وسلم كانتا لحقوقه التي تعروه ونوائبه وأمرهما إلى من ولي الأمر قال فهما على ذلك إلى اليوم قال أبو عبد الله اعتراك افتعلت من عروته فأصبته ومنه يعروه واعتراني


সহিহ বুখারী ৩০৯২

حدثنا عبد العزيز بن عبد الله، حدثنا إبراهيم بن سعد، عن صالح، عن ابن شهاب، قال أخبرني عروة بن الزبير، أن عائشة أم المؤمنين ـ رضى الله عنها ـ أخبرته أن فاطمة ـ عليها السلام ـ ابنة رسول الله صلى الله عليه وسلم سألت أبا بكر الصديق بعد وفاة رسول الله صلى الله عليه وسلم أن يقسم لها ميراثها، ما ترك رسول الله صلى الله عليه وسلم مما أفاء الله عليه‏.‏ فقال لها أبو بكر إن رسول الله صلى الله عليه وسلم قال ‏ "‏ لا نورث ما تركنا صدقة ‏"‏‏.‏ فغضبت فاطمة بنت رسول الله صلى الله عليه وسلم فهجرت أبا بكر، فلم تزل مهاجرته حتى توفيت وعاشت بعد رسول الله صلى الله عليه وسلم ستة أشهر‏.‏ قالت وكانت فاطمة تسأل أبا بكر نصيبها مما ترك رسول الله صلى الله عليه وسلم من خيبر وفدك وصدقته بالمدينة، فأبى أبو بكر عليها ذلك، وقال لست تاركا شيئا كان رسول الله صلى الله عليه وسلم يعمل به إلا عملت به، فإني أخشى إن تركت شيئا من أمره أن أزيغ‏.‏ فأما صدقته بالمدينة فدفعها عمر إلى علي وعباس، فأما خيبر وفدك فأمسكها عمر وقال هما صدقة رسول الله صلى الله عليه وسلم كانتا لحقوقه التي تعروه ونوائبه، وأمرهما إلى من ولي الأمر‏.‏ قال فهما على ذلك إلى اليوم‏.‏ قال أبو عبد الله اعتراك افتعلت من عروته فأصبته ومنه يعروه واعتراني

উম্মুল মু’মিনীন ‘আয়িশা (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ

তিনি বলেন, ফাতিমা বিনতে আল্লাহর রসূল (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) আবূ বক্‌র সিদ্দীক (রাঃ) -এর নিকট আল্লাহর রসূল (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) -এর ইন্‌তিকালের পর তাঁর মিরাস বণ্টনের দাবী করেন। যা আল্লাহর রসূল (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) ফায় হিসেবে আল্লাহ তা‘আলা কর্তৃক তাঁকে প্রদত্ত সম্পদ হতে রেখে গেছেন।

উম্মুল মু’মিনীন ‘আয়িশা (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ

তিনি বলেন, ফাতিমা বিনতে আল্লাহর রসূল (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) আবূ বক্‌র সিদ্দীক (রাঃ) -এর নিকট আল্লাহর রসূল (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) -এর ইন্‌তিকালের পর তাঁর মিরাস বণ্টনের দাবী করেন। যা আল্লাহর রসূল (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) ফায় হিসেবে আল্লাহ তা‘আলা কর্তৃক তাঁকে প্রদত্ত সম্পদ হতে রেখে গেছেন।

حدثنا عبد العزيز بن عبد الله، حدثنا إبراهيم بن سعد، عن صالح، عن ابن شهاب، قال أخبرني عروة بن الزبير، أن عائشة أم المؤمنين ـ رضى الله عنها ـ أخبرته أن فاطمة ـ عليها السلام ـ ابنة رسول الله صلى الله عليه وسلم سألت أبا بكر الصديق بعد وفاة رسول الله صلى الله عليه وسلم أن يقسم لها ميراثها، ما ترك رسول الله صلى الله عليه وسلم مما أفاء الله عليه‏.‏ فقال لها أبو بكر إن رسول الله صلى الله عليه وسلم قال ‏ "‏ لا نورث ما تركنا صدقة ‏"‏‏.‏ فغضبت فاطمة بنت رسول الله صلى الله عليه وسلم فهجرت أبا بكر، فلم تزل مهاجرته حتى توفيت وعاشت بعد رسول الله صلى الله عليه وسلم ستة أشهر‏.‏ قالت وكانت فاطمة تسأل أبا بكر نصيبها مما ترك رسول الله صلى الله عليه وسلم من خيبر وفدك وصدقته بالمدينة، فأبى أبو بكر عليها ذلك، وقال لست تاركا شيئا كان رسول الله صلى الله عليه وسلم يعمل به إلا عملت به، فإني أخشى إن تركت شيئا من أمره أن أزيغ‏.‏ فأما صدقته بالمدينة فدفعها عمر إلى علي وعباس، فأما خيبر وفدك فأمسكها عمر وقال هما صدقة رسول الله صلى الله عليه وسلم كانتا لحقوقه التي تعروه ونوائبه، وأمرهما إلى من ولي الأمر‏.‏ قال فهما على ذلك إلى اليوم‏.‏ قال أبو عبد الله اعتراك افتعلت من عروته فأصبته ومنه يعروه واعتراني


সহিহ বুখারী ৩০৯১

حدثنا عبدان، أخبرنا عبد الله، أخبرنا يونس، عن الزهري، قال أخبرني علي بن الحسين، أن حسين بن علي، عليهما السلام أخبره أن عليا قال كانت لي شارف من نصيبي من المغنم يوم بدر، وكان النبي صلى الله عليه وسلم أعطاني شارفا من الخمس، فلما أردت أن أبتني بفاطمة بنت رسول الله صلى الله عليه وسلم واعدت رجلا صواغا من بني قينقاع، أن يرتحل معي فنأتي بإذخر أردت أن أبيعه الصواغين، وأستعين به في وليمة عرسي، فبينا أنا أجمع لشارفى متاعا من الأقتاب والغرائر والحبال، وشارفاى مناخان إلى جنب حجرة رجل من الأنصار، رجعت حين جمعت ما جمعت، فإذا شارفاى قد اجتب أسنمتهما وبقرت خواصرهما، وأخذ من أكبادهما، فلم أملك عينى حين رأيت ذلك المنظر منهما، فقلت من فعل هذا فقالوا فعل حمزة بن عبد المطلب، وهو في هذا البيت في شرب من الأنصار‏.‏ فانطلقت حتى أدخل على النبي صلى الله عليه وسلم وعنده زيد بن حارثة، فعرف النبي صلى الله عليه وسلم في وجهي الذي لقيت، فقال النبي صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ ما لك ‏"‏ فقلت يا رسول الله، ما رأيت كاليوم قط، عدا حمزة على ناقتى، فأجب أسنمتهما وبقر خواصرهما، وها هو ذا في بيت معه شرب‏.‏ فدعا النبي صلى الله عليه وسلم بردائه فارتدى ثم انطلق يمشي، واتبعته أنا وزيد بن حارثة حتى جاء البيت الذي فيه حمزة، فاستأذن فأذنوا لهم فإذا هم شرب، فطفق رسول الله صلى الله عليه وسلم يلوم حمزة فيما فعل، فإذا حمزة قد ثمل محمرة عيناه، فنظر حمزة إلى رسول الله صلى الله عليه وسلم، ثم صعد النظر فنظر إلى ركبته، ثم صعد النظر فنظر إلى سرته، ثم صعد النظر فنظر إلى وجهه ثم قال حمزة هل أنتم إلا عبيد لأبي فعرف رسول الله صلى الله عليه وسلم أنه قد ثمل، فنكص رسول الله صلى الله عليه وسلم على عقبيه القهقرى وخرجنا معه‏.‏

‘আলী (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ

তিনি বলেন, বদর যুদ্ধের গনীমতের মালের মধ্য হতে যে অংশ আমি পেয়েছিলাম, তাতে একটি জওয়ান উটনীও ছিল। আর নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) খুমুসের মধ্য হতে আমাকে একটি জওয়ান উটনী দান করেন। আর আমি যখন আল্লাহর রসূল (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) -এর কন্যা ফাতিমা (রাঃ) -এর সঙ্গে বাসর যাপন করব, তখন আমি বানূ কায়নুকা গোত্রের এক স্বর্ণকারের সঙ্গে এ মর্মে চুক্তিবদ্ধ হলাম যে, সে আমার সঙ্গে যাবে এবং আমরা উভয়ে মিলে ইযখির ঘাস সংগ্রহ করে আনব। আমার ইচ্ছা ছিল তা স্বর্ণকারদের নিকট বিক্রয় করে তা দিয়ে আমার বিবাহের ওয়ালীমা সম্পন্ন করব। ইতোমধ্যে আমি যখন আমার জওয়ান উটনী দু’টির জন্য আসবাবপত্র যেমন পালান, থলে ও রশি ইত্যাদি একত্রিত করছিলাম, আর আমার উটনী দু’টি এক আনসারীর ঘরের পার্শ্বে বসা ছিল। আমি আসবাবপত্র যোগাড় করে এসে দেখি উট দু’টির কুঁজ কেটে ফেলা হয়েছে এবং কোমরের দিকে পেট কেটে কলিজা বের করে নেয়া হয়েছে। উটনী দু’টির এ হাল দেখে আমি অশ্রু চেপে রাখতে পারলাম না। আমি বললাম, কে এমনটি করেছে? লোকেরা বলল, ‘হামযা ইব্‌নু ‘আবদুল মুত্তালিব এমনটি করেছে। সে এ ঘরে আছে এবং শরাব পানকারী কতিপয় আনসারীর সঙ্গে আছে।’ আমি নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) -এর নিকট চলে গেলাম। তখন তাঁর নিকট যায়দ ইব্‌নু হারিসা (রাঃ) উপস্থিত ছিলেন। রসূলুল্লাহ্‌ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) আমার চেহারা দেখে আমার মানসিক অবস্থা উপলব্ধি করতে পারলেন। তখন নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন, তোমার কী হয়েছে? আমি বললাম, হে আল্লাহর রসূল! আমি আজকের মত দুঃখজনক অবস্থা দেখিনি। হামযা আমার উট দু’টির উপর অত্যাচার করেছে। সে দু’টির কুঁজ কেটে ফেলেছে এবং পাঁজর ফেড়ে ফেলেছে। আর সে এখন অমুক ঘরে শরাব পানকারী দলের সঙ্গে আছে।’ তখন নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তাঁর চাদরখানি আনতে আদেশ করলেন এবং চাদরখানি জড়িয়ে পায়ে হেঁটে চললেন। আমি এবং যায়দ ইব্‌নু হারিসা (রাঃ) তাঁর অনুসরণ করলাম। হামযা যে ঘরে ছিল সেখানে পৌঁছে আল্লাহর রসূল (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) ঘরে প্রবেশের অনুমতি চাইলেন। তারা অনুমতি দিল। তখন তারা শরাব পানে বিভোর ছিল। আল্লাহর রসূল (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) হামযাকে তার কাজের জন্য তিরস্কার করতে লাগলেন। হামযা তখন পূর্ণ নেশাগ্রস্থ। তার চক্ষু দু’টি ছিল রক্তলাল। হামযা তখন আল্লাহর রসূল (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) -এর প্রতি তাকাল। অতঃপর সে তীক্ষ্ণ দৃষ্টিতে তাকাল এবং তাঁর হাঁটু পানে তাকাল। আবার তীক্ষ্ণ দৃষ্টিতে তাঁর নাভির দিকে তাকাল। আবার সে তীক্ষ্ণ দৃষ্টিতে তাঁর মুখমণ্ডলের দিকে তাকাল। অতঃপর হামযা বলল, তোমরাই তো আমার পিতার গোলাম। এ অবস্থা দেখে আল্লাহর রসূল (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বুঝতে পারলেন, সে এখন পূর্ণ নেশাগ্রস্থ আছে। তখন আল্লাহর রসূল (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) পেছনে হেঁটে সরে আসলেন। আর আমরাও তাঁর সঙ্গে বেরিয়ে আসলাম।

‘আলী (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ

তিনি বলেন, বদর যুদ্ধের গনীমতের মালের মধ্য হতে যে অংশ আমি পেয়েছিলাম, তাতে একটি জওয়ান উটনীও ছিল। আর নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) খুমুসের মধ্য হতে আমাকে একটি জওয়ান উটনী দান করেন। আর আমি যখন আল্লাহর রসূল (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) -এর কন্যা ফাতিমা (রাঃ) -এর সঙ্গে বাসর যাপন করব, তখন আমি বানূ কায়নুকা গোত্রের এক স্বর্ণকারের সঙ্গে এ মর্মে চুক্তিবদ্ধ হলাম যে, সে আমার সঙ্গে যাবে এবং আমরা উভয়ে মিলে ইযখির ঘাস সংগ্রহ করে আনব। আমার ইচ্ছা ছিল তা স্বর্ণকারদের নিকট বিক্রয় করে তা দিয়ে আমার বিবাহের ওয়ালীমা সম্পন্ন করব। ইতোমধ্যে আমি যখন আমার জওয়ান উটনী দু’টির জন্য আসবাবপত্র যেমন পালান, থলে ও রশি ইত্যাদি একত্রিত করছিলাম, আর আমার উটনী দু’টি এক আনসারীর ঘরের পার্শ্বে বসা ছিল। আমি আসবাবপত্র যোগাড় করে এসে দেখি উট দু’টির কুঁজ কেটে ফেলা হয়েছে এবং কোমরের দিকে পেট কেটে কলিজা বের করে নেয়া হয়েছে। উটনী দু’টির এ হাল দেখে আমি অশ্রু চেপে রাখতে পারলাম না। আমি বললাম, কে এমনটি করেছে? লোকেরা বলল, ‘হামযা ইব্‌নু ‘আবদুল মুত্তালিব এমনটি করেছে। সে এ ঘরে আছে এবং শরাব পানকারী কতিপয় আনসারীর সঙ্গে আছে।’ আমি নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) -এর নিকট চলে গেলাম। তখন তাঁর নিকট যায়দ ইব্‌নু হারিসা (রাঃ) উপস্থিত ছিলেন। রসূলুল্লাহ্‌ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) আমার চেহারা দেখে আমার মানসিক অবস্থা উপলব্ধি করতে পারলেন। তখন নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন, তোমার কী হয়েছে? আমি বললাম, হে আল্লাহর রসূল! আমি আজকের মত দুঃখজনক অবস্থা দেখিনি। হামযা আমার উট দু’টির উপর অত্যাচার করেছে। সে দু’টির কুঁজ কেটে ফেলেছে এবং পাঁজর ফেড়ে ফেলেছে। আর সে এখন অমুক ঘরে শরাব পানকারী দলের সঙ্গে আছে।’ তখন নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তাঁর চাদরখানি আনতে আদেশ করলেন এবং চাদরখানি জড়িয়ে পায়ে হেঁটে চললেন। আমি এবং যায়দ ইব্‌নু হারিসা (রাঃ) তাঁর অনুসরণ করলাম। হামযা যে ঘরে ছিল সেখানে পৌঁছে আল্লাহর রসূল (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) ঘরে প্রবেশের অনুমতি চাইলেন। তারা অনুমতি দিল। তখন তারা শরাব পানে বিভোর ছিল। আল্লাহর রসূল (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) হামযাকে তার কাজের জন্য তিরস্কার করতে লাগলেন। হামযা তখন পূর্ণ নেশাগ্রস্থ। তার চক্ষু দু’টি ছিল রক্তলাল। হামযা তখন আল্লাহর রসূল (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) -এর প্রতি তাকাল। অতঃপর সে তীক্ষ্ণ দৃষ্টিতে তাকাল এবং তাঁর হাঁটু পানে তাকাল। আবার তীক্ষ্ণ দৃষ্টিতে তাঁর নাভির দিকে তাকাল। আবার সে তীক্ষ্ণ দৃষ্টিতে তাঁর মুখমণ্ডলের দিকে তাকাল। অতঃপর হামযা বলল, তোমরাই তো আমার পিতার গোলাম। এ অবস্থা দেখে আল্লাহর রসূল (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বুঝতে পারলেন, সে এখন পূর্ণ নেশাগ্রস্থ আছে। তখন আল্লাহর রসূল (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) পেছনে হেঁটে সরে আসলেন। আর আমরাও তাঁর সঙ্গে বেরিয়ে আসলাম।

حدثنا عبدان، أخبرنا عبد الله، أخبرنا يونس، عن الزهري، قال أخبرني علي بن الحسين، أن حسين بن علي، عليهما السلام أخبره أن عليا قال كانت لي شارف من نصيبي من المغنم يوم بدر، وكان النبي صلى الله عليه وسلم أعطاني شارفا من الخمس، فلما أردت أن أبتني بفاطمة بنت رسول الله صلى الله عليه وسلم واعدت رجلا صواغا من بني قينقاع، أن يرتحل معي فنأتي بإذخر أردت أن أبيعه الصواغين، وأستعين به في وليمة عرسي، فبينا أنا أجمع لشارفى متاعا من الأقتاب والغرائر والحبال، وشارفاى مناخان إلى جنب حجرة رجل من الأنصار، رجعت حين جمعت ما جمعت، فإذا شارفاى قد اجتب أسنمتهما وبقرت خواصرهما، وأخذ من أكبادهما، فلم أملك عينى حين رأيت ذلك المنظر منهما، فقلت من فعل هذا فقالوا فعل حمزة بن عبد المطلب، وهو في هذا البيت في شرب من الأنصار‏.‏ فانطلقت حتى أدخل على النبي صلى الله عليه وسلم وعنده زيد بن حارثة، فعرف النبي صلى الله عليه وسلم في وجهي الذي لقيت، فقال النبي صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ ما لك ‏"‏ فقلت يا رسول الله، ما رأيت كاليوم قط، عدا حمزة على ناقتى، فأجب أسنمتهما وبقر خواصرهما، وها هو ذا في بيت معه شرب‏.‏ فدعا النبي صلى الله عليه وسلم بردائه فارتدى ثم انطلق يمشي، واتبعته أنا وزيد بن حارثة حتى جاء البيت الذي فيه حمزة، فاستأذن فأذنوا لهم فإذا هم شرب، فطفق رسول الله صلى الله عليه وسلم يلوم حمزة فيما فعل، فإذا حمزة قد ثمل محمرة عيناه، فنظر حمزة إلى رسول الله صلى الله عليه وسلم، ثم صعد النظر فنظر إلى ركبته، ثم صعد النظر فنظر إلى سرته، ثم صعد النظر فنظر إلى وجهه ثم قال حمزة هل أنتم إلا عبيد لأبي فعرف رسول الله صلى الله عليه وسلم أنه قد ثمل، فنكص رسول الله صلى الله عليه وسلم على عقبيه القهقرى وخرجنا معه‏.‏


সহিহ বুখারী ৩০৯৪

حدثنا إسحاق بن محمد الفروي، حدثنا مالك بن أنس، عن ابن شهاب، عن مالك بن أوس بن الحدثان،، وكان، محمد بن جبير ذكر لي ذكرا من حديثه ذلك، فانطلقت حتى أدخل على مالك بن أوس، فسألته عن ذلك الحديث فقال مالك بينا أنا جالس في أهلي حين متع النهار، إذا رسول عمر بن الخطاب يأتيني فقال أجب أمير المؤمنين‏.‏ فانطلقت معه حتى أدخل على عمر، فإذا هو جالس على رمال سرير، ليس بينه وبينه فراش متكئ على وسادة من أدم، فسلمت عليه ثم جلست فقال يا مال، إنه قدم علينا من قومك أهل أبيات، وقد أمرت فيهم برضخ فاقبضه فاقسمه بينهم‏.‏ فقلت يا أمير المؤمنين، لو أمرت به غيري‏.‏ قال اقبضه أيها المرء‏.‏ فبينا أنا جالس عنده أتاه حاجبه يرفا فقال هل لك في عثمان وعبد الرحمن بن عوف والزبير وسعد بن أبي وقاص يستأذنون قال نعم‏.‏ فأذن لهم فدخلوا فسلموا وجلسوا، ثم جلس يرفا يسيرا ثم قال هل لك في علي وعباس قال نعم‏.‏ فأذن لهما، فدخلا فسلما فجلسا، فقال عباس يا أمير المؤمنين، اقض بيني وبين هذا‏.‏ وهما يختصمان فيما أفاء الله على رسوله صلى الله عليه وسلم من بني النضير‏.‏ فقال الرهط عثمان وأصحابه يا أمير المؤمنين، اقض بينهما وأرح أحدهما من الآخر‏.‏ قال عمر تيدكم، أنشدكم بالله الذي بإذنه تقوم السماء والأرض، هل تعلمون أن رسول الله صلى الله عليه وسلم قال ‏"‏ لا نورث ما تركنا صدقة ‏"‏‏.‏ يريد رسول الله صلى الله عليه وسلم نفسه‏.‏ قال الرهط قد قال ذلك‏.‏ فأقبل عمر على علي وعباس فقال أنشدكما الله، أتعلمان أن رسول الله صلى الله عليه وسلم قد قال ذلك قالا قد قال ذلك‏.‏ قال عمر فإني أحدثكم عن هذا الأمر، إن الله قد خص رسوله صلى الله عليه وسلم في هذا الفىء بشىء لم يعطه أحدا غيره ـ ثم قرأ ‏{‏وما أفاء الله على رسوله منهم‏}‏ إلى قوله ‏{‏قدير‏}‏ ـ فكانت هذه خالصة لرسول الله صلى الله عليه وسلم‏.‏ والله ما احتازها دونكم، ولا استأثر بها عليكم قد أعطاكموه، وبثها فيكم حتى بقي منها هذا المال، فكان رسول الله صلى الله عليه وسلم ينفق على أهله نفقة سنتهم من هذا المال، ثم يأخذ ما بقي فيجعله مجعل مال الله، فعمل رسول الله صلى الله عليه وسلم بذلك حياته، أنشدكم بالله هل تعلمون ذلك قالوا نعم‏.‏ ثم قال لعلي وعباس أنشدكما بالله هل تعلمان ذلك قال عمر ثم توفى الله نبيه صلى الله عليه وسلم فقال أبو بكر أنا ولي رسول الله صلى الله عليه وسلم‏.‏ فقبضها أبو بكر، فعمل فيها بما عمل رسول الله صلى الله عليه وسلم، والله يعلم إنه فيها لصادق بار راشد تابع للحق، ثم توفى الله أبا بكر، فكنت أنا ولي أبي بكر، فقبضتها سنتين من إمارتي، أعمل فيها بما عمل رسول الله صلى الله عليه وسلم وما عمل فيها أبو بكر، والله يعلم إني فيها لصادق بار راشد تابع للحق، ثم جئتماني تكلماني وكلمتكما واحدة، وأمركما واحد، جئتني يا عباس تسألني نصيبك من ابن أخيك، وجاءني هذا ـ يريد عليا ـ يريد نصيب امرأته من أبيها، فقلت لكما إن رسول الله صلى الله عليه وسلم قال ‏"‏ لا نورث ما تركنا صدقة ‏"‏‏.‏ فلما بدا لي أن أدفعه إليكما قلت إن شئتما دفعتها إليكما على أن عليكما عهد الله وميثاقه لتعملان فيها بما عمل فيها رسول الله صلى الله عليه وسلم، وبما عمل فيها أبو بكر، وبما عملت فيها منذ وليتها، فقلتما ادفعها إلينا‏.‏ فبذلك دفعتها إليكما، فأنشدكم بالله، هل دفعتها إليهما بذلك قال الرهط نعم‏.‏ ثم أقبل على علي وعباس فقال أنشدكما بالله هل دفعتها إليكما بذلك قالا نعم‏.‏ قال فتلتمسان مني قضاء غير ذلك فوالله الذي بإذنه تقوم السماء والأرض، لا أقضي فيها قضاء غير ذلك، فإن عجزتما عنها فادفعاها إلى، فإني أكفيكماها‏.‏

মালিক ইব্‌নু আউস ইব্‌নু হাদাসান (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ

তিনি বলেন, একবার আমি আমার পরিবার-পরিজনের সঙ্গে বসা ছিলাম, যখন রোদ প্রখর হল তখন ‘উমর ইব্‌নু খাত্তাব (রাঃ) -এর দূত আমার নিকট এসে বলল, আমীরুল মু’মিনীন আপনাকে ডেকে পাঠিয়েছেন। আমি তার সঙ্গে রওয়ানা হয়ে ‘উমর (রাঃ) -এর নিকট পৌঁছলাম। দেখতে পেলাম, তিনি একটি চাটাইয়ের উপর উপবিষ্ট ছিলেন। যাতে কোন বিছানা ছিল না। আর তিনি চামড়ার একটি বালিশে হেলান দিয়ে উপবিষ্ট ছিলেন। আমি তাঁকে সালাম করে বসে পড়লাম। তিনি বললেন, হে মালিক! তোমার গোত্রের কতিপয় লোক আমার নিকট এসেছেন। আমি তাদের জন্য সামান্য পরিমাণ ত্রাণ সামগ্রী দেয়ার আদেশ দিয়েছি। তুমি তা বুঝে নিয়ে তাদের মধ্যে বণ্টন করে দাও। আমি বললাম, হে আমীরুল মু’মিনীন! এ কাজটির জন্য আমাকে ব্যতীত যদি অন্য কাউকে নির্দেশ দিতেন। তিনি বললেন, ওহে তুমি তা গ্রহণ কর। আমি তাঁর কাছেই বসা ছিলাম। এমন সময় তাঁর দারোয়ান ইয়ারফা এসে বলল, ‘উসমান ইব্‌নু আফ্‌ফান, ‘আবদুর রাহমান ইব্‌নু ‘আউফ, যুবাইর (ইব্‌নু আওয়াম) ও সা‘দ ইব্‌নু আবূ ওয়াক্‌কাস (রাঃ) আপনার নিকট প্রবেশের অনুমতি চাচ্ছেন। ‘উমর (রাঃ) বললেন, হ্যাঁ, তাঁদের আসতে দাও। তাঁরা এসে সালাম করে বসে পড়লেন। ইয়ারফা ক্ষণিক সময় পরে এসে বলল, ‘আলী ও ‘আব্বাস (রাঃ) আপনার সাক্ষাতের জন্য অনুমতির অপেক্ষায় আছেন। ‘উমর (রাঃ) বললেন, হ্যাঁ, তাঁদেরকে আসতে দাও। অতঃপর তাঁরা উভয়ে প্রবেশ করে সালাম করলেন এবং বসে পড়লেন। ‘আব্বাস (রাঃ) বললেন, হে আমীরুল মু’মিনীন! আমার ও এ ব্যক্তির মধ্যে মীমাংসা করে দিন। বানূ নাযীরের সম্পদ হতে আল্লাহ তা‘আলা আল্লাহর রসূল (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) -কে যা দান করেছিলেন, তা নিয়ে তাঁরা উভয়ে বিরোধ করেছিলেন। ‘উসমান (রাঃ) এবং তাঁর সাথীগণ বললেন, হ্যাঁ, আমীরুল মু’মিনীন! এঁদের মধ্যে মীমাংসা করে দিন এবং তাঁদের একজনকে অপরজন হতে নিশ্চিত করে দিন। ‘উমর (রাঃ) বললেন, একটু থামুন। আমি আপনাদেরকে সে মহান সত্তার শপথ দিয়ে বলছি, যাঁর আদেশে আসমান ও জমিন স্থির রয়েছে। আপনারা কি জানেন যে, রসূলুল্লাহ্‌ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন, আমাদের (নবীগণের) মীরাস বণ্টিত হয় না। আমরা যা রেখে যাই তা সদকারূপে গণ্য হয়? এর দ্বারা আল্লাহর রসূল (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) নিজেকেই উদ্দেশ্য করেছেন। ‘উসমান (রাঃ) ও তাঁর সাথীগণ বললেন, হ্যাঁ, আল্লাহর রসূল (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) এমন বলেছেন। অতঃপর ‘উমর (রাঃ) ‘আলী এবং আব্বাস (রাঃ) -এর প্রতি লক্ষ্য করে বললেন, আমি আপনাদের আল্লাহ্‌র কসম দিয়ে বলছি। আপনারা কি জানেন যে, আল্লাহর রসূল (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) এমন বলেছেন? তাঁরা উভয়ে বললেন, হ্যাঁ, তিনি এমন বলেছেন। ‘উমর (রাঃ) বললেন, এখন এ বিষয়টি সম্পর্কে আপনাদের বুঝিয়ে বলছি। ব্যাপার হলো এই যে, আল্লাহ তা‘আলা ফায়-এর সম্পদ হতে স্বীয় রসূল (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) -কে বিশেষভাবে দান করেছেন যা তিনি ব্যতীত কাউকেই দান করেননি। অতঃপর ‘উমর (রাঃ) নিম্নোক্ত আয়াত তিলাওয়াত করেনঃ (আরবী) আর আল্লাহ তা‘আলা তাঁর রসূল (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) -কে তাদের অর্থাৎ ইয়াহূদীদের নিকট হতে যে ফায় দিয়েছেন, তজ্জন্য তোমরা ঘোড়া কিংবা উটে আরোহণ করে যুদ্ধ করনি। আল্লাহ্‌ তা‘আলাই তো যাদের উপর ইচ্ছা তাঁর রসূলগণকে কর্তৃত্ব দান করেন। আল্লাহ তা‘আলা সর্ববিষয়ে সর্বশক্তিমান- (হাশর ৬)। সুতরাং এ সকল সম্পত্তি নির্দিষ্টরূপে আল্লাহর রসূল (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) -এর জন্য নির্ধারিত ছিল। কিন্তু আল্লাহর কসম! আল্লাহর রসূল (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) এ সকল সম্পত্তি নিজের জন্য নির্দিষ্ট করে রাখেননি এবং আপনাদের বাদ দিয়ে অন্য কাউকে দেননি। বরং আপনাদেরকেও দিয়েছেন এবং আপনাদের কাজেই ব্যয় করেছেন। এ সম্পত্তি হতে যা উদ্বৃত্ত রয়েছে, তা হতে রসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) নিজ পরিবার-পরিজনের বাৎসরিক খরচ নির্বাহ করতেন। অতঃপর যা অবশিষ্ট থাকতো, তা আল্লাহর সম্পদে জমা করে দিতেন। আল্লাহর রসূল (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) আজীবন এরূপই করেছেন। আপনাদেরকে আল্লাহর কসম দিচ্ছি, আপনারা কি তা জানেন? তাঁরা বললেন, হ্যাঁ, আমরা অবগত আছি। অতঃপর ‘উমর (রাঃ) ‘আলী ও ‘আব্বাস (রাঃ) -কে লক্ষ্য করে বললেন, আমি আপনাদের উভয়কে আল্লাহর কসম দিচ্ছি, আপনারা কি এ বিষয়ে অবগত আছেন? অতঃপর ‘উমর (রাঃ) বললেন, অতঃপর আল্লাহ তা‘আলা তাঁর নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) -কে ওফাত দিলেন তখন আবূ বকর (রাঃ) বললেন, আমি আল্লাহর রসূল (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) -এর পক্ষ হতে দায়িত্ব প্রাপ্ত একথা বলে তিনি এ সকল সম্পত্তি নিজ দায়িত্বে নিয়ে নেন এবং আল্লাহর রসূল (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) এ সবের আয়-উৎপাদন যে সব কাজে ব্যয় করতেন, সে সকল কাজে ব্যয় করেন। আল্লাহ তা‘আলা জানেন যে, তিনি এক্ষেত্রে সত্যবাদী, পুণ্যবান, সুপথপ্রাপ্ত ও সত্যাশ্রয়ী ছিলেন। অতঃপর আল্লাহ তা‘আলা আবূ বকর (রাঃ) -কে ওফাত দেন। এখন আমি আবূ বকর (রাঃ) -এর পক্ষ হতে দায়িত্বপ্রাপ্ত। আমি আমার খিলাফতকালের প্রথম দু’বছর এ সম্পত্তি আমার দায়িত্বে রেখেছি এবং এর দ্বারা আল্লাহর রসূল (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) ও আবূ বকর (রাঃ) যা যা করতেন, তা করেছি। আল্লাহ তা‘আলাই জানেন যে, আমি এক্ষেত্রে সত্যবাদী, পুণ্যবান, সুপথপ্রাপ্ত ও সত্যাশ্রয়ী রয়েছি। অতঃপর এখন আপনারা উভয়ে আমার নিকট এসেছেন। আর আমার সঙ্গে এ ব্যাপারে আলোচনা করেছেন এবং আপনাদের উভয়ের কথা একই। আর আপনাদের ব্যাপার একই। হে ‘আব্বাস (রাঃ)! আপনি আমার নিকট আপনার ভ্রাতুষ্পুত্রের সম্পত্তির অংশের দাবী নিয়ে এসেছেন আর ‘আলী (রাঃ) -কে উদ্দেশ্য করে বলেছেন যে, ইনি আমার নিকট তাঁর স্ত্রী কর্তৃক পিতার সম্পত্তিতে প্রাপ্য অংশ নিতে এসেছেন। আমি আপনাদের উভয়কেই বলছি যে, আল্লাহর রসূল (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন, ‘আমরা নবীগণের সম্পদ বণ্টিত হয় না, আমরা যা ছেড়ে যাই তা সদকারূপে গণ্য হয়।’ অতঃপর আমি সঙ্গত মনে করেছি যে, এ সম্পত্তিকে আপনাদের দায়িত্বে ছেড়ে দিব। এখন আমি আপনাদের বলছি যে, আপনারা যদি চান, তবে আমি এ সম্পত্তি আপনাদের নিকট সমর্পণ করে দিব। এ শর্তে যে, আপনাদের উপর আল্লাহ তা‘আলার প্রতিশ্রুতি ও অঙ্গীকার থাকবে, আপনারা এ সম্পত্তির আয় আমদানী সে সকল কাজে ব্যয় করবেন, যে সকল কাজে আল্লাহর রসূল (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম), আবূ বকর (রাঃ) ও আমি আমার খিলাফতকালে এ যাবৎ ব্যয় করে এসেছি। তদুত্তরে আপনারা বলছেন, এ সম্পত্তিকে আমাদের নিকট দিয়ে দিন। আমি উক্ত শর্তের উপর আপনাদের প্রতি সমর্পণ করেছি। আপনাদেরকে (উসমান (রাঃ) ও তাঁর সাথীগণকে) উদ্দেশ্য করে আমি আল্লাহ্‌র কসম দিচ্ছি যে, বলুন তো আমি কি তাঁদেরকে এ শর্তে এ সম্পত্তি সমর্পণ করেছি? তাঁরা বললেন, হ্যাঁ। অতঃপর ‘উমর (রাঃ) ‘আলী ও ‘আব্বাস (রাঃ) -এর প্রতি লক্ষ্য করে বললেন, আমি আপনাদের উভয়কে আল্লাহর নামে কসম দিচ্ছি, বলুন তো আমি কি এ শর্তে আপনাদের প্রতি এ সম্পত্তি সমর্পণ করেছি? তাঁরা উভয়ে বললেন, হ্যাঁ। অতঃপর ‘উমর (রাঃ) বললেন, আপনারা কি আমার নিকট এ ছাড়া অন্য কোন মীমাংসা চান? আল্লাহ্‌র কসম! যাঁর আদেশে আকাশ ও পৃথিবী আপন স্থানে প্রতিষ্ঠিত আছে, আমি এ ব্যাপারে এর বিপরীত কোন মীমাংসা করব না। যদি আপনারা এ শর্ত পালনে অক্ষম হন, তবে এ সম্পত্তি আমার দায়িত্বে ছেড়ে দিন। আপনাদের উভয়ের পক্ষ হতে এ সম্পত্তির দেখাশুনা করার জন্য আমিই যথেষ্ট।

মালিক ইব্‌নু আউস ইব্‌নু হাদাসান (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ

তিনি বলেন, একবার আমি আমার পরিবার-পরিজনের সঙ্গে বসা ছিলাম, যখন রোদ প্রখর হল তখন ‘উমর ইব্‌নু খাত্তাব (রাঃ) -এর দূত আমার নিকট এসে বলল, আমীরুল মু’মিনীন আপনাকে ডেকে পাঠিয়েছেন। আমি তার সঙ্গে রওয়ানা হয়ে ‘উমর (রাঃ) -এর নিকট পৌঁছলাম। দেখতে পেলাম, তিনি একটি চাটাইয়ের উপর উপবিষ্ট ছিলেন। যাতে কোন বিছানা ছিল না। আর তিনি চামড়ার একটি বালিশে হেলান দিয়ে উপবিষ্ট ছিলেন। আমি তাঁকে সালাম করে বসে পড়লাম। তিনি বললেন, হে মালিক! তোমার গোত্রের কতিপয় লোক আমার নিকট এসেছেন। আমি তাদের জন্য সামান্য পরিমাণ ত্রাণ সামগ্রী দেয়ার আদেশ দিয়েছি। তুমি তা বুঝে নিয়ে তাদের মধ্যে বণ্টন করে দাও। আমি বললাম, হে আমীরুল মু’মিনীন! এ কাজটির জন্য আমাকে ব্যতীত যদি অন্য কাউকে নির্দেশ দিতেন। তিনি বললেন, ওহে তুমি তা গ্রহণ কর। আমি তাঁর কাছেই বসা ছিলাম। এমন সময় তাঁর দারোয়ান ইয়ারফা এসে বলল, ‘উসমান ইব্‌নু আফ্‌ফান, ‘আবদুর রাহমান ইব্‌নু ‘আউফ, যুবাইর (ইব্‌নু আওয়াম) ও সা‘দ ইব্‌নু আবূ ওয়াক্‌কাস (রাঃ) আপনার নিকট প্রবেশের অনুমতি চাচ্ছেন। ‘উমর (রাঃ) বললেন, হ্যাঁ, তাঁদের আসতে দাও। তাঁরা এসে সালাম করে বসে পড়লেন। ইয়ারফা ক্ষণিক সময় পরে এসে বলল, ‘আলী ও ‘আব্বাস (রাঃ) আপনার সাক্ষাতের জন্য অনুমতির অপেক্ষায় আছেন। ‘উমর (রাঃ) বললেন, হ্যাঁ, তাঁদেরকে আসতে দাও। অতঃপর তাঁরা উভয়ে প্রবেশ করে সালাম করলেন এবং বসে পড়লেন। ‘আব্বাস (রাঃ) বললেন, হে আমীরুল মু’মিনীন! আমার ও এ ব্যক্তির মধ্যে মীমাংসা করে দিন। বানূ নাযীরের সম্পদ হতে আল্লাহ তা‘আলা আল্লাহর রসূল (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) -কে যা দান করেছিলেন, তা নিয়ে তাঁরা উভয়ে বিরোধ করেছিলেন। ‘উসমান (রাঃ) এবং তাঁর সাথীগণ বললেন, হ্যাঁ, আমীরুল মু’মিনীন! এঁদের মধ্যে মীমাংসা করে দিন এবং তাঁদের একজনকে অপরজন হতে নিশ্চিত করে দিন। ‘উমর (রাঃ) বললেন, একটু থামুন। আমি আপনাদেরকে সে মহান সত্তার শপথ দিয়ে বলছি, যাঁর আদেশে আসমান ও জমিন স্থির রয়েছে। আপনারা কি জানেন যে, রসূলুল্লাহ্‌ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন, আমাদের (নবীগণের) মীরাস বণ্টিত হয় না। আমরা যা রেখে যাই তা সদকারূপে গণ্য হয়? এর দ্বারা আল্লাহর রসূল (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) নিজেকেই উদ্দেশ্য করেছেন। ‘উসমান (রাঃ) ও তাঁর সাথীগণ বললেন, হ্যাঁ, আল্লাহর রসূল (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) এমন বলেছেন। অতঃপর ‘উমর (রাঃ) ‘আলী এবং আব্বাস (রাঃ) -এর প্রতি লক্ষ্য করে বললেন, আমি আপনাদের আল্লাহ্‌র কসম দিয়ে বলছি। আপনারা কি জানেন যে, আল্লাহর রসূল (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) এমন বলেছেন? তাঁরা উভয়ে বললেন, হ্যাঁ, তিনি এমন বলেছেন। ‘উমর (রাঃ) বললেন, এখন এ বিষয়টি সম্পর্কে আপনাদের বুঝিয়ে বলছি। ব্যাপার হলো এই যে, আল্লাহ তা‘আলা ফায়-এর সম্পদ হতে স্বীয় রসূল (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) -কে বিশেষভাবে দান করেছেন যা তিনি ব্যতীত কাউকেই দান করেননি। অতঃপর ‘উমর (রাঃ) নিম্নোক্ত আয়াত তিলাওয়াত করেনঃ (আরবী) আর আল্লাহ তা‘আলা তাঁর রসূল (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) -কে তাদের অর্থাৎ ইয়াহূদীদের নিকট হতে যে ফায় দিয়েছেন, তজ্জন্য তোমরা ঘোড়া কিংবা উটে আরোহণ করে যুদ্ধ করনি। আল্লাহ্‌ তা‘আলাই তো যাদের উপর ইচ্ছা তাঁর রসূলগণকে কর্তৃত্ব দান করেন। আল্লাহ তা‘আলা সর্ববিষয়ে সর্বশক্তিমান- (হাশর ৬)। সুতরাং এ সকল সম্পত্তি নির্দিষ্টরূপে আল্লাহর রসূল (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) -এর জন্য নির্ধারিত ছিল। কিন্তু আল্লাহর কসম! আল্লাহর রসূল (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) এ সকল সম্পত্তি নিজের জন্য নির্দিষ্ট করে রাখেননি এবং আপনাদের বাদ দিয়ে অন্য কাউকে দেননি। বরং আপনাদেরকেও দিয়েছেন এবং আপনাদের কাজেই ব্যয় করেছেন। এ সম্পত্তি হতে যা উদ্বৃত্ত রয়েছে, তা হতে রসূলুল্লাহ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) নিজ পরিবার-পরিজনের বাৎসরিক খরচ নির্বাহ করতেন। অতঃপর যা অবশিষ্ট থাকতো, তা আল্লাহর সম্পদে জমা করে দিতেন। আল্লাহর রসূল (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) আজীবন এরূপই করেছেন। আপনাদেরকে আল্লাহর কসম দিচ্ছি, আপনারা কি তা জানেন? তাঁরা বললেন, হ্যাঁ, আমরা অবগত আছি। অতঃপর ‘উমর (রাঃ) ‘আলী ও ‘আব্বাস (রাঃ) -কে লক্ষ্য করে বললেন, আমি আপনাদের উভয়কে আল্লাহর কসম দিচ্ছি, আপনারা কি এ বিষয়ে অবগত আছেন? অতঃপর ‘উমর (রাঃ) বললেন, অতঃপর আল্লাহ তা‘আলা তাঁর নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) -কে ওফাত দিলেন তখন আবূ বকর (রাঃ) বললেন, আমি আল্লাহর রসূল (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) -এর পক্ষ হতে দায়িত্ব প্রাপ্ত একথা বলে তিনি এ সকল সম্পত্তি নিজ দায়িত্বে নিয়ে নেন এবং আল্লাহর রসূল (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) এ সবের আয়-উৎপাদন যে সব কাজে ব্যয় করতেন, সে সকল কাজে ব্যয় করেন। আল্লাহ তা‘আলা জানেন যে, তিনি এক্ষেত্রে সত্যবাদী, পুণ্যবান, সুপথপ্রাপ্ত ও সত্যাশ্রয়ী ছিলেন। অতঃপর আল্লাহ তা‘আলা আবূ বকর (রাঃ) -কে ওফাত দেন। এখন আমি আবূ বকর (রাঃ) -এর পক্ষ হতে দায়িত্বপ্রাপ্ত। আমি আমার খিলাফতকালের প্রথম দু’বছর এ সম্পত্তি আমার দায়িত্বে রেখেছি এবং এর দ্বারা আল্লাহর রসূল (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) ও আবূ বকর (রাঃ) যা যা করতেন, তা করেছি। আল্লাহ তা‘আলাই জানেন যে, আমি এক্ষেত্রে সত্যবাদী, পুণ্যবান, সুপথপ্রাপ্ত ও সত্যাশ্রয়ী রয়েছি। অতঃপর এখন আপনারা উভয়ে আমার নিকট এসেছেন। আর আমার সঙ্গে এ ব্যাপারে আলোচনা করেছেন এবং আপনাদের উভয়ের কথা একই। আর আপনাদের ব্যাপার একই। হে ‘আব্বাস (রাঃ)! আপনি আমার নিকট আপনার ভ্রাতুষ্পুত্রের সম্পত্তির অংশের দাবী নিয়ে এসেছেন আর ‘আলী (রাঃ) -কে উদ্দেশ্য করে বলেছেন যে, ইনি আমার নিকট তাঁর স্ত্রী কর্তৃক পিতার সম্পত্তিতে প্রাপ্য অংশ নিতে এসেছেন। আমি আপনাদের উভয়কেই বলছি যে, আল্লাহর রসূল (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন, ‘আমরা নবীগণের সম্পদ বণ্টিত হয় না, আমরা যা ছেড়ে যাই তা সদকারূপে গণ্য হয়।’ অতঃপর আমি সঙ্গত মনে করেছি যে, এ সম্পত্তিকে আপনাদের দায়িত্বে ছেড়ে দিব। এখন আমি আপনাদের বলছি যে, আপনারা যদি চান, তবে আমি এ সম্পত্তি আপনাদের নিকট সমর্পণ করে দিব। এ শর্তে যে, আপনাদের উপর আল্লাহ তা‘আলার প্রতিশ্রুতি ও অঙ্গীকার থাকবে, আপনারা এ সম্পত্তির আয় আমদানী সে সকল কাজে ব্যয় করবেন, যে সকল কাজে আল্লাহর রসূল (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম), আবূ বকর (রাঃ) ও আমি আমার খিলাফতকালে এ যাবৎ ব্যয় করে এসেছি। তদুত্তরে আপনারা বলছেন, এ সম্পত্তিকে আমাদের নিকট দিয়ে দিন। আমি উক্ত শর্তের উপর আপনাদের প্রতি সমর্পণ করেছি। আপনাদেরকে (উসমান (রাঃ) ও তাঁর সাথীগণকে) উদ্দেশ্য করে আমি আল্লাহ্‌র কসম দিচ্ছি যে, বলুন তো আমি কি তাঁদেরকে এ শর্তে এ সম্পত্তি সমর্পণ করেছি? তাঁরা বললেন, হ্যাঁ। অতঃপর ‘উমর (রাঃ) ‘আলী ও ‘আব্বাস (রাঃ) -এর প্রতি লক্ষ্য করে বললেন, আমি আপনাদের উভয়কে আল্লাহর নামে কসম দিচ্ছি, বলুন তো আমি কি এ শর্তে আপনাদের প্রতি এ সম্পত্তি সমর্পণ করেছি? তাঁরা উভয়ে বললেন, হ্যাঁ। অতঃপর ‘উমর (রাঃ) বললেন, আপনারা কি আমার নিকট এ ছাড়া অন্য কোন মীমাংসা চান? আল্লাহ্‌র কসম! যাঁর আদেশে আকাশ ও পৃথিবী আপন স্থানে প্রতিষ্ঠিত আছে, আমি এ ব্যাপারে এর বিপরীত কোন মীমাংসা করব না। যদি আপনারা এ শর্ত পালনে অক্ষম হন, তবে এ সম্পত্তি আমার দায়িত্বে ছেড়ে দিন। আপনাদের উভয়ের পক্ষ হতে এ সম্পত্তির দেখাশুনা করার জন্য আমিই যথেষ্ট।

حدثنا إسحاق بن محمد الفروي، حدثنا مالك بن أنس، عن ابن شهاب، عن مالك بن أوس بن الحدثان،، وكان، محمد بن جبير ذكر لي ذكرا من حديثه ذلك، فانطلقت حتى أدخل على مالك بن أوس، فسألته عن ذلك الحديث فقال مالك بينا أنا جالس في أهلي حين متع النهار، إذا رسول عمر بن الخطاب يأتيني فقال أجب أمير المؤمنين‏.‏ فانطلقت معه حتى أدخل على عمر، فإذا هو جالس على رمال سرير، ليس بينه وبينه فراش متكئ على وسادة من أدم، فسلمت عليه ثم جلست فقال يا مال، إنه قدم علينا من قومك أهل أبيات، وقد أمرت فيهم برضخ فاقبضه فاقسمه بينهم‏.‏ فقلت يا أمير المؤمنين، لو أمرت به غيري‏.‏ قال اقبضه أيها المرء‏.‏ فبينا أنا جالس عنده أتاه حاجبه يرفا فقال هل لك في عثمان وعبد الرحمن بن عوف والزبير وسعد بن أبي وقاص يستأذنون قال نعم‏.‏ فأذن لهم فدخلوا فسلموا وجلسوا، ثم جلس يرفا يسيرا ثم قال هل لك في علي وعباس قال نعم‏.‏ فأذن لهما، فدخلا فسلما فجلسا، فقال عباس يا أمير المؤمنين، اقض بيني وبين هذا‏.‏ وهما يختصمان فيما أفاء الله على رسوله صلى الله عليه وسلم من بني النضير‏.‏ فقال الرهط عثمان وأصحابه يا أمير المؤمنين، اقض بينهما وأرح أحدهما من الآخر‏.‏ قال عمر تيدكم، أنشدكم بالله الذي بإذنه تقوم السماء والأرض، هل تعلمون أن رسول الله صلى الله عليه وسلم قال ‏"‏ لا نورث ما تركنا صدقة ‏"‏‏.‏ يريد رسول الله صلى الله عليه وسلم نفسه‏.‏ قال الرهط قد قال ذلك‏.‏ فأقبل عمر على علي وعباس فقال أنشدكما الله، أتعلمان أن رسول الله صلى الله عليه وسلم قد قال ذلك قالا قد قال ذلك‏.‏ قال عمر فإني أحدثكم عن هذا الأمر، إن الله قد خص رسوله صلى الله عليه وسلم في هذا الفىء بشىء لم يعطه أحدا غيره ـ ثم قرأ ‏{‏وما أفاء الله على رسوله منهم‏}‏ إلى قوله ‏{‏قدير‏}‏ ـ فكانت هذه خالصة لرسول الله صلى الله عليه وسلم‏.‏ والله ما احتازها دونكم، ولا استأثر بها عليكم قد أعطاكموه، وبثها فيكم حتى بقي منها هذا المال، فكان رسول الله صلى الله عليه وسلم ينفق على أهله نفقة سنتهم من هذا المال، ثم يأخذ ما بقي فيجعله مجعل مال الله، فعمل رسول الله صلى الله عليه وسلم بذلك حياته، أنشدكم بالله هل تعلمون ذلك قالوا نعم‏.‏ ثم قال لعلي وعباس أنشدكما بالله هل تعلمان ذلك قال عمر ثم توفى الله نبيه صلى الله عليه وسلم فقال أبو بكر أنا ولي رسول الله صلى الله عليه وسلم‏.‏ فقبضها أبو بكر، فعمل فيها بما عمل رسول الله صلى الله عليه وسلم، والله يعلم إنه فيها لصادق بار راشد تابع للحق، ثم توفى الله أبا بكر، فكنت أنا ولي أبي بكر، فقبضتها سنتين من إمارتي، أعمل فيها بما عمل رسول الله صلى الله عليه وسلم وما عمل فيها أبو بكر، والله يعلم إني فيها لصادق بار راشد تابع للحق، ثم جئتماني تكلماني وكلمتكما واحدة، وأمركما واحد، جئتني يا عباس تسألني نصيبك من ابن أخيك، وجاءني هذا ـ يريد عليا ـ يريد نصيب امرأته من أبيها، فقلت لكما إن رسول الله صلى الله عليه وسلم قال ‏"‏ لا نورث ما تركنا صدقة ‏"‏‏.‏ فلما بدا لي أن أدفعه إليكما قلت إن شئتما دفعتها إليكما على أن عليكما عهد الله وميثاقه لتعملان فيها بما عمل فيها رسول الله صلى الله عليه وسلم، وبما عمل فيها أبو بكر، وبما عملت فيها منذ وليتها، فقلتما ادفعها إلينا‏.‏ فبذلك دفعتها إليكما، فأنشدكم بالله، هل دفعتها إليهما بذلك قال الرهط نعم‏.‏ ثم أقبل على علي وعباس فقال أنشدكما بالله هل دفعتها إليكما بذلك قالا نعم‏.‏ قال فتلتمسان مني قضاء غير ذلك فوالله الذي بإذنه تقوم السماء والأرض، لا أقضي فيها قضاء غير ذلك، فإن عجزتما عنها فادفعاها إلى، فإني أكفيكماها‏.‏


সহিহ বুখারী > খুমুস আদায় করা দ্বীনের অন্তর্গত।

সহিহ বুখারী ৩০৯৫

حدثنا أبو النعمان، حدثنا حماد، عن أبي حمزة الضبعي، قال سمعت ابن عباس ـ رضى الله عنهما ـ يقول قدم وفد عبد القيس فقالوا يا رسول الله، إنا هذا الحى من ربيعة، بيننا وبينك كفار مضر، فلسنا نصل إليك إلا في الشهر الحرام، فمرنا بأمر نأخذ منه وندعو إليه من وراءنا‏.‏ قال ‏ "‏ آمركم بأربع، وأنهاكم عن أربع، الإيمان بالله شهادة أن لا إله إلا الله ـ وعقد بيده ـ وإقام الصلاة وإيتاء الزكاة وصيام رمضان، وأن تؤدوا لله خمس ما غنمتم، وأنهاكم عن الدباء والنقير والحنتم والمزفت ‏"‏‏.‏

ইব্‌নু ‘আব্বাস (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ

তিনি বলেন, ‘আবদুল কায়স গোত্রের প্রতিনিধি দল আল্লাহর রসূল (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) -এর নিকট এসে বলল, হে আল্লাহর রসূল! আমরা রাবী‘আ গোত্রের একটি উপদল। আপনার ও আমাদের মাঝে মুযার (কাফির) গোত্রের বসবাস। তাই আমরা আপনার নিকট নিষিদ্ধ মাসসমূহ ব্যতীত অন্য সময় আসতে পারিনা। কাজেই আপনি আমাদের এমন কাজে আদেশ করুন, যার উপর আমরা ‘আমল করব এবং আমাদের পশ্চাতে যারা রয়ে গেছে, তাদেরকেও তা ‘আমল করতে আহ্বান জানাব। তিনি [রসূলুল্লাহ্‌ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)] বললেন, আমি তোমাদেরকে চারটি কাজের আদেশ করছি এবং চারটি কাজ হতে নিষেধ করছি। আল্লাহর রসূল (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) হাতের অঙ্গুলিতে তা গণনা করে বলেন, আল্লাহ তা‘আলার প্রতি ঈমান আন। আর তা হচ্ছে এ সাক্ষ্যদান করা যে, আল্লাহ ব্যতীত অন্য কোন ইলাহ নেই আর সালাত প্রতিষ্ঠা করা, যাকাত দান করা, রমযান মাসে সিয়াম পালন করা এবং আল্লাহর জন্য গনীমত লদ্ধ সম্পদের এক পঞ্চমাংশ আদায় করা [১]। আর আমি তোমাদের শুকনো লাউয়ের খোলে তৈরি পাত্র, খেজুর গাছের মূল দ্বারা তৈরি পাত্র, সবুজ মটকা, আলকাতরার প্রলেপ দেয়া মটকা ব্যবহার করতে নিষেধ করছি।

ইব্‌নু ‘আব্বাস (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ

তিনি বলেন, ‘আবদুল কায়স গোত্রের প্রতিনিধি দল আল্লাহর রসূল (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) -এর নিকট এসে বলল, হে আল্লাহর রসূল! আমরা রাবী‘আ গোত্রের একটি উপদল। আপনার ও আমাদের মাঝে মুযার (কাফির) গোত্রের বসবাস। তাই আমরা আপনার নিকট নিষিদ্ধ মাসসমূহ ব্যতীত অন্য সময় আসতে পারিনা। কাজেই আপনি আমাদের এমন কাজে আদেশ করুন, যার উপর আমরা ‘আমল করব এবং আমাদের পশ্চাতে যারা রয়ে গেছে, তাদেরকেও তা ‘আমল করতে আহ্বান জানাব। তিনি [রসূলুল্লাহ্‌ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম)] বললেন, আমি তোমাদেরকে চারটি কাজের আদেশ করছি এবং চারটি কাজ হতে নিষেধ করছি। আল্লাহর রসূল (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) হাতের অঙ্গুলিতে তা গণনা করে বলেন, আল্লাহ তা‘আলার প্রতি ঈমান আন। আর তা হচ্ছে এ সাক্ষ্যদান করা যে, আল্লাহ ব্যতীত অন্য কোন ইলাহ নেই আর সালাত প্রতিষ্ঠা করা, যাকাত দান করা, রমযান মাসে সিয়াম পালন করা এবং আল্লাহর জন্য গনীমত লদ্ধ সম্পদের এক পঞ্চমাংশ আদায় করা [১]। আর আমি তোমাদের শুকনো লাউয়ের খোলে তৈরি পাত্র, খেজুর গাছের মূল দ্বারা তৈরি পাত্র, সবুজ মটকা, আলকাতরার প্রলেপ দেয়া মটকা ব্যবহার করতে নিষেধ করছি।

حدثنا أبو النعمان، حدثنا حماد، عن أبي حمزة الضبعي، قال سمعت ابن عباس ـ رضى الله عنهما ـ يقول قدم وفد عبد القيس فقالوا يا رسول الله، إنا هذا الحى من ربيعة، بيننا وبينك كفار مضر، فلسنا نصل إليك إلا في الشهر الحرام، فمرنا بأمر نأخذ منه وندعو إليه من وراءنا‏.‏ قال ‏ "‏ آمركم بأربع، وأنهاكم عن أربع، الإيمان بالله شهادة أن لا إله إلا الله ـ وعقد بيده ـ وإقام الصلاة وإيتاء الزكاة وصيام رمضان، وأن تؤدوا لله خمس ما غنمتم، وأنهاكم عن الدباء والنقير والحنتم والمزفت ‏"‏‏.‏


সহিহ বুখারী > নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) -এর ওফাতের পর তাঁর স্ত্রীগণের ব্যয় নির্বাহ।

সহিহ বুখারী ৩০৯৬

حدثنا عبد الله بن يوسف، أخبرنا مالك، عن أبي الزناد، عن الأعرج، عن أبي هريرة ـ رضى الله عنه ـ أن رسول الله صلى الله عليه وسلم قال ‏ "‏ لا يقتسم ورثتي دينارا، ما تركت بعد نفقة نسائي ومئونة عاملي فهو صدقة ‏"‏‏.‏

আবূ হুরায়রা (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ

আল্লাহর রসূল (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন, আমার উত্তরাধিকারীগণ একটি দীনারও ভাগ বণ্টন করে নিবে না। আমি যা রেখে যাব, তা হতে আমার স্ত্রীগণের খরচাদি ও আমার কর্মচারীদের ব্যয় নির্বাহের পর বাকী যা থাকবে, তা সদকারূপে গণ্য হবে।

আবূ হুরায়রা (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ

আল্লাহর রসূল (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বলেছেন, আমার উত্তরাধিকারীগণ একটি দীনারও ভাগ বণ্টন করে নিবে না। আমি যা রেখে যাব, তা হতে আমার স্ত্রীগণের খরচাদি ও আমার কর্মচারীদের ব্যয় নির্বাহের পর বাকী যা থাকবে, তা সদকারূপে গণ্য হবে।

حدثنا عبد الله بن يوسف، أخبرنا مالك، عن أبي الزناد، عن الأعرج، عن أبي هريرة ـ رضى الله عنه ـ أن رسول الله صلى الله عليه وسلم قال ‏ "‏ لا يقتسم ورثتي دينارا، ما تركت بعد نفقة نسائي ومئونة عاملي فهو صدقة ‏"‏‏.‏


সহিহ বুখারী ৩০৯৭

حدثنا عبد الله بن أبي شيبة، حدثنا أبو أسامة، حدثنا هشام، عن أبيه، عن عائشة، قالت توفي رسول الله صلى الله عليه وسلم وما في بيتي من شىء يأكله ذو كبد، إلا شطر شعير في رف لي، فأكلت منه حتى طال على، فكلته ففني‏.‏

‘আয়িশা (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ

তিনি বলেন, ‘রসূলুল্লাহ্‌ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) -এর ওফাত হল, তখন আমার ঘরে এমন কোন বস্তু ছিল না, যা খেয়ে কোন প্রাণী বাঁচতে পারে। শুধুমাত্র তাকের উপর আধা ওয়াসাক আটা পড়ে ছিল। আমি তা হতে খেতে থাকলাম এবং বেশ কিছুকাল কেটে গেল। অতঃপর আমি তা মেপে দেখলাম, ফলে তা শেষ হয়ে গেল।’

‘আয়িশা (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ

তিনি বলেন, ‘রসূলুল্লাহ্‌ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) -এর ওফাত হল, তখন আমার ঘরে এমন কোন বস্তু ছিল না, যা খেয়ে কোন প্রাণী বাঁচতে পারে। শুধুমাত্র তাকের উপর আধা ওয়াসাক আটা পড়ে ছিল। আমি তা হতে খেতে থাকলাম এবং বেশ কিছুকাল কেটে গেল। অতঃপর আমি তা মেপে দেখলাম, ফলে তা শেষ হয়ে গেল।’

حدثنا عبد الله بن أبي شيبة، حدثنا أبو أسامة، حدثنا هشام، عن أبيه، عن عائشة، قالت توفي رسول الله صلى الله عليه وسلم وما في بيتي من شىء يأكله ذو كبد، إلا شطر شعير في رف لي، فأكلت منه حتى طال على، فكلته ففني‏.‏


সহিহ বুখারী ৩০৯৮

حدثنا مسدد، حدثنا يحيى، عن سفيان، قال حدثني أبو إسحاق، قال سمعت عمرو بن الحارث، قال ما ترك النبي صلى الله عليه وسلم إلا سلاحه وبغلته البيضاء، وأرضا تركها صدقة‏.‏

‘আম্‌র ইব্‌নু হারিস (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ

তিনি বলেন, ‘নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তাঁর যুদ্ধাস্ত্র, সাদা খচ্চর ও কিছু যমীন ছাড়া কিছুই রেখে যাননি এবং তাও তিনি সদকা হিসেবে রেখে গেছেন।’

‘আম্‌র ইব্‌নু হারিস (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ

তিনি বলেন, ‘নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তাঁর যুদ্ধাস্ত্র, সাদা খচ্চর ও কিছু যমীন ছাড়া কিছুই রেখে যাননি এবং তাও তিনি সদকা হিসেবে রেখে গেছেন।’

حدثنا مسدد، حدثنا يحيى، عن سفيان، قال حدثني أبو إسحاق، قال سمعت عمرو بن الحارث، قال ما ترك النبي صلى الله عليه وسلم إلا سلاحه وبغلته البيضاء، وأرضا تركها صدقة‏.‏


সহিহ বুখারী > নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) -এর স্ত্রীগণের ঘর এবং যে সব ঘর তাঁদের সঙ্গে সম্পর্কিত সে সবের বর্ণনা।

সহিহ বুখারী ৩০৯৯

حدثنا حبان بن موسى، ومحمد، قالا أخبرنا عبد الله، أخبرنا معمر، ويونس، عن الزهري، قال أخبرني عبيد الله بن عبد الله بن عتبة بن مسعود، أن عائشة ـ رضى الله عنها ـ زوج النبي صلى الله عليه وسلم قالت لما ثقل رسول الله صلى الله عليه وسلم استأذن أزواجه أن يمرض في بيتي فأذن له‏.‏

‘উবায়দুল্লাহ ইব্‌নু ‘আব্দুল্লাহ ইব্‌নু উতবা ইব্‌নু মাস‘উদ (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ

নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) -এর স্ত্রী ‘আয়িশা (রাঃ) বলেছেন, ‘রসূলুল্লাহ্‌ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) -এর রোগ যখন অতি মাত্রায় বেড়ে গেল তখন তিনি আমার ঘরে অবস্থান করে রোগের সেবা শুশ্রুষার ব্যাপারে তাঁর অপর স্ত্রীগণের নিকট অনুমতি চান। তাঁকে অনুমতি দেয়া হয়।’

‘উবায়দুল্লাহ ইব্‌নু ‘আব্দুল্লাহ ইব্‌নু উতবা ইব্‌নু মাস‘উদ (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ

নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) -এর স্ত্রী ‘আয়িশা (রাঃ) বলেছেন, ‘রসূলুল্লাহ্‌ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) -এর রোগ যখন অতি মাত্রায় বেড়ে গেল তখন তিনি আমার ঘরে অবস্থান করে রোগের সেবা শুশ্রুষার ব্যাপারে তাঁর অপর স্ত্রীগণের নিকট অনুমতি চান। তাঁকে অনুমতি দেয়া হয়।’

حدثنا حبان بن موسى، ومحمد، قالا أخبرنا عبد الله، أخبرنا معمر، ويونس، عن الزهري، قال أخبرني عبيد الله بن عبد الله بن عتبة بن مسعود، أن عائشة ـ رضى الله عنها ـ زوج النبي صلى الله عليه وسلم قالت لما ثقل رسول الله صلى الله عليه وسلم استأذن أزواجه أن يمرض في بيتي فأذن له‏.‏


সহিহ বুখারী ৩১০৩

حدثنا إبراهيم بن المنذر، حدثنا أنس بن عياض، عن هشام، عن أبيه، أن عائشة ـ رضى الله عنها ـ قالت كان رسول الله صلى الله عليه وسلم يصلي العصر والشمس لم تخرج من حجرتها‏.‏

‘আয়িশা (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ

তিনি বলেন, রসূলুল্লাহ্‌ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) ‘আসরের সালাত তখন আদায় করতেন, যখন সূর্যের আলো তাঁর আঙ্গিণা থেকে বাহির হয়ে যায়নি।

‘আয়িশা (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ

তিনি বলেন, রসূলুল্লাহ্‌ (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) ‘আসরের সালাত তখন আদায় করতেন, যখন সূর্যের আলো তাঁর আঙ্গিণা থেকে বাহির হয়ে যায়নি।

حدثنا إبراهيم بن المنذر، حدثنا أنس بن عياض، عن هشام، عن أبيه، أن عائشة ـ رضى الله عنها ـ قالت كان رسول الله صلى الله عليه وسلم يصلي العصر والشمس لم تخرج من حجرتها‏.‏


সহিহ বুখারী ৩১০৪

حدثنا موسى بن إسماعيل، حدثنا جويرية، عن نافع، عن عبد الله ـ رضى الله عنه ـ قال قام النبي صلى الله عليه وسلم خطيبا فأشار نحو مسكن عائشة فقال ‏ "‏ هنا الفتنة ـ ثلاثا ـ من حيث يطلع قرن الشيطان ‏"‏‏.‏

‘আবদুল্লাহ ইব্‌নু ‘উমর (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ

তিনি বলেন, একবার নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) খুত্‌বা দিতে দাঁড়িয়েছিলেন। এ সময় তিনি ‘আয়িশা (রাঃ) -এর ঘরের দিকে ইশারা করে তিনবার বললেন, এ দিক থেকেই ফিত্‌না, যে দিক হতে সূর্য উদয়ের কালে শয়তান দাঁড়িয়ে থাকে।

‘আবদুল্লাহ ইব্‌নু ‘উমর (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ

তিনি বলেন, একবার নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) খুত্‌বা দিতে দাঁড়িয়েছিলেন। এ সময় তিনি ‘আয়িশা (রাঃ) -এর ঘরের দিকে ইশারা করে তিনবার বললেন, এ দিক থেকেই ফিত্‌না, যে দিক হতে সূর্য উদয়ের কালে শয়তান দাঁড়িয়ে থাকে।

حدثنا موسى بن إسماعيل، حدثنا جويرية، عن نافع، عن عبد الله ـ رضى الله عنه ـ قال قام النبي صلى الله عليه وسلم خطيبا فأشار نحو مسكن عائشة فقال ‏ "‏ هنا الفتنة ـ ثلاثا ـ من حيث يطلع قرن الشيطان ‏"‏‏.‏


সহিহ বুখারী ৩১০২

حدثنا إبراهيم بن المنذر، حدثنا أنس بن عياض، عن عبيد الله، عن محمد بن يحيى بن حبان، عن واسع بن حبان، عن عبد الله بن عمر ـ رضى الله عنهما ـ قال ارتقيت فوق بيت حفصة، فرأيت النبي صلى الله عليه وسلم يقضي حاجته، مستدبر القبلة، مستقبل الشأم‏.‏

‘আবদুল্লাহ ইব্‌নু ‘উমর (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ

তিনি বলেন, আমি হাফসাহ (রাঃ) -এর ঘরের উপর আরোহণ করি। তখন আমি নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) -কে কিবলাকে পেছন দিকে রেখে সিরিয়া মুখী হয়ে প্রাকৃতিক প্রয়োজন সেরে নিতে দেখলাম।

‘আবদুল্লাহ ইব্‌নু ‘উমর (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ

তিনি বলেন, আমি হাফসাহ (রাঃ) -এর ঘরের উপর আরোহণ করি। তখন আমি নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) -কে কিবলাকে পেছন দিকে রেখে সিরিয়া মুখী হয়ে প্রাকৃতিক প্রয়োজন সেরে নিতে দেখলাম।

حدثنا إبراهيم بن المنذر، حدثنا أنس بن عياض، عن عبيد الله، عن محمد بن يحيى بن حبان، عن واسع بن حبان، عن عبد الله بن عمر ـ رضى الله عنهما ـ قال ارتقيت فوق بيت حفصة، فرأيت النبي صلى الله عليه وسلم يقضي حاجته، مستدبر القبلة، مستقبل الشأم‏.‏


সহিহ বুখারী ৩১০০

حدثنا ابن أبي مريم، حدثنا نافع، سمعت ابن أبي مليكة، قال قالت عائشة ـ رضى الله عنها توفي النبي صلى الله عليه وسلم في بيتي، وفي نوبتي، وبين سحري ونحري، وجمع الله بين ريقي وريقه‏.‏ قالت دخل عبد الرحمن بسواك، فضعف النبي صلى الله عليه وسلم عنه، فأخذته فمضغته ثم سننته به‏.‏

‘আয়িশা (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ

তিনি বলেন, আমার ঘরে আমার পালার দিন আমার কণ্ঠ ও বুকের মধ্য বরাবর মাথা রাখা অবস্থায় নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) -এর মৃত্যু হয়েছে। আল্লাহ তা‘আলা তাঁর ও আমার মুখের লালাকে একত্রিত করেছেন। তিনি বলেন, ‘আবদুর রাহমান (রাঃ) একটি মিস্‌ওয়াক নিয়ে প্রবেশ করেন। আল্লাহর রসূল (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তা চিবাতে অক্ষম হন। তখন আমি সে মিসওয়াকটি নিয়ে চিবিয়ে আল্লাহর রসূল (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) -এর দাঁত মেজে দেই।

‘আয়িশা (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ

তিনি বলেন, আমার ঘরে আমার পালার দিন আমার কণ্ঠ ও বুকের মধ্য বরাবর মাথা রাখা অবস্থায় নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) -এর মৃত্যু হয়েছে। আল্লাহ তা‘আলা তাঁর ও আমার মুখের লালাকে একত্রিত করেছেন। তিনি বলেন, ‘আবদুর রাহমান (রাঃ) একটি মিস্‌ওয়াক নিয়ে প্রবেশ করেন। আল্লাহর রসূল (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তা চিবাতে অক্ষম হন। তখন আমি সে মিসওয়াকটি নিয়ে চিবিয়ে আল্লাহর রসূল (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) -এর দাঁত মেজে দেই।

حدثنا ابن أبي مريم، حدثنا نافع، سمعت ابن أبي مليكة، قال قالت عائشة ـ رضى الله عنها توفي النبي صلى الله عليه وسلم في بيتي، وفي نوبتي، وبين سحري ونحري، وجمع الله بين ريقي وريقه‏.‏ قالت دخل عبد الرحمن بسواك، فضعف النبي صلى الله عليه وسلم عنه، فأخذته فمضغته ثم سننته به‏.‏


সহিহ বুখারী ৩১০১

حدثنا سعيد بن عفير، قال حدثني الليث، قال حدثني عبد الرحمن بن خالد، عن ابن شهاب، عن علي بن حسين، أن صفية، زوج النبي صلى الله عليه وسلم أخبرته أنها جاءت رسول الله صلى الله عليه وسلم تزوره، وهو معتكف في المسجد في العشر الأواخر من رمضان ثم قامت تنقلب فقام معها رسول الله صلى الله عليه وسلم حتى إذا بلغ قريبا من باب المسجد عند باب أم سلمة زوج النبي صلى الله عليه وسلم مر بهما رجلان من الأنصار، فسلما على رسول الله صلى الله عليه وسلم، ثم نفذا فقال لهما رسول الله صلى الله عليه وسلم ‏"‏ على رسلكما ‏"‏‏.‏ قالا سبحان الله يا رسول الله‏.‏ وكبر عليهما ذلك‏.‏ فقال ‏"‏ إن الشيطان يبلغ من الإنسان مبلغ الدم، وإني خشيت أن يقذف في قلوبكما شيئا ‏"‏‏.‏

‘আলী ইব্‌নু হুসাইন (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ

নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) -এর স্ত্রী সাফিয়্যা (রাঃ) তাঁকে জানিয়েছেন যে, তিনি আল্লাহর রসূল (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) -এর সঙ্গে সাক্ষাৎ করার জন্য আসেন। তখন তিনি রমযানের শেষ দশকে মাসজিদে ই‘তিকাফ অবস্থায় ছিলেন। অতঃপর যখন তিনি ফিরে যাবার জন্য উঠে দাঁড়ান, তখন আল্লাহর রসূল (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) -ও তাঁর সঙ্গে উঠে দাঁড়ালেন। যখন তিনি আল্লাহর রসূল (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) -এর অপর স্ত্রী উম্মু সালামা (রাঃ) -এর দরজার নিকটবর্তী মাসজিদের দরজার নিকট পৌঁছলেন তখন দু’জন আনসার তাঁদের পাশ দিয়ে যাচ্ছিলেন। আল্লাহর রসূল (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তাদের উদ্দেশ্যে বললেন, একটু থাম, (এ মহিলা আমার স্ত্রী) তারা বলল, সুবহানাল্লাহ! হে আল্লাহর রসূল! আল্লাহর রসূল (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) -এর এ রকম বলাটা তাদের নিকট কষ্টদায়ক মনে হল। তখন আল্লাহর রসূল (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন, ‘শয়তান মানুষের রক্ত কণিকার মত সর্বত্র বিচরণ করে। আমি আশঙ্কা করেছিলাম, না জানি সে তোমাদের মনে কোন সন্দেহ জাগ্রত করে দেয়।’

‘আলী ইব্‌নু হুসাইন (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ

নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) -এর স্ত্রী সাফিয়্যা (রাঃ) তাঁকে জানিয়েছেন যে, তিনি আল্লাহর রসূল (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) -এর সঙ্গে সাক্ষাৎ করার জন্য আসেন। তখন তিনি রমযানের শেষ দশকে মাসজিদে ই‘তিকাফ অবস্থায় ছিলেন। অতঃপর যখন তিনি ফিরে যাবার জন্য উঠে দাঁড়ান, তখন আল্লাহর রসূল (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) -ও তাঁর সঙ্গে উঠে দাঁড়ালেন। যখন তিনি আল্লাহর রসূল (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) -এর অপর স্ত্রী উম্মু সালামা (রাঃ) -এর দরজার নিকটবর্তী মাসজিদের দরজার নিকট পৌঁছলেন তখন দু’জন আনসার তাঁদের পাশ দিয়ে যাচ্ছিলেন। আল্লাহর রসূল (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) তাদের উদ্দেশ্যে বললেন, একটু থাম, (এ মহিলা আমার স্ত্রী) তারা বলল, সুবহানাল্লাহ! হে আল্লাহর রসূল! আল্লাহর রসূল (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) -এর এ রকম বলাটা তাদের নিকট কষ্টদায়ক মনে হল। তখন আল্লাহর রসূল (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন, ‘শয়তান মানুষের রক্ত কণিকার মত সর্বত্র বিচরণ করে। আমি আশঙ্কা করেছিলাম, না জানি সে তোমাদের মনে কোন সন্দেহ জাগ্রত করে দেয়।’

حدثنا سعيد بن عفير، قال حدثني الليث، قال حدثني عبد الرحمن بن خالد، عن ابن شهاب، عن علي بن حسين، أن صفية، زوج النبي صلى الله عليه وسلم أخبرته أنها جاءت رسول الله صلى الله عليه وسلم تزوره، وهو معتكف في المسجد في العشر الأواخر من رمضان ثم قامت تنقلب فقام معها رسول الله صلى الله عليه وسلم حتى إذا بلغ قريبا من باب المسجد عند باب أم سلمة زوج النبي صلى الله عليه وسلم مر بهما رجلان من الأنصار، فسلما على رسول الله صلى الله عليه وسلم، ثم نفذا فقال لهما رسول الله صلى الله عليه وسلم ‏"‏ على رسلكما ‏"‏‏.‏ قالا سبحان الله يا رسول الله‏.‏ وكبر عليهما ذلك‏.‏ فقال ‏"‏ إن الشيطان يبلغ من الإنسان مبلغ الدم، وإني خشيت أن يقذف في قلوبكما شيئا ‏"‏‏.‏


সহিহ বুখারী ৩১০৫

حدثنا عبد الله بن يوسف، أخبرنا مالك، عن عبد الله بن أبي بكر، عن عمرة ابنة عبد الرحمن، أن عائشة، زوج النبي صلى الله عليه وسلم أخبرتها أن رسول الله صلى الله عليه وسلم كان عندها، وأنها سمعت صوت إنسان يستأذن في بيت حفصة فقلت يا رسول الله، هذا رجل يستأذن في بيتك‏.‏ فقال رسول الله صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ أراه فلانا، لعم حفصة من الرضاعة، الرضاعة تحرم ما تحرم الولادة ‏"‏‏.‏

‘আমরা বিন্‌তু ‘আব্দুর রহমান (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ

নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) -এর স্ত্রী ‘আয়িশা (রাঃ) বর্ণনা করেন যে, আল্লাহর রসূল (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) একবার তাঁর নিকট ছিলেন, তখন ‘আয়িশা (রাঃ) আওয়াজ শুনতে পেলেন যে, এক ব্যক্তি হাফসাহ (রাঃ) -এর ঘরে প্রবেশের অনুমতি চাচ্ছে। আমি বললাম, হে আল্লাহর রসূল! এ ব্যক্তি আপনার ঘরে প্রবেশের অনুমতি চাচ্ছে। তখন আল্লাহর রসূল (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন, আমার মনে হয়, সে অমুক, হাফসা (রাঃ) -এর দুধ চাচা। দুখপান তা-ই হারাম করে, যা জন্মগত সম্পর্ক হারাম করে।

‘আমরা বিন্‌তু ‘আব্দুর রহমান (রাঃ) থেকে বর্নিতঃ

নবী (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) -এর স্ত্রী ‘আয়িশা (রাঃ) বর্ণনা করেন যে, আল্লাহর রসূল (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) একবার তাঁর নিকট ছিলেন, তখন ‘আয়িশা (রাঃ) আওয়াজ শুনতে পেলেন যে, এক ব্যক্তি হাফসাহ (রাঃ) -এর ঘরে প্রবেশের অনুমতি চাচ্ছে। আমি বললাম, হে আল্লাহর রসূল! এ ব্যক্তি আপনার ঘরে প্রবেশের অনুমতি চাচ্ছে। তখন আল্লাহর রসূল (সাল্লাল্লাহু ‘আলাইহি ওয়া সাল্লাম) বললেন, আমার মনে হয়, সে অমুক, হাফসা (রাঃ) -এর দুধ চাচা। দুখপান তা-ই হারাম করে, যা জন্মগত সম্পর্ক হারাম করে।

حدثنا عبد الله بن يوسف، أخبرنا مالك، عن عبد الله بن أبي بكر، عن عمرة ابنة عبد الرحمن، أن عائشة، زوج النبي صلى الله عليه وسلم أخبرتها أن رسول الله صلى الله عليه وسلم كان عندها، وأنها سمعت صوت إنسان يستأذن في بيت حفصة فقلت يا رسول الله، هذا رجل يستأذن في بيتك‏.‏ فقال رسول الله صلى الله عليه وسلم ‏ "‏ أراه فلانا، لعم حفصة من الرضاعة، الرضاعة تحرم ما تحرم الولادة ‏"‏‏.‏


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